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योगी सरकार की Good Book में प्रमोटी आईएएस अफसर

योगी सरकार की Good Book में प्रमोटी आईएएस अफसर

लखनऊ(यूपी)। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार से शुरू हुए प्रांतीय सिविल सेवा के अफसरों के अच्छे दिन योगी सरकार में भी जारी हैं। वर्षों से UP सरकारों की उपेक्षा का शिकार रहे पीसीएस संवर्ग के इन अफसरों पर जहां पिछली सरकार में प्रमोशन से लेकर तैनाती तक सम्मान अखिलेश यादव से मिला । वही सिलसिला आज भी योगी सरकार में भी जारी है । देश मे उत्तर प्रदेश सूबे के प्रशासन की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले इस संवर्ग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरोसे का आलम यह है कि इस संवर्ग से आईएएस बने अफसरों की पूरे प्रदेश के करीब आधे जिलों में डीएम के पद पर तैनाती की गयी है वही उत्तर प्रदेश के आधे मंडल के मंडलायुक्त भी पीसीएस से प्रमोटी अफसर ही बनाये गए हैं । 

जिलों के प्रशासन के कुशल प्रबंधन में कार्यकारी पदों पर ज्यादा अनुभव रखने वाले ये प्रमोटी अफसर ज्यादा कामयाब रहते हैं । अखिलेश सरकार से लेकर योगी सरकार में इनका जलवा बरकरार है । UP में प्रधान से लेकर पटवारी तक की कार्यशैली से परिचित इन प्रमोटी PCS अफसरों को हासिल महारत ही इनके प्रति सरकार के विश्वास का कारण है ।  फिलहाल प्रदेश के जिलों और मंडलों में मंडल कमिश्नर और जिलों के जिलाधिकारियों की तैनातियों पर अगर नजर डालें तो सूबे के 33 जिलों के डीएम प्रोन्नति अफ़सर पाए आईएएस अफसर हैं और सूबे के 18 मंडलों में 9 मंडल के कमिश्नर भी प्रमोटी आईएएस ही हैं । 

UP में प्रमोटी मंडलायुक्तों की तैनाती पर नजर डालें तो 9 मंडलों में मुरादाबाद में अनिल राज कुमार, फैजाबाद में मनोज मिश्रा, अलीगढ में अजय दीप सिंह, आजमगढ़ में जगतराज, चित्रकूट में शरद कुमार सिंह, झांसी में कुमुद्लता श्रीवास्तव, मिर्जापुर में मुरली मनोहर लाल, सहारनपुर में सीपी त्रिपाठी और देवीपाटन मंडल में सुधेश कुमार ओझा की तैनाती योगी सरकार ने कर रखा है ।         

योगी सरकार ने प्रदेश के जिन जिलों में प्रमोशन से आईएएस बने इन अफसरों को जिलाधिकारी बनाया है वह सूबे के महत्वपूर्ण जिले माने जाते रहे हैं । फिलहाल प्रदेश के मंडल मुख्यालय सहित अन्य जिलों की कमान ये अफसर संभाल रहे हैं । मंडल मुख्यालय पर तैनात 7 जिलाधिकारियों में बरेली में वीरेंद्र कुमार सिंह, फैजाबाद में अनिल पाठक, मुरादाबाद में राकेश कुमार सिंह, अलीगढ में चन्द्र भूषण सिंह, आजमगढ़ में शिवा कांत द्विवेदी, बांदा में हीरालाल और देवीपाटन में प्रमान्शु श्रीवास्तव का नाम शामिल है । योगी की सबसे Good List में सबसे ईमानदार DM का नाम राकेश कुमार सिंह-मुरादाबाद लिखा है । 

इसके अलावा अन्य में गोरखपुर मंडल के महाराजगंज जिले में अमरनाथ उपाध्याय, कुशीनगर में डॉ अनिल कुमार सिंह, फैजाबाद मंडल के अमेठी जिले में शकुन्तला गौतम, अम्बेडकरनगर में सुरेश कुमार, बाराबंकी में उदयभानु त्रिपाठी, चित्रकूट मंडल के महोबा जिले में सहदेव, लखनऊ मंडल के उन्नाव जिले में देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, लखीमपुर में शैलेन्द्र कुमार सिंह, बरेली मंडल के बदायूं जिले में दिनेश कुमार सिंह, पीलीभीत में डॉ अखिलेश मिश्रा, मुरादाबाद मंडल के अमरोहा जिले में हेमंत कुमार, बिजनौर में अटल कुमार राय, संभल में अविनाश कृष्ण सिंह, अलीगढ मंडल के एटा जिले में आईपी पाण्डेय, कासगंज में आरपी सिंह, हाथरस में रमाशंकर मौर्य, आगरा मंडल के मथुरा जिले में सर्वग्यराम मिश्र, मैनपुरी में प्रदीप कुमार, झांसी मंडल के ललितपुर जिले में मानवेन्द्र सिंह, मेरठ मंडल के गौतमबुद्धनगर जिले में डॉ बीएन सिंह, कानपुर मंडल के कानपुर देहात जिले में राकेश कुमार सिंह, औरैया में श्रीकांत मिश्रा को तैनाती दी गयी है । कासगंज डीएम और पीलीभीत DM की छवि मुख्यमंत्री की नज़र में काफ़ी अच्छी है ।                                 

