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Bricks Summit 2019 : प्रधानमंत्री मोदी का बिजनेस मंत्र गूंजा ब्रिक्स सम्मेलन में

 Bricks  Summit  2019 :  प्रधानमंत्री मोदी का बिजनेस मंत्र गूंजा ब्रिक्स सम्मेलन में

ब्रासीलिया: ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का बिजनेस मंत्र गूंजा है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को यहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और उनकी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की पहले रुसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात हुई.  इसके बाद मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ औपचारिक बैठक हुई. 

मोदी 11 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए ब्राजील में है उनका मेजबान ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो ने मोदी का जमकर स्वागत किया और 26 जनवरी पर भारत आने का न्योता भी स्वीकार किया. ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी ने सभी सदस्य देशों को भारत में निवेश करने का निमंत्रण दिया और कहा कि भारत इस वक्त दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्था है.बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि लगातार बैठकों ने हमारे संबंधों को मजबूत किया है.पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) की तर्ज पर रूस के सुदूर पूर्व व्लादिवोस्तोक शहर में व्यापक बातचीत करने के दो महीने बाद दोनों नेताओं की बैठक हो रही है, जिसके दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने अगले साल भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निमंत्रण बुधवार को स्वीकार कर लिया.

ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। यह दुनिया के उभरती पांच प्रमुख अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है.बता दें कि प्रधानमंत्री छठी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं.

 

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लॉकडाउन के चलते डाकिया पहुंचाएगा घर-घर सामान, मिलेगी ये सुविधाएं

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जयपुर: लॉकडाउन के चलते आम जरूरतों की सेवा के लिए आम आदमी इधर उधर मुंह तक रहा है लेकिन इस समस्या को दूर करने में अब डाक विभाग ने पहल की है. इसके तहत वह दवाइयां, सब्जी, फल, आटा, दाल और राशन की होम डिलीवरी करेगा. देशभर के डेढ़ लाख से ज्यादा पोस्ट ऑफिस में यह सुविधा आम लोगों को मुहैया कराई जा रही है.

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डाक विभाग डोर स्टेप पर तमाम तरह का सामान पहुंचाएगा:
आटा, दाल या अन्य जरूरी सामान जैसी राशन की सामग्री लेनी हो या दवाइयां, सब्जी, फल... अब इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है. डाक विभाग अपने डाकियों के जरिए आपके डोर स्टेप पर यह तमाम तरह का सामान पहुंचाएगा. साथ ही आप अपना पार्सल देश के किसी भी कोने में भेज सकते हैं. 

क्या सुविधाएं मिलेंगी: 

 -केंद्र सरकार ने रोज के उपयोग में आने वाले सामान को पार्सल के जरिए होम डिलीवरी का काम डाक विभाग को दिया है.

- ऐसे में लॉक डाउन के दौरान रिश्तेदार या परिचित को कोई भी जरूरी सामान भेजना चाहते हैं तो इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं.

- इसके लिए आपको पास के डाक विभाग में जाकर अपनी जरूरत बतानी होगी.

- यही नहीं आप पोस्ट ऑफिस नहीं जा पाएंगे तो आप सबसे पास के पोस्ट ऑफिस को फोन भी कर सकते हैं... सूचना पर पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी आपके घर पहुंच जाएंगे. वहीं से आपको सभी सुविधाएं मिल जाएंगी.

- यही नहीं आपको यदि पैसों की जरूरत है तो आप पैसे भी ले सकते हैं और सामान पार्सल करना है या और कोई जानकारी लेनी है तो घर पर ही सारी जानकारियां उपलब्ध करा दी जाएंगी.

- कर्फ्यू के दौरान भी जो लोग बैंक तक पैसे निकालने नहीं जा सकते उन्हें पोस्ट ऑफिस उनके घरों पर रुपए निकालने की सुविधा दे रहा है.

- अगर आपका अकाउंट आधार से लिंक है तो डाकिए को आधार कार्ड दिखाकर आप 500 से ₹5000 तक ले सकते हैं इसके लिए किसी भी बैंक में आपका खाता होना चाहिए आधार मिलते ही बायोमेट्रिक से डाकिया वाजिब रकम निकाल कर दे देगा या पैसा आपके अकाउंट से कट जाएगा. 

