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VIDEO: कांग्रेस में गर्म अंदरुनी सियासत, राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या नहीं, संशय बरकरार

VIDEO: कांग्रेस में गर्म अंदरुनी सियासत, राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या नहीं, संशय बरकरार

जयपुर: राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे या नहीं इसे लेकर कांग्रेस के अंदर सियासत गर्म है. 25 मई को दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एक लाईन प्रस्ताव के तहत राहुल गांधी की ओर से इस्तीफे की पेशकश को ठुकरा दिया था. सीडब्लूसी ने एकमत से राहुल गांधी को संगठन में बदलाव के अधिकार सौंप दिये थे, लेकिन माना यही जा रहा है कि वो अध्यक्ष पद पर बने नहीं रहना चाहते. ऐसे में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तराधिकारी के तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष की ताजपोशी हो सकती है. 

वायनाड़ दौरे के बाद राहुल से कांग्रेसियों को थी उम्मीद:
राहुल गांधी का न्याय सिद्धांत लोकसभा चुनाव परिणामों के बीच कहीं खोता हुआ नजर आया. उधर राहुल गांधी ने भी मन बना लिया कि वो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नहीं रहेंगे. सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और तमाम कांग्रेसी दिग्गजों के मनुहार के बावजूद राहुल गांधी अपने निर्णय पर अडिग बने हुए हैं. कांग्रेसियों को उम्मीद थी कि वायनाड़ दौरे के बाद राहुल गांधी की मन और विचार बदलेंगे, लेकिन ऐसा नजर नहीं आ रहा है. राहुल गांधी लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर बेहद निराश है. खासतौर पर कांग्रेस के सत्ता वाले राज्यों में हुई पराजय ने भी उन्हें अंदर तक झकझोरा. यहीं कारण है कि राहुल गांधी ने शायद यह तय कर लिया है कि वे सीडब्लूसी के सदस्यों की मान मनुहार के बाद पद पर भले ही कुछ दिनों तक बने रहे, लेकिन पूर्णकालिक तौर पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका में नहीं रहना चाहते है. 

हो सकती है कार्यकारी अध्यक्ष पद की रचना:
निचले स्तर तक संगठन में बदलाव की प्रक्रिया को भी नये अध्यक्ष के जरिये पूरा कराना चाहते है. ऐसे में कांग्रेस के अंदर नई सोच को बल मिला है कि जिसके तहत कार्यकारी अध्यक्ष पद की रचना की जाये और इस पद पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता को बैठाया जाये. चाहे वो सुशील कुमार शिंदे, आनंद शर्मा हो या मल्लिकार्जुन खड़गे. दिल्ली में इस समय कांग्रेस के अंदर हलचल तेज है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने दिल्ली के दौरे पर उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, आनंद शर्मा, भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सरीखे बड़े नेताओं से मुलाकात और बातचीत की. गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक समेत प्रमुख नेताओं से भी बातचीत हुई है. कांग्रेस के इन अग्रिम पंक्ति के नेताओं की कोशिश है कि राहुल गांधी अपने पद पर बरकरार रहे. जिससे कांग्रेस संगठन की एकता और ताकत बनी रहे. लिहाजा अलग अलग विचार सुनने को मिल रहे है. 

राहुल गांधी की सोच !
—कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहने के बजाये संगठन की मजबूती पर ध्यान देना
—पद पर रहे बगैर कांग्रेस को निचले स्तर तक फिर से खड़ा करना 
—राज्यव्यापी दौरों के जरिये कांग्रेस के आम वर्कर से जुड़ना और संवाद करना
—लोगों के बीच जाकर भारी पराजय के मूल कारणों को तलाशना
—कांग्रेस क्यों कमजोर हो रही है इसकी हकीकत को सही मायने में तलाशना
—संगठनात्मक दायित्वों के साथ राहुल को लगता है वो अपने नये विजन के साथ न्याय नहीं कर पायेंगे
—राहुल गांधी शायद चाहते है गैर गांधी परिवार का व्यक्ति कांग्रेस अध्यक्ष की बागडौर संभाले
—सीडब्लूसी बैठक में राहुल गांधी ने अपने मन के विचार सबको बता दिये थे
—आहत मन से उन्होंने पराजय को लेकर आत्मचिंतन और आत्ममंथन की बात कही
—राहुल गांधी को शायद लगता है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर नवाचार करने की महत्ती जरुरत है
—युवा और नये वर्ग को कांग्रेस से जोड़ना है
—ब्लॉक स्तर तक निराशा में डूबे कांग्रेसी के अंदर जोश और ऊर्जा भरनी है 
—राहुल ने मन की बात सबसे पहले अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को बता दी थी
—सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अंतिम फैसला राहुल गांधी पर ही छोड़ रखा है

