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पुष्कर में गुरु पूर्णिमा का महास्नान करने उमड़ा भक्तों का सैलाब

पुष्कर में गुरु पूर्णिमा का महास्नान करने उमड़ा भक्तों का सैलाब

पुष्कर(अजमेर)। जगत पिता की नगरी तीर्थ गुरु पुष्कर आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूरी तरह से भक्ति के रंग में रंग में रंग गया है। आलम यह है की सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालु भक्तों का सरोवर पर पहुंचना शुरू हो गया है। जो पवित्र सरोवर के किनारे बने बावन घाटो पर बैठकर जल में स्नान कर रहे है। साथ ही पूजा अर्चना कर स्थानीय तीर्थ पुरोहितो को दान पुण्य कर रहे है।

अरावली की पहाडियों से घिरा पवित्र सरोवर के घाटो पर आस्था और विश्वास की डुबकी में गोते लगाता जन सैलाब और अपने घर परिवार की शुख शान्ति के लिए पूजा करते श्रद्धालो का यह नजारा देखते ही बनता है। जगत पिता ब्रम्हा की नगरी पुष्कर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आज देशभर से पहुंचे श्रद्धालु  तीर्थ यात्री सरोवर में स्नान कर पूजा अर्चना कर रहे है । 

आज सुबह ब्रम्ह मुहूर्त शुरू होने के साथ ही देश के कोने कोने से आये श्रद्धालु भक्त सरोवर के प्रमुख घाटों पर पहुंचना शुरू हो गए।  जो कार्तिक पूर्णिमा के इस खास अवसर पर माँ सिर्फ सरोवर के पवित्र जल में स्नान कर आस्था की डुबकी लगा रहे है। धार्मिक मान्यता है की जो भी श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा के दिन ब्रम्ह सरोवर के जल में श्रद्धा पूर्वक स्नान कर विद्वान् पुरोहितो के हाथो पूजा अर्चना करता है तो भगवान् ब्रम्हा जी के आर्शीवाद से उसकी सभी परेशानियां स्वत ही दूर हो जाती है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। यही कारण है की आज सुबह से ही श्रद्धालुओ के घाटों पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। माना जाता है कि सभी तीर्थो का गुरु पुष्करराज है और यही वजह है की यहाँ आज के दिन की मान्यता बढ़ जाती है। 

गुरु पूर्णिमा के दिन पुष्कर में दूर दराज से भी काफी श्रद्धालु आते है और यहाँ जगत गुरु ब्रह्मा जी के दर्शन करके अपने आप को आनंदित महसूस करते है। जो भी श्रद्धालु पुष्कर आते है वे सरोवर पर डुबकी लगाने के बाद जगत पिता ब्रम्हा जी के दर्शन करने उनके मन्दिर जरुर जाते है। यही कारण है की मन्दिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है। 
 

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अजमेर: अज्ञात चोरों ने बीती रात जगतपिता भगवान ब्रह्मा जी की पत्नी और अखंड सौभाग्य दायिनी मां सावित्री के मंदिर को भी निशाना बना दिया. जानकारी के अनुसार चोर सावित्री माता की प्रतिमा पर चढ़ाए गए चांदी के दो मुकुट सहित मंदिर परिसर ने लगे स्टील के दान पात्र को भी उखाड़कर ले गए. घटना का खुलासा होते ही पुजारी परिवार सहित पुष्कर पुलिस भी सकते में आ गई. थाना प्रभारी राजेश मीणा ने चोरी की इस वारदात की सूचना तुरंत अपने उच्चाधिकारियों को दी हिसके बाद अजमेर एस पी कुंवर राष्ट्रदीप भी रोपवे में बैठकर सावित्री माता मंदिर पहुंचे और घटना स्थल का जायजा लिया. 