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हालांकि लॉक डाउन के चलते ग्रामीण और शहरी अपने घरों से बाहर कम से कम निकल पा रहे हैं. लेकिन इस स्कीम से गांव के लोगों को ज्यादा लाभ मिल रहा है. 
 

फोर्ब्स सूची: दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति पर कोरोना का कहर, आधे से ज्यादा की संपत्ति में गिरावट!

फोर्ब्स सूची: दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति पर कोरोना का कहर, आधे से ज्यादा की संपत्ति में गिरावट!

नई दिल्ली: दुनियाभर में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा है. दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की वजह से कारोबार बिल्कुल ठप है. भारत में लॉकडाउन की वजह से 15 दिन से सब कुछ बंद है. इमरजेंसी सेवाओं को छोडकर सभी लॉकडाउन है. इस बीच फोर्ब्स ने साल 2020 में दुनिया के अरबपतियों की सूची जारी की. जिसमें अरबपति भी कोरोना वायरस के कहर से नहीं बच पाये. जी हां आधे से ज्यादा अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है. चलिए अब बात करते है दुनिया के सबसे अरबपति इंसान की, तो आपको बता दें कि लगातार तीसरे साल अमेजन के फाउंडर जेफ बेजॉस सबसे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति है. उनकी संपत्ति 113 अरब डॉलर (8624 अरब रुपए) है.

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दूसरे नंबर पर बिल गेट्स:
फोर्ब्स की सूची में दूसरे नंबर माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स हैं तो एलवीएमएच के सीईओ और चेयरमैन बेरनार्ड अरनॉल्ट वॉरेन बफेट को पीछे छोड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. वहीं बात करें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी की, तो उनका इस सूची में नंबर 17 वां है. फोर्ब्स की सूची के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं. हालांकि उनकी संपत्ति में एक साल पहले के मुकाबले 13.2 अरब डॉलर की गिरावट आई है.

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एशिया के सबसे अमीर इंसान जैक मा: 
फोर्ब्स की सूची के मुताबिक अलीबाबा के फाउंडर जैक मा एशिया के सबसे बड़े अमीर है. इस सूची में अन्य भारतीयों की बात करें तो 65वें नंबर पर हैं मुंबई के बड़े निवेशक राधाकिशन दमानी, जिन्हें भारत का रिटेल किंग भी कहा जाता है.  सुपरमार्केट चेन डीमार्ट के मालिक की संपत्ति 16.6 अरब डॉलर (1267 अरब रुपए) है. दमानी ने 2002 में मुंबई में एक स्टोर से कारोबार की शुरुआत की थी.

कोरोना संकट से जूझ रहे राज्यों को रिजर्व बैंक की बड़ी राहत, राजस्थान ले सकेगा 13 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज 

कोरोना संकट से जूझ रहे राज्यों को रिजर्व बैंक की बड़ी राहत, राजस्थान ले सकेगा 13 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज 

जयपुर: कोरोना संकट से जूझ रहे 19 राज्यों को मंगलवार को 32 हजार 500 करोड़ का कर्ज देने के बाद रिजर्व बैंक ने एक और बड़ा कदम उठाया है. लॉकडाउन से राज्यों की पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को सुधारने,कर्मचारियों को  समय पर वेतन देने सहित अन्य इंतजामों के लिए राज्य अब आगामी ​तीन तिमाही का कर्ज एक साथ ले सकेंगे. राजस्थान अपनी जरूरत के हिसाब से 2750 करोड़ का कर्ज ले चुका है और कोरोना संकट से निपटने के लिए 13 हजार 637 करोड़ रुपए का कर्ज आगामी 9 महीेने में कभी भी ले सकेगा.

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केन्द्र सरकार ने लिखा था रिर्जव बैंक को पत्र:
इस राशि का आंकलन रिजर्व बैंक ने राज्य के कुल सकल घरेलू उत्पाद के हिसाब से आकलन किया है. वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कोरोना संकट से निपटने के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ढाई हजार करोड़ का पैकेज पहले ही घोषित कर चुके हैं. ऐसे में जरूरत के समय कर्ज मिलेगा तो कोरोना संकट से निपटने में राज्य सरकार को काफी मदद मिलेगी. जानकारी के अनुसार देश में कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन लागू हुआ तो 23 मार्च को केन्द्र सरकार ने रिर्जव बैंक को पत्र लिखा था.

