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दाल आयातकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, देश के विभिन्न हाईकोर्ट में दर्ज याचिकाओं की सुनवाई पर लगायी रोक

दाल आयातकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, देश के विभिन्न हाईकोर्ट में दर्ज याचिकाओं की सुनवाई पर लगायी रोक

जयपुर: देश के अलग अलग बंदरगाहों पर रखी करीब ढाई लाख मीट्रिक टन दालों को देश में वितरण की अनुमति देने से जुड़ी राजस्थान हाईकोर्ट में दर्ज 81 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी है. दालों को रिलीज करने को लेकर दायर इन याचिकाओं पर बुधवार को सुबह 11 बजे राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति की खण्डपीठ के नॉन सिटिंग के चलते इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई टल गयी थी. इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट में गुरूवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना था. इसी बीच केन्द्र सरकार और डीजीएफटी द्वारा दायर 106 ट्रांसफर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की बैंच ने सुप्रीम कोट में ट्रांसफर पीटीशन में 6 मार्च 2020 को नोटिस जारी होने के बाद भी 15 मई को आदेश जारी होने पर आश्चर्य जताया. 

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देशभर के विभिन्न हाईकोर्ट में दर्ज है 106 याचिकाए:
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के साथ ही देश के अलग अलग हाईकोर्ट में दर्ज कुल 106 याचिकाओं पर अग्रिम कार्यवाही या यो कहे तो सुनवाई पर रोक लगायी है. केन्द्र सरकार ने इन सभी अलग अलग याचिकाओं के खिलाफ मार्च के प्रथम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में 106 ट्रांसफर पीटीशन दायर कि थी. जिस पर 6 मार्च को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं में नोटिस जारी किये थे. आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने 6 मार्च को जारी किये नोटिस को दुबारा सभी 106 याचिकाओं के पक्षकारों को जारी किये है. सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिये है कि वो टांसफर पीटीशन में अप्रार्थी पक्षकारों केा जारी किये जाने वाले प्रस्तावित नोटिस का प्रारूप याचिकाकर्ता केन्द्र सरकार केा मेल करे. जिसे केन्द्र सरकार एक सप्ताह के अंदर स्थानीय दो समाचार पत्रों में प्रकाशित करेगी. तीन सदस्य बैंच ने मामले की अगली सुनवाई 17 जून केा तय की है. 

15 मई के आदेश से केन्द्र सरकार हुई सतर्क:
देश के 5 हाईकोर्ट में दाल आयातकों द्वारा दायर कि गयी याचिकाओं के खिलाफ केन्द्र सरकार ने डीजीएफटी के जरिए ट्रांफसर पीटीशन दायर की. मार्च के प्रथम सप्ताह में दायर कि गयी इन ट्रांसफर पीटीशन पर सुप्रीम कोर्ट में 6 मार्च को सुनवाई करते हुए सभी तीन दर्जन आयातकों को नोटिस जारी किये गये. नोटिस जारी होने से पूर्व ही एएसजी आर डी रस्तोगी द्वारा ट्रांसफर पीटीशन पेश किये जाने की सूचना के आधार पर जस्थान हाईकोर्ट में दर्ज याचिकाओं पर सुनवाई 11 मई तक टाल दी गयी. इस आदेश को निखिल पल्सेज ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दे दी. 11 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर सुनवाई को 2 सप्ताह के लिए टाल दिया. इसी बीच निखिल पल्सेज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर फाइनल सुनवाई के लिए गुहार लगायी गयी. 15 मई को सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बैंच ने एसएलपी को खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट को कहा कि वो एक माह में इस मामले अंतिम रूप से तय करे. लेकिन उस सुनवाई के दौरान कोर्ट को नही बताया गया कि ट्रांसफर पीटीशन दायर कि जा चुकी है. निखिल पल्सेज ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में पेश कर तुरंत सुनवाई की मांग की. जिस पर हाईकोर्ट में 26 मई को केस सूचीबद्ध किया गया. एएसजी आर डी रस्तोगी ने हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में 15 मई के आदेश के खिलाफ रिकॉल पीटीशन की सूचना दी. लेकिन कोर्ट ने फाइनल सुनवाई के लिए 3 जून की तारीख तय कर दी. 

