VIDEO: राजस्थान विधानसभा चुनाव में टिकट की खरीद फरोख्त! हाईकोर्ट ने दिये सीबीआई जांच के आदेश

Nizam Kantaliya Published Date 2019/11/02 08:11

जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में जयपुर से टिकट दिलवाने के नाम पर समाजवादी पार्टी की यूथ विंग के तत्कालीन उपाध्यक्ष ने 58 लाख रुपए लेने स्वीकार किया है. जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आए इस मामले को गंभीर मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौपने के आदेश दिये है. जस्टिस महेन्द्र महेश्वरी ने यह आदेश अनूप चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये है. 

खरीद फरोख्त के दूसरे मामलों का भी पता लगाने के निर्देश दिये: 
अदालत ने सीबीआई निदेशक को जनहित में इस मामले की जांच के अलावा टिकटों की खरीद फरोख्त के दूसरे मामलों का भी पता लगाने के निर्देश दिये है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इस केस में राजस्थान और दिल्ली की पुलिस में शिकायते हुई है और दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर है. ऐसे में जनहित में इस केस की जांच सीबीआई को सौपना ही उचित होगा. हाईकोर्ट ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को आदेश दिये है कि इस मामले की पुलिस जांच तुरंत रोक दे और इस केस की संपूर्ण फाइल सीबीआई डायरेक्टर सुपूर्द करे. इसके साथ ही सीबीआई डायरेक्टर को आदेश दिये है कि इस मामले में सीबीआई केस दर्ज कर 15 नवंबर को जांच अधिकारी केस डायरी के साथ हाईकोर्ट में पेश हो. इस दौरान मामले में आरोपी और याचिकाकर्ता अनुप चौधरी को गिरफतार नही करने के भी निर्देश दिये है. 

ये है मामला: 
वर्ष 2018 में राकेश खंडेलवाल ने इस्तगासे के जरिए श्याम नगर थाने में दर्ज कार्रवाही रिपोर्ट में गाजियाबाद निवासी अनूप चौधरी पर 25 करोड़ रुपए का ऋण दिलवाने के लिए 58 लाख रुपए लेने के आरोप लगाए. इस संबंध में चौधरी ने उसके साथ एक एग्रीमेंट भी किया था लेकिन, चौधरी ने ना तो 25 करोड़ का लोन दिलवाया ना ही 58 लाख रुपए लौटाए हैं. दर्ज परिवाद में डीजे कोर्ट ने अनूप चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी तो उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुप चौधरी ने कहा कि उसने राकेश खंडेलवाल से 58 लाख रुपए समाजवादी पार्टी की सदस्यता और 2018 में राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में जयपुर से टिकट दिलवाने को लिए थे. लोन दिलवाने के एग्रीमेंट पर खंडेवाल ने जबरन उससे दिल्ली में दस्तख्त करवाए थे. इस संबंध में उसने दिल्ली पुलिस में शिकायत भी कर रखी है और दिल्ली हाईकोर्ट में सुरक्षा दिलवाने के लिए याचिका भी दायर कर रखी है जो अभी लंबित है. 

पुलिस की जांच से हाईकोर्ट नाराज: 
जस्टिस महेन्द्र महेश्वरी ने माना है कि जयपुर में पुलिस जानबूझकर एक तरफा जांच कर रही है और पुलिस ने जांच में चौधरी की दिल्ली पुलिस में की गई शिकायत को ध्यान में नहीं रखा है. केस डायरी और बैंक स्टेटमेंट से राशि देना साबित है लेकिन निष्पक्ष अनुसंधान नहीं हो रहा है. चौधरी ने शिकायतकर्ता से समाजवादी पार्टी का टिकट दिलवाने व सदस्य बनाने को लिए थे और मामला दो राज्यों के बीच का है इसलिए सीबीआई से जांच करवाना ही उचित है. अदालत ने सीबीआई निदेशक को कहा है कि जनहित में यह भी देखना जरुरी है कि क्या विधानसभा चुनाव में टिकट की खरीद फरोख्त का का दायरा प्रार्थी और शिकायतकर्ता तक ही सीमित है या अन्य व्यक्तियों के साथ भी लेनदेन हुआ है या नहीं. 

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