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ज्यादा के कर्ज की जरूरत बताई:
जिसमें कहा गया था कि रिजर्व बैंक मौजूदा हालातों का सामना करने के लिए राज्यों को कर्ज की व्यवस्था करे. इस पर रिजर्व बैंक को राजस्थान समेत 28 राज्यों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा के कर्ज की जरूरत बताई. अब कर्ज लेने के पहले से तय शिडयूल के अलावा  कोरोना वायरस से जूझ रहे राजस्थान को 16 हजार 387 करोड़, महाराष्ट्र को 46 हजार 182 करोड़,पश्चिम बंगाल को 20 हजार करोड़ और पंजाब को 9 हजार करोड़ का कर्ज एक साथ लेने की अनुमति दे दी है.

कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबर और मैसेज फेजने वालों की अब खैर नहीं...! 

कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबर और मैसेज फेजने वालों की अब खैर नहीं...! 

नई दिल्ली: टिकटॉक, फेसबुक पर कोरोना वायरस को लेकर फर्जी खबरों और मैसेज भेजने वालों की अब खैर नहीं है. भारत सरकार अब इस पर सख्त कार्रवाई कर सकती है. सरकार ने टिकटॉक, हेलो और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गलत सूचना देने वाले मैसेज या कंटेंट को हटाने के लिए कहा है. साथ ही कहा कि ये गलत मैसेज लोगों को गुमराह करते हैं और सरकार के कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जारी अभियान को कमजोर बनाते हैं. 

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गुमराह करने वाले वीडियो और पोस्ट वायरल न हों:
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों से दुर्भावनापूर्ण सामग्री वाले संदेश डालने वालों के बारे में ब्योरा रखने को कहा गया है. उस ब्योरे की आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों के साथ शेयर किया जा सकता है.इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने इन कंपनियों से कहा है कि वे ये पक्का करें कि इस तरह के गुमराह करने वाले वीडियो और पोस्ट वायरल न हों.

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कोरोना के खिलाफ अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव: 
मंत्रालय ने एक अलग बयान में सोशल मीडिया कंपनियों से इस प्रकार के कंटेंट हटाने को कहा है जिससे सरकार के कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसबीच भारतीय इंटरनेट और मोबाइल संघ ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां को उनके प्लेटफॉर्म से किसी भी कंटेंट को हटाने के आदेश कानूनी तरीके से जारी होने चाहिए. आईएएमएआई के सदस्यों में फेसबुक, गूगल, टिकटॉक, शेयरचैट जैसी कंपनियां शामिल हैं.

कोविड-19 संकट के बीच रेलवे की बड़ी पहल, रेलवे प्रशासन संचालित करेगा स्पेशल ट्रेन

कोविड-19 संकट के बीच रेलवे की बड़ी पहल, रेलवे प्रशासन संचालित करेगा स्पेशल ट्रेन

जयपुर: कोरोना वैश्विक महामारी के संकट के बीच रेलवे प्रशासन ने बड़ी पहल करते हुए आमजन को एक राहत दी है. जरूरी सामग्रियों का परिवहन करने के लिए रेलवे प्रशासन मंगलवार से 14 अप्रैल तक गुड्स पार्सल स्पेशल ट्रेन संचालित करेगा. रेलवे सीपीआरओ अभय शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के मद्देनजर आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए यह ट्रेन चलाई जा रही है. 

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- 7 अप्रैल से 14 अप्रैल तक संचालित होगी पार्सल स्पेशल ट्रेन
- ट्रेन 00951 जयपुर से 7, 9, 11 और 13 अप्रैल को चलेगी
- ट्रेन 00953 जयपुर से 8,10, 12 और 14 अप्रैल को चलेगी
- आमजन करा सकते हैं स्टेशनों पर पार्सल की बुकिंग

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हर रोज दोपहर 3 बजे होगी रवाना:
ट्रेन जयपुर से हर रोज दोपहर 3 बजे रवाना होगी. रास्ते में अलवर, रेवाड़ी, भिवानी, हिसार, सिरसा, हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, मेड़ता रोड, जोधपुर, पाली मारवाड़, मारवाड़ जंक्शन, अजमेर, किशनगढ़ होते हुए अगले दिन शाम 7:15 बजे वापस जयपुर लौटेगी. इन सभी स्टेशनों पर पार्सल की लोडिंग-अनलोडिंग की जा सकेगी. ट्रेन में दवाइयां खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामग्री भेजी जा सकती है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