घटना को पुलिस के आला अधिकारी बेहद गंभीरता से ले रहे:  
रत्नागिरी पहाड़ी की इतनी ऊंची चोटी पर स्थित इस अतिप्राचीन मंदिर को भी चोरों द्वारा निशाना बना लिए जाने की घटना को पुलिस के आला अधिकारी बेहद गंभीरता से ले रहे हैं. यही वजह है कि एस पी के आदेश के बाद फोरेंसिक जांच करने वाली टीम भी मौके पर पहुंच गई है तो वही बाकी पुलिस कर्मी भी घटना स्थल की बारीकी से जांच कर रहे हैं. मंदिर के पुजारी की माने तो यह घटना देर रात्रि के दौरान घटी. चोरी ने मंदिर के पिछवाड़े सीढियां लगाकर उसके जरिये मंदिर में प्रवेश किया. अनुमान के मुताबिक अज्ञात चोर लगभग 400 ग्राम चांदी के मुकुट सहित दानपात्रों में रखे 30 से 40 हजार रुपये चुराकर फरार हो गए है.

पुष्कर पुलिस गहनता से पड़ताल करने में जुटी:
बीते लंबे समय बाद पहाड़ी पर स्थित सावित्री माता मन्दिर में हुई इस चोरी के बाद पुष्कर पुलिस गहनता से पड़ताल करने में जुट गई है तो वही दूसरी और चोरों ने भी ऐसी वारदात को अंजाम देकर कही ना कही पुलिस को भी कड़ी चुनौती देने की हिमाकत तो कर ही दी है. 

नववर्ष को लेकर अजमेर के पुष्कर पहुंचे हजारों देशी विदेशी सैलानी

नववर्ष को लेकर अजमेर के पुष्कर पहुंचे हजारों देशी विदेशी सैलानी

पुष्कर(अजमेर): एक ओर जहां देशभर में नववर्ष को लेकर लोगों में काफी उत्साह है तो वहीं राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर में नववर्ष मनाने के लिए देशी-विदेशी सैलानी दूरदराज से पुष्कर पहुंच चुके हैं और नववर्ष का स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं. 

देशी विदेशी संस्कृति का अनूठा संगम:  
चारों ओर अरावली की पहाड़ियों में बसा पुष्कर राजस्थान में एकमात्र ऐसी जगह है जहां देशी विदेशी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है. हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर पुष्कर में हर साल हजारों की संख्या में विदेशी सैलानी घूमने आते है. इस बार भी नववर्ष मनाने हजारों की संख्या विदेशी मेहमान पुष्कर पहुंचे हैं. पुष्कर में नववर्ष को लेकर विदेशी सैलानियों में खासा उत्साह है और यही वजह है कि प्राकृतिक सौंदर्य के बीच वो नया साल मनाने का इंतजार कर रहे हैं. विदेशी सैलानियों ने बताया कि पुष्कर की हरियाली और राजस्थानी संस्कृति को देखने के लिए हर साल पुष्कर में नया साल मनाने आते हैं. 

नववर्ष को लेकर होटलों में सजावट: 
नववर्ष को लेकर होटल रेस्टोरेंट संचालक यादगार बनाने में जुटे हैं. नववर्ष को लेकर होटलों में विदेशियों ने पहले ही होटल्स की बुकिंग करा दी. पुष्कर स्थित होटल, रिसोर्ट में नववर्ष की पार्टियां आयोजित की जाती है. जिसमे देशी विदेशी सैलानी डीजे की धुनों पर पूरी रात जमकर थिरकते है और नए साल का स्वागत करते हैं. नववर्ष को लेकर होटलों में सजावट की जाती है साथ ही कालबेलिया नृत्य सहित अनेकों आयोजन विदेशी पावणों को लुभाते हैं. वहीं विदेशियों को पुष्कर घुमाने वाले टूरिस्ट गाइड बताते हैं कि हर साल की तरह इस साल भी हजारों की संख्या में विदेशी सैलानी नववर्ष मनाने के लिए पुष्कर पहुंचे हैं और नववर्ष को लेकर काफी उत्साहित है.  

