Rajasthan By Election: सहाड़ा सीट पर बिछी सियासी चौसर, कांग्रेस और बीजेपी साधने में जुटी जातीय गणित

Rajasthan By Election: सहाड़ा सीट पर बिछी सियासी चौसर, कांग्रेस और बीजेपी साधने में जुटी जातीय गणित

जयपुर: 4 विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक चौसर बिछाई  जा रही है. किसी भी चुनाव में रणनीति का हिस्सा होता है जातीय गणित. कांग्रेस और बीजेपी अभी से इस गणित को साधने में जुट गए हैं. सोशल इंजीनियरिंग के बल पर चुनाव जीतने की रणनीति तैयार की जा रही है. आइए चार उपचुनाव की फेहरिस्त में आज हम सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के जातीय गणित को जानते और समझते हैं. 

क्षेत्र में किसी भी एक जाति का वरदहस्त नहीं:
सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र में किसी भी एक जाति का वरदहस्त नहीं है. अलग-अलग जातियां यहां अपना अलग अलग राजनीतिक वजूद रखती है. ब्राह्मण और जाट वर्ग चुनावी तौर पर काबिज रहा है. ज्यादातर विधायक इन्हीं दो जातियों से बनते आए हैं. सहाड़ा की जातीय गणित को अलग तरीके से देखने की आवश्यकता है. यहां सर्वाधिक दलित वर्ग की आबादी है. वहीं मूल ओबीसी का वोट यहां जीत और हार में निर्णायक भूमिका अदा करता है. आइए आपको बताते हैं जातियों की सोशल इंजीनियरिंग...

जातियों की सोशल इंजीनियरिंग:
-दलित वर्ग की आबादी यहां सर्वाधिक है , इनमें भी खटीक बैरवा रेगर समाजों की बहुतायत है , करीब 40 हजार 
- जाट वर्ग यहां राजनीतिक तौर पर सशक्त वर्ग है , कई बार इस समाज से यहां जनप्रतिनिधि रहे  , तकरीबन 25 से 30 हजार के लगभग इस समाज के वोट है.
- राजनीतिक तौर पर ही ब्राह्मण यहां प्रमुख वर्ग है सहाड़ा में सबसे ज्यादा बार विधायक ब्राह्मण वर्ग से ही बने है , करीब  20 वोट है.
- वैश्य वर्ग के वोटों की आबादी करीब 10 हजार है ,  जैन वर्ग के वोट की भूमिका अहम है.
- भील समाज के वोट बैंक महत्वपूर्ण स्थान सहाड़ा की राजनीति में रखते है ,इनका संख्याबल 15 से 18 हजार के बीच है.
- यहां सबसे अहम है मूल ओबीसी वोटों का गणित ,इनमे प्रमुख है  कुम्हार - प्रजापत ,गुर्जर , गाडरी - गायरी , सुथार , माली , जांगिड़ ,सुनार आदि
- इन्हें मिलाकर तकरीबन 1 से 1.50 लाख वोट होता है ,जो किसी भी दल की हार और जीत में निर्णायक है.
- कुम्हार - प्रजापत - कुमावत तकरीबन 15 हजार के लगभग है , गुर्जर समुदाय की आबादी भी इतनी ही मानी जाती ,गायरी वोट बैंक को गुर्जर समाज से जोड़ कर देखा जाता है.
- मुस्लिम वर्ग के यहां वोट है लेकिन निर्णायक नहीं कहे जा सकते.

- सहाड़ा में सोशल इंजीनियरिंग के बलबूते ही जीत हासिल की जा सकती है.  सिर्फ एक जाति के बलबूते जीत प्राप्त कर पाना आसान नहीं है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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