कांग्रेस के वरिष्ठ-युवा नेताओं की सोच !
—वरिष्ठ नेताओं में कहे जाते है ए के एंटनी, मोती लाल वोरा, अहमद पटेल, अशोक गहलोत
—पी चिदम्बरम, कमलनाथ, गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे
—सुशील कुमार शिंदे, कैप्टन अमरिंदर सिंह, जनार्दन द्विवेदी, शीला दीक्षित, वेणुगोपाल
—मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह समेत दिग्गज आते है
—युवा नेताओं की टोली में ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, आर पी एन सिंह
—शशी थरुर, जतिन प्रसाद, मिलिंद देवड़ा सरीखे नेता शुमार है 
—कांग्रेस के इन तमाम दिग्गजों की राय है राहुल गांधी अपने पद पर बरकरार रहे
—वरिष्ठ और युवा नेताओं का मानना है कि गांधी परिवार एक ताकत और संजीवनी की तरह है
—गांधी नाम से ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच जोश बरकरार रहता है
—कांग्रेस को बगैर गांधी के नहीं देखा जा सकता है
—दिग्गजों की सोच है कि गैर गांधी को बनाया ही अगर जाये तो वो कार्यकारी अध्यक्ष तक सीमित रखा जाये
—कांग्रेस में गैर गांधी के विकल्प को लेकर वरिष्ठ और युवा नेता एकमत नहीं है
—इनका यही कहना है कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर बने रहे और निचले स्तर पर जो भी बड़े बदलाव करने हो वो कर लिये जाये
—कांग्रेस चिंतको का यह भी मानना है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य अध्यक्ष पद नहीं संभालेगा तो बिखराव के हालात भी पैदा हो सकते है !
—खासतौर से सत्ता वाले राज्यों के अंदर ,जहां बीजेपी की पैनी निगाहें टिकी है

अध्यक्षीय पद ज्यादा समय नहीं रहा गैर गांधी परिवार का सदस्य:
कांग्रेस में गैर गांधी परिवार के सदस्य की अध्यक्षीय पद का इतिहास कोई बहुत अच्छा नहीं रहा है. दुनिया की सबसे पुरानी इस पार्टी के अंदर नेहरु-गांधी युग की ही परम्परा रही है. राजीव गांधी की असमय मौत के बाद बदले हालातों में सीताराम केसरी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था. सब जानते है कि उस समय गांधी परिवार के वफादारों ने कांग्रेस तिवारी का गठन कर लिया था. जब सोनिया गांधी ने इन वफादारों के दबाव के बाद अध्यक्ष बनने की हामी भरी तो सीताराम केसरी को पद से हटना पड़ा था. कांग्रेस तिवारी का मुख्य कांग्रेस में विलय कर दिया गया. सोनिया गांधी की लीड़रशीप में कांग्रेस पार्टी ना केवल सशक्त रही बल्कि यूपीए सरकार का गठन करने भी कामयाब हो गई. सोनिया गांधी के लिये कहा जाता है कि उन्होंने पीएम पद को त्याग कर राजनीति को अलग संदेश दिया, यही कारण है कि कांग्रेस का कार्यकर्ता सोनिया गांधी को सम्मान और आदर के भाव से सदैव देखता है. 

सोनिया गांधी पर सबकी निगाहें:
मोदी लहर अगर नहीं होती तो सोनिया गांधी को शायद इतनी सक्रिय सियासत अभी नहीं करनी पड़ती, क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी को बागडौर सौंप दी थी, लेकिन मौजूदा कालखंड में कांग्रेस सबसे बुरे सियासी दौर से गुजर रही है. लिहाजा पार्टी को संभालने औऱ ताकत देने के लिये फिर से सोनिया गांधी पर सबकी निगाहें टिकी है. क्या वो अपने पुत्र को मना पायेंगी कि वो अध्यक्ष पद पर बरकरार रहे या फिर वे अपने पुत्र की इच्छा का सम्मान करेंगी. कांग्रेस की अंदरुनी सियासत के भविष्य के गर्भ में इन तमाम तथ्यों पर गौर किया जा रहा है. 

