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उत्तराखंड में 12वीं और 10वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर कार्यक्रम जारी

उत्तराखंड में 12वीं और 10वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर कार्यक्रम जारी

रामनगर: उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा परिषद ने भी 12वीं और 10वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर कार्यक्रम जारी कर दिया है. 12वीं बोर्ड की परीक्षा दो मार्च 2020 और 10वीं बोर्ड परीक्षाएं 3 मार्च से लेकर 25 मार्च तक चलेंगी. आज बोर्ड ऑफिस ने परीक्षा तिथि की घोषणा के साथ ही परीक्षा स्कीम भी जारी की है. परीक्षा नियंत्रण समिति की बैठक में ये फैसला लिया गया. 

दरअसल इस साल करीब कुल पौने 3 लाख बच्चे बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल होंगे. आकंडों के मुताबिक 10वीं की बोर्ड में इस साल डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल होंगे. जबकि 12वीं में एक लाख 20 हजार बच्चों ने परीक्षा देनी है. बता दें कि पिछले साल उत्तराखंड बोर्ड हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में करीब 2.5 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी थी. हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं एक मार्च से शुरू होकर 26 मार्च तक चली थीं. जिसका परिणाम 30 मई 2019 को घोषित हुआ था. लोकसभा चुनाव होने के चलते मूल्यांकन 20 अप्रैल से चार मई के बीच हुआ था. मूल्यांकन देर से होने के कारण रिजल्ट 30 मई को जारी किया गया था. 

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सेला दर्रे के आधर क्षेत्र में पर्वतारोहियों ने खोजी झील

सेला दर्रे के आधर क्षेत्र में  पर्वतारोहियों ने खोजी झील

पिथौरागढ़: वर्ष 2017 में योगेश गर्बियाल के नेतृत्व में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले वाले पर्वतारोहियों के एक दल ने हाल में 20 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित सेला दर्रे के आधार क्षेत्र में एक झील खोजी है. गर्बियाल ने बताया कि यह झील जिले में भारत-चीन सीमा के पास उच्च हिमालयी घाटियों, व्यास और दारमा, को जोड़ने वाले सेला दर्रे के उत्तर में करीब तीन किलोमीटर दूर है. एक किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस झील में साफ पानी बह रहा है.

उन्होंने बताया कि अपनी इस खोज के बारे में वह जल्द ही राज्य सरकार को सूचित करेंगे ताकि इस खूबसूरत झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सके.क्षेत्र के ग्रामीण भी झील की खोज से बहुत उत्साहित हैं और उनका मानना है कि अगर इसे अच्छी तरह से विकसित किया जाए तो इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है.इससे आमदनी के साधन विकसित होगें. (सोर्स-भाषा)

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नहर में कार गिरने से रुड़की की तहसीलदार सहित तीन लोगों की मौत

नहर में कार गिरने से रुड़की की तहसीलदार सहित तीन लोगों की मौत

बिजनौर/हरिद्वार (भाषा): उत्तराखंड के रुड़की की तहसीलदार की कार शनिवार रात उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पूर्वी गंगनहर में गिर गई जिससे तहसीलदार, उनके अर्दली और कार चालक की मौत हो गई. तीनों के शव रविवार सुबह निकाल लिए गए. पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने रविवार को बताया कि रुड़की की तहसीलदार सुनयना राणा (35) शनिवार रात अपने अर्दली ओमपाल के साथ एक वाहन से नैनीताल से रुड़की जा रही थीं कि तभी उनका वाहन गंग नहर की पुलिया की रेलिंग तोड़कर नहर में जा गिरा.

उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने बचाव कार्य शुरू कर दिया. सिंह ने बताया कि आज सुबह तीनों के शव निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए गए. कार को क्रेन से बाहर निकाला गया.जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय ने बताया कि तहसीलदार विभागीय प्रशिक्षण के लिए नैनीताल गई थीं.उन्होंने बताया कि नहर में पानी ज्यादा था और बहाव तेज था. उत्तराखंड के अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी गई है.

