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50 लाख भारतीयों का जीवन होगा प्रभावित, बिटकॉइन और बाकी वर्चुअल करंसियों पर RBI ने लगाई रोक

50 लाख भारतीयों का जीवन होगा प्रभावित, बिटकॉइन और बाकी वर्चुअल करंसियों पर RBI ने लगाई रोक

मुंबई। रिजर्व बैंक ने बिटकॉइन और बाकी वर्चुअल करंसीज पर रोक लगा दी है। बता दें कि इससे पहले क्रिप्टोकरंसी में इन्वेस्टमेंट को लेकर केंद्रीय बैंक ने एक चेतावनी भी दी थी। 

गौरतलब है कि आबीआई का ये कदम लगभग 50 लाख उन भारतीयों के जीवन को सीधे प्रभावित करेगा, जिन्होंने क्रिप्टो करंसी में निवेश किया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसीज में इन्वेस्ट करने वाले लोगों का पैसा डूब जाएगा।

आपकों बता दें कि भारत में 2 अरब डॉलर का निवेश बिटकॉइन में है। आरबीआई ने बैंकों, ई-वॉलिट आदि को किसी व्यक्ति या संस्था को क्रिप्टोकरंसी खरीदने की सुविधा देने पर पाबंदी लगा दी है। हालांकि, देश में वर्चुअल करंसीज ट्रेड कर रहे क्रिप्टोएक्सचेंज भी इससे प्रभावित होंगे। 

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लॉक डाउन के बीच फीकी रही नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे

लॉक डाउन के बीच फीकी रही नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे

जयपुर: कोरोना संकट के दौर में प्रदेश में लॉक डाउन के चलते वित्त वर्ष 2020-21 की फीकी शुरुआत हुई. सरकारी खजाने को उम्मीद रहती है कि वित्त वर्ष अंतिम महीने मार्च में मोटी रकम प्राप्त होगी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और बुरी स्थिति तब हो गई जब लॉक डाउन के चलते वित्त वर्ष की शुरुआत भी फीकी रही. ऐसे में अब राज्य सरकार के सामने चुनौती रहेगी कि वे किस तरह से नए वित्त वर्ष में योजनाओं का वित्तपोषण कर पाएगी. 

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- लॉक डाउन के बीच नए वित्त वर्ष की शुरुआत
- पुराने राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे, नए प्राप्त करने के लिए भी जुटना होगा
- लेकिन अभी 14 अप्रैल तक है लॉक डाउन
- ऐसे में टैक्स हैड वाले विभागों के लिए चुनौती भरा रहेगा नया वर्ष
- आबकारी, खान, परिवहन सहित कई विभाग जुड़े हैं सीधे राजस्व अर्जन से
- प्रदेश में खनन बंद, होटल, resto-bar बंद, शराब दुकानें बंद
- ऐसे में लॉक डाउन अवधि में प्रभावित रहेगा राजस्व अर्जन का कार्य

राजस्व लक्ष्य अर्जित करने को लेकर सरकार भले ही गंभीर दिखी लेकिन जिस तरह वित्त वर्ष के अंतिम माह में कोरोना का कहर टूटा उससे राज्य सरकार की उम्मीद है भी धराशाई हो गई. सरकार को उम्मीद थी कि कर राजस्व से जुड़े महकमें सरकारी खजाने को संबल प्रदान करेंगे लेकिन हुआ ठीक उल्टा कोरोना के चलते वित्त वर्ष का अंतिम महीना सूखा निकला और नए वित्त वर्ष की शुरुआत भी बिल्कुल फीकी रही. मोटे तौर पर अभी टैक्स हेड वाले महकमें इस बात का गुणा भाग करने में लगे हैं कि 31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2019-29 में राजस्व अर्जन की स्थिति क्या रही..? इधर वित्त विभाग के अफसरों की माने तो बीते वित्त वर्ष में सरकार की उम्मीदों के विरुद्ध 70 से 75 फ़ीसदी ही राजस्व लक्ष्य अर्जित हो पाए हैं.