... संवाददाता नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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जयपुर: 28मई को कांग्रेस महा अभियान शुरु करने जा रही है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने विडियो कांफ्रेसिंग की. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट VC में शामिल हुए. तय हुआ है कि वर्तमान परिस्थिति में संकट के दौर से गुजर रहे लाखों की संख्या में प्रवासी श्रमिकों, किसानों, संगठित क्षेत्रों के कामगारों, एमएसएमई, छोटे कारोबारियों और दैनिक मजदूरों की आवाज को केन्द्र सरकार तक पहुंचाने के लिये कांग्रेस आवाज बुलंद करेगी. प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी 28मई को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ऑनलाईन अभियान चलायेगी. इस सम्बन्ध में मंगलवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने समस्त राज्यों के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों और कांग्रेस विधायक दल के नेताओं की वी.सी. आयोजित की.

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ऑनलाइन अभियान की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा:
इसमें ऑनलाइन अभियान की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई. सचिन पायलट ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने समय-समय पर केन्द्र सरकार को प्रवासी श्रमिकों और मजदूरों की पीड़ा को कम करने हेतु अनेक उपयोगी सुझाव दिए , जिन्हें केन्द्र सरकार ने सिरे से नकार दिया और प्रवासी श्रमिकों, किसानों, दैनिक मजदूरों, एमएसएमई, लघु उद्यमियों और गैर-संगठित क्षेत्रों के कामगारों को किसी प्रकार का सहयोग करने की बजाय उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया है. इन वर्गों की आवाज को केन्द्र सरकार तक पहुँचाने के उद्देश्य से उक्त अभियान चलाया जायेगा.

10 हजार रुपये की मदद की जाये:
पायलट ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण वर्तमान परिस्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध करवाकर आर्थिक सम्बल प्रदान करने में मनरेगा योजना मददगार साबित हुई है. उन्होंने बताया कि राजस्थान में मनरेगा के तहत श्रमिक नियोजन 40 लाख से अधिक हो गया है जो कि गत् 10 वर्षों में सर्वोच्च है. पायलट ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करेंगी कि लॉकडाउन के कारण अपना रोजगार खो चुके परिवार, जो आयकर के दायरे से बाहर हैं, उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा तुरन्त प्रभाव से 10 हजार रुपये की मदद सीधे नकद के रूप में की जाए. उन्होंने प्रदेश के सभी कांग्रेसजनों से आह्वान किया है कि इसके लिए फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब तथा अन्य सोश्यल मीडिया माध्यमों से इस देशव्यापी ऑनलाईन कैम्पेन में अनिवार्य रूप से प्रतिभागी बनकर अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करें.

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राहुल गांधी ने बोला मोदी सरकार पर हमला, कहा- देश में लॉकडाउन पूरी तरह से फेल

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नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि लॉकडाउन के चारों चरण फेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दो महीने पहले कहा था कि हम 21 दिन में कोरोना वायरस को हरा देंगे, लेकिन अब 60 दिन बाद हमारे देश में कोरोना वायरस तेजी से बढ़ रहा है और लॉकडाउन को हटाया जा रहा है. ऐसे में लॉकडाउन का मकसद पूरी तरह से फैल हो गया है. 

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महामारी घटने के बजाय दिन पर दिन बढ़ती जा रही: 
उन्होंने कहा कि जो होना था वह नहीं हुआ. देश को मालूम होना चाहिए कि सरकार की क्या रणनीति है. लॉकडाउन को लागू हुए करीब 60 दिन पूरे हो चुके हैं. लेकिन ये महामारी घटने के बजाय दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूर परेशान हैं. सरकार उनकी परेशानियों और मुसीबतों को कैसे दूर करेगी?

पीएम को फिर फ्रंटफुट पर आना होगा:
राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी शुरुआती वक्त में फ्रंटफुट पर खेलते हुए दिखे, लेकिन अब वो बैकफुट पर हैं. लेकिन पीएम को फिर फ्रंटफुट पर आना होगा. राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने जो पैकेज में ऐलान किया है, उससे कुछ नहीं होने वाला है. सरकार में बैठे लोगों में डर है कि अगर गरीबों को ज्यादा पैसा दिया, तो बाहर के देशों में गलत संदेश जाएगा. राहुल ने कहा कि भारत की शक्ति ये गरीब हैं, ऐसे में बाहर की चिंता नहीं करनी चाहिए.

