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VIDEO: राजस्थान विधानसभा चुनाव में टिकट की खरीद फरोख्त! हाईकोर्ट ने दिये सीबीआई जांच के आदेश

VIDEO: राजस्थान विधानसभा चुनाव में टिकट की खरीद फरोख्त! हाईकोर्ट ने दिये सीबीआई जांच के आदेश

जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में जयपुर से टिकट दिलवाने के नाम पर समाजवादी पार्टी की यूथ विंग के तत्कालीन उपाध्यक्ष ने 58 लाख रुपए लेने स्वीकार किया है. जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आए इस मामले को गंभीर मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौपने के आदेश दिये है. जस्टिस महेन्द्र महेश्वरी ने यह आदेश अनूप चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये है. 

खरीद फरोख्त के दूसरे मामलों का भी पता लगाने के निर्देश दिये: 
अदालत ने सीबीआई निदेशक को जनहित में इस मामले की जांच के अलावा टिकटों की खरीद फरोख्त के दूसरे मामलों का भी पता लगाने के निर्देश दिये है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इस केस में राजस्थान और दिल्ली की पुलिस में शिकायते हुई है और दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर है. ऐसे में जनहित में इस केस की जांच सीबीआई को सौपना ही उचित होगा. हाईकोर्ट ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को आदेश दिये है कि इस मामले की पुलिस जांच तुरंत रोक दे और इस केस की संपूर्ण फाइल सीबीआई डायरेक्टर सुपूर्द करे. इसके साथ ही सीबीआई डायरेक्टर को आदेश दिये है कि इस मामले में सीबीआई केस दर्ज कर 15 नवंबर को जांच अधिकारी केस डायरी के साथ हाईकोर्ट में पेश हो. इस दौरान मामले में आरोपी और याचिकाकर्ता अनुप चौधरी को गिरफतार नही करने के भी निर्देश दिये है. 

ये है मामला: 
वर्ष 2018 में राकेश खंडेलवाल ने इस्तगासे के जरिए श्याम नगर थाने में दर्ज कार्रवाही रिपोर्ट में गाजियाबाद निवासी अनूप चौधरी पर 25 करोड़ रुपए का ऋण दिलवाने के लिए 58 लाख रुपए लेने के आरोप लगाए. इस संबंध में चौधरी ने उसके साथ एक एग्रीमेंट भी किया था लेकिन, चौधरी ने ना तो 25 करोड़ का लोन दिलवाया ना ही 58 लाख रुपए लौटाए हैं. दर्ज परिवाद में डीजे कोर्ट ने अनूप चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी तो उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुप चौधरी ने कहा कि उसने राकेश खंडेलवाल से 58 लाख रुपए समाजवादी पार्टी की सदस्यता और 2018 में राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में जयपुर से टिकट दिलवाने को लिए थे. लोन दिलवाने के एग्रीमेंट पर खंडेवाल ने जबरन उससे दिल्ली में दस्तख्त करवाए थे. इस संबंध में उसने दिल्ली पुलिस में शिकायत भी कर रखी है और दिल्ली हाईकोर्ट में सुरक्षा दिलवाने के लिए याचिका भी दायर कर रखी है जो अभी लंबित है. 

पुलिस की जांच से हाईकोर्ट नाराज: 
जस्टिस महेन्द्र महेश्वरी ने माना है कि जयपुर में पुलिस जानबूझकर एक तरफा जांच कर रही है और पुलिस ने जांच में चौधरी की दिल्ली पुलिस में की गई शिकायत को ध्यान में नहीं रखा है. केस डायरी और बैंक स्टेटमेंट से राशि देना साबित है लेकिन निष्पक्ष अनुसंधान नहीं हो रहा है. चौधरी ने शिकायतकर्ता से समाजवादी पार्टी का टिकट दिलवाने व सदस्य बनाने को लिए थे और मामला दो राज्यों के बीच का है इसलिए सीबीआई से जांच करवाना ही उचित है. अदालत ने सीबीआई निदेशक को कहा है कि जनहित में यह भी देखना जरुरी है कि क्या विधानसभा चुनाव में टिकट की खरीद फरोख्त का का दायरा प्रार्थी और शिकायतकर्ता तक ही सीमित है या अन्य व्यक्तियों के साथ भी लेनदेन हुआ है या नहीं. 

