प्रतापगढ़ जिले के सीता माता मंदिर पर चार दिवसीय मेले की तैयारियां जोरों पर, यहीं हुआ था लव-कुश का जन्म

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/19 04:26

प्रतापगढ़: रामायण काल के दौरान जब राम ने सीता को वनवास दिया तो उस कालखंड में सीता माता ने जिस स्थान पर लव और कुश को जन्म दिया वह स्थान आज भी प्रतापगढ़ में मौजूद है. यहां पर सीता माता का मंदिर बना हुआ है. जहां प्रतिवर्ष मेला लगता है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है. 

कलक्टर श्याम सिंह राजपुरोहित ने बताया कि इस साल यह मेला 1 जून से शुरू होगा. सीता माता मेले के नाम से प्रसिद्ध इस मेले में दूर-दूर से सीता माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं और मन्नते मांगते हैं. राजपुरोहित ने बताया कि यह वह स्थान है जहां पर लव और कुछ ने अश्वमेध के घोड़ों को पकड़ा था और राम को युद्ध के लिए ललकारा था. वह पेड़ आज भी यहां पर मौजूद हैं, जिस पर हनुमान जी को बांधा गया था. 

चार दिवसीय मेले की तैयारियां जोरों पर
सीता माता का मंदिर जहां बना हुआ है वहां से देखने पर साफ तौर पर पता चलता है कि यही वह स्थान है जहां पर धरती दो भागों में फटी और सीता माता उसमें समा गई. श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र सीता माता के चार दिवसीय मेले की तैयारियां प्रशासन की ओर से जोर शोर से की जा रही है. यहां पर स्थित वाल्मीकि आश्रम में आज भी लोग लव कुश पालने को झूला झूलाते हुए देखे जा सकते हैं. इतने सारे पौराणिक स्थानों के होने के कारण इस इलाके का नाम सीतामाता वन्य जीव अभ्यारण रखा गया है.

....संजय जैन फर्स्ट इंडिया न्यूज प्रतापगढ़
 

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