हमारा काम सरकार पर दबाव डालना: 
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विपक्ष को गंभीरता से नहीं लेती? इस सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि हमारा काम सरकार पर दबाव डालना है. मैंने फरवरी में ही कह दिया था कि हालात और खतरनाक होंगे. रोजगार को लेकर राहुल ने कहा कि सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बहुत काम करने की जरूरत है. सरकार को लोगों को कैश देना चाहिए. सरकार कम से कम 50 फीसदी गरीबों के खाते में 7500 रुपए महीना कैश ट्रांस्फर करे.

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हमारे यहां केस बढ़ रहे हैं और लॉकडाउन हट रहा:
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पूरी दुनिया जब लॉकडाउन हटा रही है तो वहां केस कम हो रहे हैं, लेकिन हमारे यहां केस बढ़ रहे हैं और लॉकडाउन हट रहा है. राहुल ने सवाल किया कि पीएम मोदी गरीबों के लिए, किसानों के लिए क्या कर रहे हैं उसका जवाब दे दें.

28 मई को कांग्रेस का महा अभियान, कामगारों को सीधे जेब में 10 हजार रुपए देने की मांग, कांग्रेस चलायेगी ऑनलाइन अभियान

जयपुर: कोरोना महामारी से त्रस्त प्रवासी श्रमिकों ,कामगारों ,लघु व्यापारियों ,असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों समेत वो लोग जो इन्कम टैक्स के दायरे में नहीं आते उनके लिए कांग्रेस बड़ा अभियान चलाने जा रही है. 28 मई को कांग्रेस के व्यापक ऑनलाइन अभियान के जरिये केन्द्र सरकार से मांग की जाएगी कि इनकी जेब में सीधे 10हजार रुपये डाले जाये. राजस्थान की कांग्रेस भी इस महा अभियान से जुडेगी. 

सभी प्रदेश कांग्रेस इकाइयों को लिखा पत्र:
बीते कुछ दिनों से कांग्रेस एक्शन में है खासतौर पर प्रवासी श्रमिकों के मसले पर.  ताबडतोड केन्द्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला जा रहा ,नीतियों को कोसा जा रहा. अब केन्द्र सरकार से उसी मांग को दोहराया जाएगा जो कुछ दिनों पहले राहुल गांधी से की गई थी ,चलाया जाएगा देशव्यापी ऑनलाइन अभियान ,इसके लिये कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर AICC महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस इकाइयों को पत्र लिखा है.

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कांग्रेस का मूवमेंट

-28 मई को कांग्रेस बड़ा ऑनलाइन अभियान चलायेगी
-केन्द्र सरकार से की जाएगी मांग
-प्रवासी श्रमिक,कामगार,छोटे व्यापारी
-असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को मिले पैसा
-उनकी जेब में सीधे 10हजार रुपये दिये जाये
-28 मई को 11से 2 बजे के बीच चलेगा अभियान
-सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को AICC के निर्देश
-सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं से किया आह्वान
-जो इन्कम टैक्स दायरे में नहीं आते है उनके लिये अभियान
-10हजार रुपये कैश या बैंक खाते के जरिये प्रत्येक श्रमिक को मिले
-सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर व्यापक अभियान चलेगा
-अभियान में कांग्रेस के जनप्रतिनिधि होंगे शामिल

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कांग्रेस का अभियान बेहद अहम:
कांग्रेस का अभियान बेहद अहम है. ऑनलाइन अभियान का मकसद उन लोगों तक सरकार के जरिये पैसा पहुंचाना है जिनके सामने अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. केन्द्र सरकार से पुरजोर मांग की जाएगी ,लॉकडाउन के कारण कांग्रेस सड़क पर नहीं आ सकती इसलिये ऑनलाइन अभियान के जरिये कांग्रेसियों से आह्वान किया जाएगा कि वे केन्द्र सरकार से राहत देने की मांग करे. 