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जयपुर: मुख्यमंत्री आवस से बड़ी खबर निकल कर आई है. जयपुर के विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की है. इस दौरान विधायकों ने बिजली के बिल माफ करने की मांग की. मंत्री प्रताप सिंह, मुख्य सचेतक महेश जोशी, रफीक खान, गंगादेवी, वेद सोलंकी व लक्ष्मण मीणा ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि सरकार गरीबों व मध्यम वर्ग को राहत दें. 

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स्कूल-कॉलेजों की परीक्षा नहीं कराने की भी बात रखीं:  
विधायकों ने अब तक के बकाया बिल को दो-तीन किश्त में एडजस्ट कराने की मांग की. इसके साथ ही विधायकों ने स्कूल-कॉलेजों की परीक्षा नहीं कराने की भी बात रखीं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार कोरोना फैल रहा है. ऐसे में बिना परीक्षा अगली क्लास में प्रमोट किया जाएग. इसके साथ ही स्कूल फीस में भी रियायत देने के प्रयास करने की मांग की. 

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भोपाल: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के मंत्रिमंडल का आज विस्तार हो गया है. मध्य प्रदेश की राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) आनंदी बेन पटेल ने राजभवन में मंत्रियों को शपथ दिलाई. कुल 28 नए मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें 20 कैबिनेट मंत्री और आठ राज्यमंत्री हैं. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिरने के बाद जब शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब कुछ ही मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था.

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इन नेताओं ने ली शपथ: 
मंत्रिमंडल में आज गोपाल भार्गव, यशोधरा राजे सिंधिया, जगदीश देवड़ा, बिसाहूलाल सिंह, विश्वास सारंग, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभुराम चौधरी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रेमसिंह पटेल ओमप्रकाश सकलेचा, उषा ठाकुर, अरविंद भदौरिया, मोहन यादव, हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, भारत सिंह कुशवाहा, रामकिशोर कांवरे, इंदर सिंह परमार, रामखेलावन पटेल, रामकिशोर कांवरे, बृजेंद्र सिंह यादव, रामकिशोर कांवरे, बृजेंद्र सिंह यादव, गिरिराज दंडोतिया, सुरेश राठखेड़ा, ओपीएस भदौरिया, विजय शाह और एंदल सिंह कसाना ने शपथ ली. 

ये पहले से ही हैं मंत्री:
नरोत्तम मिश्रा, तुलसीराम सिलावट, कमल पटेल, गोविंद सिंह राजपूत और मीना सिंह 23 मार्च को ही शपथ ले चुके. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की छाप देखने को मिली:
मंत्रिमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की छाप देखने को मिली. शपथ ग्रहण में खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे. कैबिनेट विस्तार से पहले शिवराज ने दिल्ली आकर शीर्ष नेतृत्व के साथ मंथन किया था. 

शिवराज चौहान ने 23 मार्च को ली थी शपथ:
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक छह मंत्रियों समेत 22 विधायकों के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद 20 मार्च को कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा था और 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार गिर गई थी. शिवराज चौहान ने इस साल 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. 

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मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य:
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं. इस लिहाज से अधिकतम 35 विधायक मंत्री बनाए जा सकते हैं. जब शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब कैबिनेट में सिर्फ 6 मंत्री ही शामिल हुए थे.

बंगला खाली करने के नोटिस के बाद लखनऊ शिफ्ट होंगी प्रियंका गांधी, हो चुकी व्यवस्था !

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लखनऊ: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के दिल्ली में लोधी एस्टेट स्थित बंगला खाली करने के नोटिस के बाद अब वे दिल्ली के बजाए लखनऊ का रुख करने के मूड में हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उनके लिए यहां एक शानदार बंगले की व्यवस्था भी हो चुकी है. प्रियंका लखनऊ में कौल हाउस में शिफ्ट होने की तैयारी में है. कौल हाउस इंदिरा गांधी की मामी शीला कौल का है.