हरिद्वार के जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बताया कि शनिवार देर रात बिजनौर के नजीबाबाद में हुए हादसे में राणा, उनके अर्दली ओमपाल और चालक सुंदर सिंह की मौत हो गई. मौके पर मौजूद हरिद्वार के तहसीलदार आशीष कुमार घड़ियाल और तहसीलदार-प्रभारी कुंभ मनजीत सिंह ने बताया कि शनिवार रात सभी नैनीताल से प्रशिक्षण के बाद लौट रहे थे. राणा की गाड़ी सबसे पीछे थी.

उन्होंने बताया कि बीती रात लगभग 10 बजे राणा की लोकेशन मिलनी बंद हो गई और उनका मोबाइल भी बंद हो गया. अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद राणा की तलाश शुरू की गई और जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी गई. बिजनौर के कई थानों की पुलिस उनकी गाड़ी की तलाश में लग गई. बाद में नहर की पुलिया की रेलिंग टूटी मिलने के बाद बैराज से पानी का रुख मोड़ा गया और शव निकाले गए.

श्रद्धालुओं के लिए बंद हुआ हेमकुंड साहिब, 36 दिन की अवधि में 8,500 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन 

श्रद्धालुओं के लिए बंद हुआ हेमकुंड साहिब, 36 दिन की अवधि में 8,500 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन 

गोपेश्वर: उत्तराखंड में सिखों के प्रसिद्ध धर्मस्थल हेमकुंड साहिब का द्वार शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया. गुरुद्वारे का द्वार श्रद्धालुओं के लिए शीतकाल में बंद ही रहता है क्योंकि यहां बर्फबारी होती है.

हेमकुंड प्रबंधन न्यास के मुख्य प्रबंधक सेवा सिंह ने बताया कि अरदास के बाद दोपहर में गुरुद्वारे का द्वार बंद कर दिया गया. इस दौरान वहां 1,350 श्रद्धालु मौजूद थे. उन्होंने बताया कि गुरुद्वारे में इस साल का अंतिम अरदास दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर हुआ.

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सिंह ने बताया कि कोविड-19 महामारी की वजह से इस साल विलंब से गुरुद्वारे का द्वार श्रद्धालुओं के लिए चार सितंबर को खुला था और 36 दिन की अवधि में यहां 8,500 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. पिछले साल यहां 2.39 लाख श्रद्धालु आए थे.(भाषा)

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उत्तराखंड में दिलाई गई शपथ

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उत्तराखंड में दिलाई गई शपथ

देहरादून: उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव हेतु जन जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को विधायकों एवं अधिकारियों को शपथ दिलाई. राज्यपाल बेबी रानी ने राजभवन में अधिकारियों तथा कर्मचारियों को शपथ दिलाई. मुख्यमंत्री रावत ने राज्य सचिवालय में विधायकों एवं अधिकारियों को कोविड-19 से बचाव और कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए सावधानियां बरतने, कोविड से जुड़े आचार व्यवहार का अनुसरण करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करने की शपथ दिलाई. इसमें मास्क, फेस कवर पहनने एवं दूसरों से दो गज की दूरी बनाकर रखने, नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने, कोविड के लक्षण महसूस होने पर तत्काल चिकित्सा सलाह लेने एवं मिलकर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई जीतने की भी शपथ दिलाई गई.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ठंड और त्योहारों का समय शुरू होने वाला है जिसे देखते हुए कोविड-19 के खिलाफ व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में कोविड पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता, तब तक जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
रावत ने अधिकारियों से भी बैठकों को वर्चुअल माध्यम से करने को कहा. उन्होंने कहा कि सतर्कता से राज्य में कोविड संक्रमण की दर में कमी आई है लेकिन इस समय किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए.

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अभियान के तहत इसी प्रकार की शपथ यहां सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग तथा उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के केदारनाथ, बदरीनाथ, जोशीमठ, उखीमठ, देहरादून और ऋषिकेश के कार्यालयों में भी दिलाई गई. देवस्थानम बोर्ड के मुख्य कार्याधिकारी रविनाथ रमन ने अधिकारियों और कर्मचारियों से न केवल अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का ध्यान रखने बल्कि चारधाम में आने वाले श्रद्धालुओं से भी कोविड दिशानिर्देशों का पालन कराने को कहा. (भाषा) 

देवस्थानम बोर्ड का आदेश, अब हर दिन बदरीनाथ और केदारनाथ धाम जा सकेंगे तीन हजार यात्री

देवस्थानम बोर्ड का आदेश, अब हर दिन बदरीनाथ और केदारनाथ धाम जा सकेंगे तीन हजार यात्री

देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध धामों, बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी करते हुए उसे अब प्रतिदिन तीन हजार कर दिया गया है. उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, गंगोत्री धाम के लिए श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या 900 और यमुनोत्री धाम के लिए 700 कर दी गई है. हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग कर धामों का दर्शन करने आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या हालांकि इसमें शामिल नहीं है.