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जब सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने संभाला मोर्चा:
सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बैंच के 15 मई के आदेश के बाद केन्द्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुरे मामले केा सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता को सौंप दिया. तुषार मेहता ने राजस्थान के एएजसी आर डी रस्तोगी सहित केस से जुड़े अन्य अधिवक्ताओं से तथ्य जुटाकर सुप्रीम कोर्ट के ओदश के खिलाफ रिकॉल के लिए पीटीशन दायर की. 3 जून को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई से एक दिन पूर्व ही सॉलिस्टर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट मे अर्जेंट मेंशनिंग कर मामले की सुनवाई की गुहार लगायी. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए अर्जेंट मेंशनिंग की. राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए बुधवार को सभी 81 याचिकाए सुचीबद्ध थी लेकिन मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ की नॉन सिटिंग के चलते मामले की सुनवाई टल गयी. वहीं दूसरी तरफ सॉलिस्टर जनरल द्वारा किये गसये मेंशनिग पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई हुई. जस्टिस खानविलकर की तीन सदस्य बैंच ने अर्जेंट सुनवाई करते हुए इन सभी याचिकाओं में हाईकोर्ट द्वारार अग्रिम सुनवाई पर रोक लगा दी गयी. जिसके बाद गुरूवार को इन याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट में अब सुनवाई नहीं हो सकती. सुप्रीम कोर्ट में अब तक इस मामले में केन्द्र सरकार की ओर से पेश होने वाले एएसजी अमन लेखी को केस से अलग कर दिया गया है. केन्द्र सरकार की ओर से दायर की गयी रिकॉल पीटीशन पर अब सुप्रीम कोर्ट 5 जून को सुनवाई करेगी. 

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संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन में बोले पीएम मोदी, वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में UN कहां है?

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नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए क​हा कि भारत को इस बात का बहुत गर्व है कि वो संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक देशों में से एक है. आज के इस ऐतिहासिक मौके पर मैं आप सभी के सामने भारत के 130 करोड़ लोगों की भावनाएं इस वैश्विक मंच पर साझा करने आया हूं.पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है?

संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता:
पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं. अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं. ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए. कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियां बहती रहीं. इन युद्धों और हमलों में, जो मारे गए वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे. लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़ कर चले गए. उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे? 

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पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र से किया सवाल?:
पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है.इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहां है? एक प्रभावशाली Response कहां है? पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोग UN के रिफॉर्म्स को लेकर जो प्रोसेस चल रहा है, उसके पूरा होने का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रोसेस कभी logical end तक पहुंच पाएगा. कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के decision making structures से अलग रखा जाएगा.

फार्मा इंडस्ट्री ने भेजी 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां:
पीएम मोदी ने कहा कि भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो वो किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होती. भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है, तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती. हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते.भारत ने हमेशा पूरी मानव जाति के हित के बारे में सोचा है, न कि अपने निहित स्वार्थों के बारे में, भारत की नीतियां हमेशा से इसी दर्शन से प्रेरित रही हैं. महामारी के इस मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां भेजीं हैं. विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर आज मैं वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूं. भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डिलीवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी.

BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान, राजस्थान से 4 नामों को मिली टीम में जगह, वसुंधरा राजे को बनाया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की नई टीम का ऐलान हो गया है. जेपी नड्डा ने बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है. इस टीम में 12 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 8 राष्ट्रीय महामंत्री, एक संगठन महामंत्री, 3 राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री, 13 राष्ट्रीय महामंत्री, कोषाध्यक्ष, सह कोषाध्यक्ष, केंद्रीय कार्यालय सचिव, आईटी-सोशल मीडिया प्रभारी, युवा मोर्चा अध्यक्ष, ओबीसी मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्षों, 23 राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए है. बीजेपी की ओर से  नामों की सूची जारी की गई हैं.

राजस्थान से मिली 4 नामों को नई टीम में जगह:
राजस्थान से चार नामों को इस सूची में जगह मिली है. आपको बता दें कि वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव को राष्ट्रीय महामंत्री का जिम्मा सौंपा गया है. जबकि अल्का गुर्जर को नड्डा की टीम में राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है. वहीं सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है.  