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बेहद सधी हुई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा ये कदम: 
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रयंका गांधी वाड्रा अब यूपी की राजधानी लखनऊ में अपना बेस बनाने की तैयारी में हैं. प्रियंका पार्टी की महासचिव होने के साथ साथ यूपी की इंचार्ज भी हैं. लिहाजा उनका ये कदम बेहद सधी हुई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. ऐसे में लखनऊ शिफ्ट होना राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. महासचिव बनाए जाने के बाद से प्रियंका लगातार यूपी में ज्यादा सक्रिय रही हैं. 

प्रियंका यूपी में और ज्यादा नजर आएंगी:
जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा का दिल्ली से लखनऊ शिफ्ट होना चुनावी तैयारी के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. इस तरह आने वाले दिनों में प्रियंका यूपी में और ज्यादा नजर आएंगी. अपनी शादी के बाद, इंदिरा गांधी भी अपने पति फ़िरोज़ के साथ लखनऊ आ गईं थी. वे चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एपी सेन रोड के एक बंगले में रहती थीं.

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बंगला एक अगस्त तक खाली करना होगा:
मोदी सरकार ने कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को लोधी एस्टेट स्थित बंगला खाली करने को कहा है. प्रियंका को ये बंगला एक अगस्त तक खाली करना है. SPG सुरक्षा हटने के चलते बंगला खाली करना होगा. इस बाबत मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की ओर से नोटिस जारी किया गया है. प्रियंका गांधी लगभग दो दशक से फैमिली के साथ इसी बंगले में रहती है. 


 

कंफ्यूज हो गया आज पंचर वाला राजू जब नींद से उठा ! ...क्योंकि उसकी कुर्सी पर बैठे थे सतीश पूनिया

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जयपुर: आज पंचर वाला राजू जब नींद से उठा तो उसने एक ऐसा दृश्य देखा की वह कंफ्यूज हो गया. पहले तो उसे लगा कि जैसे वह कोई सपना देख रहा है लेकिन फिर उसने वापस आंखे खोलकर देखी तो वह अंचभित रह गया. दरअसल, हुआ ये कि राजू की नींद खुली तो उसकी कुर्सी पर सतीश पूनियां बैठे थे. पूनिया एक पंचायतीराज से संबंधित वीसी को संबोधित कर रहे थे. राजू पहले तो किंकर्तव्यविमूढ़ हुआ, लेकिन फिर प्रसन्नता में छोटा कूलर चलाते हुए बोला साहब पानी लाऊं ?

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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां को आमेर जाना था: 
यह सब वाकया उस समय घटित हुआ जब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां को आमेर जाना था. इसी दौरान बीच रास्ते में भाजपा कार्यालय से प्रदेश मंत्री मुकेश दाधीच कॉल आया और वीसी से जुडने का निवेदन किया. इस समय पूनिया 14, नंबर विश्वकर्मा के पास अपनी गाड़ी में थे. इस पर पूनिया अपना आईपैड निकाल कर कार्यकर्ताओं को संबोधित करने लगे. 

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...फर्स्ट इंडिया के लिए एश्वर्य प्रधान की रिपोर्ट

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नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमत को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार पेट्रोल-डीज़ल से मुनाफ़ाख़ोरी बंद करे, एक्साइज़ दर तुरंत घटाए और दाम कम करे. इससे पहले आज देश के तमाम हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया और इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इनकी कीमतों को कम करने की भी अपील की गई.      

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महंगे पेट्रोल-डीजल की मार ने देशवासियों का जीना मुश्किल कर दिया:  
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी वीडियो संदेश के जरिए केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा, एक तरफ कोरोना महामारी का कहर और दूसरी तरफ महंगे पेट्रोल-डीजल की मार ने देशवासियों का जीना मुश्किल कर दिया है. आज देश की राजधानी दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 80 रुपये प्रति लीटर को भी पार कर गई हैं.  लॉकडाउन के बाद मोदी सरकार ने 22 बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं.

