VIDEO: राहुल गांधी का पत्र सभी कांग्रेसियों के लिया बना अहम 'दस्तावेज'

Naresh Sharma Published Date 2019/07/05 09:50

जयपुर: राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से चार पेज के इस्तीफे की औपचारिक लिखित घोषणा करके लगभग सवा महीने से अध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर जारी असमंजस खत्म कर दिया है. लेकिन अब पूरे कांग्रेस हलके में इसी पत्र की चर्चा है. हर कांग्रेसी राहुल के इस पत्र को पढ़कर वायरल कर रहा है, जो कांग्रेस के लिए अहम दस्तावेज बन गया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कहा है कि सभी कांग्रेसी नेताओं, विधायकों, सांसदों व मंत्रियों से कहा है कि वे राहुल गांधी के चार पन्नों के पत्र को कम से कम 10 बार पढ़े. इस पत्र में कई बात छिपी है और इससे आने वाले वक्त में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी. 

सीएम ने भी कही पत्र को पढ़ने की बात:
दो दिन पहले राहुल गांधी ने चार पेज का पत्र क्या ट्वीट किया, पूरी कांग्रेस में हलचल मच गई. राहुल इस पत्र के माध्यम से साफ स्पष्ट कर दिया कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नहीं रहेंगे, लेकिन साथ ही कांग्रेसजनों को लिखित में कई सीख भी दे गए. कांग्रेसी नेता भी इस पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं. कोई राहुल गांधी से फिर से अपने फैसले पर विचार करने के लिए कह रहा है, तो कोई राहुल गांधी के फैसले का सम्मान करने की बात बोल रहा है. इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि हर कांग्रेस कार्यकर्ता को कम से कम 10 बार इस चार पन्ने के पत्र को पढ़ना चाहिए. यह पत्र अब अहम दस्तावेज बन गया है और इसमें कई बातें छीपी है. इस पत्र में लिखी बाते आने वाले वक्त में कांग्रेस को मजबूती प्रदान करेगी. पत्र का साफ संदेश है कि आने वाले वक्त में अंतिम जीत सत्य की ही होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि आरएसएस व भाजपा के खिलाफ लड़ने वाले लोगों के लिए यह पत्र प्रेरणास्त्रोत की तरह काम करेगा. 

कांग्रेसजनों को लिखित में कई सीख:
मुख्यमंत्री ने जिस पत्र को पढ़ने की बात कही है. आखिर उसमें क्या लिखा है यह भी आपको बताते है. राहुल गांधी ने तीन जुलाई को शाम करीब 4 बजे चार पन्नों का पत्र लिखा. इस पत्र को पढ़ते ही कांग्रेसी सकते में आ गए, क्योंकि राहुल ने साफ कर दिया कि वे अध्यक्ष नहीं है और किसी और को अध्यक्ष चुना जाए. पत्र का मजूमन क्या है, आप भी देखिए:

राहुल का पत्र:
'कांग्रेस पार्टी के लिए काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है. कांग्रेस पार्टी की विचारधारा हमेशा से भारत जैसे खूबसूरत देश की सेवा करना रही है. मैं पार्टी अध्यक्ष के रूप में लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी लेता हूं. पार्टी को भविष्य में आगे बढ़ाने के लिए हार की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, इसलिए मैंने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है. पार्टी को अगर आगे बढ़ाना है, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के लिए कई लोगों को जिम्मेदारी लेनी होगी. ऐसे में पार्टी अध्यक्ष होने के नाते अगर मैं हार की जिम्मेदारी नहीं लेता हूं और दूसरो लोगों को जिम्मेदार ठहराता हूं, तो यह बेईमानी होगी. मेरे कई सहयोगियों ने मुझसे कहा कि आप पार्टी अध्यक्ष के लिए किसी नाम का चुनाव करें, लेकिन यह अनुचित होगा कि मैं किसी नाम का सुझाव दूं. मैंने इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी को सुझाव दिया है कि वह कुछ लोगों को यह जिम्मेदारी दें और वह एक नए अध्यक्ष का चुनाव करें. मैं इस काम में उनका पूरा सहयोग करूंगा. मेरा संघर्ष कभी बेकार नहीं जाएगा. 