सरकारी खजाने में उम्मीद के मुताबिक धन नहीं पहुंचा: 
इसका सीधा मतलब है कि सरकारी खजाने में उम्मीद के मुताबिक धन नहीं पहुंचा और बीते वित्त वर्ष में सरकार को कर राजस्व में करीब 10,000 करोड रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. दरअसल वित्त वर्ष के अंतिम महीने यानी मार्च में परिवहन विभाग जहां एडवांस टैक्स का कलेक्शन करता है वहीं आबकारी विभाग भी नया बंदोबस्त करता है. खान विभाग भी नए ठेकों के लिए एडवांस राशि का कलेक्शन करता है जिससे सरकारी खजाने में शतप्रतिशत से कहीं ज्यादा राजस्व पहुंच जाता है. परंतु इस बार कोरोना वायरस के कहर के सामने सब मटिया मेट हो गया. आबकारी विभाग जहां लक्ष्य से 2000 करोड़ रुपए पीछे रहा वही खान विभाग भी करीब 800 करोड रुपए अर्जित नहीं कर पाया. यही नहीं परिवहन विभाग, पंजीयन एवं मुद्रांक, विद्युत व अन्य कर राजस्व से जुड़े महकमें भी राजस्व लक्षणों से पिछड़ गए. अब सरकार के सामने मुश्किल इस बात की है कि नए वित्त वर्ष में जनता से जुड़ी हुई योजनाओं का किस तरह से वित्त पोषण किया जाएगा. पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के बजट में जो घोषणाएं की थी वह कैसे पोषित हो पाएंगी. राज्य सरकार की वार्षिक योजना की बात करें तो उसके लिए धनराशि कहां से आएगी. ऐसे सैकड़ों सवाल हैं जो चुनौती के रूप में राज्य सरकार के सामने खड़े हैं.

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कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा पर्यटन और खनन कमर तोड़ दी: 
अब खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने वित्त की टीम से यह उम्मीद है कि वह कोरोना संकट के बीच इस तरह का फार्मूला लेकर आएंगे जिससे सरकारी खजाने को भी संभल मिलेगा और आमजन से जुड़ी योजनाएं भी वित्त पोषित हो पाएंगी. कोरोनावायरस संकट में ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकारी राजस्व में कमी की हो बल्कि प्रदेश और देश के अंदर विभिन्न सेक्टर में जो रोजगार था उसकी भी कमर तोड़ दी है. राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर्यटन और खनन पर काफी हद तक आधारित है और कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा कमर इन 2 सेक्टर की ही थोड़ी है. पर्यटन सेक्टर की बात करें तो प्रदेश के तमाम पर्यटन स्थल, स्मारक, संग्रहालय बंद पड़े हैं. इसके नतीजे में ट्रैवल ट्रेड से जुड़े टैक्सी ड्राइवर, गाइड, जिप्सी संचालक, होटल, मोटल कैफे, रेस्टोरेंट सब कुछ बंद पड़ा है. छोटे-छोटे होकर और वेंडर जो हस्तशिल्प और अन्य सामग्री को बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे वह भी बेरोजगार हो गए हैं. ऐसे में चुनौती सिर्फ यही नहीं है कि सरकारी योजनाओं का वित्तपोषण कैसे होगा वरन चुनौती इस बात की भी है कि कोरोनावायरस देर सवेर दूर हो जाएगा लेकिन इससे पस्त हुए प्रदेश के रोजगार धंधों को किस तरह से उठाया जाएगा. यह बड़ी चुनौती होगी. अब देखना है कि सूबे की सरकार कोरोना संकट से निपटने और इसके बाद के हालात की चुनौती से निपटने के लिए किस तरह खुद को तैयार करती है.  

Coronavirus: मंदी में चली जाएगी वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत और चीन हो सकते हैं अपवाद- यूएन

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संयुक्त राष्ट्र: यूएन की ताजा व्यापार रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी, लेकिन चीन और भारत इसके अपवाद हो सकते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान खरबों डॉलर का नुकसान होने की संभावना है इससे विकासशील देशों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. 

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विकासशील देशों में करीब दो तिहाई लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे: 
रिपोर्ट में हालांकि इस बात की विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है कि भारत और चीन इसका अपवाद कैसे बनेंगे. यूएन के अनुसार कोरोना वायरस संकट के चलते विकासशील देशों में रह रहे दुनिया के करीब दो तिहाई लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इन देशों के लिए 2500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है.

विदेशों में आने जाने वाला निवेश प्रभावित होने की संभावना: 
यूएन और विकास सम्मेलन के विश्लेषण के अनुसार दुनिया की दो-तिहाई आबादी प्रभावित होगी और अगले दो वर्षों के दौरान विकासशील देशों में करीब 2,000 अरब डॉलर से 3,000 अरब डॉलर के बीच विदेशों में आने जाने वाला निवेश प्रभावित होने की संभावना है. विकास सम्मेलन ने कहा कि कोरोना वायरस के लोकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन ने काफी बड़े सरकारी पैकेज की घोषणा की है. जी-20 के अनुसार उनकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ये पैकेज कुल 5,000 अरब डॉलर का होगा. 