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सरकार ने टैक्स बढ़ाकर जनता से 18 लाख करोड़ की अतिरिक्त वसूली की: 
निया गांधी का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत गिर रही है, इसका फायदा जनता को देना चाहिए लेकिन सरकार ने टैक्स बढ़ाकर जनता से 18 लाख करोड़ की अतिरिक्त वसूली की. उन्होंने कहा कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने जनता को कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फायदा देने की जगह पेट्रोल/डीजल पर 12 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 18 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त वसूली की. सोनिया ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी ये है कि वो मुश्किल समय में देशवासियों का सहारा बने न कि उनकी मुसीबत का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करे.

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जयपुर: देश के साथ प्रदेश भर में आज कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि के खिलाफ हल्ला बोल प्रदर्शन किया. इस मौके पर कांग्रेसी नेताओं ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. इसी कड़ी में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. कई जगहों पर कांग्रेसी नेता बैलगाड़ी, ऊंट गाड़ी पर बैठकर प्रदर्शन करते नजर आए, तो कुछ जगहों पर साइकिल और पैदल मार्च भी निकाला गया. 

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जयपुर में यूथ कांग्रेस मुख्यालय पर धरना दिया गया: 
प्रदेश की राजधानी जयपुर में यूथ कांग्रेस मुख्यालय पर धरना दिया गया. इस दौरान डिप्टी सीएम सचिन पायलट, मंत्री डॉ.बीडी कल्ला, परिवहन मंत्री खाचरियावास, रमेश मीणा, महेश जोशी, राज्य मंत्री ममता भूपेश, रफीक खान, ज्योति खंडेलवाल, महेश शर्मा, सीताराम अग्रवाल, सुरेश चौधरी और राजेश चौधरी समेत प्रमुख नेता मौजूद रहे. इस दौरान कई कांग्रेस नेता अनूठे अंदाज में धरना स्थल पर पहुंचे. ममता भूपेश ऊंट गाड़ी में सवार होकर पहुंची तो वहीं प्रताप सिंह खाचरियावास साइकिल पर पहुंचे. इनके अलावा युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मुकेश भाकर पैदल पहुंचे. बगरू विधायक गंगा देवी भी ऊंट गाड़ी पर सवार होकर धरना स्थल पर पहुंची. 

सचिन पायलट ने कहा 70 साल के इतिहास में ऐतिहासिक वृद्धि: 
यूथ कांग्रेस मुख्यालय पर धरना स्थल पर संबोधन करते हुए डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दामों में 70 साल के इतिहास में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है. यह सब तब हुआ जब मांग और दाम दोनों गिर गए. इससे सबसे ज्यादा चोट गरीब और मध्यम वर्ग को लगी है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में ऐसा हाल नहीं है. अमेरिका ने 3 हजार बिलियन डॉलर लोगों के खाते में दिया है, लेकिन केंद्र सरकार का रवैया इसके विपरीत है. हम इस बारे में राष्ट्रपति को पत्र भेज रहे हैं. 

कांग्रेस के अगले धरने-प्रदर्शन होंगे वर्चुअल आधारित:
वहीं डिप्टी CM सचिन पायलट ने संकेत दिए कि कांग्रेस के अगले धरने-प्रदर्शन वर्चुअल आधारित होंगे. सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर यह निर्णय लिया जाएगा. डिप्टी सीएम सचिन पायलट आज धरने-प्रदर्शन के मैनेजमेंट से निराश नजर आ रहे थे. इसको लेकर उन्होंने कहा कि मैंने सोशल डिस्टेंसिंग के प्रयास किए लेकिन कार्यकर्रताओं का जोश अधिक था. 

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा:
गौरतल है कि लॉकडाउन के दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. देशभर के साथ प्रदेशबर में 7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू हुआ जो आज 29 जून तक जारी है. इस अवधि में पिछले 23 दिन में पेट्रोल जहां 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है वहीं डीजल की कीमतों में भी 10.94 रुपए की वृद्धि हुई है. पेट्रोल के दाम 87.59 रुपए के स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल के दाम में भी 81.34 रुपए का मुकाम हासिल किया है. इसका सीधा मतलब है कि भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में जहां लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, वेतन भत्तों में कमी आई है उस दौर में पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ाकर आम आदमी की मानों कमर तोड़ दी गई है. 


