जोधपुर में लड़ाकू विमान तेजस के तैनाती की तैयारी शुरू

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/08 11:46

जोधपुर। आज वायु सेना दिवस है और हवा में रहकर जिस तरह बिना जान की परवाह किए 24 घंटे हमारे वायु सैनिक मुस्तैद रहते हैं उससे देश को तो गर्व है ही लेकिन साथ जोधपुर में स्थित वायुसेना का शक्तिशाली एयरवेज नापाक इरादे रखने वाले पाक को महज जोधपुर से 18 मिनट में ध्वस्त करने की ताकत रखता है और अब इसी एयरबेस पर भारत में निर्मित लड़ाकू विमान तेजस की तैनाती की तैयारी भी शुरू हो गई है। 

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ पर हाल ही में जोधपुर आए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जब जोधपुर स्थित वायुसेना एयरवेज पर यह जानकारी मिली कि यह दक्षिण पूर्वी एशिया का सबसे बड़ा वायुसैनिक हवाई अड्डा है और पाक की नापाक इरादों को चंद मिनटों में नेस्तनाबूद कर सकता है तो प्रधानमंत्री भी काफी उत्साहित हुए और उन्होंने लड़ाकू विमानों की जानकारी मिली थी और आज जब वायु सेना दिवस है तब देश के लिए तत्पर रहने वाले वायु सैनिकों को तो देश की सुरक्षा का दायित्व निभाते हुये उत्साह और खुशी है ही लेकिन साथ ही देशवासियों को भी इन वायुसैनिकों पर नाज है।

दक्षिण पूर्वी एशिया के सबसे बड़े वायुसैनिक हवाईअड्डे जोधपुर में तैनात सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान मात्र 18 मिनट में जोधपुर से पाक की दक्षिण कमान के मुख्यालय कराची एयरबेस पहुंचकर वहां की वायु रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर सकते हैं। बाड़मेर के उत्तरालाई से 6 मिनट, गुजरात के नलिया से 5 और बीकानेर के नाल हवाईअड्डे से 14 मिनट में एयर अटैक हो सकता है। भारतीय वायुसेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान का मुख्यालय पूना में है और जोधपुर इसका महत्वपूर्ण एयरबेस है। 

जोधपुर और पूना में भारत का प्रथम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 की स्क्वाड्रन तैनात है। उधर पाकिस्तान का सबसे बड़ा एयरबेस कराची जोधपुर से 400 किलोमीटर दूर है। कराची में एफ-16 और पाकिस्तान में चीन के सहयोग से बने जेएफ-17 लड़ाकू विमान तैनात हैं। सुखोई-30 इन दोनों पर भारी है।वैसे इसी साल पाकिस्तानी एयरफोर्स में शामिल सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट जेएफ-17 की गति 1.6 मैक है। जबकि भारत में निर्मित तेजस-एलसीए भविष्य का विमान है जिसकी गति 2 मैक तक है। जोधपुर से मिग-27 की स्क्वाड्रन के अगले साल रिटायर होने पर तेजस की स्क्वाड्रन की तैनाती की संभावना है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. द्वारा तैयार तेजस को सन् 2016 में वाुयसेना में शामिल किया गया था।उधर जोधपुर में वायु यौद्धाओं को डेजर्ट वारियर नाम दिया गया है। यहां सुखोई-30 की स्क्वाड्रन में 18 विमान हैं। इस स्क्वाड्रन संख्या 31 को लॉयन नाम दिया गया है। 

इसके अलावा मिग-27 अपगे्रडेड की दो स्क्वाड्रन है। स्क्वाड्रन संख्या-10 को डेजर्ट और स्क्वाड्रन संख्या-29 का नाम स्कोर्पियन है। इनके अलावा एचएएल मार्क-1 रुद्र हेलीकॉप्टर की स्क्वाड्रन संख्या-116 और एमआइ-17 हेलीकॉप्टर की स्क्वाड्रन संख्या-117 यहां तैनात है। बीकानेर और जैसलमेर में दूरी अधिक होने पर बीच में फलोदी एयरबेस बनाया गया है जहां रुद्र हेलीकॉप्टर तैनात है। चेतक व चीता हेलीकॉप्टर की यूनिट यहां से चली गई है। जोधपुर से आगे पश्चिमी सीमा पर उत्तरलाई, नलिया और नाल एयरबेस में मिग-21 तैनात हैं जो हमले के समय जोधपुर एयरबेस की सुरक्षा कर सकते हैं। 

जोधपुर एयरबेस पर अलग-अलग रेंज की आधुनिक मिसाइल पिछोरा, सैम और ओएसए-एके मिसाइल भी तैनात हैं। गौरतलब है कि,तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने 1924 में जोधपुर में हवाई पट्टी की नींव रखी। उन्होंने यहां 1931 में फ्लाइंग क्लब की स्थापना की और दो टाइगर मोथ विमान लेकर आए थे। एयर फोर्स स्टेशन पर इनके हैंगर बनाए गए थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यहां पहला एलिमेंट्री फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल और वर्ष 1950 में यहां एयरफोर्स फ्लाइंग कॉलेज खोला गया। 70 के दशक में यहां लड़ाकू विमान तैनात किए गए। राजीव गौर फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in