देवस्थानम बोर्ड ने चारधाम यात्रा के लिये पिछले दिनों प्रदेश से बाहर के यात्रियों के लिए कोरोना-मुक्त जांच रिपोर्ट लाने की बाध्यता हटा दी थी जिसके बाद धामों के दर्शन के लिए ई-पास मांगने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई. इसी के मद्देनजर बोर्ड ने चारों धामों के दर्शन हेतु तीर्थयात्रियों की अधिकतम संख्या को बढ़ा दिया है. बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि अब बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन 3000, केदारनाथ में 3000, गंगोत्री में 900 तथा यमुनोत्री में 700 तीर्थयात्री दर्शन कर सकेंगे.

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इससे पहले, बोर्ड ने चमोली, रूद्रप्रयाग एवं उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी ताकि सुविधाओं के अनुसार तीर्थयात्रियों की संख्या बढाई जा सके. बदरीनाथ चमोली जिले में, केदारनाथ रूद्रप्रयाग जिले में तथा गंगोत्री और यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित है. पहले बदरीनाथ जाने के लिए 1200, केदारनाथ के लिये 800, गंगोत्री के लिए 600 तथा यमुनोत्री के लिए अधिकतम 400 श्रद्धालुओं को ही अनुमति दी जा रही थी. (भाषा)

उत्तराखंड सरकार ने जारी की अनलॉक-5 की गाइडलाइन, 15 अक्टूबर से खुलेंगे सिनेमा और मल्टीप्लेक्स 

उत्तराखंड सरकार ने जारी की अनलॉक-5 की गाइडलाइन, 15 अक्टूबर से खुलेंगे सिनेमा और मल्टीप्लेक्स 

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने अनलॉक-5 के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं जिनके तहत 15 अक्टूबर से निषिद्ध क्षेत्रों के के बाहर स्थित सिनेमा, थिएटर और मल्टीप्लेक्स को केवल 50 प्रतिशत सीटों के साथ खोलने की अनुमति देने का निर्णय किया गया है. बृहस्पतिवार देर रात जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक  मनोरंजन पार्क तथा इसी प्रकार के अन्य स्थानों को भी कुछ शर्तों के साथ 15 अक्टूबर से खोलने की अनुमति दे दी गई है.

सरकार ने कहा कि निषिद्ध क्षेत्रों के बाहर 15 अक्टूबर के बाद सामाजिक, शैक्षिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक समारोहों में केवल 100 लोगों के एकत्र होने की सीमा को समाप्त किया जा सकता है. हालांकि, बंद जगहों में 200 से ज्यादा या हॉल की क्षमता के 50 प्रतिशत से अधिक लोग एकत्र नहीं हो पाएंगे. स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से खोले जाने के बारे में निर्णय राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की राय से स्थिति का आकलन करने के बाद किया जाएगा.

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हालांकि, इस दौरान ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा को तरजीह दी जाएगी. विद्यार्थी अपने माता-पिता की लिखित सहमति से ही स्कूल या संस्थान में कक्षाओं में पढ़ाई करने जाएंगे. स्कूल खोलने के संबंध में शिक्षा विभाग अपने अलग दिशा-निर्देश जारी करेगा. दिशा-निर्देशों के अनुसार दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में आने वाले सभी लक्षणविहीन व्यक्तियों को यात्रा से पहले अपने आने की सूचना वेब पोर्टल पर देनी होगी, चाहे वे यात्रा के लिए किसी भी साधन से आएं. हालांकि, उन्हें पृथक-वास से छूट दी जाएगी. इसी प्रकार पर्यकों को भी स्मार्ट सिटी वेब पोर्टल पर अपने आने की सूचना दर्ज करानी होगी. हालांकि, उन्हें अपने साथ कोरोना-मुक्त होने की जांच रिपोर्ट लाना अनिवार्य नहीं है. निषिद्ध क्षेत्रों में प्रतिबंध 31 अक्टूबर तक जारी रहेंगे.(भाषा) 