पुष्कर सैलानियों की मेहमान नवाजी के लिए तैयार: 
नववर्ष को लेकर देशभर में उत्साह नजर आ रहा है तो वही पुष्कर भी विदेशी सैलानियों की मेहमान नवाजी के लिए पूरी तरीके से तैयार है. अगर आप भी नववर्ष का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो राजस्थान के पुष्कर चले आइए जहां देशी-विदेशी संस्कृति का मिलन होता है. 

पुष्कर में कार्तिक महास्नान आज, दुर्लभ संयोग में लाखों श्रद्धालु लगा रहे डुबकी

पुष्कर में कार्तिक महास्नान आज, दुर्लभ संयोग में लाखों श्रद्धालु लगा रहे डुबकी

पुष्कर(अजमेर): करोड़ों लोगों के आस्था के केंद्र पुष्कर सरोवर में आज कार्तिक मास की पावन पूर्णिमा के उपलक्ष्य पर महास्नान हो रहा है. कार्तिक मेला दुर्लभ पद्म योग कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर 2019 को रात 8:01 पर प्रारंभ होकर 13 नवंबर 2019 बुधवार को रात 10:00 बजे तक यह योग रहेगा. ज्योतिष शास्त्र एवं निर्णय सिंधु धर्मसिंधु अनेकों शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा पर कृतिका नक्षत्र होवे एवं सूर्य विशाखा नक्षत्र में चंद्रमा कृतिका नक्षत्र में होने पर पद्मा नामक योग जो दुर्लभ योग है जो वर्षों के बाद आता है वह इस वर्ष बन रहा है. तीर्थराज पुष्कर में इस पद्मयोग में स्नान कर परिक्रमा करने से दान करने से, धर्म करने से यज्ञ करने से अक्षय कोटि गुना फल लिखा है. 

ब्रह्मा जी पुष्कर की परिसीमा में भ्रमण करते हैं: 
इस योग में परम ब्रह्मा जी महाराज, सावित्री माता एवं गायत्री के साथ हंस की सवारी पर पुष्कर की परिसीमा में भ्रमण करते हैं. पुष्कर राज के जल में निवास करते हैं इसलिए यह योग परम श्रेष्ठ कार्य होता है. ब्रह्मा विष्णु एवं 33 करोड़ देवी देवता ब्रह्मा जी की स्तुति करते हैं. पूजन करते हैं एवं स्वर्णा करके इस तीर्थराज पुष्कर में स्नान करते हैं. ऐसी योग में स्नान करने से मनुष्य पाप मुक्त होता है. परिवार में सुख समृद्धि एवं परमात्मा के चरणों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कुंभ के समान स्नान का पुण्य फल मिलता है चार धाम सप्तपुरी यात्रा पूरी करने के बाद भी अगर पुष्कर में स्नान नहीं करते हैं तो उसकी यात्रा अधूरी रहती है. इसी दिन मत्स्य अवतार का भगवान का जन्मदिन भी है. ऐसा लिखते हैं कि इस दिन त्रिपुर उत्सव मनाना चाहिए, दीप दान करना चाहिए. ऐसा लिखते हैं कि दीपदान करने से कीट, पतंग, मच्छर, वृक्ष व जल व स्थल में जीव विचरण करते हैं. दीपदान करने से पद्म पुराण. विष्णु पुराण. अग्नि पुराण में लिखा है कि मनुष्य को पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता है. एवं अंत समय में वैकुंठ लोक में प्रकाश उनको मिलता है.

सात जन्म के पाप क्षीण होकर पुण्य के भागीदार बनते हैं: 
साथ ही इस दिन स्वामी कार्तिक भगवान का पूजन करने से दर्शन करने से जनमानस में सात जन्म के पाप क्षीण होकर पुण्य के भागीदार बनते हैं एवं श्रेष्ठ पुरुषों में महा धनी उम्मीदवार बनने का सहयोग मिलता है. पद्म योग सर्वश्रेष्ठ योग है यह वर्षों के बाद ज्योतिष मत के अनुसार रात्रि में आया है. अतः जिनकी कुंडली में सूर्य और चंद्रमा अशुभ योग है वक्र गति पर है इस दिन स्नान दान करने से सूर्य चंद्रमा का आशीर्वाद मिलता है एवं ब्रह्मा जी विष्णु, शंकर और 33 करोड़ देवी देवताओं के साथ में आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
 

