जयपुर Rajasthan: प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर की रोकथाम की तैयारी, ताकि फिर चकमा ना दे "बहरुपिया" कोरोना !

Rajasthan: प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर की रोकथाम की तैयारी, ताकि फिर चकमा ना दे "बहरुपिया" कोरोना !

जयपुर: राजस्थान में भले ही कोरोना के मरीजों का ग्राफ कंट्रोल की श्रेणी में है, लेकिन देश-दुनिया में फिर से सामने आ रही तस्वीर ने चिकित्सा विभाग को चिंता में डाल रखा है. तीसरी लहर की रोकथाम और इंतजाम के लिए चिकित्सा विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है. इसी क्रम में विभाग ने इन दिनों आने वाले सभी पॉजिटीव केसेज की जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू कर दी है. ताकि पता लगाया जा सके कि प्रदेश में कोई नया वेरिएंट को दस्तक नहीं दे गया. 

कोरोना की पहली लहर में जहां वुहान के वायरस ने सभी को खौफजदा किया, वहीं दूसरी लहर में डेल्टा वेरियंट ने देशभर में हाहाकार की स्थिति पैदा कर दी थी. इस दरमियान हजारों लोगों की मौत हुई और लाखों लोग कोरोना से संक्रमित हुए. दूसरी लहर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने के कारणों लेकर जब रिसर्च किया गया तो पता चला कि वायरस ने अपना रूप बदल लिया है. 

वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग में पता चला कि कोरोना के नए वेरिएंट डेल्टा ने कोहराम मचाया है. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. हालांकि, राजस्थान सरकार के अथक प्रयासों से पिछले दो तीन माह से कोविड के केस लगातार कम हो रहे हैं. बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है. पिछले दिनों कोरोना के एक और नए वेरियंट डेल्टा प्लस की पुष्टि हुई, जिसको देखते हुए अब सभी पॉजिटीव केसेज की जिनोम सिक्वेंसिंग की जा रही है. 

चिकित्सा सचिव वैभव गालरिया की माने तो प्रदेश के किसी भी कोने में आने वाले पॉजिटीव केस के सेम्पल को जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज स्थित लैब में जिनोम सिक्वेसिंग की जा रही है. ताकि नए वेरिंएंट के बारे में पता लग सके. हमारा फोकस ज्यादा से ज्यादा सैम्पलिंग और टेस्टींग पर है. उन्होंने बताया कि अभी सभी केस डेल्टा वेरिएंट के ही आ रहे हैं लेकिन अगर नया वेरिएंट आता है तो जीनोम सिक्वेंसिंग से जल्द पता लग जाएगा. 

एक नजर में जीनोम सीक्वेंसिंग:-
- दरअसल, किसी भी वायरस के वेरियंट का पता लगाने के लिए होती है जीनोम सीक्वेंसिंग.
- SMS मेडिकल कॉलेज में करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से लगाई गई मशीन.
- कॉलेज में इसी साल जून माह में जीनोम सीक्वेंसिंग की व्यवस्था शुरू की गई थी.
- इससे पहले जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्रदेश से सैंपल दिल्ली या पूना भेजे जाते थे सैम्पल.
- जीनोम सिक्वेसिंग के अलावा स्वास्थ्य विभाग की तीसरी लहर की तैयारियों पर भी फोकस है.
- अब तक प्रदेश में ऑक्सीजन के 300 प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं.

कोरोना वायरस के बदलते रूप के चलते चिकित्सक भी उसे "बहरुपिया" करार दे रहे है. दुनियाभर में कई जगहों पर कोरोना का नया रूप देखा जा रहा है, जिसके चलते राजस्थान में सभी पॉजिटिव मरीजों की जीनोम सिक्वेसिंग की कवायद अच्छी मानी जा सकती है. हालांकि ज्यादातर वेरिएंट घातक नहीं होते हैं लेकिन कुछ वेरिएंट तबाही लेकर आते हैं. ऐसे में लगातार वेरिएंट के नए स्वरुप को ट्रेस करना जरुरी होता है. ताकी समय पर एक्शन लिया जा सके. 

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