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वैश्विक निवेश को अरबों-खरबों डॉलर का नुकसान होगा:
रिपोर्ट के अनुसार इस अभूतपूर्व संकट में अभूतपूर्व फैसले करने हैं. विकास सम्मेलन ने कहा कि इन राहत उपयों के बाद भी विश्व अर्थव्यवस्था इस साल मंदी के दौर में चली जाएगी और वैश्विक निवेश को अरबों-खरबों डॉलर का नुकसान होगा, जो विकासशील देशों के लिए गंभीर मुसीबन बन जाएगा.   

LPG सिलेंडर की कीमत में कटौती, लॉकडाउन के बीच लोगों को मिली राहत

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नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस के लॉकडाउन के बीच एलपीजी सिलेंडर के दाम कर हो गए हैं. आम आदमी के लिए यह बड़ी राहत की खबर है. 14.2 किलोग्राम वाले गैर-सब्सिडाइज्‍ड एएनपीजी सिलेंडर के दाम दिल्‍ली में 61.5 रुपये प्रति सिलेंडर सस्‍ते हुए हैं. इसी तरह, नॉन सब्सिडी सिलेंडर की कीमत दिल्‍ली में 744 रुपये रह गई है जो 805.50 रुपये थी. इसी तरह, नॉन सब्सिडी सिलेंडर की कीमत कोलकाता में 774.50 रुपये, मुंबई में 714.50 रुपये और चेन्‍नई में 761.50 रुपये हो गई है जो क्रमश: 839.50 रुपये, 776.50 रुपये और 826 रुपये हुआ करती थी.

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लगातार दूसरे महीने में एलपीजी के दाम घटे:
लगातार दूसरे महीने में एलपीजी के दाम घटे हैं. आखिरी बार फरवरी में एलपीजी के दाम बढ़े थे. तब दिल्ली में  14 किलोग्राम के गैस सिलेंडर के दाम 144.50 रुपये बढ़ गए थे. वहीं कोलकाता में 149, मुंबई में 145 और चेन्नई में 146 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी. 

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19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती:
वहीं आज नॉन सब्सिडी के अलावा 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती की गई है जो पहली अप्रैल से प्रभावी है. दिल्‍ली में 19 किग्रा का रसोई गैस सिलेंडर 96 रुपये सस्‍ता हुआ है. दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब 1285 रुपये का पड़ेगा. वहीं चेन्नई में इस सिलेंडर का दाम 1402 रुपये है. वहीं पांच किलो वाला सिलेंडर भी 21.50 रुपये कम होने के बाद 286.50 रुपये का हो गया.
 

VIDEO: कोरोना लेकर आया एयरलाइंस के लिए आर्थिक संकट! भारतीय एयरलाइंस को 3 अरब डॉलर के नुकसान की आशंका

VIDEO: कोरोना लेकर आया एयरलाइंस के लिए आर्थिक संकट! भारतीय एयरलाइंस को 3 अरब डॉलर के नुकसान की आशंका

जयपुर: कोरोना वायरस एयरलाइंस के लिए आर्थिक संकट लेकर आया है. देश-विदेश की सभी एयरलाइंस इस आर्थिक नुकसान की चपेट में आना शुरू हो गई हैं. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भारतीय एयरलाइंस को पहली तिमाही में 3 अरब डॉलर के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई है. दरअसल सभी एयरलाइंस पहले से ही आर्थिक फायदे की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन अब लॉकडाउन ने एयरलाइंस के लिए हालात और खराब कर दिए हैं.

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देश के 6 प्रमुख एयरलाइन बेड़े में 631 विमान: 
देश में 6 प्रमुख एयरलाइन कम्पनियां हैं, जिनके बेड़े में 631 विमान हैं. इन एयरलाइंस के पास हर रोज एक समय में करीब 1 लाख सीट मौजूद रहती हैं. पिछले 1 सप्ताह से ये सभी सीटें खाली हैं. 24 मार्च से पहले भी एयरलाइंस को इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ रही थीं. दरअसल फरवरी माह के दूसरे सप्ताह से ही कोरोना संकट के चलते एयरलाइंस को नुकसान होना शुरू हो गया था. आपको बता दें कि जयपुर एयरपोर्ट से भी रोजाना 63 फ्लाइट संचालित होती हैं, जिनसे करीब 14500 यात्रियों का आवागमन होता है, लेकिन कोरोना संकट के चलते पिछले एक सप्ताह से जयपुर एयरपोर्ट से भी फ्लाइट संचालन बंद हो चुका है. 