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तेजस्वी सूर्या को युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष:
जेपी नड्डा की नई टीम में राजेश अग्रवाल को कोषाध्यक्ष, महेंद्र पांडेय को केंद्रीय कार्यालय सचिव, अमित मालवीय को प्रभारी राष्ट्रीय IT, सोशल मीडिया, तेजस्वी सूर्या को युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. के लक्ष्मण को ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजकुमार चाहर को किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, लालसिंह आर्य को अनुसूचित जाति मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, समीर ओरांव को अनुसूचित जनजाति मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, जमाल सिद्दिकी को अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, संबित पात्रा,सुधांशु त्रिवेदी,शाहनवाज हुसैन को बनाया राष्ट्रीय प्रवक्ता, अनिल बलूनी को मुख्य प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी, संजय मयूख को बनाया मीडिया सह प्रभारी बनाया गया हैं.

Coronavirus in india: देश में कोरोना के मामले 59 लाख के पार, 24 घंटे में 85,362 नए कोरोना मरीज आए

Coronavirus in india: देश में कोरोना के मामले 59 लाख के पार, 24 घंटे में 85,362 नए कोरोना मरीज आए

नई दिल्ली: भारत में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 85,362 नए मामले रिपोर्ट किए गए. वहीं, इस दौरान 1,089 लोगों की इस खतरनाक वायरस के चलते मौत हुई है. ऐसे में अब देश में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 59,03,933 हो गई है. इनमें से 93,379 लोगों की मौत हो चुकी है. एक्टिव केस की संख्या घटकर 9 लाख 60 हजार हो गई और 48 लाख 49 हजार लोग ठीक हो चुके हैं.

पिछले 24 घंटे के अंदर 13,41,535 कोरोना जांच की गई:  
आईसीएमआर के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे के अंदर 13,41,535 कोरोना जांच की गई है. इसके साथ ही अभी तक 7,02,69,975 लोगों की कोरोना जांच की जा चुकी है. आईसीएमआर ने कहा है कि कोरोना जांच से मरीजों का पता लगाना आसान हो जाता है और वह जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं.

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देश में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में:
देश में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. यहां कोविड-19 के एक दिन में 17,794 नये मामले सामने आने से राज्य में संक्रमितों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 13,00,757 हो गई. वहीं एक दिन में 416 और मरीजों की संक्रमण से मौत हो जाने से राज्य में मृतक संख्या बढ़कर 34,761 हो गई.  


 

ड्रग्स मामले में आज दीपिका, सारा और श्रद्धा से पूछताछ करेगी एनसीबी

ड्रग्स मामले में आज दीपिका, सारा और श्रद्धा से पूछताछ करेगी एनसीबी

मुंबई: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में सामने आए ड्रग्स एंगल के जुड़ते ही बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे रडार पर हैं. आज इस केस में दीपिका पादुकोण को एनसीबी ने पूछताछ के लिए बुलाया है. दीपिका के साथ साथ उनकी मैनेजर करिश्मा प्रकाश को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

दीपिका-करिश्मा को आमने-सामने बैठाकर होगी पूछताछ:  
सूत्रों के मुताबिक दीपिका पादुकोण और करिश्मा को आज आमने सामने बैठाकर एनसीबी पूछताछ करेगी. सूत्रों के मुताबिक करिश्मा ने 2017 की व्हाट्सएप चैट की बात कबूल की है, लेकिन खुद ड्रग्स की बात पर मुकर गई कहा मैं सिर्फ सिगरेट पीती हूँ. उन्होंने बताया कि दीपिका हेल्थ को लेकर बहुत सजग है उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं ली.

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सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से भी होगी पूछताछ:
वहीं एक्ट्रेस सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से भी आज एनसीबी पूछताछ करेगी. एनसीबी ने सारा और श्रद्धा को सुबह 10.30 बजे बुलाया है. दोनों एक्ट्रेस से ड्रग्स कनेक्शन को लेकर पूछताछ की जाएगी. सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के बारे में सुशांत के फॉर्महाउस के पूर्व मैनेजर, बोटमैन और ड्राइवर तीनों ने नाम का खुलासा किया था. इन पर भी ड्रग्स लेने का आरोप है. पहले मुंबई की एनसीबी पूछताछ करेगी और उसके बाद दिल्ली की एसआईटी इनसे पूछताछ करेगी. 