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

सादुलपुर SHO विष्णुदत्त आत्महत्या प्रकरण, CBI जांच की मांग पर अड़े उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ और सांसद राहुल कस्वां

सादुलपुर SHO विष्णुदत्त आत्महत्या प्रकरण, CBI जांच की मांग पर अड़े उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ और सांसद राहुल कस्वां

चूरू: चूरू के राजगढ़ में विष्णु दत्त विश्नोई द्वारा आत्महत्या मामले को लेकर धरना जारी है. उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ थाने के आगे पहुंचे. सांसद राहुल कस्वां भी दिल्ली से धरना स्थल पहुंच गए है. भाजपा जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता भी मौजूद हैं. सभी इस मामले पर CBI  जांच की मांग कर रहे है. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने चूरू जिले के राजगढ़ थानाधिकारी विष्णुदत्त बिश्नोई की आत्महत्या पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए सरकार से उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है. राठौड़ ने इस संबंध में DGP भूपेन्द्र यादव व ACS होम राजीव स्वरूप से बात कर विष्णुदत्त को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले राजनीतिज्ञ व पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की. राठौड़ ने कहा कि बिगड़ी सरकारी व्यवस्था व स्थानीय राजनीतिज्ञों के अपराधियों के पक्ष में बेजा दबाव से प्रताड़ित होकर एक जांबाज पुलिस अधिकारी की आत्महत्या मौजूदा पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा है.

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स्थानांतरण किए जाने पर राजनीतिक दबाव:
राठौड़ ने कहा कि एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में जनमानस में बेहद लोकप्रिय छवि के पुलिस अधिकारी विष्णुदत्त का स्थानांतरण किए जाने पर राजनीतिक दबाव पिछले दो माह से पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ था. अपराधियों से गठजोड़ और कमजोर प्रशानसिक क्षमता वाले अधिकारियों के कारण दो दिन पूर्व ही विष्णुदत्त के मातहत काम करने वाले चार कांस्टेबल को लाइन हाजिर करने व विगत एक माह में 7 कांस्टेबल व हैड कांस्टेबल को अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करने पर अकारण हटाये जाने से विष्णुदत्त काफी व्यतीत थे जिसकी चर्चा आम थी तथा कल उनके द्वारा किए गए वाट्सएप चैट के प्रमाणित दस्तावेज इसकी पुष्टि भी करते हैं जो संलग्न भी है.

विष्णुदत्त के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा देने की मांग:
प्रदेश में अपराधियों को खुला राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो रहा है. अपराधों का ग्रााफ लगातार बढ़ रहा है और कोई भी ईमानदार पुलिस अधिकारी फील्ड पोस्टिंग से बचना चाहते हैं. दर्जनों व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संगठनों ने विभिन्न स्तर पर ज्ञापन देकर उन्हें स्थानांतरित नहीं किए जाने की मांग इस बात को प्रमाणित करती है कि वो अत्यन्त जनप्रिय व निष्पक्ष पुलिस अधिकारी थे. पुलिस बेड़े में इस प्रकार की घटना से विभाग में कार्यरत पुलिस कांस्टेबल व अधिकारी भी व्यथित है. राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार तुरंत विष्णुदत्त की आत्महत्या के कारक बने राजनीतिज्ञ, पुलिस अधिकारी का चेहरा बेनकाब करने के लिए न्यायिक जांच करवाये और विष्णुदत्त के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा और आश्रितों को नियुक्ति दें. 

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नई दिल्ली: कांग्रेस संकट के बीच शुक्रवार को विपक्षी दलों की वीडियो कॉफ्रेंस के जरिए बैठक हुई. यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई. इस बैठक में देश की बड़ी विपक्षी पार्टियों शामिल हुई. बैठक में कोरोना वायरस संकट के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा हुई. बैठक में चर्चा की शुरुआत से पहले नेताओं ने बंगाल और उड़ीसा में आए तूफान अम्फान की वजह से मारे गए लोगों की याद में मौन रखा गया. 

सोनिया गांधी ने रखी अपनी बात:
इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सबसे पहले अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों को लेकर असमंजस में है और ना ही उसने इससे निकलने की कोई रणनीति तैयार की है. संकट के इस वक्त भी सारी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक सीमित हैं. सोनिया गांधी के अनुसार हममें से कई समान विचारधारा वाली पार्टियां मांग कर चुकी हैं कि गरीबों के खातों में पैसे डाले जाएं, सभी परिवारों को मुफ्त राशन दिया जाए और घर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों को बस एवं ट्रेन की सुविधा दी जाए. हमने यह मांग भी की थी कि कर्मचारियों एवं नियोजकों की सुरक्षा के लिए ‘वेतन सहायत कोष’ बनाया जाए. हमारी गुहार को अनसुना कर दिया गया.