 

वर्चुअल रैली में बोले नितिन गडकरी, कहा-कांग्रेस राज में 55 साल में जो नहीं हुआ हमने 6 साल में करके दिखाया है

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जयपुर: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना का संकट पूरे विश्व का है पूरा विश्व ही संकट से ग्रस्त है. कोरोना संकट गहरा है लेकिन संकट से पूरी ताकत से मिलकर जीत हासिल करेंगे. इस वायरस का इलाज वैक्सीन है हमारे देश के वैज्ञानिक भी वैक्सीन बनाने में कोशिश कर रहे हैं. ज्यादा दूर नहीं वो दिन जब जल्द हमारे देश मे वैक्सीन मिलेगी. जब तक टीका हासिल न हो हमे कोरोना से लड़ना है. 

मुगल सल्तनत के खिलाफ राजस्थान के वीरों ने लड़ाई लड़ी:
उन्होंने कहा कि मुगल सल्तनत के खिलाफ राजस्थान के वीरों ने लड़ाई लड़ी.  नितिन गडकरी ने महाराणा प्रताप के बलिदान का जिक्र किया. कहा कि हमारे पूर्वजों ने देश की संस्कृति और इतिहास बचाने के लिए प्राणों की आहुति दी. इतिहास ही हमारी प्रेरणा है. अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारियों को भी याद किया. संकटों का सामना हमने स्वाधीनता के पहले और बाद में भी किया है. छत्रपति शिवाजी के बलिदान का भी  जिक्र किया. उन्होंने सकारात्मकता, आत्मविश्वास और स्ट्रॉन्ग इच्छाशक्ति पर भाजपा कार्यकर्ताओं की सराहना की. बीजेपी सरकार के 6 साल के कार्याकाल को इतिहास गौरवशाली इतिहास है. 55-60 साल तक कांग्रेस पार्टी को शासन करने का मौका मिला.55 साल का कांग्रेस का इतिहास और 6 साल में मोदी के नेतृत्व में भाजपा का इतिहास. कांग्रेस 55 सालों में जो नहीं कर सकी वह भाजपा ने 6 साल में करके दिखाया.

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श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने किया देश की एकता, अखंडता के लिए बलिदान: 
नितिन गडकरी ने कहा कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता, अखंडता के लिए बलिदान किया. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पूरे हिंदुस्तान को एक बनाने का काम किया. लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने केवल कश्मीर के बारे में कहा कि यह मेरे ऊपर छोड़ दो मैं करूंगा. अगर यह काम सरदार पटेल को मिलता तो कश्मीर की समस्या नहीं होती. बाबा साहब अंबेडकर ने 370 को लेकर लिखा था कि 370 भारत के संविधान में टेंपरेरी है. टेंपरेरी कलम जल्दी ही निकालने की बात कही थी. लेकिन कांग्रेस के राज में कभी यह कलम नहीं निकल सका. पीएम मोदी सरकार दूसरी बार आई तो सबसे पहले 370 को हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा किया. 370 क्यों नहीं हटा, क्योंकि कांग्रेस तुष्टीकरण नीति के कारण हिम्मत नहीं कर सकी. तीन बार की लड़ाई में पाकिस्तान हार गया इसलिए हमारे साथ प्रॉक्सी वॉर शुरू की. आतंकवादियों को ट्रेनिंग देकर हिंदुस्तान में भेजा जाता है. मुंबई के बम विस्फोट की घटनाओं का जिक्र किया. आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों की हत्या की, उस इतिहास को हम कभी भूल नहीं सकते है. कांग्रेस की सरकार आतंकवादियों के सामने घुटने टेकने का काम करती थी.