मोदी कैबिनेट का अहम फैसला, सभी सांसदों के वेतन में एक वर्ष तक होगी 30 प्रतिशत कटौती

मोदी कैबिनेट का अहम फैसला, सभी सांसदों के वेतन में एक वर्ष तक होगी 30 प्रतिशत कटौती

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच मोदी कैबिनेट ने सोमवार को अहम फैसले लिए है.  केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के सभी सांसदों के वेतन में एक साल तक 30 प्रतिशत की कटौती का फैसला किया गया. इसके साथ ही सांसद निधि के लिए दी जाने वाली राशि भी 2 वर्ष तक के लिए टाल दी गई है. इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि इस कटौती से सरकार को एक वर्ष में करीब 8 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी. 

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30 प्रतिशत योगदान देने का फैसला:
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है. यह राशि भारत के समेकित कोष में दर्ज की जाएगी. इसके तहत सांसद निधि को दो साल के लिए टाल दिया गया. वहीं राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल सहित तमाम सांसदों ने भी अपने वेतन का 30 प्रतिशत योगदान देने का फैसला किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद अधिनियम, 1954 के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी. 1 अप्रैल, 2020 से एक साल के लिए भत्ते और पेंशन को 30 फीसद तक कम किया जाएगा.

केंद्रीय मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग:
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की. पीएमओ ने बताया कि इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि उनकी तरफ से लगातार दी गई फीडबैक कोविड-19 से निपटने के लिए रणनीति बनाने में प्रभावी रही है.

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VIDEO: कोरोना संकट के चलते राजस्थान में टूरिज्म इंडस्ट्री को 500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान

जयपुर: प्रदेश में कोरोना संकट के दौरान किए गए लॉक डाउन से अभी तक टूरिज्म इंडस्ट्री को 500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है. पर्यटन और उससे जुड़े तमाम उद्योग ठप हैं ऐसे में रोजाना ट्रैवल ट्रेड को 50 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है. आशंका इस बात की है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो कम से कम इस वर्ष प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय हाशिए पर ही रहेगा जिसके बुरे प्रभाव आने वाले 2 वर्षों तक दिखाई दे सकते हैं. प्रदेश में 18 मार्च से ही सभी किले, महल, स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले और उत्सव बंद हैं. अब 14 अप्रैल तक कम से कम इनमें कोई भी पर्यटक गतिविधि नहीं होगी. 

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- ट्रैवल ट्रेड को लॉक डाउन से अभी तक 500 करोड़ का नुकसान
- रोजाना करीब 50 करोड रुपए का हो रहा नुकसान
- पर्यटन स्थल बंद होने से चरमराया ट्रैवल ट्रेड का ढांचा
- प्रदेश के 700 से अधिक सितारा, बजट व छोटे होटल बंद
- प्रदेश के 2000 से अधिक अधीकृतरेस्टोरेंट व क्लब भी बंद
- होटल, फॉरेन एक्सचेंज, गाइड, टैक्सी ऑपरेटर 
- जिप्सी ऑपरेटर, हैंडीक्राफ्ट, वेंडर, हॉकर सभी को भारी नुकसान
- प्रदेश में 18 मार्च से बंद हैं पर्यटन स्थल व नेशनल पार्क
- पुरातत्व विभाग को अभी तक 2 करोड़ से अधिक का नुकसान

कोरोना के कहर से प्रदेश का पर्यटन व्यवसाय वेंटिलेटर पर चला गया है. टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है. अकेले राजस्थान की बात करें तो करीब 10 लाख से ज्यादा लोग अचानक बेरोजगार हो गए हैं. रोजाना 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और अभी तक की बात करें तो पर्यटन उद्योग को 500 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. कोरोना की बढ़ती दहशत के बीच राज्य सरकार ने 18 मार्च को लॉक डाउन अवधि तक के लिए प्रदेश के सभी किले, महल, स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले, उत्सव और तमाम इवेंट बंद कर दिए थे. इस फैसले के बाद प्रदेश में पर्यटकों की गतिविधि पूरी तरह से ठप हो गई है और जो देशी और विदेशी सैलानी राजस्थान में थे उनमें से 90 फ़ीसदी से अधिक  अपने वतन लौट चुके हैं. जो आमेर, जंतर मंतर और हवा महल पर्यटकों की चहल-पहल से रोशन रहते थे  आज उनमें सन्नाटे का चीत्कार उठ रहा है. 