भाजपा का मैंने हमेशा विरोध किया है. मैं आखिरी दम तक भाजपा की विचारधारा का विरोध करता रहूंगा. मेरा यह विरोध निजी नहीं बल्कि भारत की विचारधारा के आधार पर है. यह कोई नई लड़ाई नहीं है. यह भारत की धरती पर हजारों साल से लड़ी गई है. जब वे द्वेष और घृणा की राजनीति करते हैं तो मैं प्यार की राजनीति करता हूं. यह लड़ाई हमारे करोड़ों भारतीय जनता की लड़ाई है. हमारे संविधान पर हमला देश के ताना-बाना को खराब करने का है. मैं कांग्रेस का एक वफादार सैनिक हूं और भारत माता का सच्चा सपूत भी. ऐसे में देश को बचाने के लिए आखिरी सांस तक लड़ता रहूंगा. मैंने प्रधानमंत्री और आरएसएस से लड़ाई लड़ी. मैं उन संस्थाओं के लिए लड़ाई लड़ी, जिन पर उन्होंने कब्जा कर लिया. मैंने ये लड़ाई इसलिए लड़ी क्योंकि भारत से प्यार करता हूं. मैंने देश की विचारधारा के लिए यह लड़ाई लड़ी. इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस पार्टी को नया रूप देना होगा. आज भाजपा भारतीयों की आवाज को दबा रही है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी की यह जिम्मेदारी है कि वह उन्हें बचाए. मैं पूरी ताकत से कांग्रेस की विचारधारा की लड़ाई लड़ता रहूंगा. मैं हमेशा पार्टी के लिए हाजिर रहूंगा, जब कभी भी मेरी जरूरत होगी या मेरी सलाह मांगी जाएगी. भारत में यह प्रचलन बन गया है कि कोई मजबूत व्यक्ति सत्ता नहीं छोड़ता, लेकिन हम बिना सत्ता के मोह छोड़े विचारधारा की लड़ाई में अपने प्रतिद्वंद्वी को नहीं हरा सकते. मैं एक पैदाइशी कांग्रेसी हूं और पार्टी भी सदा हमारे साथ है. मैं इस बचाने के लिए आखिरी दम तक लड़ूंगा. 

जातिवाद व छदम राष्ट्रीयता की बात करके भाजपा ने चुनाव लड़ा:
इस पत्र के विचार को लेकर ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे कहा कि एक धर्म, जातिवाद व छदम राष्ट्रीयता की बात करके भाजपा ने चुनाव लड़ा. भाजपा ने घोषित कर रखा है कि वे ही राष्ट्रवादी है. एक बार गुमराह करके सत्ता में आ सकते हैं, लेकिन हर बाद ऐसा नहीं होता. वक्त बताएगा कि क्या होगा, लेकिन जिस तरह से भाजपा जीती है, उस तरह हारे, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. 

राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद अब तय हो गया है कि कांग्रेस की कमान नए हाथों में होगी, लेकिन यह चेहरा कौन होगा इस पर अभी कोई कुछ नहीं बोल रहा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह काम मेरा नहीं है. कांग्रेस में CWC ही ऐसे फैसले लेती है. वही फैसले लेने के लिए सर्वोच्च बॉडी है. अब CWC के फैसले का इंतजार कीजिए. 

कांग्रेसजनों के लिए पत्र बना दस्तावेज:
राहुल गांधी का इस्तीफा का पत्र कांग्रेसजनों के लिए भले ही एक दस्तावेज बन गया, लेकिन इस पत्र ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भूचाल ला दिया है. कांग्रेसियों को लोकसभा में हार के बाद इतनी निराशा नहीं हुई, जितना मनोबल उनका पिछले एक महीने के घटनाक्रम ने तोड़ रखा है. अब देखना यह है कि राहुल गांधी की जगह कौन व्यक्ति कांग्रेस की कमान संभाल संभालेगा. हालांकि जो भी अध्यक्ष बनेगा, उसके लिए यह कांटो के ताज से कम नहीं होगा, क्योंकि चुनाव की चुनौतियां तो तीन महीने बाद ही शुरू हो जाएगी.

... संवाददाता नरेश शर्मा की रिपोर्ट 

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