शुक्रवार को रकुल और करिश्मा से हुई थी पूछताछ:
इससे पहले शुक्रवार को एनसीबी ने रकुल और करिश्मा को पूछताछ के लिए बुलाया था. एनसीबी के अधिकारियों ने रकुल से करीब चार घंटे की पूछताछ की. करिश्मा से 6 घंटे पूछताछ हुई. सूत्रों का कहना है कि रकुल ने 2018 में रिया के साथ ड्रग चैट की बात स्वीकार की है. रकुल ने कहा कि इस बातचीत में रिया सामान (ड्रग) मंगवा रही थीं. उनका सामान मेरे घर पर था. जबकि, करिश्मा ने माना, जिस व्हाट्सएप ग्रुप में हैश ड्रग को लेकर बातचीत हुई, उसकी एडमिन दीपिका थीं. ग्रुप में जया साहा भी थीं. 

कृषि अध्यादेशों को लेकर सीएम गहलोत ने केंद्र को घेरा, कहा-किसानों को बर्बाद करने पर तुली है मोदी सरकार

कृषि अध्यादेशों को लेकर सीएम गहलोत ने केंद्र को घेरा, कहा-किसानों को बर्बाद करने पर तुली है मोदी सरकार

जयपुर: किसान की लड़ाई कौरव-पांडव के बीच की लड़ाई है, कौरव है मोदी सरकार, वहीं पांडव है किसान. कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कांग्रेस ने कुछ यूं बोला मोदी सरकार पर हमला. पीसीसी में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जो हालात एनडीए सरकार में बने उससे देश का किसान सड़कों पर है, मीडिया दबाव में है और लोकतंत्र खतरे में है. रणदीप सिंह सुरजेवाला ने तीन काले कानूनों को देश के संघीय ढांचे पर हमला करार दिया. पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि किसान को कमजोर करने का प्रयास कर रही है केन्द्र सरकार. 

कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई का बजा दिया बिगुल:
कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजा दिया है. इसकी शुरूआत देश भर में कांग्रेस ने सभी राज्यों में मीडिया से मुखातिब होकर की. कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कांग्रेस नेविरोध पखवाडा मना  रही है. विरोध पखवाड़े के तहत आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेसवार्ता हुई. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा,छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव, पंजाब के सांसद सरदार अमर सिंह  ने अध्यादेशों की खामियां गिनाई. कांग्रेस जन घोषणा पत्र समिति के चैयरमेन ताम्रध्वज साहू ,कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेडा और मंत्री हरीश चौधरी ,प्रताप सिंह खाचरियावास की मौजूदगी रही.  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज पूरे देश का किसान उन तीनों कृषि बिलों के चलते सड़कों पर है, लेकिन केंद्र सरकार जिस तरह से बेशर्मी से फैसले ले रही हैं, देश में वह सब के सामने है. देश में आज लोकतंत्र खतरे में हैं.

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देश में फासिस्ट वादियों की सरकार:
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जब से केंद्र में एनडीए सरकार आई है तब से चाहे नोटबंदी हो, जीएसटी हो या लॉकडाउन का फैसला हो और अब किसानों के यह तीन बिल लाने की बात हो, एक तरफा बिना किसी से बात किए हुए यह निर्णय लिए जा रहे हैं. बगैर किसानों के संगठनों से बात किए और व्यापारियों से बात किए जो 40 साल पुराना कानून बदला गया और जिस मंडी को विकसित होने में 40 से 50 साल लगे, उनको एक-एक करके उखाड़ फेंकने का निर्णय लिये जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में फासिस्टवादियों की सरकार है. हाउस में ना तो रेजोल्यूशन आने दिया गया और बिना चर्चा के यह बिल पास कर दिया गया. इसी के चलते सभी विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से बात की है कि वह इस पर हस्ताक्षर नही करें, यही कारण है कि इतना बड़ा आंदोलन शुरू हुआ है.

ये जंग कौरव और पांडवों के बीच की:
सीएम ने कहा कि आज बॉर्डर पर चाइना की स्थिति, इकॉनामी  स्लोडाउन हो रहा है, राज्यों के साथ जीएसटी के वादे लिखित में समझौते हुए थे, लेकिन केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ लिखित समझौतों को नहीं मान रही है तो फिर कल को अगर किसान और व्यापारी के बीच में अगर कोई विवाद हुआ तो फिर उसे कैसे निपटाया जाएगा. बहुत बड़ी बर्बादी के लक्षण दिख रहे हैं.रणदीप सिंह सुरजेवाला ने किसानों के मसले पर सीधे शब्दों में कहा कि ये जंग कौरव और पांडवों के बीच की है मोदी सरकार कौरव है और किसान है पांडव. सीएम गहलोत ने कहा कि किसान समझदार है और वह जानता है कि उसके हित किस रूप में सुरक्षित रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब जब विरोध हो रहा है तो केंद्र सरकार डिफेंस में आकर एमएसपी की बात कर रही है, लेकिन जो कानून बना है उसमें एमएसपी का क्यों इस्तेमाल नहीं किया गया,  जिस रूप में यह तीनों बिल पास किए गए हैं, उसमें किसी की बात नहीं सुनी गई. पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डेटासरा ने जमकर प्रहार किए. 
 
