VIDEO: RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का एक साल का कार्यकाल हुआ पूरा, 1 साल में मिलीं दो बड़ी उपलब्धि 

VIDEO: RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का एक साल का कार्यकाल हुआ पूरा, 1 साल में मिलीं दो बड़ी उपलब्धि 

जयपुर: राजस्थान क्रिेकेट संघ की मौजूदा कार्यकारिणी का एक साल का कार्यकाल पूरा हो गया है. इस एक साल में आरसीए में कोई झगड़ा फसाद नहीं हुआ, लेकिन क्रिकेट भी नहीं हो सकी. संघ के अध्यक्ष वैभव गहलोत की सबसे बड़ी उपलब्धि है, आरसीए के खुद के स्टेडियम के लिए सरकार से जमीन आवंटन की सहमति कराना. 

RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का एक साल का कार्यकाल हुआ पूरा
-आरसीए को पटरी पर लाने में ही बीत गया एक साल
-एक साल में दो सबसे बड़ी उपलब्धि रही वैभव गहलोत की
-आरसीए के स्टेडियम के लिए जमीन की हरी झंडी दिलाई सरकार से
-सरकार ने जमीन आवंटन के लिए दे दी है सैद्धांतिक सहमति
-जोधपुर के बरकतुल्लाह स्टेडियम के लिए भी बजट स्वीकृत कराया
-लेकिन क्रिकेट पूरी तरह ठप रही है इस एक साल में
-वैभव का एक साल का अधिकांश कार्यकाल कोरोना की भेंट चढ़ा
-अब नए साल में आरसीए को वैभव से है बड़ी उम्मीदें
-आईपीएल व अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजन का बड़ा टास्क है वैभव के सामने

वैभव ने उठाया स्टेडियम को जीवंत करने का बीड़ा: 
पिछले साल अक्टूबर में वैभव गहलोत के अध्यक्ष बनने के साथ ही आरसीए में लंबे समय से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया था और उम्मीद की जा रही थी कि आरसीए अपने खोऐ हुए वैभव को हासिल कर लेगा. इस एक साल के कार्यकाल का अगर हम लेखा जोखा देखे, तो पाएंगे कि आरसीए के पास उपलब्धि कम और चुनौतियां ज्यादा रही. सबसे पहले बात करते हैं बड़ी उपब्लधियों की. पिछले एक साल में आरसीए बिलकुल शांत रहा और किसी तरह का नया विवाद नहीं उपजा. जबकि इससे पहले आरसीए में लगातार विवाद चल रहा था और कई बार ताले भी लग चुके थे. वैभव गहलोत की सबसे बड़ी उपलब्धि की बात करें, तो वैभव आरसीए के खुद के स्टेडियम के लिए जमीन के लिए सरकार से हरी झंडी दिलाने में कामयाब हुए. आरसीए के स्टेडियम के लिए जमीन चिन्हित हो गई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आवंटन पत्र भी मिल जाएगा. इसके साथ ही वैभव ने जोधपुर के बरकतुल्लाह खान स्टेडियम की भी सुध ली. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के साथ वैभव ने मीटिंग करके इस स्टेडियम को जीवंत करने का बीड़ा उठा लिया. धारीवाल ने वैभव की मंशा के अनुसार बजट भी आवंटित कर दिया.

स्टेडियम के लिए तो एक साल में हुए काफी प्रयास:
स्टेडियम के लिए तो एक साल में काफी प्रयास हुए, लेकिन बात क्रिकेट की करें, तो पिछले एक साल में प्रदेश में क्रिकेट नहीं हो सकी. हालांकि इसके पीछे का कारण आरसीए का प्रबंधन नहीं बल्कि कोविड का महाप्रकोप है. मार्च से ही प्रदेश में खेल गतिविधियां बंद है. ऐसे में आरसीए न अपने घरेलू टूर्नामेंट करा सका और न ही बीसीसीआई. हालांकि वैभव ने सरकार को पत्र लिखकर घरेलू टूर्नामेंट कराने का प्रयास किया था, लेकिन बोर्ड की गाइडलाइंस के चलते टूर्नामेंट नहीं हो सके. अपशकुनी माने जाने वाले आरसीए के कांच वाले दफ्तर से अब पदाधिकारियों का दफ्तर हट गया है और वेभव गहलोत सहित सभी पदाधिकारियों का नया ऑफिस बन गया है, लेकिन इस एक साल में वैभव गहलोत अपनी पूरी कार्यकारिणी नही बना सके. नए नियमों के तहत आरसीए की 9 सदस्यीय पूरी कार्यकारिणी तब मानी जाती है, जब उसमें दो खिलाड़ियों के प्रतिनिधि हो और एक एजी का अफसर. इनकी नियुक्ति आज तक नहीं हो सकी. इतना ही नहीं आरसीए एक साल में अपना सीईओ नहीं ढूंढ सका. आरसीए में पहले से बनाई गई चयन समिति तो विवादों के कारण भंग कर दी गई, लेकिन नई चयन समिति बाद में नहीं बन सकी. क्रिकेट कमेटी सहित अन्य कमेटियों के गठन का भी अभी इंतजार ही है.

30 फीसदी से अधिक कार्यकाल खत्म:
आरसीए की कार्यकारिणी का कार्यकाल महज तीन साल का होता है और इसमे से एक साल बीत गया, यानी 30 फीसदी से अधिक कार्यकाल खत्म हो गया है. कोरोना का प्रकोप तो आने वाले कुछ समय और रहना है, ऐसे में अब आरसीए को इसकी चुनौती का सामना करते हुए प्रदेश में क्रिकेट कराने पर ध्यान देना होगा.जिला संघों की राजनीति अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन प्रदेश में प्रतिभावान खिलाड़ियों को ही मौका मिले और कोई बाहरी यहां हक नहीं जमा सके, इसके लिए भी वैभव गहलोत को अभी नियम कायदे बनाने होंगे. आरसीए में विवाद के चलते लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मैच यहां नहीं हो सके, ऐसे में वैभव गहलोत को बोर्ड अध्यक्ष सौरव गांगुली से अपने मधुर रिश्तो को भुनाते हुए राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी के प्रयास भी करने होंगे. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि वैभव गहलोत के कार्यकाल का पहला एक साल तो कोरोना की भेंट चढ़ गया, लेकिन शेष बचे दो साल में उनको अपनी टीम के साथ ऐसे कदम क्रिेकेट और खिलाड़ियों के हित में उठाने चाहिए, ताकि उनका कार्यकाल याद रखा जाए.

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