सरकारी बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लॉकडाउन की आशंका नहीं: RBI गवर्नर

सरकारी बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लॉकडाउन की आशंका नहीं: RBI गवर्नर

 सरकारी बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लॉकडाउन की आशंका नहीं: RBI गवर्नर

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को लेकर सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं और इस संदर्भ में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई कीमत और वित्तीय स्थिरता बनाये रखते हुए अर्थव्यवस्था में पुनरुद्धार के लिये अपने सभी नीतिगत उपायों के उपयोग को लेकर प्रतिबद्ध है.

बैंकों के निजीकरण को लेकर कर रहे हैं सरकार के साथ चर्चा:

दास ने टाइम्स नेटवर्क इंडिया एकोनॉमिक कॉनक्लवे में कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को लेकर सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं और इस संदर्भ में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में आरबीआई और वित्त मंत्रालय के बीच बजट से पहले चर्चा हुई थी और बाद में भी चर्चा हुई. उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को 2021-22 का बजट पेश करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी के निजीकरण का प्रस्ताव किया था.

कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामले चिंता की बात:

उन्होंने यह भी कहा कि देश में कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामले चिंता की बात है लेकिन इससे निपटने के लिये इस बार हमारे पास अतिरिक्त उपाय हैं. दास ने भरोसा जताया कि कोरोना वायरस संक्रमण की नई लहर से आर्थिक वृद्धि में सुधार की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी और आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 10.5 प्रतिशत के हालिया वृद्धि लक्ष्य को बरकरार रखा है. कोविड-19 वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ने और कई शहरों में इसके चलते लॉकडाउन लगाने की आशंकाओं के बीच आरबीआई गवर्नर का आश्वासन महत्वपूर्ण है.

आर्थिक गतिविधियों का पुनरुद्धार निर्बाध रूप से जारी:

दास ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों का पुनरुद्धार निर्बाध रूप से जारी रहना चाहिए और मुझे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आरबीआई के 10.5 प्रतिशत वृद्धि अनुमानों को घटाने की जरूरत नहीं लगती. साथ ही उन्होंने कहा कि इस समय किसी को भी पिछले साल जैसे लॉकडाउन की आशंका नहीं है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक पुनरुद्धार निर्बाध रूप से जारी रहना चाहिए, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आरबीआई के 10.5 प्रतिशत वृद्धि अनुमानों को घटाने की जरूरत नहीं लगती. सेवाओं की बेहतर डिलिवरी के लिये वित्तीय क्षेत्र में नवप्रवर्तन की जरूरत पर बल देते हुए आरबीआई गवर्नर ने नवोन्मेष को बढ़ावा देने वाले प्रभावी नियमन का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आरटीजीएस और एनईएफटी की सुविधा अब 24 घंटे उपलब्ध है. आरटीजीएस में विभिन्न मुद्राओं में लेन-देन की क्षमता है. इस बात की संभावना पर विचार करने की जरूरत है कि क्या इसका दायरा भारत से बाहर भी बढ़ाया जा सकता है.

रिजर्व बैंक के लिये प्रभावी नियमन प्राथमिकता:

दास ने कहा कि रिजर्व बैंक के लिये प्रभावी नियमन प्राथमिकता है और कायदा-कानून ऐसे नहीं होने चाहिए जो वित्तीय प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करे. उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत पूंजी आधार के साथ बैंक क्षेत्र की वित्तीय सेहत, नैतिक मानदंडों के साथ संचालन व्यवस्था बनाये रखना हमारी प्राथमिकता है. दास ने कहा कि ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिये प्रौद्योगिकी और नवप्रवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका है. लोगों को प्रत्यक्ष अंतरण लाभ पहुंचाने के लिये 274 करोड़ डिजिटल लेन-देन को सुगम बनाया गया और इसमें ज्यादातर महामारी के दौरान हुए.क्रिप्टो करेंसी के बारे में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इस संदर्भ में वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताओं का आकलन कर रहा है. दास ने कहा कि हमने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत कराया है, इस पर विचार किया जा रहा है. सरकार इस पर निर्णय करेगी. (भाषा)

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