प्रदेश में छोटे-बड़े 700 से अधिक होटल वीरान:
पुरातत्व विभाग को भी अभी तक राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के तमाम स्मारक और संग्रहालय बंद होने से 10 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है. टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट्स ने इस वर्ष 31 दिसंबर तक जो इवेंट तैयार किए थे उन सब को रद्द करना पड़ा है.  मैरिज टूरिज्म, रिलिजियस टूरिज्म, रूरल टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म सहित करीब डेढ़ हजार से दो हजार इवेंट रद्द करने पड़े हैं. प्रदेश में छोटे-बड़े 700 से अधिक होटल और दो हजार से अधिक अधिकृत क्लब व रेस्टोरेंट वीरान पड़े हैं. रणथंभौर, सरिस्का, मुकंदरा, भरतपुर में घना, कुंभलगढ़, चित्तौड़, झालाना लेपर्ड सफारी को भी बंद है. 

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लाखों लोग बेरोजगार:
प्रदेश में पर्यटक गतिविधि बंद किए जाने से ट्रैवल ट्रेड को भारी नुकसान हुआ है पर्यटकों के परिवहन से जुड़े टैक्सी ड्राइवर, जिप्सी संचालक और हाथी गांव में पल रहे हाथी और महावतों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. जो वेंडर और होकर छोटे-छोटे सामान बेचकर अपने घर पर 2 जून की रोटी का इंतजाम करते थे उनके चेहरे पर निराशा के भाव साफ देखे जा सकते हैं. दरअसल पर्यटन पर कोरोना का कहर इस कदर टूटा है कि लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं, अरबों रुपए का व्यवसाय चौपट हुआ है और ऐसी कोई उम्मीद नहीं कि अगले 1 साल में भी पर्यटन उद्योग वापस अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा. 

लॉक डाउन के बीच फीकी रही नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे

लॉक डाउन के बीच फीकी रही नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे

जयपुर: कोरोना संकट के दौर में प्रदेश में लॉक डाउन के चलते वित्त वर्ष 2020-21 की फीकी शुरुआत हुई. सरकारी खजाने को उम्मीद रहती है कि वित्त वर्ष अंतिम महीने मार्च में मोटी रकम प्राप्त होगी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और बुरी स्थिति तब हो गई जब लॉक डाउन के चलते वित्त वर्ष की शुरुआत भी फीकी रही. ऐसे में अब राज्य सरकार के सामने चुनौती रहेगी कि वे किस तरह से नए वित्त वर्ष में योजनाओं का वित्तपोषण कर पाएगी. 

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- लॉक डाउन के बीच नए वित्त वर्ष की शुरुआत
- पुराने राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे, नए प्राप्त करने के लिए भी जुटना होगा
- लेकिन अभी 14 अप्रैल तक है लॉक डाउन
- ऐसे में टैक्स हैड वाले विभागों के लिए चुनौती भरा रहेगा नया वर्ष
- आबकारी, खान, परिवहन सहित कई विभाग जुड़े हैं सीधे राजस्व अर्जन से
- प्रदेश में खनन बंद, होटल, resto-bar बंद, शराब दुकानें बंद
- ऐसे में लॉक डाउन अवधि में प्रभावित रहेगा राजस्व अर्जन का कार्य

राजस्व लक्ष्य अर्जित करने को लेकर सरकार भले ही गंभीर दिखी लेकिन जिस तरह वित्त वर्ष के अंतिम माह में कोरोना का कहर टूटा उससे राज्य सरकार की उम्मीद है भी धराशाई हो गई. सरकार को उम्मीद थी कि कर राजस्व से जुड़े महकमें सरकारी खजाने को संबल प्रदान करेंगे लेकिन हुआ ठीक उल्टा कोरोना के चलते वित्त वर्ष का अंतिम महीना सूखा निकला और नए वित्त वर्ष की शुरुआत भी बिल्कुल फीकी रही. मोटे तौर पर अभी टैक्स हेड वाले महकमें इस बात का गुणा भाग करने में लगे हैं कि 31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2019-29 में राजस्व अर्जन की स्थिति क्या रही..? इधर वित्त विभाग के अफसरों की माने तो बीते वित्त वर्ष में सरकार की उम्मीदों के विरुद्ध 70 से 75 फ़ीसदी ही राजस्व लक्ष्य अर्जित हो पाए हैं.