हम विस्तारवाली नहीं है, हम शांति और अहिंसा चाहते हैं:
गडकरी ने कहा कि हम विस्तारवाली नहीं है, हम शांति और अहिंसा चाहते हैं. सामर्थ्यवान और ताकतवर व्यक्ति ही शांति और अहिंसा को स्थापित कर सकता है. दुर्बल व्यक्ति के सत्य अहिंसा के भाषण को कोई नही सुनता है. किसी देश की जमीन को हड़पना नहीं चाहते ना हम किसी की जमीन को लेना चाहते है. नेपाल और भूटान के साथ हम हमेशा खड़े रहे. बांग्लादेश को स्वाधीनता दिलाई लेकिन 1 इंच जमीन अपने पास नहीं रखी. हमारे देश में आतंकवादी पाकिस्तान सरकार के आशीर्वाद से आते हैं. जम्मू कश्मीर में विकास की प्रक्रिया को हमने गतिशील किया है. केवल 60000 करोड़ के रोड टनल और अन्य विकास कार्य मेरे विभाग की ओर से चल रहा है. जम्मू कश्मीर को गरीबी भुखमरी और बेरोजगारी से मुक्ति देना चाहते हम. महिलाओ के स्वयंसेवी करने पर जोर दिया जा रहा है. बारामुला की 2000 महिलाओं को 12 से ₹15000 महीने का काम दिया है. 370 से मुक्ति देकर विकास पर केंद्र सरकार ने फोकस किया है.

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VIDEO: पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अपने ही विभाग की खोली 'जन्मपत्री', मुख्यमंत्री से विभाग में बदलाव की मांगी अनुमति

जयपुर: यूं तो पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह की अपने विभाग के अधिकारियों से अदावत कई बार कई मंचों पर खुलकर सामने आई है लेकिन गुरुवार रात को विश्वेंद्र सिंह विभाग के जन्मपत्री ही खोल कर रख दी. विश्वेंद्र सिंह ट्विटर पर मुख्यमंत्री से विभाग में बदलाव के लिए कठोर फैसले लेने तक की अनुमति ही मांग ली. 

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विश्वेंद्र सिंह न तो अपने विभाग से खुश हैं और ना ही विभाग के अधिकारियों से: 
गहलोत कैबिनेट के वरिष्ठ दम मंत्रियों में से एक विश्वेंद्र सिंह न तो अपने विभाग से खुश हैं और ना ही विभाग के अधिकारियों से. कभी अपने पुत्र अनिरुद्ध को विभाग की मीटिंग में ले जाकर विवाद में आए तो कभी पर्यटन निगम के टेंडर्स को निरस्त करने के लिए मोर्चा खोलने को लेकर लाइमलाइट में रहे. बहरहाल ताजा मामले आगे बढ़ने से पहले गुरुवार देर रात विश्वेंद्र सिंह ने एक के बाद एक 9 ट्वीट किए इन ट्वीट्स को आपके साथ साझा करना जरूरी है. 

एक के बाद एक 9 ट्वीट किए: 
'मैंने बहुत लंबे समय तक, अपने स्वभाव और कार्य नैतिकता के खिलाफ जा कर  बहुत सारी चीजों पर चुप्पी बनाए रखी थी लेकिन मेरे सीएम @ashokgehlot ने हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी की वकालत की है और मैं अब पर्यटन विभाग की कमियों को साझा करने के लिए मजबूर हूं.'

'विभाग के अधिकारी मेरे निरंतर प्रयासों और पहलों के बावजूद उच्च पर्यटन वृद्धि प्राप्त करने और नए उत्पादों को पेश करने के प्रति उदासीन हैं पिछले डेढ़ वर्षों में, विभाग एक नई नीति पेश करने में असमर्थ रहा है'.

'यहाँ नए गाइड्स की कोई भर्ती नहीं हुई है और विभाग को पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार से एक भी स्वदेश दर्शन परियोजना नहीं मिल पाई है'. 'एक भी राज्य पर्यटन परियोजना का उद्घाटन नहीं किया गया है और न ही पर्यटन अधिकारियों की कोई नई भर्ती हुई है दो एमडी बदले जाने के बावजूद, आरटीडीसी की पुनरुद्धार योजना का कोई ठिकाना नहीं'.