किस एयरलाइन के बेड़े में कितने विमान:
एयर एशिया - 22 विमान
एयर इंडिया - 171 विमान (एयर इंडिया एक्सप्रेस के 25, अलायंस एयर के 19 विमान शामिल)
गो एयर - 51 विमान
इंडिगो - 243 विमान
स्पाइसजेट - 112 विमान
विस्तारा - 32 विमान

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- एक समय में इन एयरलाइंस के पास रहती हैं करीब 1 लाख सीट
- अकेले जयपुर एयरपोर्ट से रोज संचालित होती हैं 63 फ्लाइट
- इनमें 16000 सीटों पर यात्रा करते हैं करीब 14500 यात्री
- इंडिगो, गो एयर, स्पाइसजेट में लॉकडाउन में कर्मचारियों की बची हुई छुट्टियां काटी जा रही हैं
- छुट्टियां नहीं बचीं तो कर्मचारियों को बिना वेतन अवकाश दिया जाएगा

...फर्स्ट इंडिया के लिए जयपुर से काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

नहीं हुआ वित्त वर्ष में कोई बदलाव, 1 अप्रैल से ही शुरू होगा वित्त वर्ष

नहीं हुआ  वित्त वर्ष में कोई बदलाव, 1 अप्रैल से ही शुरू होगा वित्त वर्ष

नई दिल्ली: पूरे देशभर में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है. इसी के चलते पूरे देश को लॉकडाउन किया गया है. इमरजेंसी सेवाओं को छोडकर सभी बंद है. इस बीच एक खबर वित्त वर्ष को लेकर सामने आई है.  केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2020-21 शुरू होने की तारीख में बदलाव नहीं किया है. ये 1 अप्रैल से बदलकर 1 जुलाई नहीं की गई है. ये एक अप्रैल से ही शुरू होगा. 

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इंडियन स्टाम्प ऐक्ट की तारीख में बदलाव:
केन्द्र सरकार की तरफ से बयान जारी कर उस खबर को नकारा गया है जिसमें दावा किया जा रहा था कि वित्त वर्ष को 30 जून तक बढ़ाने का फैसला किया गया है. वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इंडियन स्टाम्प ऐक्ट की तारीख में बदलाव को वित्त वर्ष में बदलाव कहा जा रहा जो गलत रिपोर्ट है.

नोटिफिकेशन किया जारी:
केंद्र सरकार ने सोमवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें स्टॉम्प ड्यूटी कलेक्शन की तारीखों में बदलाव की जानकारी थी. एक अधिकारी ने बताया कि इस बदलाव के तहत स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरीज के माध्यम से सिक्युरिटी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स पर स्टॉम्प ड्यूटी कलेक्ट की जाएगी. पहले यह बदलाव एक अप्रैल 2020 से लागू होना था. लेकिन अब 1 जुलाई 2020 से लागू होगा. हालांकि आम लोगों के लिए कई सुविधाएं 30 जून तक बढ़ा दी गई हैं.

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लॉक डाउन की अवधि के टिकट का मिलेगा पूरा रिफंड, रेलवे प्रशासन ने यात्रियों के लिए दी राहत

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जयपुर: कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉक डाउन की अवधि के बीच जब ट्रेनों का संचालन बंद हो चुका है. ऐसे में रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को पहले से बुक टिकटों के लिए पूरी राशि रिफंड करने का फैसला लिया है. रेलवे प्रशासन ने यह राहत उन यात्रियों के लिए भी दी है, जिन्होंने पहले से अपना टिकट स्वयं के स्तर पर रद्द करवा लिया है. हालांकि ऐसे टिकटों के रद्द करने पर कैंसिलेशन चार्ज काट लिया गया है, लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने आज जारी आदेशों में कहा है कि ऐसे यात्री कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर काटी गई राशि रिफंड कराने के लिए भी आवेदन कर सकेंगे.

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यात्रा के टिकटों की पूरी राशि मिलेगी:
21 मार्च से 14 अप्रैल तक की अवधि के रद्द हुए टिकटों की पूरी राशि यात्रियों को रिफंड की जाएगी. जिन यात्रियों ने रेलवे स्टेशनों की टिकट विंडो से टिकट खरीदे हैं, उन्हें टिकट डिपॉजिट रिसिप्ट फॉर्म भरना होगा. जबकि जिन यात्रियों ने ऑनलाइन टिकट बुक किए हैं, उनकी राशि अपने आप खाते में क्रेडिट हो जाएगी. टिकट कैंसिलेशन के लिए टिकट डिपॉजिट रिसिप्ट भरने की अंतिम तिथि 21 जून 2020 रखी गई है.