ब्रह्म चौदस पर सैकड़ों साधु-संतों ने किया पुष्कर सरोवर में शाही स्नान

ब्रह्म चौदस पर सैकड़ों साधु-संतों ने किया पुष्कर सरोवर में शाही स्नान

पुष्कर(अजमेर): सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण और देश में खुशहाली की मनोकामना लेकर सैकड़ों साधु-संतों ने गुरुवार को ब्रह्म चौदस के पवित्र अवसर पर पुष्कर सरोवर में शाही स्नान कर पूजा-अर्चना की. 

सभी साधु संतों ने वैदीक मंत्रोचार के साथ किया शाही स्नान: 
साधु-संतों ने पवित्र मौके पर ब्रह्म मुहूर्त में शाही स्नान किया. सेन भक्तिपीठ से सेनाचार्य अंचलानंदचार्य व रामरामिया आश्रम के रामदयाल महाराज की अगुवाई में सभी आश्रमों के सन्त-साधुओं और महंत गाजे बाजे के साथ सप्तऋषि घाट ओर ब्रह्म घाट पहुंचे. जहां जनप्रतिनिधियों ने अगवानी की और सभी साधु संतों ने वैदीक मंत्रोचार के साथ पूजा अर्चना कर पवित्र सरोवर में शाही स्नान किया. इसके पश्चात श्राद्धलुओं ने संत महात्माओं का शॉल माला पहनाकर सम्मान किया. इस अवसर पर सभी ने सरोवर का जल हाथ में लेकर सेनाचार्य अंचलानंद महाराज के सानिध्य में पुष्कर को स्वच्छ बनाने पर्यावरण बचाओं का संकल्प लिया. 

गुलाबो ने पुष्कर मेले में नृत्य की प्रस्तुति देकर विदेशी पर्यटकों को किया अभिभूत

गुलाबो ने पुष्कर मेले में नृत्य की प्रस्तुति देकर विदेशी पर्यटकों को किया अभिभूत

पुष्कर(अजमेर): राजस्थान का गौरवमयी इतिहास है. सदियों पुरानी परंपराएं आज भी यहां अपने मूल रूप में हैं. अपनी आन बान और शान के लिए पहचाने जाने वाले इस प्रदेश की नृत्य परंपराएं भी पूरी दुनियां में लोकप्रिय हैं. हम बात कर रहे है आज फेमस सपेरा डांसर गुलाबो की जी हां यह वही गुलाबो है. गुलाबो की कहानी काफी डराने वाली है. पैदा होते ही इन्हें दफना दिया गया था. पर नियति को तो कुछ और ही मंजूर था. गुलाबो ने ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कालबेलिया नृत्य को पहचान दिलाई. कम लोगों को पता होगा कि इस कलाकार को पैदा होते ही समाज की महिलाओं ने जमीन में गाड़ दिया था. अपनी मौसी की बदौलत उन्हें एक नया जीवन मिला.

गुलाबो ने 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का संदेश दिया: 
जिस समाज की रीति-रिवाजों के चलते उन्हें पैदा होने के बाद जमीन में गाड़ दिया गया था उसी ने अपने सपेरे समाज को दुनिया में पहचान दिलाई. पुष्कर मेले में आई आयोजित कार्यक्रम में आई गुलाबो देसी विदेशी पर्यटकों को राजस्थानी सांस्कृति से रूबरू करवाने के लिए प्रख्यात कालबेलिया नृत्यांगना गुलाबो ने नृत्य की प्रस्तुति देकर विदेशी पर्यटकों को अभिभूत कर दिया. कार्यक्रम के दौरान गुलाबो ने एक से बढ़कर एक नृत्य की प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरी. कार्यक्रम के दौरान गुलाबो ने संबोधित करते हुए 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का संदेश दिया. उन्होंने यह भी कहा कि मैं पुष्कर से निकली हूं जो कालबेलिया नृत्य को देश विदेश तक पहुंचाने के कार्य में लगी हुई हूं. 

