VIDEO: निजी स्कूलों की मनमानी शिक्षा विभाग पर हावी

Madan Kalal Published Date 2019/04/10 01:55

जयपुर। प्रदेश के ज्यादातर निजी स्कूलों में मनमाफिक किताब-स्टेशनरी शुल्क वसूली रोकना शिक्षा विभाग के लिए मुश्किल हो गया है। न तो विभाग के पास संसाधन हैं और न ही विभाग की ओर से निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायत मिलने पर कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। हालत यह है कि किताबों की दरों को स्कूल वेबसाइट पर जारी करने के जो निर्देश विभाग की ओर से जारी किए गए हैं। उसके उलट करीब 15 हजार स्कूलें तो ऐसी हैं, जिनके पास अपनी वेबसाइट ही नहीं है। एक रिपोर्ट:

प्रदेश में करीब 53 हजार निजी स्कूल इस समय राज्यभर में संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 15 हजार ऐसे हैं, जिनकी अपनी वेबसाइट तक नहीं बनी हुई है। विभाग की ओर से जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसमें किताबों की दरों सहित तमाम सूचनाएं वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा जिन स्कूलों की अपनी साइट्स हैं, उनमें चुनिंदा को छोड़कर ज्यादातर इस प्रकार की सूचनाएं अपडेट नहीं कर रहे। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों और अभिभावकों को मुंहमांगी कीमते चुकाकर लूटने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

सवाल दर सवाल? इसलिए थोथी नजर आ रही है सरकारी गाइडलाइन:

—यदि विभाग ने गाइडलाइन जारी की हैं तो आखिर क्यों नहीं बनाई मॉनीटरिंग सेल?
—अब तक क्यों किसी भी स्कूल के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं ?
—किताब-ड्रेस की शिकायतें मिलने के बाद क्यों नहीं की जाती छापेमारी?
—आखिर इस मामले में अब तक क्यों नहीं आया एक भी स्कूल की मान्यता पर संकट?

राज्य के ज्यादातर निजी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र का आगाज हो चुका है। ऐसे में अभिभावकों को पीड़ा भुगतने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार ने अपनी गाइडलाइन में कहा है कि पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते, टाई स्कूल से खरीदने के लिए निजी स्कूल बाध्य नहीं कर सकेंगे। वे खुले बाजार से खरीदारी को स्वतंत्र हैं। फीस को लेकर भी जो निर्देश जारी किए गए, उनकी भी ठीक से पालना ही नहीं हो पा रही है। स्कूलों में फीस तभी बढ़ाई जा सकेगी जब फीस कमेटी उसे मान्यता देगी, लेकिन ज्यादातर स्कूलों में फीस कमेटियों का गठन ही नहींं। शिक्षामंत्री गोविंदसिंह डोटासरा का कहना है कि अफसरों को गाइडलाइन की पूरी तरह पालना करवाने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

... संवाददाता मदन कलाल की रिपोर्ट 


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