बीकानेर VIDEO:  कलक्टर की पहल पर पोषण की पाठशाला! गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य पर कार्य, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO:  कलक्टर की पहल पर पोषण की पाठशाला! गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य पर कार्य, देखिए ये खास रिपोर्ट

बीकानेर: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में राजस्थान के आंकड़ों में कुछ सुधार हुआ हो, लेकिन फिर भी अभी हम बेहतर राज्यों की स्थिति में नहीं आए हैं. कई जिलों में स्थितियां विकट भी हैं, लेकिन बावजूद उसके आजकल जिलों में इन पर फोकस कम हो रहा है. ऐसे में बीकानेर कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल पुकार अभियान के तहत महिलाओं की जाजम बैठकों के जरिए मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण पाठशालाएं आयोजित कर रहे है.

करीब डेढ़  लाख महिलाओं से संवाद सम्भव हो पाया है. पिछले बुधवार भी पुकार के तहत 495 स्थानों पर मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण पाठशालाएं आयोजित की गई. दरअसल जिला कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल की पहल पर जिले में चल रहे पुकार अभियान के तहत मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण पाठशालाओं (जाजम बैठक) का आयोजन किया जा रहा है.

इस दौरान महिला एवं बाल विकास और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों ने गर्भधारण से बच्चे के दो वर्ष के होने तक रखी जाने वाली सावधानियों के साथ साथ अन्य जानकरियां उपलब्ध करा रहे है. पोषण की इन पाठशाला में सीएमएचओ से लेकर जिला कलेक्टर तक शिरकत कर रहे हैं. इस अभियान के तहत अब तक 6 हजार 530 पाठशालाओं का आयोजन हुआ है, जिनमें  1 लाख 46 हजार 752 महिलाओं से संवाद किया जा चुका है.  

​अभियान से आए परिवर्तन पर नजर:
- Trimester रजिस्ट्रेशन में बढोत्तरी हुई 
 - 4ANC चेकअप में सुधार हुआ 
- संस्थागत प्रसवों में बढोत्तरी देखी जा रही है  
- अब तक आयरन फॉलिक एसिड की 5 लाख 5हजार 183 टेबलेट वितरित की गई
- साथ ही सरकार की योजनाओं की जानकारी महिलाओं तक आआसानी से पहुंच रही है

बीकानेर जिला कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल कहते हैं कि मातृ शिशु स्वास्थ्य की पाठ शालाओं के जरिए सरकार की विभिन्न योजनाएं भी महिलाओं तक पहुंच रही है यही इसका उद्देश्य है.उल्लेखनीय है कि जिले में यह अभियान 6 अप्रैल से प्रारम्भ हुआ. अब तक 14 हफ्तों से प्रत्येक बुधवार को यह पाठशालाएं आयोजित की जा रही हैं. जिला कलेक्टर भगवती प्रसाद कहते हैं कि बिना किसी विशेष खर्चे के हमारे स्वास्थ्य कार्यकर्ता महिलाओं से संवाद बना पा रहे हैं उनको एक फिक्स फॉर्मेट दिया जा रहा है. उसी फॉर्मेट में अपनी बात रखते हैं. निश्चित तौर पर सकारात्मक परिणाम देखने को मिल भी रहे. साथ ही मुख्यमंत्री जी और सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं से महिलाओं को रुबरु भी करवा रहे है.

विगत कुछ सालों में यह देखने में आया है कि स्वास्थ्य के मानकों पर ध्यान कम हुआ है, हालांकि कोरोना के बाद दुनिया को समझना पड़ा कि स्वास्थ्य सबसे प्राथमिकता का विषय है. दरअसल इन सुधारों पर सुर्खियां बनने में समय लगता है. जबकि शहर के सौंदरयकर्ण , चमचमाते चौराहें से जुड़ी खबरों पर ज्यादा फोकस रहता है. निश्चित तौर पर जिला कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल की इन स्वास्थ्य मानकों पर काम करने की कोशिश की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. बशर्ते यह आंकड़े केवल कागजी ना रहे.

और पढ़ें