पुष्कर मेले में हुआ भारतीय दूल्हा-दुल्हन की अनूठी प्रतियोगिता का आयोजन, विदेशी युवतियों ने किया सोलह श्रृंगार

पुष्कर मेले में हुआ भारतीय दूल्हा-दुल्हन की अनूठी प्रतियोगिता का आयोजन, विदेशी युवतियों ने किया सोलह श्रृंगार

पुष्कर(अजमेर): जगत पिता ब्रम्हा की नगरी पुष्कर में चल रहे मेले के दौरान विदेशियों के लिए भारतीय दूल्हा-दुल्हन की एक अनूठी प्रतियोगिता आयोजित की गई. इस प्रतियोगिता में सात समुन्दर पार से मेला देखने आई विदेशी युवतियों ने सोलह श्रृंगार करके भातीय दुल्हन का वेश धरा और एक सुशील दुल्हन की तरह लोगों के बीच आकर उनका अभिवादन किया. वहीं इस बार भी विदेशी युवकों को दूल्हा बना कर उतारा गया जो भी काफी रोचक रहा. पुष्कर मेले के सबसे मुख्य आकर्षण के रूप में विख्यात इस आयोजन में अलग अलग देशों की 26 विदेशी युवक-युवतियों ने हिस्सा लिया जिन्हें देखकर हजारो दर्शक झूम उठे.

अलग-अलग देशों के कुल 6 युवक व 20 युवतियों ने हिस्सा लिया: 
माथे पर टीका और कानों में झुमका पहनकर एक पारंपरिक भारतीय दुल्हन के लिबास में लोगों का अभिवादन करती विदेशी युवतियों और विदेशी युवकों की हौसला अफजाई करते हजारो लोग...यह नजारा है पुष्कर में चल रहे मेले का जहां पर भारतीय दूल्हा-दुल्हन प्रतियोगिता आयोजित की गई. इस आयोजन की खास बात यह है की इसमें केवल विदेशी युवक युवतियां ही हिस्सा ले सकते है. पुष्कर मेले में घूमने आये विदेशी मेहमानों के मनोरंजन के लिए खास तौर से आयोजित की जाने वाली इस प्रतियोगिता में अलग-अलग देशों के कुल 6 युवक व 20 युवतियों ने हिस्सा लिया. किसी ने हाथों में चूड़ियों से लेकर माथे पर टीका लगाया तो किसी ने गले में बेशकीमती हार पहनकर हाथों में मेहंदी भी लगवाई. सभी 26 युवक युवतियों ने एक दूसरे को टक्कर देने के लिए आकर्षक श्रृंगार किये और स्टेज पर अपनी अदाओं के जलवे बिखेरे. खास बात यह थी की कुछ ने तो यहां राजस्थानी दुल्हन बनने के लिए पारम्परिक गहने पहने तो किसी ने चमचमाते जरीदार बेस. 

सज धजकर पहुंची सभी युवतियां बेहद खुबसूरत लग रही थी: 
पुष्कर में स्थित अलग अलग ब्यूटी पार्लर में सज धजकर पहुंची सभी युवतियां बेहद खुबसूरत लग रही थी. इनमे से कुछ तो इतनी सुन्दर सजी हुई थी की पूरी तरह से भारतीय दुल्हन ही नजर आ रही थी. सात समुन्दर पार से भारत आई इन युवतियों में से तीन को जब विजेता घोषित किया गया तो उनके चेहरों की खुशी देखने लायक थी.  उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था की इतनी दूर आकर उन्होंने यह अनूठी प्रतियोगिता जीत ली है. 

युवक युवतियों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार लम्हा बताया: 
एक ओर जहां फर्स्ट, सेकण्ड और थर्ड रही युवक युवतियों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार लम्हा बताते हुए खुशी व्यक्त की वहीं दूसरी और अलग अलग देशों से भारत घूमने आई इन सभी विदेशी युवतियों ने भारतीय दुल्हन के रूप में सोलह श्रंगार कर कार्यक्रम में मौजूद हजारों लोगों को अपना दीवाना बना दिया. 

