जयपुर VIDEO: जयपुर एयरपोर्ट पर तीसरी आंख! राडार इंस्टॉलेशन का काम पूरा, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: जयपुर एयरपोर्ट पर तीसरी आंख! राडार इंस्टॉलेशन का काम पूरा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर आगामी दिनों में एक बड़ी सुविधा जुड़ने जा रही है. जयपुर एयरपोर्ट पर अब 2 राडार स्थापित किए गए हैं. इनसे जयपुर एयरपोर्ट और आस-पास के 120 नॉटिकल माइल इलाके में उड़ने वाले विमानों पर एयरपोर्ट प्रशासन की सीधी नजर होगी. किस तरह से मिलेगा इसका फायदा और क्या होंगे बदलाव. जयपुर एयरपोर्ट पर पहली बार राडार लगाए गए हैं. एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर के पास 2 राडार लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है. इनके इंस्टॉलेशन के बाद एयरपोर्ट प्रशासन के पास इन प्रिंसिपल अप्रूवल आ चुका है. अब सेफ्टी स्टैंडर्ड के हिसाब से नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से अनुमति मांगी गई है. 

दरअसल अभी तक जयपुर एयरपोर्ट पर राडार नहीं लगे हुए थे. यहां पर फ्लाइट्स की लैंडिंग के लिए प्रोसीजरल सिस्टम अपनाया जा रहा था. इसके तहत जिन विमानों में एडीएस बी ट्रांसपोंडर लगा होता था, उनकी तो रियल टाइम लोकेशन एयर ट्रैफिक कंट्रोल की टीम को पता रहती थी. लेकिन जिन विमानों में एडीएस बी उपकरण नहीं लगा होता, उनकी रियल टाइम लोकेशन नहीं मिल पाती थी. ऐसे में विमानों की लोकेशन के लिए एटीसी को पायलट के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन राडार लगने के बाद यह स्थिति नहीं रहेगी. राडार लगने पर सभी तरह के विमानों की रियल टाइम लोकेशन एटीसी के पास उपलब्ध रहेगी. 

जानिए, क्या बदलाव होने जा रहा है एयरपोर्ट पर:
- पहला रडार ASR यानी एप्रोच सर्विलांस राडार लगाया गया
- दूसरा रडार MSSR यानी मोनोपल्स सैकंडरी सर्विलांस राडार लगाया गया
- ASR के जरिए आसमान में उड़ते विमानों की लोकेशन पता चलेगी
- MSSR के जरिए विमानों की एक्युरेसी, कॉल साइन, फ्लाइट संख्या पता चलेगी
- अभी जयपुर एयरपोर्ट पर कोई राडार नहीं
- विमानों की एप्रोच या प्रोसीजरल लैंडिंग कराई जाती है
- नए राडार लगने पर विमानों की एक्युरेसी बहुत बेहतर हो जाएगी
- जयपुर एयरपोर्ट के राडार का दायरा 120 नॉटिकल माइल होगा
- करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से दोनों राडार लगाए गए

जयपुर एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जल्द ही डीजीसीए से अनुमति मिल जाएगी और अप्रैल माह तक इनका उपयोग शुरू हो जाएगा. दोनों राडार शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा फायदा एयरलाइंस को होगा. अभी अप्रोच लैंडिंग में विमान को 7 मिनट का समय लगता है, लेकिन अब यह समय नहीं लगेगा. इससे एयरलाइंस को विमानों में फ्यूल कंजंप्शन में कमी आएगी. समय कम लगने से यात्रियों का समय भी बचेगा. प्रत्येक विमान की एक्युरेट लोकेशन पता चलने से लैंडिंग और टेक ऑफ की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होगी.

राडार से घटेगा विमानों का लैंडिंग टाइम:
- अभी विमान ओवरहैड आता है, फिर लैंडिंग कराई जाती है.
- राडार लगने से 1 से 2 बार चक्कर लगाने की समस्या समाप्त होगी.
- 2 विमानों के बीच में हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल डिस्टेंस घटेगी.
- यानी एक के बाद एक कम समय में फ्लाइट्स की लैंडिंग हो सकेगी.
- राडार लगने पर 30 फ्लाइट तक का आवागमन 1 घंटे में संभव हो सकेगा.
- प्रत्येक फ्लाइट का प्रोसीजरल लैंडिंग टाइम बचेगा, यानी 7 मिनट की बचत

एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि एक महीने में प्रत्येक विमान का करीब 3 घंटे का समय बचेगा. 2 विमानों के बीच में कम दूरी रखते हुए सुरक्षित तरीके से विमानों का आवागमन हो सकेगा. कुलमिलाकर नए रडार लगने से न केवल एयरलाइंस को फ्यूल की बचत होगी, साथ ही यात्रियों की हवाई यात्रा भी अधिक सुरक्षित होगी. साथ ही एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल के अधिकारियों के लिए भी सुविधा बढ़ेगी.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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