RBI ने ऋण पुनर्गठन, वैक्सीन निर्माताओं, अस्पतालों को नए Loan देने की घोषणा की

RBI ने ऋण पुनर्गठन, वैक्सीन निर्माताओं, अस्पतालों को नए Loan देने की घोषणा की

RBI ने ऋण पुनर्गठन, वैक्सीन निर्माताओं, अस्पतालों को नए Loan देने की घोषणा की

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank Of India) ने बुधवार को कुछ व्यक्तिगत तथा छोटे कर्जदारों को कर्ज चुकाने के लिए अधिक समय देने के साथ ही बैंकों से कहा कि वे वैक्सीन निर्माताओं, अस्पतालों और कोविड से संबंधित स्वास्थ्य ढांचे को प्राथमिकता के आधार पर ऋण दें.

संकट में संभालने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की:
RBI ने कोविड-19 महामारी से त्रस्त व्यक्तियों तथा सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (Micro, Small and Medium Enterprises Development) से वसूल नहीं हो पा रहे कर्जों के पुनर्गठन की छूट देने सहित अ​र्थव्यवस्था (Economy) को इस संकट में संभालने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की है. इन कदमों में कोविड-19 से संक्रमित लोगों के इलाज में काम आने वाली वस्तुओं और बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए इनके कारोबार में लगी इकाइयों को बैंकों द्वारा 50,000 करोड़ रुपये के कर्ज की एक नयी सुविधा भी शामिल है.

वित्त पोषण की यह सुविधा 31 मार्च 2022 तक खुली रहेगी:
​रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Governor Shaktikanta Das) ने कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच सुबह आननफानन में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में इन कदमों की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि 50 हजार रुपये के वित्त पोषण (Funding) की यह सुविधा 31 मार्च 2022 तक खुली रहेगी. इसके तहत बैंक वैक्सीन विनिर्माताओं, वैक्सीन और चिकित्सा उपकरणों के आयातकों और आपूर्तिकर्ताओं, चित्सालयों, डिस्पेंसरी, आक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं और वेंटिलेटर आयातकों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराएंगे.

बैंकों द्वारा इस तरह के कर्ज को प्राथमिकता दी जाएगी:
बैंक मरीजों को भी उपकरण आदि के आयात के लिए प्राथमिकता के आधार पर कर्ज दे सकेंगे. उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा इस तरह के कर्ज को प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ऋण की श्रेणी में रखकर शीघ्रता के कर्ज सुलभ करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ऋण पुनर्गठन संबंधी घोषणा के तहत कुल 25 करोड़ रुपये तक के कर्ज वाली इकाइयों के बकायों के पुनर्गठन पर विचार किया जा सकेगा. यह सुविधा उन्हीं व्यक्तियों/ इकाइयों को मिलेगी, जिन्होंने पहले किसी पुनर्गठन योजना का लाभ नहीं लिया है. इसमें छह अगस्त 2020 को घोषित पहली समाधान व्यवस्था भी शामिल है.

खातों के संचालन की वरियता के आधार पर दिया जाएगा लोन:
इस नई समाधान-व्यवस्था 2.0 का लाभ उन्हीं व्यक्तियों/ इकाइयों को दिया जा सकेगा, जिनके कर्ज खाते 31 मार्च 2021 तक अच्छे थे. कर्ज समाधान की इस नयी व्यवस्था के तहत बैंकों को 30 सितंबर तक आवेदन दिया जा सकेगा. इसके 90 दिन के अंदर इस योजना को लागू करना होगा. रिजर्व बैंक ने लघु-ऋण बैंकों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के विशेष दीर्घकालिक (Special Long Term) रेपो परिचालन की घोषणा भी की है. दास ने कहा इसके तहत MSME इकाईयों को 10 लाख रुपये तक की सहायता को प्राथमिकता क्षेत्र के लिए कर्ज माना जाएगा.