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नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. शक्तिकांत दास ने बताया कि कोरोना वायरस संकट के चलते RBI की बैठक पहले बुलाई गई है. इसके साथ ही उन्होंने रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती का भी एलान किया. इस कटौती के बाद नई रेपो रेट 4.4 हो गई है. इसका असर आपकी ईएमआई पर पड़ेगा. इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. शक्तिकांत दास ने कहा कि इससे कोरोना से लड़ने में मदद मिलेगी.

कर्ज होंगे सस्ते:
आमजन को लॉकडाउन के दौरान कोई असुविधा न हो, इसके लिए RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एलान किए. उन्होंने जनता के लिए सभी तरह के लोन सस्ते किए गए. रेपो रेट में कटौती से आपकी ईएमआई घटेगी. साथ ही 3 माह तक ईएमआई देने में राहत का भी एलान किया गया. रेपो रेट में 75 आधार अंकों की कटौती.  मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के छह में से चार सदस्यों ने रेट कट के पक्ष में वोट किया. रेपो रेट 5.15 फीसदी से घटकर 4.45 फीसदी हो गई है। इससे सभी तरह के कर्ज सस्ते होंगे. इसके अतिरिक्त आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में भी 0.90 प्रतिशत की कटौती की है. अब ये 4.90 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत हो गई है.

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घटेंगी कच्चे तेल की कीमत:
कोरोना की वजह से दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं. इसका असर कितना होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता। लेकिन कच्चे तेल की कीमतें घटने से कुछ राहत मिलेगी.कच्चे तेल के दाम और मांग में कमी से कोर (मुख्य) मुद्रास्फीति कम होगी. RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोविड-19 के चलते अर्थव्यवस्था को होने वाले खतरे को देखते हुए एमपीसी ने समय से पहले ही समीक्षा बैठक की. समीक्षा बैठक 24 से 27 मार्च तक चली. 

आरबीआई ने सभी बैंकों को दी सलाह: 
शक्तिकांत दास ने कहा है कि उनका ध्यान आर्थिक स्थिरता पर है और विश्व के कई देश कोरोना वायरस की महामारी से लड़ रहे हैं. देश में लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप हैं. इसलिए RBI का ध्यान लोगों को राहत देने में हैं. RBI ने सभी बैंकों को सलाह दी है कि वो ग्राहकों से 3 माह के लिए ईएमआई को लेने के लिए टाल दें. RBI ने सभी बैंकों का कैश रिजर्व रेश्यो भी एक प्रतिशत यानी 100 आधार अंक घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया है. यह पूरे एक वर्ष के लिए 4 प्रतिशत की बजाए तीन फीसदी होगा. इसके तहत बैंक अपनी जमा का कुछ प्रतिशत RBI के पास रखते हैं. इसमें कटौती होने से 1.37 लाख करोड़ रुपए की रकम बैंकों को मिल पाएगी.

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नई दिल्ली: उज्जवला स्कीम के तहत भी वित्त मंत्री ने सीतारमण ने गुरुवार को बड़ा एलान किया. वित्त मंत्री ने कहा- रसोई गैस की दिक्कत महिलाओं को ना हो इसलिए उन्हें मुफ्त में अगले तीन महीने तक तीन गैस सिलेंडर मिलेंगे. इस फैसले से 8.3 करोड़ बीपीएल परिवारों को फायदा होगा.

किसानों के खाते में 2000 रुपए की किश्त डाल दी जाएगी:
उन्होंने बताया कि अप्रैल के पहले हफ्ते में किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के खाते में 2000 रुपए की किश्त डाल दी जाएगी. इसका फायदा 8.69 करोड़ किसानों को इसका फायदा मिलेगा. मनरेगा के तहत मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाकर 180 रुपए से बढ़ाकर 202 रुपए कर दी गई है. इसका फायदा पांच करोड़ परिवारों को फायदा होगा.

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वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांदजनों के लिए घोषणा:
सीतारमण ने बताया कि 60 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिक, विधवा और दिव्यांगजनों को एक हजार रुपये अगले तीन महीने में दो किश्तों में मिलेगा. इस फैसले से तीन करोड़ गरीब वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांदजनों को फायदा होगा. यह सारा फैसला डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से उनके खाते में जाएगा. मनरेगा और पीएम किसान का पैसा भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से ही जाएगा.

पांच करोड़ परिवारों को फायदा:
वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि अप्रैल के पहले हफ्ते में किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के खाते में 2000 रुपए की किश्त डाल दी जाएगी. इसका फायदा 8.69 करोड़ किसानों को इसका फायदा मिलेगा. मनरेगा के तहत मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाकर 180 रुपए से बढ़ाकर 202 रुपए कर दी गई है. इसका फायदा पांच करोड़ परिवारों को फायदा होगा.

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