गौरतलब है कि पिछले कई दशकों से उत्तर प्रदेश को छोडकर देश के ज्यादातर राज्यों में जिलाधिकारी अथवा डीसी के पदों पर राज्य सिविल सेवा से तरक्की पाकर भारतीय प्राशासनिक सेवा में आये अफसरों की तैनाती सीधी भर्ती से आये आईएएस अफसरों के मुकाबले संख्या में काफी अधिक होती रही है ।  जिलों की कार्य प्रगति के आधार पर जानकारों का कहना है कि अपने अनुभव कुशलता के चलते यदि अपवाद को छोड़ दिया जाय तो इनकी परफार्मेंश औरों से बेहतर रही है, और यही वजह है की पिछली अखिलेश सरकार से लेकर इस सरकार योगी सरकार में भी इन पर भरोसा किया जा रहा है ।    

उत्तर प्रदेश में पीसीएस से आईएएस में प्रोन्नति की सुस्त रफ़्तार के चलते पहले लम्बे समय तक सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का जिलों और मंडलों की तैनाती में एकाधिकार देखा जाता रहा है । एक दौर ऐसा था जब 1976 बैच के सिर्फ एक अफसर चरणजीत सिंह बक्शी को आईएएस में प्रोन्नति के साथ डीएम के पद पर तैनाती मिली थी । शेष बैच और आगे के बैच के अफसरों को वर्षों तक तरक्की का इन्तजार करना पडा था । अगर पिछले दो दशकों का इतिहास देखें तो संवर्ग पुनर्गठन न होने के चलते कई दर्जन ऐसे पीसीएस अफसर आईएएस में प्रोन्नति नहीं पा सके और रिटायर हो गए जो सर्वथा योग्य अफ़सर थे । 

इन हालातों से आजिज कई अफसरों ने तो ज्यादा विलम्ब और वेतन की दृष्टि से आर्थिक नुक्सान को देखते हुए आईएएस संवर्ग में जाने से ही साफ़ इनकार कर दिया था । तारीफ़ करनी होगी तो अखिलेश यादव सरकार की जिसने पहल की और केंद्र सरकार के डीओपीटी से बेहतर समन्वय बनाकर बड़ी संख्या में पीसीएस अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में प्रोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया और अब 31 पीसीएस अफसरों के प्रमोशन का करीब 6 महीनों से अटके मसले को योगी सरकार ने हल किया और इन अफसरों को प्रमोशन मिल पाया । लिहाज़ा 1997 बैच के होनहार,काबिल,जगलर,गुड़ा-गडित में माहिर 5 प्रोटिव IAS DM की कुर्सी हासिल करने में कामयाब हो सकते है । जिसमे 3 नाम UP PCS एसोसिएशन के पदाधिकारियों का रहा है । 

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बेहद सधी हुई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा ये कदम: 
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जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा का दिल्ली से लखनऊ शिफ्ट होना चुनावी तैयारी के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. इस तरह आने वाले दिनों में प्रियंका यूपी में और ज्यादा नजर आएंगी. अपनी शादी के बाद, इंदिरा गांधी भी अपने पति फ़िरोज़ के साथ लखनऊ आ गईं थी. वे चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एपी सेन रोड के एक बंगले में रहती थीं.

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दोनों की कई दिनों से तबीयत खराब थी:
मिली जानकारी के अनुसार यह घटना अमेठी के शुक्ल बाजार की है जहां बारात लेकर जा रहे दूल्हे को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है. यह बारात बराबंकी के हैदरगढ़ जा रही थी और इस बीच दूल्हे और उसके पिता की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई. जानकारी के अनुसार शुक्ल बाजार निवासी एक व्यक्ति और उसके बेटे की कई दिनों से तबीयत खराब थी. उसके बाद डॉक्टर ने दोनों की कोरोना जांच की सलाह दी थी. स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना जांच के लिए सैंपल ले गई थी.

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उसके बाद शुक्रवार को जब बेटे की जानी थी तो शादी स्थगित नहीं करने का फैसला लिए दोनों ने बारात ले जाने का निर्णय लिया. इसी के चलते जांच रिपोर्ट आने से पहले ही दूल्हे के पिता बारात लेकर हैदरगढ़ के लिए निकल पड़े. उधर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम दोनों को अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए उनके घर पहुंच गई. जहां जानकारी मिली की दोनों बारात लेकर बाराबंकी चले गए हैं. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की सूचना पर हरकत में आई पुलिस ने बाप बेटे को बाराबंकी बॉर्डर से पकड़ लिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम के हवाले कर दिया, जिसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 


 

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लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी. हाईकोर्ट ने सरकार को परीक्षा की उत्तर-कुंजी जारी करने की छूट दी है. अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी.

