विधानसभा चुनावों में राजस्थान भाजपा का विस्तारक मॉडल हुआ फेल ! 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/20 11:34

जयपुर (योगेश शर्मा)। विधानसभा चुनावों से तकरीबन 1साल पहले राजस्थान की बीजेपी में विस्तारक मॉडल का आगाज हुआ था। मकसद था विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मिशन 180 को पूरा करना है। करीब 200 विस्तारकों को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भेजा गया, इन्हें बाइक और भत्ते भी दिये गये। लेकिन आर एस एस से आयात किया गया यह मॉडल मौजूदा विधानसभा चुनावों में बीजेपी को फिर सत्ता नहीं दिला सका, यूं कहे सफल नहीं हो पाया। खास सियासी रिपोर्ट-

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तर्ज पर बीजेपी में विस्तारक मॉडल को अपनाया गया। संघनिष्ठ और पार्टी की विचारधारा से ओतप्रोत नेताओं को विस्तारक का जिम्मा सौंपा गया। करीब 170 दीर्घकालीन विस्तारक बनाये गये, साथ ही अल्पकालिक विस्तारकों की फौज भी खड़ी की गई। सत्ता संगठन के  प्रमुख चेहरों को पालक बनाकर विस्तारक मॉडल को अमलीजामा भी पहनाया गया, हालांकि चुनाव में पालक रुपी बड़े नेताओं के चेहरे पीछे छूट गये और मूल विस्तारक ही फील्ड में रह गये। चुनाव से पहले करीब 1 साल तक इन्होंने ग्राउंड पर काम किया और शीर्ष नेतृत्व को चुनावी फीड़बैक देने का काम किया। इनके जिम्मे सरकारी योजनाओं को आम जन के बीच प्रचारित करने, गुटबाजी को दूर करने, पार्टी को सशक्त बनाने के काम भी थे। बीजेपी में जब संगठन महामंत्री चंद्रशेखर का युग शुरु हुआ उन्होंने पार्टी के जयपुर मुख्यालय में काम संभालते ही विस्तारक प्रक्रिया पर फोकस किया। अशोक परनामी पहले से ही गंभीर थे लेकिन वह अपने काम को चुनावी तौर पर अमलीजामा पहनाते इससे पहले ही विदा कर दिये गये और मदन लाल सैनी की ताजपोशी हो गई। जाहिर है अमित शाह के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी नये बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने संभाली। 

विस्तारक का काम मिशन 180 के लिहाज से बेहद खास था। लेकिन चुनाव समाप्ती और कांग्रेस सरकार के निर्माण ने बीजेपी की विस्तारक प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है। सवाल उठ रहे है कि क्या विस्तारक फेल हुये या फिर उनकी ओर से बताई गई ग्राउंड रियलिटी को ठंडे बस्ते में डाल दिया। कारण कुछ भी हो लेकिन राज्य बीजेपी में पहली बार शुरु हुई विस्तारक प्रक्रिया अपनी पहली परीक्षा में उतीर्ण नहीं हो पाई, जाहिर फेल का तमगा लग गया। इन्हें बाकायदा भत्ते भी दिये गये और मोटर बाइक भी प्रदान की गई। बीजेपी राज्य संगठन के खजाने की स्थिति अच्छी नहीं थी फिर भी विस्तारक मॉडल पर खर्च करने में कंजूसी नहीं बरती गई। 

भाजपा के विस्तारकों के कार्य
—बूथ अध्यक्ष,बूथ समिति,पेज प्रमुख पर कार्य करना
—बूथ में रहने सम्पूर्ण मतदाता की जानकारी करना
—खासतौर पर नवमतदाता से सम्पर्क साधना
—प्रशिक्षण शिविरों और रचनात्मक कार्यो के आयोजन
—बूथ के जातीय समीकरणों की गणना
—बूथ में स्थित बस्तियों,कॉलोनियों की रिपोर्ट बनाना
—सामाजिक कार्यो के प्रति योगदान निभाना
—सरकारी संस्थान कैसे काम कर रहे यह भी जांचना
—लोगों को समय पर राशन मिल रहा है या नहीं
—बीपीएल की स्थिति और भ्रष्टाचार का पता लगाना
—सरकार के विकास काम कैसे हो रहे नजर रखना
—संघ निष्ठ व भाजपा के वैचारिक परिवारों की सूची बनाना
—बूथ कार्यालय बनाकर सुनवाई करना
—चुनावी संरचना के काम को करना
—बूथ वार क्या विकास के काम है वो पता करना

विस्तारकों पर खर्च का गणित
—एक विस्तारक पर सालाना करीब 1लाख का खर्च हुआ
—साल भर तक करीब 167 विस्तारक दीर्घकालीन अवधि के लिये लगाये
—इन्हें वाहन भत्ते के तौर पर आर्थिक राशि प्रदान की गई
—मोटर बाइक भी इन्हें प्रदान की गई, हालांकि ये संख्या 150 के लगभग रही
—एक मोटरसाइकिल की कीमत लगभग 60-70हजार रुपये रही 

विस्तारक प्रक्रिया क्यों असफल साबित हुई इसके बड़े कारण सामने आ रहे है। यह केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी शुरु की गई थी। अमित शाह के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की स्थानीय संगठनो ने जोर शोर से शुरुआत की थी लेकिन कई खामियों ने इस पर प्रश्नचिन्ह लगाये और चुनावी पराजय का दंश झेला। 

क्यों फेल हुई विस्तारक प्रक्रिया
—कुछ विस्तारक अपने गंतव्य पहुंचते ही गणेश परिक्रमा में जुटे गये 
—इन्होंने स्थानीय नेताओं से सम्पर्क साध लिये और वहीं रिपोर्ट दी जैसे वो चाहते थे
—जनप्रतिनिधि की फेवर की रिपोर्ट बनाने का काम किया
—ग्राउंड रिपोर्ट ऊपर तक ठीक ढंग से नहीं पहुंचाई
—कुछ विस्तारक ऐसे रहे जिन्होंने अपने काम में ईमानदारी बरती
—लेकिन इनकी रिपोर्ट पर आलाकमान ने गंभीरता नहीं बरती
—टिकट बदलाव की रिपोर्ट पर अमल नहीं हो पाया
—विस्तारकों में कुछ ऐसे रहे जो परिपक्व और कुशल नहीं थे
—योग्य विस्तारकों की कमी खली
—अनुभव की कमी विस्तारकों में देखी गई है, कुछ बेहद नौसखिये थे
—50हजार बूथों पर विस्तारक भेजने की प्रक्रिया कारगर नहीं रही
—विस्तारकों ने ईमानदारी से सबंधित प्रवास मे पूरा समय नहीं बिताया 

जयपुर में विस्तारकों की पहली बैठक में अमित शाह ने पूरे मॉडल के प्रति गंभीरता बरतने को लेकर राज्य नेतृत्व को आगाह किया था। मदनलाल सैनी और चंद्रशेखर ने संगठन के नेताओं को हिदायत भी। बीजेपी सत्ता और संगठन के बीच भी इस मुद्दें पर सेतु नहीं बन पाया और खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा आखिर कार सत्ता गंवाने के कारणों में विस्तारक मॉडल भी शुमार हो गया। 

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