RBSE Board Exam: छात्रों को Promote करने के लिए अभी तक तय नहीं हुआ Formula, जाने Experts की राय

RBSE Board Exam: छात्रों को Promote करने के लिए अभी तक तय नहीं हुआ Formula, जाने Experts की राय

RBSE Board Exam:  छात्रों को Promote करने के लिए अभी तक तय नहीं हुआ Formula, जाने Experts की राय

जयपुर: कोरोना (Covid) के चलते RBSE बोर्ड की परिक्षाएं (RBSE Board Exams) रद्द होने के बाद सरकार अभी तक छात्रों को प्रमोट (Pramote) करने की नीति नहीं तय कर पाई है. इसका नतीजा है कि आज एक सप्ताह बाद भी स्टूडेंट्स (Students) इस चिंता में है कि अगली क्लास में एडमिशन कैसे होगा? अब बुधवार को जयपुर में प्रिंसिपल सैक्रेटरी (Principal Secretary) अपर्णा अरोरा ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर (Board of Secondary Education Ajmer) और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर (Directorate of Secondary Education Bikaner) के अधिकारियों को जयपुर तलब किया है.

बुधवार को भी निर्णय होने की उम्मीद नहीं:
निर्णय बुधवार को भी होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि विभाग अब तक प्रस्तावों पर ही चर्चा कर रहा है. उधर, एक्सपर्ट्स (Education Experts) का कहना है कि पिछली बोर्ड क्लास को आधार मानते हुए मूल्यांकन (Assessment) करना चाहिए, ताकि प्रतिभा के अनुसार ही नंबर मिल सके. 10वीं और 12वीं कक्षा के करीब 21 लाख स्टूडेंट्स को प्रमोट करने से पहले शिक्षा विभाग ने मार्क्स को लेकर पॉलिसी बनाने की बात कही थी. 

सीबीएसई और राजस्थान बोर्ड की परिस्थितियों में बड़ा अंतर:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने दो जून को ही दसवीं व बारहवीं के स्टूडेंट्स को प्रमोट कर दिया था. तब CBSE की नीतियों के आधार पर ही स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का निर्णय हुआ था. हकीकत में सीबीएसई और राजस्थान बोर्ड की परिस्थितियों में बड़ा अंतर है. सीबीएसई बोर्ड पिछले सत्र में बच्चों का एसेसमेंट कर चुका था, जबकि आरबीएसई ने स्कूलों में ऑफलाइन क्लासेज होने के बावजूद टेस्ट नहीं लेने के आदेश दिए थे. ऐसे में CBSE तो अपने एसेसमेंट के आधार पर स्टूडेंट्स को मार्क्स दे सकता है लेकिन शिक्षा विभाग (Education Department) के पास ऐसा कोई आधार नहीं है.

पिछली कक्षाओं में लिए गए मार्क्स ही एकमात्र आधार:
राजस्थान के शिक्षा विभाग के पास स्टूडेंट के एसेसमेंट के लिए अब पिछली कक्षाओं में लिए गए मार्क्स ही एकमात्र आधार है. 12वीं में प्रमोट हुए करीब 10 लाख स्टूडेंट्स ने तो 11वीं का टेस्ट भी नहीं दिया था. वहां भी उसे सीधे प्रमोट किया गया. ऐसे में इस स्टूडेंट का अंतिम असेसमेंट दसवीं कक्षा की परीक्षा ही था. इसी तरह दसवीं के स्टूडेंट का अंतिम असेसमेंट आठवीं कक्षा की परीक्षा है. इसके मार्क्स विभाग के पास उपलब्ध है. आठवीं के मार्क्स के आधार पर दसवीं के मार्क्स दिए जा सकते हैं.

पिछली तीन कक्षाओं के मार्क्स के आधार पर तय हो परिणाम: एक्सपर्ट
एक्सपर्ट का मानना है कि एक विकल्प ये भी है कि दसवीं के स्टूडेंट को 8वीं, 9वी और 10वीं के असेसमेंट के आधार पर मार्क्स दिए जाए. इसमें 8वीं के सभी विषयों के मार्क्स है, जबकि 9वीं व 10वीं में इंटरनल मार्क्स ही उपलब्ध है. इसी तरह बारहवीं के स्टूडेंट के तीन वर्षों के असेसमेंट में दसवीं के सभी विषयों के मार्क्स है जबकि ग्यारहवीं और 12वीं के इंटरनल मार्क्स ही है. ऐसे में 10वीं के स्टूडेंट के लिए आठवीं और 12वीं के स्टूडेंट के लिए 10वीं के मार्क्स का अनुपात अधिक रखते हुए शेष दो क्लासेज का कम अनुपात जोड़ा जा सकता है.