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क्वालिफाइंग अंक निर्धारित करने का विशेषाधिकार सरकार का:  
हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से कहा गया कि किसी परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग अंक निर्धारित करने का विशेषाधिकार सरकार का है. इसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती. साथ ही कहा कि छह जनवरी 2019 को हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के आयोजक परीक्षा नियामक प्राधिकरण ने प्रश्नपत्र की उत्तर कुंजी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी थी. यह एक क्वालिफाइंग परीक्षा थी, इसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया तैयार की जानी थी. यह भी साफ किया कि अभी तक इस परीक्षा के आधार पर कोई भर्ती नहीं की गई है.

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याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को यूपी सरकार यूजीसी को भेजेगी और यूजीसी आपत्तियों का निस्तारण करेगी. अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी. गौरतलब है कि सरकार नियुक्तियां पूरी करने में बहुत तत्परता दिखा रही थी. सरकार का मानना था कि इस कोरोना काल मे जल्द नियुक्तियां होने पर अनेकों अभ्यार्थियों को बहुत राहत मिलेगी.


 

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. यह धमकी पुलिस मुख्यालय के वॉट्सऐप नंबर पर मैसेज भेजकर दी गई है. जिस नंबर से धमकी भरा मैसेज आया है, पुलिस ने उसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है. मैसेज में सीएम योगी को एक विशेष समुदाय के लिए पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है. पुलिस के आला अधिकारियों के अनुसार इस मामले से जुड़े आरोपी को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा. 

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जानकारी के अनुसार यूपी पुलिस के 112 मुख्यालय में गुरुवार देर रात लगभग साढ़े बारह एक वॉट्सऐप मैसेज आया. मैसेज में लिखा था कि सीएम योगी को मैं बम से मारने वाला हूं. (एक खास समुदाय का नाम लिखा) की जान का दुश्मन है वो. मैसेज मिलने के बाद इस बात की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई. अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नंबर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है. अब रिकॉर्ड निकाला जा रहा है कि यह नंबर किसके नाम का है. 

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इस दौरान मुख्यमंत्री ने भी महामारी से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाते हुए आर्थिक गतिविधियों पर फोकस देने की बात पर सहमति जताई. साथ ही कहा कि स्थानीय उद्यमों पर भी अधिकाधिक फोकस किया जाएगा, ताकि प्रदेश का प्रत्येक गांव और जिला आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सके. करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में मंत्रियों ने लॉकडाउन बढ़ाने के साथ आर्थिक गतिविधियों के लिए अधिक से अधिक अनुमति देने की बात कही. 

बैठक में शादी-ब्याह की अनुमति देने का भी सुझाव: 
वहीं कुछ मंत्रियों ने बैठक में शादी-ब्याह की अनुमति देने का भी सुझाव दिया. इस दौरान सीएम योगी ने  प्रभारी मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों पर लगातार ध्यान दें. बाहर से आने वाले प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ हल करवाने में मदद करें. 

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केंद्र को सुझाव देने के लिए यह बैठक की गई:
सीएम ने कहा कि लॉकडाउन के तीसरे चरण की समाप्ति से पहले केंद्र को सुझाव देने के लिए यह बैठक की जा रही है. लॉकडाउन का चौथा चरण लागू होता है, तो उसके स्वरूप को लेकर इस संबंध में विस्तृत सुझाव देने होंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि लॉकडाउन के संबंध में राज्य सरकारें स्वयं निर्णय लें. 
 

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किसी प्रकार की समस्या न हो इसके अधिकारियों को निर्देश दिए: 
इसके साथ ही यूपी में प्रवासी मजदूरों के अंतरराज्यीय या अंतर्जनपदीय आवागमन में किसी प्रकार की समस्या न हो इसके अधिकारियों को निर्देश दिए है. साथ ही कहा कि जो जहां हैं, वहीं से उन्हें गृह जनपद पहुंचाने की व्यवस्था अधिकारी करें. सोमवार को कोरोना को लेकर बनाई गई टीम-11 की बैठक में सीएम योगी ने निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी कामगार श्रमिक को अंतरराज्यीय, अंतर्जनपदीय आवागमन में समस्या ना हो, यह सुनिश्चित किया जाए. साथ ही इस दौरान सभी के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए. पैदल अथवा दुपहिया वाहन से कोई भी श्रमिक कामगार ना चले.

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रिफॉर्म कानून के जरिए गांवों व कस्बों में ही रोजगार देने की योजना बनाई:
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों को लेबर रिफॉर्म कानून के जरिए गांवों व कस्बों में ही रोजगार देने की योजना बनाई है. इसके साथ ही बाहर से आए 20 लाख प्रवासी मजदूरों में तेजी से स्किलिंग डाटा तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
 

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