'विभाग की वित्तीय स्थिति बेहद चिंतनीय है पर्यटन विभाग के अधिकारियों और पर्यटन उद्योग के हितधारकों के लिए कोई प्रशिक्षण या पुनर्विन्यास नहीं किया गया है'. 'अधिकारी इस बात को लेकर अंधेरे में हैं कि #Covid19 के बाद पर्यटन पुनरुद्धार की दिशा में क्या होना चाहिए और इस संबंध में मेरे प्रयासों के बावजूद, निजी क्षेत्र से हितधारकों की भागीदारी को शामिल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है'.

'पर्यटकों के आगमन के आंकड़े पहले ही गंभीर रूप से गिर चुके हैं और राजस्थान में पर्यटन उद्योग की दुर्दशा लगातार बढ़ रही है फिर भी अधिकारी आंखें मूंदे हैं' यह स्थिति है (पर्यटन विभाग) जो की प्रदेश के सबसे अधिक प्रासंगिक विभागों में से एक है अतएव कुछ  बदलाव लाने  की जरूरत है'.

'अशोक गहलोत जी, मैं राजस्थान में पर्यटन और उससे सम्बंधित उद्योगों में लगे लाखों लोगों के हितों और आजीविका को बचाने के लिए निकट भविष्य में कुछ कठोर लेकिन आवश्यक फैसलों में आपके समर्थन के लिए तत्पर हूं'.

विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा बैठकों में नहीं हो रही शामिल:
पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह इन ट्वीट्स के जरिए जो संदेश सरकार तक पहुंचाना चाह रहे हैं या पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं वह स्पष्ट है. पिछले काफी समय से विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह की बैठकों मैं शामिल नहीं हो रही हैं. कमोबेश यही स्थिति अन्य अधिकारियों की भी है. दरअसल विभाग की बैठक में मंत्री पुत्र के दखल के चलते श्रेया गुहा ने अपने आप को बैठकों से दूर कर लिया था. पिछले दिनों पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के निवास पर हुई बैठक में अभी उनके पुत्र अनिरुद्ध और विभाग के निदेशक डॉ भंवरलाल व अन्य अधिकारियों के बीच तू तू मैं मैं की खबरें भी छन कर बाहर आई.

मंत्री और उनके पुत्र को लेकर मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा:
इसके बाद अधिकारियों ने मुख्य सचिव डीबी गुप्ता से मुलाकात कर मंत्री और उनके पुत्र को लेकर शिकायत की और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा. इससे पहले भी मंत्री विश्वेंद्र सिंह पर्यटन निगम के लाइट एंड साउंड शो से संबंधित टेंडर निरस्त करवा चुके हैं. हालांकि यह बात अलग है कि मंत्री खुद कई बार सार्वजनिक मंच पर कह चुके हैं कि पर्यटन निगम उनके क्षेत्राधिकार में नहीं. बावजूद इसके वह क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर पर्यटन निगम की फाइलें मंगाने से लेकर टेंडर निरस्त करने तक की कार्रवाई करवा चुके हैं. 

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विभाग के अधिकारियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहे:
अब एक बार फिर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अपने ही विभाग के खिलाफ मोर्चा खोला है दरअसल उनके ट्वीट्स से जो मनसा झलक रही है. वह स्पष्ट है कि वह विभाग के अधिकारियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं और बदलाव चाहते हैं. ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर निदेशक तक के अहम पदों पर अपनी पसंद के अफसर चाहते हैं. मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की मोर्चाबंदी को लेकर उन्हें सरकार में किस स्तर पर समर्थन मिलता है यह कहना तो संभव नहीं लेकिन यह जरूर है कि विभाग में किसी भी स्तर पर अब बदलाव जरूरी है ताकि मंत्री अफसरों के बीच की रस्साकशी रुके और कोविड-19 के दौर में दरक चुके पर्यटन ढांचे को एक बार फिर से खड़ा किया जा सके.
 

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