...पुष्कर से लोकेश वैष्णव की रिपोर्ट

पुष्कर मेले में प्रसिद्ध नृत्यांगना अक्षिता भट्ट ने दी ऑडिसी डांस की शानदार प्रस्तुति

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पुष्कर(अजमेर): पुष्कर मेले के दौरान प्रसिद्ध नृत्यांगना अक्षिता भट्ट ने ऑडिसी डांस की शानदार प्रस्तुति देकर मौजूद हजारो दर्शको का दिल जीत लिया. गुरु पदम चरण देहुरी के सानिध्य में ऑडिसी डांस सीख रही पुष्कर की उभरती हुई नृत्यांगना अक्षिता ना सिर्फ बीते 5 सालों से यह डांस सिख रही है बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को आगे बढाने के लिए बच्चों को सिखा भी रही है.

ऑडिसी डांस की प्रस्तुति देख सैलानी मंत्र मुग्ध: 
 पुष्कर मेले में आयोजित हुई सांस्कृतिक संध्या में जैसे ही अक्षिता भट्ट ने ऑडिसी डांस की प्रस्तुति दी वैसे ही मेला मैदान में मौजुद देशी विदेशी सैलानी मंत्र मुग्ध हो गए. आपको बता दें कि अक्षिता बीते पांच सालों से लगातार पुष्कर मेले के दौरान प्रस्तुति देकर अपनी कला का प्रदर्शन  कर रही है. साथ ही मेड़ता के मीरां महोत्सव सहित नागौर के मेले में भी प्रस्तुति देकर इस नृत्य कला का प्रचार प्रसार कर रही है.    

पंचतीर्थ महास्नान और आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही धार्मिक पुष्कर मेला आज से शुरू

पंचतीर्थ महास्नान और आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही धार्मिक पुष्कर मेला आज से शुरू

पुष्कर(अजमेर): कार्तिक मास की पवित्र प्रबोघिनी एकादशी के पहले पंचतीर्थ महास्नान और आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही धार्मिक पुष्कर मेला आज से शुरू हो गया है. प्रात: ब्रह्म मुहूर्त से ही महास्नान शुरू हो गया जो पूरे दिन जारी रहा रहेगा.  

अभिनन्दन के बाद आध्यात्मिक पदयात्रा शुरू हुई: 
ब्रह्मा की पवित्र धरा पर संत, महन्त एवं अनेक समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने  आध्यात्मिक पदयात्रा की. इससे पहले यात्रा को जिला कलक्टर आरती डोगरा ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. प्रात: आठ बजे पुष्कर के गुरूद्वारे के सामने संत, महन्त, विभिन्न संप्रदायों के मठाधीशों का पुष्प तिलक के साथ अभिनन्दन के बाद  आध्यात्मिक पदयात्रा शुरू हुई. पदयात्रा में विभिन्न मंदिरों, स्कूलों और समाज सेवकों  की ओर से मनोहर झांकियां सजाई गई. 

स्वागत में जगह-जगह पुष्प वर्षा: 
आध्यात्म से जुड़ी ये झांकियां ढोल नगाड़ों के साथ जब पुष्कर के मुख्य बाजारों से निकली तो कस्बेवासियों ने इनके स्वागत में जगह-जगह स्वागत द्वार बनवाए और फूलों की वर्षा की. भारतीय संस्कृति और आध्यात्म के इस नज़ारे को देखकर विदेशी पर्यटकों ने भी न केवल इसमें पैदल चलकर भागीदारी निभाई बल्कि हरे राम हरे कृष्णा का बखान करते हुए ढोल नगाड़े भी बजाये. ये पदयात्रा मुख्य बाजारों और ब्रह्मा मंदिर से होते हुए मेला मैदान तक पहुंची. 

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