राज्य एक तिमाही में 50 दिन तक ओवर-ड्राफ्ट पर रह सकते है:
उन्होंने राज्य सरकारों के लिए ओवर-ड्राफ्ट (Over Draft) के नियमों में कुछ ढ़ील दिए जाने की घोषणा भी की है. इससे सरकारों को अपनी नकदी के प्रावह और बाजार कर्ज की र​णनीति को संभालने में सुविधा होगी. इस ढील के बाद राज्य एक तिमाही में 50 दिन तक ओवर-ड्राफ्ट पर रह सकते है. पहले ओवर-ड्राफ्ट की स्थिति अधिकतम 36 दिन ही हो सकती थी. आरबीआई ने बैंकों और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थाओं से कहा कि केवाईसी अपडेट नहीं कराने वाले ग्राहकों के खिलाफ दिसंबर तक कोई दंडात्मक प्रतिबंध न लगाए.

KYC और VCIP का दायरा बढ़ाया:
RBI ने प्रोप्राइटरशिप फर्मों (Proprietorship Firms), अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और कानूनी संस्थाओं के हितकारी मालिकों जैसी ग्राहकों की नई श्रेणियों के लिए वीडियो केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) या वी-सीआईपी (वीडियो-आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया) का दायरा बढ़ाने का भी फैसला किया है.

 KYC अपडेट पर 31 दिसंबर 2021 तक लागू न किया जाए:
दास ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड ​​से संबंधित प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए विनियमित संस्थाओं को सलाह दी जाती है कि ग्राहक खातों के लिए जहां समय-समय से KYC (Know Your Coustmers) अपडेट (अद्यतन करने की प्रक्रिया) लंबित है, वहां ग्राहक खाते के संचालन पर कोई दंडात्मक प्रतिबंध 31 दिसंबर 2021 तक लागू न किया जाए. ऐसे में बैंक या विनियमित वित्तीय संस्थान किसी अन्य विधिक कारण को छोड़कर ग्राहक खातों पर दंडात्मक प्रतिबंध नहीं लगाएंगे.

सरकार के साथ मिलकर उस हालात में सुधार के लिए काम करेंगे:
दास ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करेगा कि वित्तीय हालात अनुकूल रहें और बाजार कुशलता से काम करता रहे. उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में हमारे नागरिक जिस परेशानी का सामना कर रहे हैं, हम सरकार के साथ मिलकर उस हालात में सुधार के लिए काम करेंगे. जरूरत पड़ने पर हम अपरंपरागत उपायों (Unconventional Measures) और नई प्रतिक्रियाओं को आजमाने के लिए भी तैयार हैं. हमें अपने भविष्य को भी ध्यान में रखना होगा, जो इस मोड़ पर भी उज्ज्वल दिखाई दे रहा है, और भारत दुनिया की सबसे अधिक तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभरने के लिए तैयार है.

35,000 करोड़ रुपये की दूसरी खरीद की जाएगी:
आरबीआई ने कहा कि अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधनों (Financial Resources) का प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम (जी-सैप 1.0) के तहत 20 मई को 35,000 करोड़ रुपये की दूसरी खरीद की जाएगी. उम्मीद है कि इससे कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर के बीच बांडों पर निवेश के प्रतिफल में स्थिरता बहाल होगी. दास कहा कि आरबीआई दो सप्ताह में 35,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) की दूसरी खरीद करेगा.

खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति ने महंगाई को बढ़ा दिया:
बॉन्ड खरीद कार्यक्रम पर स्पष्टता लाने के लिए दास ने जी-सैप 1.0 नामक नए इंस्ट्रूमेंट के तहत पहली तिमाही के दौरान खुले बाजार के परिचालन (OMO) के जरिए एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने के लक्ष्य की घोषणा की थी. महंगाई पर उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति (Inflation) ने महंगाई को बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि सामान्य मानसून के पूर्वानुमान से खाद्य मुद्रास्फीति में मदद मिलेगी.

वायरस से  लड़ने के लिए अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा:
RBI गवर्नर (RBI Governor) ने कहा कि केंद्रीय बैंक कोविड-19 संक्रमण के मामलों में दोबारा बढ़ोतरी से पैदा हुए हालात की निगरानी करता रहेगा और इससे निपटने के लिए सभी संसाधनों को तैनात करेगा. उन्होंने कहा कि हमें वायरस से लड़ने के लिए अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा.
 

Watch out for the address by RBI Governor @DasShaktikanta at 10:00 am today, May 05, 2021.

YouTube: https://t.co/QPLkdTkKve#rbitoday #rbigovernor

— ReserveBankOfIndia (@RBI) May 5, 2021
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