यूनिवर्सिटी के लिए भी संकट:
आमतौर पर सभी बड़े यूनिवर्सिटी (Univercity) में एडमिशन का आधार 12वीं क्लास के मार्क्स ही होते हैं. अब सभी बच्चे प्रमोट हुए हैं तो वो एडमिशन किस आधार पर देंगे. सीटें कम और एडमिशन के इच्छुक स्टूडेंट्स अधिक होने के कारण अब BSC जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश मुश्किल हो गया है. कोई आश्चर्य नहीं कि युनिवर्सिटी अपने यहां प्रवेश के लिए अब प्री टेस्ट का आयोजन रख लें। उस प्री टेस्ट को क्लियर करने पर ही मेरिट आधार पर प्रवेश दिया जा सकता है.

निदेशालय ने सरकार को पूर्व में भेजे थे कई सुझाव:
स्टूडेंट्स को प्रमोट करने से पहले माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने कई सुझाव सरकार को भेजे थे. अब ये सभी सुझाव बेकार हो गए क्योंकि किसी भी स्तर पर एग्जाम नहीं कराने का निर्णय हो गया है. इसमें छत्तीसगढ़ की तरह टेक होम एग्जाम बड़ा विकल्प था, जिसमें स्टूडेंट को घर पर ही पेपर और एंसवर शीट दी जा रही है. पांच दिन में पांच विषयों की आंसर शीट (Answer Sheet) स्टूडेंट्स को जमा करानी है. इसी तरह महत्वपूर्ण विषयों का एक ही पेपर बनाने का भी विकल्प था. जैसे साइंस बायो (Science Bio) के स्टूडेंट्स का फिजिक्स, केमिस्ट्री औ बायो का एक ही पेपर बनता. दसवीं के पांचों विषयों का एक ही पेपर हो जाता. अब प्रमोट के आदेश होने के बाद किसी तरह की परीक्षा संभव नहीं है.

कर सकते थे इंतजार:
एक्सपर्ट का कहना है कि स्टूडेंट्स को इस तरह प्रमोट करने के बजाय शिक्षा विभाग कुछ दिन के लिए इंतजार कर सकता था. प्रदेशभर में कोरोना के केस अब कम हो गए हैं. जुलाई तक एग्जाम का प्रयास हो सकता था. पिछले साल भी शिक्षा विभाग ने दो महीने रुक कर दो विषयों का एग्जाम लिया था. इसमें किसी तरह की कोई रियायत बच्चों को नहीं दी गई.

अदालती दावपेंच संभव:
शिक्षा विभाग के सामने यह समस्या भी है कि वो जो भी पॉलिसी अब तय करेगा, वो सौ प्रतिशत स्वीकार नहीं हो सकती. ऐसे में किसी न किसी आधार पर यह मामला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है. ऐसे में निर्णय से पहले बहुत सावधानी बरतने का प्रयास हो रहा है.

आंकड़ों में RBSE की दोनों क्लासेज:

इस बार दोनों क्लासेज में स्टूडेंटस : 21 लाख 60 हजार 217

दसवीं में स्टूडेंट्स : 12 लाख 14 हजार 512

दसवीं मूक-बधिर में स्टूडेंटस : 1763

10वीं वोकेशनल में स्टूडेंटस : 48 हजार 846

प्रवेशिका परीक्षा में स्टूडेंट्स : 8 हजार 355

12वीं में स्टूडेंट्स : 8 लाख 82 हजार 112 परीक्षार्थियों

12वीं मूक बधिर : 809

वरिष्ठ उपाध्याय : 3 हजार 823

मार्क्स देकर ही प्रमोट करना पड़ेगा: पांडे
बीकानेर के एज्यूकेशन एक्सपर्ट (Education Expert in Bikaner) महेंद्र पांडे के अनुसार सरकार को मार्क्स देकर ही स्टूडेंट्स को प्रमोट करना पड़ेेगा. अन्यथा आगे एडमिशन में मुश्किल आयेगी. पिछली तीन कक्षाओं का एसेसमेंट लेकर मार्क्स देने चाहिए. दसवीं के स्टूडेंट को आठवीं बोर्ड और बारहवीं के स्टूडेंट को दसवीं बोर्ड के मार्क्स का बड़ा अनुपात रखकर मार्क्स देने चाहिए.

 

अब कॉलेज के लिए प्री टेस्ट हो:
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा के पूर्व संयुक्त निदेशक (Former Joint Director of Rajasthan Secondary Education) विजय शंकर आचार्य की माने तो बेहतर होगा कि कॉलेज में प्रवेश के लिए एक प्री टेस्ट का आयाेजन किया जाये। प्रदेशभर के लिए एक प्री टेस्ट को आधार बनाया जाये. इसी के मार्क्स के आधार पर कॉलेज में प्रवेश होना चाहिए. जो बच्चे राजस्थान से बाहर प्रवेश ले रहे हैं, वहां भी इसी प्री टेस्ट (Pre Test) को मान्य मानना चाहिए. पिछली कक्षाओं के मार्क्स को आधार बनाकर मार्क्स भी दे सकते हैं.

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