केन्द्र सरकार MSP, सरकारी खरीद ,मंडियां खत्म करने पर तुली:
टीएस सिंह देव ने कहा क्या कल्पना कर सकते है देश की सरकार औणे पौणे दामों पर खरीद की छूट दे रही ! यह राज्यों के अधिकारों को लेकर प्रजातांत्रिक फासिस्ट वाद का उदाहरण है. सांसद सरदार अमर सिंह ने कहा कि ये सब इंटरनेशनल एंजेडा है वर्ल्ड बैंक और डब्ल टी ओ चाहते एफ सी आई बंद हो कॉरपोरेट के हाथों में सब कुछ रहे.सुरजेवाला ने एक रिपोर्ट भी प्रेसवार्ता में दिखाई इसके तहत जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के सी एम थे तब उन्होंने भारत सरकार को एक रिपोर्ट दी थी जिसके तहत कृषि कानूनों में एम एस पी लिखा होना अनिवार्य होना चाहिए. कांग्रेस का आरोप है जबकि आज यहीं केन्द्र सरकार MSP , सरकारी खरीद ,मंडियां खत्म करने पर तुली है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

Bihar Election 2020: बिहार में तीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव, 10 नवंबर को आएंगे नतीजे

Bihar Election 2020:  बिहार में तीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव, 10 नवंबर को आएंगे नतीजे

नई दिल्ली: चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. बिहार की 243 विधानसभा सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को तो दूसरे चरण में 94 सीटों के लिए 3 नवंर को मतदान होगा. वहीं तीसरे चरण में 78 सीटों पर पर 7 नवंबर को मतदान होगा. उसके बाद 10 नवंबर को बिहार चुनाव के नतीजे आएंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोरोना संकट की वजह से दुनिया के 70 देशों में चुनावों को टाल दिया गया. कोरोना संकट के बीच बिहार और उपचुनावों को लेकर लगातार मंथन किया गया. बिहार चुनाव देश के सबसे बड़े राज्यों में है और ये चुनाव कोरोना काल का सबसे बड़ा चुनाव है. राज्य में 29 नवंबर तक विधानसभा का कार्यकाल है. 

इस बार एक बूथ पर सिर्फ एक हजार ही मतदाता होंगे: 
इस बार एक बूथ पर सिर्फ एक हजार ही मतदाता होंगे. इस बार चुनाव में 6 लाख पीपीई किट राज्य चुनाव आयोग को दी जाएंगी, 46 लाख मास्क का इस्तेमाल भी होगा. सात लाख हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही 6 लाख फेस शील्ड को उपयोग में लाया जाएगा. इस बार पोलिंग स्टेशन की संख्या और मैनपावर को बढ़ाया गया है. बिहार में 2020 के चुनाव में सात करोड़ से अधिक वोटर मतदान करेंगे. इस बार वोट डालने के लिए एक घंटा अधिक वक्त रखा गया है, सुबह सात से शाम 6 बजे तक मतदान होगा. लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ऐसा नहीं होगा. मतदान के अंतिम समय में कोरोना पीड़ित अपना वोट डाल सकेंगे, जिनके लिए अलग व्यवस्था होगी.

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चुनाव टाले जाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार:
इससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विधानसभा चुनाव टाले जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया है. याचिकाकर्ता ने राज्य में कोरोना के चलते बिगड़े हालात का हवाला दिया था. कोर्ट ने कहा कि हम पहले ही साफ कर चुके है कि चुनाव आयोग हालात के मुताबिक सभी चीजों को ध्यान में रखकर फैसला लेने में समर्थ है.

243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा: 
बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा. 2015 में राजद और जदयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था. जिसके कारण बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था. तब राजद, जदयू, कांग्रेस महागठबंधन ने 178 सीटों पर बंपर जीत हासिल की थी. राजद को 80, जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं थीं. जबकि एनडीए को 58 सीटें हीं मिली. हालांकि लालू यादव की पार्टी राजद के साथ खटपट होने के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार चलाना शुरू किया.