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लॉकडाउन से करोड़ों लोगों को ज़बरदस्त नुक़सान:
इस बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन से करोड़ों लोगों को ज़बरदस्त नुक़सान हुआ है. अगर आज उनकी मदद नहीं की, उनके खातों में 7,500 रुपये नहीं डाला, अगर राशन का इंतज़ाम नहीं किया, अगर प्रवासी मज़दूरों, किसानों और छोटे उद्योगों की मदद नहीं की तो आर्थिक तबाही हो जाएगी.

बैठक में शामिल हुए ये नेता
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, शिवसेना प्रमुख एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार, द्रमुक नेता एमके स्टालिन, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला समेत कई बड़े नेता शामिल हुए हैं.

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पीसीसी में मना राजीव गांधी का बलिदान दिवस, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

जयपुर: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि गुरुवार को मनाई गई. पीसीसी में पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ. पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने राजीव गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए, मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, विश्वेन्द्र सिंह,महेश जोशी ,कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुलदीप इंदौरा समेत प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रही. पायलट ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को मदद अगर केन्द्र सरकार नहीं कर पाती है तो कांग्रेस उनकी सहायता के तत्पर है,कांग्रेस ने ही बसों की व्यवस्था की लेकिन उन्होंने सियासत की.

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राजीव गांधी थे आधुनिक भारत के प्रणेता:
जिस सभागार का उदघाटन खुद राजीव गांधी ने ही किया था,संयोग है उसी सभागार में उनका बलिदान दिवस मनाया गया. राजीव गांधी की पुण्यतिथि प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मनाई गई ,यहीं पर स्थापित राजीव गांधी की प्रतिमा को कांग्रेस ने नमन किया. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने पुष्प अर्पित किए. पायलट ने मीडिया से बात करते हुये कहा कि राजीव गांधी आधुनिक भारत के प्रणेता थे. 

राजीव गांधी का राजस्थान से गहरा नाता:
राजीव गांधी का राजस्थान से गहरा नाता रहा. उन्होंने ही राजस्थान की सियासत में अशोक गहलोत को नवीन ऊंचाई पर लाने का काम किया,गहलोत पहली बार जब पीसीसी चीफ बने वो राजीव गांधी की ही सोच थी,राज्य में नई पीढी को नेतृत्व देने की. सचिन पायलट के पिता स्व. राजेश पायलट को भी राजस्थान से राजनीति में लाने का योगदान राजीव गांधी को ही है. ऐसे कई नाम है जो राजस्थान की कांग्रेस में " द स्कूल ऑफ राजीव गांधी " से निकल कर आये. महेश जोशी समेत कई नेता उसी स्कूल के छात्र रह चुके है.

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विश्वेन्द्र सिंह,प्रताप सिंह खाचरियावास ,महेश जोशी ,कुलदीप इंदौरा,खिलाडी लाल बैरवा ,महेश शर्मा ,अमीन कागजी,अर्चना शर्मा,  मुमताज मसीह,   अश्क़ अली टाक,पुखराज पाराशर, अनिल पारीक,गिरिराज गर्ग , राजेश चौधरी, सुशील शर्मा, ज्योति खंडेलवाल, विजय सारस्वत , प्रशांत शर्मा, संगीता गर्ग,विभा माथुर समेत प्रमुख नेता और कार्यकर्ताओं ने अपने महबूब नेता को याद किया. लॉकडाउन इफेक्ट के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया.

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जोधपुर में विधायक सूर्यकांता व्यास का पुत्र कोरोना पॉजिटिव, विधायक के स्वास्थ्य की भी होगी जांच

जोधपुर में विधायक सूर्यकांता व्यास का पुत्र कोरोना पॉजिटिव, विधायक के स्वास्थ्य की भी होगी जांच

जोधपुर: कोरोना वायरस को लेकर प्रदेश की इस वक्त की सबसे बड़ी खबर जोधपुर से आ रही है. विधायक सूर्यकांता व्यास का पुत्र कोरोना पॉजिटिव आया है. विधायक का मकान शहर के भीतरी क्षेत्र में स्थित है. जिला कलेक्टर डॉ. प्रकाश राजपुरोहित भी विधायक के निवास पहुंचे थे. ऐसे में पुत्र के पॉजिटिव आने के बाद अब विधायक के स्वास्थ्य की भी जांच होगी. चिकित्सा विभाग ने इसकी पुष्टि की है.  

