VIDEO: बारिश की एक-एक बूंद सहेजने की गहलोत सरकार की बड़ी कवायद, छोटे भूखंडों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी

VIDEO: बारिश की एक-एक बूंद सहेजने की गहलोत सरकार की बड़ी कवायद, छोटे भूखंडों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी

जयपुर: पानी की कमी के लिए देशभर में चर्चित मरूस्थल वाले राजस्थान में वर्षा के जल को सहेजने के लिए और भी कड़े प्रावधान लागू करने की तैयारी है. बरसाती पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए गंभीर प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के संबंध में जल्द ही नया नियम लागू करेगी. राजस्थान का क्षेत्रफल देश के क्षेत्रफल का 10.45% है. देश की कुल जनसंख्या का 5.5% भाग राजस्थान में निवास करता है. जल की अत्यधिक आवश्यकता और सतही जल की कम उपलब्धता के कारण प्रदेश में भूजल का औसतन दोहन 135 प्रतिशत है.

राज्य के कुल 248 ब्लॉक में से 25 ब्लॉक ही सुरक्षित:
इस कारण राज्य के कुल 248 ब्लॉक में से 25 ब्लॉक ही सुरक्षित हैं. इसे देखते हुए बरसाती पानी को भूगर्भ तक पहुंचाने के लिए पिछली अशोक गहलोत सरकार में 300 वर्ग मीटर और इससे बड़े भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाना अनिवार्य किया गया था. इससे पहले यह सिस्टम 500 वर्ग मीटर और उससे बड़े भूखंडों के लिए ही बनाया जाना जरूरी था. हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई बैठक में इससे भी छोटे भूखंडों पर यह सिस्टम बनाने का प्रावधान लागू करने पर चर्चा हुई थी. इस बैठक में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल मौजूद थे. इसके बाद यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने अधिकारियों को इस बारे में प्रावधान लागू करने के निर्देश दिए. इसके तहत रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का दायरा बढ़ाए जाने की तैयारी की जा रही है. आपको सबसे पहले बताते हैं कि छोटे भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाना क्यों जरूरी है.

जानिए क्यों जरूरी है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम:
- 300 वर्ग मीटर से छोटे भूखंडों पर निर्माण क्षेत्र अधिक होता है जबकि खुला क्षेत्र काफी कम होता है.
-इसके चलते ऐसे भूखंडों पर बने भवनों की छतों पर आया बरसात का पानी नाले के माध्यम से सीधे सीवर में बहा दिया जाता है.
- विशेषज्ञों की माने तो 1000 वर्ग फीट क्षेत्रफल वाली छत पर एक मानसून में जितना पानी आता है, उस पानी को अगर सहेजा जाए तो से एक परिवार की साल भर की पानी की जरूरत का इंतजाम हो सकता है.
-लंबे समय से विशेषज्ञ मांग कर रहे थे कि छोटे भूखंडों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का प्रावधान लागू किया जाना चाहिए.

एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन:

मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन के संबंध में सिफारिश के लिए प्रमुख सचिव यूडीएच की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया हुआ है. इस कमेटी की प्रमुख सचिव यूडीएच कुंजीलाल मीना की अध्यक्षता में 10 अगस्त को बैठक होगी. इस बैठक में पानी के समुचित एवं किफायती उपयोग के लिए भवन विनियमों में नए प्रावधान लागू करने पर विचार किया जाएगा. बैठक में किए गए फैसले के मुताबिक एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश पर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के स्तर पर अंतिम फैसला किया जाएगा. इसके बाद उसके अनुरूप मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव किया जाएगा. आपको बताते हैं कि इस बैठक में ऐसे किन प्रावधानों पर विचार होगा. 

इन प्रावधानों पर होगा बैठक में विचार:
-मौजूदा प्रावधान 300 वर्ग मीटर की बजाए 167 वर्ग मीटर व इससे बड़े भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाना अनिवार्य किया जाए.
-वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के निर्माण पर तकनीकी परामर्श और निर्मित सिस्टम की उपयोगिता को प्रमाणित करने के लिए जल संसाधन विभाग या भूजल विभाग के सेवानिवृत्त अभियंता व अन्य तकनीकी विशेषज्ञों का एंपैनलमेंट किया जाए.
-संबंधित निकाय की ओर से इन एक्सपर्ट की फीस तय की जाए.
-भवन निर्माणकर्ता इस निर्धारित फीस को चुकाकर तकनीकी विशेषज्ञ से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के संबंध में राय ले सकेगा साथ ही इसका उपयोगिता प्रमाण पत्र भी ले सकेगा.
-इसके अलावा बैठक में यह भी विचार किया जाएगा कि 5000 वर्ग मीटर के स्थान पर 2500 वर्ग मीटर और उससे बड़े भूखंडों में बाथरूम और रसोई के वेस्ट वाटर के रीसाइक्लिंग को अनिवार्य किया जाए इसमें टॉयलेट से निकलने वाला जल शामिल नहीं होगा.

बारिश के पानी को भविष्य के लिए बचाना बहुत जरूरी:
जिस तरह प्रदेश की आबादी बढ़ रही है और जल संसाधन सीमित होते जा रहे हैं उस लिहाज से बारिश के पानी को भविष्य के लिए बचाना बहुत जरूरी है. इस लिहाज से छोटे भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने का प्रावधान लागू करना वाकई बड़ा कदम है. लेकिन यह प्रावधान तभी सार्थक होगा जब इसकी सख्ती से पालना कराना सुनिश्चित किया जाए.

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