 

पीएम मोदी बोले- आजादी के कई साल बाद तक किसानों के नाम पर कई नारे लगे, लेकिन उनके नारे खोखले थे

पीएम मोदी बोले- आजादी के कई साल बाद तक किसानों के नाम पर कई नारे लगे, लेकिन उनके नारे खोखले थे

नई दिल्ली: भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 104वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे. पीएम मोदी ने कहा कि आज जब देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक-एक देशवासी अथक परिश्रम कर रहा है तब गरीबों को, दलितों, वंचितों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, आदिवासी, मजदूरों को उनका हक देने का बहुत ऐतिहासिक काम हुआ है.

लोगों के जीवन में सरकार जितना कम दखल देगी, उतना बेहतर होगा: 
वहीं कृषि बिल पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते दिनों में हमारी सरकार ने युवा और किसानों के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. पीएम बोले कि लोगों के जीवन में सरकार जितना कम दखल देगी, उतना बेहतर होगा. आजादी के कई साल बाद तक किसानों के नाम पर कई नारे लगे, लेकिन उनके नारे खोखले थे. उन्होंने कहा कि कृषि बिल से छोटे किसानों को सबसे अधिक फायदा होगा. पीएम ने कहा कि अब किसान की मर्जी है कि वो कहीं पर भी फसल बेचे, जहां पर किसान को अधिक दाम मिलेगा वो वहां बेच सकेगा. बीजेपी के कार्यकर्ताओं को आसान भाषा में किसानों को समझाना होगा. 

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फेसलेस टैक्स सिस्टम कुछ महीने पहले ही टैक्स रिजीम का हिस्सा हो चुका:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज से ही देश के ईमानदार करदाताओं के हितों को सुरक्षा देने वाला, फेसलेस अपील का प्रावधान, भारत की टैक्स व्यवस्था से जुड़ने वाला है.  ईमानदार करदाताओं को परेशानी ना हो, इसके लिए फेसलेस टैक्स सिस्टम कुछ महीने पहले ही टैक्स रिजीम का हिस्सा हो चुका है.  

दीनदयाल जी का योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला:
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में, भारत को बेहतर बनाने के लिए दीनदयाल जी ने जो योगदान दिया है, वो पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला है. ये दीनदयाल जी ही थे जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति और समाजनीति, इन तीनों को भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात मुखरता से कही थी, लिखी थी. 

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

नई दिल्ली: किसानों को लेकर हाल ही में संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध में आज किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है. इसमें 31 संगठन शामिल हो रहे हैं. किसान संगठनों को कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, AAP, TMC समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है. हालांकि आंदोलन का ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में दिख रहा है. इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरुआत हो गई है. किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द:
रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द और पांच को गंतव्य से पहले रोक दिया है. वहीं, हरियाणा में किसानों-आढ़तियों ने राजमार्ग जाम करने की भी चेतावनी दी है. उधर, यूपी में भी सपा ने किसान कर्फ्यू और जाम का आह्वान किया है. 

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बिहार के हाजीपुर में भी खास असर:
कृषि बिल के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का सबसे खास असर बिहार के हाजीपुर में देखने को मिल रहा है. गांधी सेतु के निकट NH 19 पर जाम लगाया गया है. सुबह से ही पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के समर्थक सड़क पर डटे हैं. बंद समर्थकों ने NH 19 को बंद करा दिया है. सड़कों पर टायर जला कर नारेबाजी की जा रही है. 

दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया: 
वहीं भारत बंद के चलते दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया है. किसानों के विरोध के चलते ट्रेन के पहिये भी थमे हैं. पंजाब सरकार ने यह हिदायत भी दी है कि पंजाब बंद के दौरान किसानों के प्रति नरम रवैया अपनाया जाए और उन पर कोई सख्त जबरदस्ती न की जाए.

इन विधेयकों का हो रहा विरोध: 
केंद्र सरकार ने हाल ही में कृषि सुधारों से जुड़े तीन बिल संसद से पास कराए हैं. ये हैं कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) बिल-2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता बिल-2020 और कृषि सेवा विधेयक-2020। किसानों को आशंका है कि संसद से पारित बिल के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का रास्ता खुल जाएगा और उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर रहना पड़ेगा.