सीएम रावत ने किया नैनीताल के धनगढी गेट में कार्बेट परिचय केंद्र का उद्घाटन 

सीएम रावत ने किया नैनीताल के धनगढी गेट में कार्बेट परिचय केंद्र का उद्घाटन 

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को नैनीताल जिले के रामनगर में धनगढ़ी गेट पहुंचकर लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित अत्याधुनिक तकनीक से युक्त कार्बेट परिचय केंद्र, नेचर शॉप और कैंटीन का लोकार्पण किया. रावत ने कार्बेट बाघ अभयारण्य की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के स्मारक पर दीप जलाए और पुष्प चक्र अर्पित किए.

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इस अवसर पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि कार्बेट परिचय केंद्र के खुलने से पर्यावरण एवं वन्य जीवप्रेमियों को कार्बेट पार्क की जैव विविधता को जानने एवं समझने में आसानी होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्बेट पार्क का आकर्षण बढ़ने के साथ ही जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं. उन्होंने इस संबंध में स्थानीय लोगों द्वारा वन एवं वन्य जीवों का संरक्षण करने में किये जा रहे कार्यों की भी सराहना की. उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक पर्यावरण चक्र को दीर्घकालिक बनाए रखने के लिए वन विभाग के साथ ही जनमानस को भी जागरूक करना होगा.

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मुख्यमंत्री कहा कि जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण माने जाने वाले पिरूल यानि चीड़ की सूखी पत्तियों से चारकोल बनाया जा रहा है और बिजली का उत्पादन हो रहा है. उन्होंने बताया कि पिरुल से 25 किलोवाट की विद्युत उत्पादन यूनिट में 207 लोगों को पहले चरण में काम मिला है और उसकी क्षमता बढ़ने के साथ ही रोजगार में भी वृद्धि होगी. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने चोपड़ा, लेटी, रामपुर गांव को राजस्व ग्राम बनाने की घोषणा की. 

उन्होंने कहा कि कार्बेट पार्क बाघों के संरक्षण के साथ ही इस बात के लिए भी जाना जाएगा कि यह वही पार्क है जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा आतंकी हमले का बदला एवं प्रतिकार लेने के लिए दृढ़ निश्चय एवं संकल्प लिया था. इस मौके पर कार्बेट बाघ अभयारण्य में बाघों की गणना का आंकड़ा जारी करते हुए बताया गया कि वर्ष 2018 में अभयारण्य में बाघों की संख्या 231 थी जो वर्ष 2020 में 252 से अधिक हो चुकी है. (भाषा)

हल्द्वानी में 119 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण, सीएम रावत ने कहा-प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त एवं पारदर्शी सरकार देना उनका लक्ष्य

हल्द्वानी में 119 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण, सीएम रावत ने कहा-प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त एवं पारदर्शी सरकार देना उनका लक्ष्य

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नैनीताल जिले की हल्द्वानी तहसील में बृहस्पतिवार को 119 करोड़ रुपए की 62 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. मुख्यमंत्री रावत ने 3163.56 लाख रुपए की 20 योजनाओं का लोकार्पण तथा 8773.21 लाख रुपए की 42 योजनाओं का शिलान्यास करने के अलावा अनाथ बच्चियों को उनकी पढ़ाई हेतु 4.93 लाख रुपए के चेक भी वितरित किए. 

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त एवं पारदर्शी सरकार देना उनका लक्ष्य है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल में प्राप्त 30 हजार समस्याओं का समाधान किया गया है तथा प्रदेश में 500 विद्यालयों में ऑनलाईन शिक्षा दी जा रही है.

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उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों पर बेहतर कार्य किये हैं और स्वरोजगार देने के ज्यादा से ज्यादा प्रयास किये जा रहे हैं. रावत ने कहा कि प्रदेश में चीड की पत्तियों से विद्युत उत्पादन प्रारम्भ हो चुका है जबकि प्रदेश के चीड के जंगलों से 200 मेगावाट विद्युत उत्पादन तथा 40 हजार लोगों को रोजगार दिया जा सकता है.(भाषा)