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131 नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए: 
वहीं राजस्थान में लगातार कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. गुरुवार दोपहर 2 बजे तक राजस्थान में 3 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 131 नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आये है. डूंगरपुर में अकेले 33 नए केस सामने आये है.  ऐसे में प्रदेश में कोरोना मरीजों का ग्राफ 6146 पहुंच गया है. 
 

लॉकडाउन 4 के बीच राज्यसभा चुनाव की कवायद, राजनीतिक गतिविधियां तेज

लॉकडाउन 4 के बीच राज्यसभा चुनाव की कवायद, राजनीतिक गतिविधियां तेज

जयपुर: कोरोना संकट के चलते स्थगित किए गए राज्यसभा चुनाव की कवायद एक बार फिर से शुरू हो गई है. 18 मई से लागू  होने वाले लॉकडाउन 4 के दौरान प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराए जा सकते हैं. हालांकि चुनाव की तारीखों का ऐलान केंद्रीय चुनाव आयोग को करना है. सूत्रों की माने तो  केंद्रीय चुनाव आयोग राजस्थान सहित कई राज्यों की राज्यसभा सीटों के लिए जून में चुनाव कराने का ऐलान कर सकता है. हालांकि कांग्रेस के अंदर एक खेमा नीरज डांगी के नाम पर खुश नहीं है. 

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लॉकडाउन के बावजूद राजनीतिक गतिविधियां तेज: 
प्रदेश में लॉकडाउन के बावजूद राजनीतिक गतिविधियां तेज है. प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस से पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी हैं तो वहीं भाजपा की ओर से राजेंद्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत को मैदान में उतारा है. संभावना जताई जा रही है कि जून में राज्यसभा के चुनाव हो सकते हैं. 

तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 6 मार्च को शुरू हुई थी:
प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 6 मार्च को शुरू हुई थी. नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 मार्च थी 16 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच  हुई थी, राज्‍यसभा की तीन सीटों के लिए चार उम्‍मीदवारों की ओर से तेरह नामांकन पत्र दाखिल किये गये थे, जांच में सभी नामांकन पत्र सही पाये गये थे. ओंकार सिंह लखावत का पर्चा वापस नहीं लेने के चलते 26 मार्च को तीन सीटों पर मतदान तय था, लेकिन इसी बीच कोरोना संकट और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव स्थगित कर दिए थे. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को ऐलान करना है, वे स्वदेश लौट चुके है , हालांकि अभी आयोग में कामकाज पूरी तरह शुरु नहीं हो पाया है. 

वोट के गणित में अशोक गहलोत सेफ जोन में:
राजस्थान की कांग्रेस में नीरज डांगी के नाम को लेकर एक खेमा खुश नहीं इनमें अधिकांश सचिन पायलट के समर्थक है. लेकिन आलाकमान के निर्णय के विरोध की संभावना कम है. वोट के गणित में अशोक गहलोत सेफ जोन में. गहलोत के पास 122वोटों का साथ है. 

एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए:
प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के वोट हैं. प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए. कांग्रेस के पास है 107 विधायकों के वोट हैं तो भाजपा के पास है 72 विधायकों के वोट हैं. कांग्रेस के पास 13 निर्दलियों में से अधिकतर का समर्थन भी है. अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायक की संख्या 21 है. 2 सीटों पर कांग्रेस, एक सीट बीजेपी को जाने की संभावना है. 

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कांग्रेस को 2 सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए:
तय फॉर्मूले के अनुसार कांग्रेस को 2 सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं. वहीं भाजपा के पास सदन में 72 विधायक हैं, ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए लिहाजा भाजपा के खाते में भी एक सीट आने वाली है. हालांकि भाजपा ने ओंकार सिंह लखावत का पर्चा वापस न लेकर मतदान कराए जाने की स्थिति पैदा कर दी है. विधानसभा सचिवालय के पास अभी चुनाव को लेकर कोई नई गाइडलाइन नहीं मिली है.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की  रिपोर्ट

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