सरकारी खजाने में उम्मीद के मुताबिक धन नहीं पहुंचा: 
इसका सीधा मतलब है कि सरकारी खजाने में उम्मीद के मुताबिक धन नहीं पहुंचा और बीते वित्त वर्ष में सरकार को कर राजस्व में करीब 10,000 करोड रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. दरअसल वित्त वर्ष के अंतिम महीने यानी मार्च में परिवहन विभाग जहां एडवांस टैक्स का कलेक्शन करता है वहीं आबकारी विभाग भी नया बंदोबस्त करता है. खान विभाग भी नए ठेकों के लिए एडवांस राशि का कलेक्शन करता है जिससे सरकारी खजाने में शतप्रतिशत से कहीं ज्यादा राजस्व पहुंच जाता है. परंतु इस बार कोरोना वायरस के कहर के सामने सब मटिया मेट हो गया. आबकारी विभाग जहां लक्ष्य से 2000 करोड़ रुपए पीछे रहा वही खान विभाग भी करीब 800 करोड रुपए अर्जित नहीं कर पाया. यही नहीं परिवहन विभाग, पंजीयन एवं मुद्रांक, विद्युत व अन्य कर राजस्व से जुड़े महकमें भी राजस्व लक्षणों से पिछड़ गए. अब सरकार के सामने मुश्किल इस बात की है कि नए वित्त वर्ष में जनता से जुड़ी हुई योजनाओं का किस तरह से वित्त पोषण किया जाएगा. पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के बजट में जो घोषणाएं की थी वह कैसे पोषित हो पाएंगी. राज्य सरकार की वार्षिक योजना की बात करें तो उसके लिए धनराशि कहां से आएगी. ऐसे सैकड़ों सवाल हैं जो चुनौती के रूप में राज्य सरकार के सामने खड़े हैं.

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कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा पर्यटन और खनन कमर तोड़ दी: 
अब खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने वित्त की टीम से यह उम्मीद है कि वह कोरोना संकट के बीच इस तरह का फार्मूला लेकर आएंगे जिससे सरकारी खजाने को भी संभल मिलेगा और आमजन से जुड़ी योजनाएं भी वित्त पोषित हो पाएंगी. कोरोनावायरस संकट में ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकारी राजस्व में कमी की हो बल्कि प्रदेश और देश के अंदर विभिन्न सेक्टर में जो रोजगार था उसकी भी कमर तोड़ दी है. राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर्यटन और खनन पर काफी हद तक आधारित है और कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा कमर इन 2 सेक्टर की ही थोड़ी है. पर्यटन सेक्टर की बात करें तो प्रदेश के तमाम पर्यटन स्थल, स्मारक, संग्रहालय बंद पड़े हैं. इसके नतीजे में ट्रैवल ट्रेड से जुड़े टैक्सी ड्राइवर, गाइड, जिप्सी संचालक, होटल, मोटल कैफे, रेस्टोरेंट सब कुछ बंद पड़ा है. छोटे-छोटे होकर और वेंडर जो हस्तशिल्प और अन्य सामग्री को बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे वह भी बेरोजगार हो गए हैं. ऐसे में चुनौती सिर्फ यही नहीं है कि सरकारी योजनाओं का वित्तपोषण कैसे होगा वरन चुनौती इस बात की भी है कि कोरोनावायरस देर सवेर दूर हो जाएगा लेकिन इससे पस्त हुए प्रदेश के रोजगार धंधों को किस तरह से उठाया जाएगा. यह बड़ी चुनौती होगी. अब देखना है कि सूबे की सरकार कोरोना संकट से निपटने और इसके बाद के हालात की चुनौती से निपटने के लिए किस तरह खुद को तैयार करती है.  

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