औरंगाबाद Maharashtra के औरंगाबाद में मवेशियों, बकरियों की नस्लों का जीनोम विश्लेषण करने की परियोजना शुरू

Maharashtra के औरंगाबाद में मवेशियों, बकरियों की नस्लों का जीनोम विश्लेषण करने की परियोजना शुरू

Maharashtra के औरंगाबाद में मवेशियों, बकरियों की नस्लों का जीनोम विश्लेषण करने की परियोजना शुरू

औरंगाबाद: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (बीएएमयू) के जंतु विज्ञान विभाग ने यहां के मूल मवेशियों और बकरियों की नस्लों का जीनोम विश्लेषण करने की एक परियोजना शुरू की है, ताकि उनकी विशेषताओं को पता लगाया जा सके.

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि परियोजना को औरंगाबाद में संभागीय आयुक्त कार्यालय द्वारा शुरू किया गया है,जिसके वास्ते चार साल के लिए 1.69 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है.

परियोजना के तहत लाल कंधारी गाय, देवनी बैल और उस्मानाबादी बकरी की देशी नस्लों का अध्ययन किया जाएगा:

अधिकारी ने कहा कि इस परियोजना के तहत लाल कंधारी गाय, देवनी बैल और उस्मानाबादी बकरी की देशी नस्लों का अध्ययन किया जाएगा. इससे उनकी बुनियादी विशेषताओं की पहचान करने और अंततः उन्हें बचाने में मदद मिलेगी.

जंतु विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. गुलाब खेड़कर ने कहा, ‘‘लाल कंधारी गाय, उस्मानाबादी बकरी और देवनी बैल से क्षेत्र के किसानों को वित्तीय सहायता मिलती है. लाल कंधारी गायों और देवनी बैलों का क्रमशः लगभग 650 वर्ष और 250 वर्ष का इतिहास है. हालांकि, समय के साथ, इन नस्लों की बुनियादी विशेषताओं में बदलाव आया है. हम देख सकते हैं कि इन गायों की दूध देने की क्षमता आदि में बदलाव पाया है.

परियोजना के हिस्से के रूप में, हम जीनोम विश्लेषण के लिए उनके नमूने एकत्र करेंगे:

उन्होंने कहा कि परियोजना के हिस्से के रूप में, हम जीनोम विश्लेषण के लिए उनके नमूने एकत्र करेंगे. उनका अध्ययन करने के बाद, हम मराठवाड़ा क्षेत्र की मूल नस्लों को बचा पाएंगे. उन्होंने बताया कि बीएएमयू के कुलपति, डॉ. प्रमोद येओले और वसंतराव नायक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी) परभणी के डॉ. अशोक धवन ने परियोजना में मदद का आश्वासन दिया है. सोर्स-भाषा

और पढ़ें