जयपुर VIDEO: फीका पड़ा पीसीसी में जनसुनवाई कार्यक्रम, नेता ज्यादा और फरियादी आए कम

VIDEO: फीका पड़ा पीसीसी में जनसुनवाई कार्यक्रम, नेता ज्यादा और फरियादी आए कम

VIDEO: फीका पड़ा पीसीसी में जनसुनवाई कार्यक्रम, नेता ज्यादा और फरियादी आए कम

जयपुर: प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जनसुनवाई का कार्यक्रम एक बार फिर फेल रहा. दो दिन के अंतराल के बाद गुरुवार को जन सुनवाई की औपचारिकता तो हुई, लेकिन समय पर सूचना के अभाव में आज भी गिने चुने लोग ही मंत्री की सुनवाई में पहुंच सके. हालात यह थे कि इस कार्यक्रम में सुनवाई करने वाले नेता ज्यादा और फरियाद इक्का दुक्का थे. मंत्री लालचंद कटारिया भी फरियादियों की राह देखते नजर आए. 

भाजपा की तर्ज पर मंत्री दरबार:
भाजपा की तर्ज पर कांग्रेस दफ्तर में मंत्री दरबार लगाने का कांग्रेस का फैसला लगता है, जल्दबाजी में लिया गया. न मंत्री की तैयारी और न ही पीसीसी की तैयारी. सात अक्टूबर को आनन-फानन में बिना कार्यक्रम तय किए जनसुनवाई का आगाज किया गया, लेकिन हालात यह है कि आज तक यह कार्यक्रम व्यवस्थित नहीं हो सका. पहले दिन मंत्री बीडी कल्ला देरी से पहुंचे थे, तो फरियादी नहीं थे. उसके बाद जनता आने लगी, तो मंत्री सुनवाई के लिए नहीं आए. बुधवार को भी जल्दबाजी में मंत्री दरबार लगाने का फैसला किया गया. बुलाया तो राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को था, लेकिन वे खींवसर में चुनाव प्रचार करने चले गए और जन सुनवाई में नहीं आए, तो फिर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया को तैयार किया गया. मंत्री को तो पीसीसी में आने की जानकारी मिल गई, लेकिन जनता को कोई सूचना नहीं दी गई. मंत्री कटारिया के साथ आज पीसीसी के महासचिव पुखराज पाराशर और संगठन महासचिव महेश शर्मा जनसुनवाई के लिए बैठ गए, लेकिन फिर फरियादी नहीं आए. धीरे धीरे मीडिया के माध्यम से खबर पहुंची, तो कुछ गिने चुने फरियादी आए. मंत्री कटारिया ने कार्यकर्ताओं और नागरिकों की समस्याएं सुनकर समाधान का आश्वासन दिया. पीसीसी में आने वाले कार्यकर्ताओं में अधिकांश पानी बिजली सड़क और कृषि विभाग से जुड़ी हुई समस्याएं लेकर आए. कई कार्यकर्ताओं ने तबादलों को लेकर भी लालचंद कटारिया को ज्ञापन सौपे।

अधूरी तैयारी के चलते यह निर्णय पीसीसी पर भारी:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर सोमवार अपने आवास पर जन सुनवाई करते हैं. मंत्री भी अपने सरकारी निवासों पर सुनवाई करते हैं, लेकिन पिछले दिनों पीसीसी में हुई कांग्रेस की उच्च स्तर बैठक में तय किया गया था कि पिछली भाजपा सरकार की तर्ज पर अब कांग्रेस दफ्तर में भी मंत्री दरबार लगाया जाएगा. संगठन को महत्व देने के उद्देश्य से पीसीसी में जन सुनवाई करने का निर्णय लिया था, लेकिन अधूरी तैयारी के चलते यह निर्णय पीसीसी पर भारी पड़ता दिख रहा है. समझा तो जा रहा था कि कार्यकर्ताओं के काम होंगे, लेकिन अब संदेश ही गलत जा रहा है. दरअसल जनता व कार्यकर्ताओं को जन सुनवाई की आधिकारिक जानकारी ही नहीं दी जाती. अंतिम समय तक मंत्री ही तय नहीं होते. कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने माना है कि अभी शुरुआती दिन है इसलिए कार्यक्रम व्यवस्थित नहीं हो पाया आने वाले दिनों में पीसीसी में होने वाली जनसुनवाई में कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी देखने को मिलेगी. 

सह प्रभारी विवेक बंसल से राय के बाद तय होगा कार्यक्रम:
प्रदेश में दो जगह उप चुनाव होने जा रहे है और जल्द ही निकाय चुनाव की तैयारी भी शुरू हो जाएगी, ऐसे में बिना किसी तैयारी और मंत्रियों की सहमति के जनसुनवाई का कार्यक्रम तय करने की वजह से अब संगठन को बैकफुट पर आना पड़ा है. माना जा रहा है कि सह प्रभारी विवेक बंसल से राय मशविरा करके जल्द ही जन सुनवाई को व्यवस्थित कार्यक्रम तय होगा. 

... संवाददाता नरेश शर्मा की रिपोर्ट 

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