Rajasthan By Elections 2021: उप चुनाव में किसानों के वोट पर कांग्रेस की खास नजर, छेड़ रखा तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रचार

Rajasthan By Elections 2021: उप चुनाव में किसानों के वोट पर कांग्रेस की खास नजर, छेड़ रखा तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रचार

जयपुर: राजस्थान में तीन विधानसभा उप चुनाव हो रहे हैं. यह विधानसभा उपचुनाव तय करेंगे कि दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे है किसान आंदोलन का कितना असर इन चुनावों में पड़ा है. तीनों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 60 फ़ीसदी आबादी ग्रामीण अथवा किसान परिवेश से है. वाम पार्टियों के असर के कारण सुजानगढ़ में किसान आंदोलन की धमक का असर है लेकिन मेवाड़ के राजसमन्द और सहाड़ा में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के बीच कोई बड़ा असर नहीं देखा जा रहा. यह अलग बात है कि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव प्रचार में किसान मूवमेंट को बड़ा मुद्दा बना रखा है.

हाल ही में पंजाब में नगर निकाय के चुनाव हुए, इन चुनावों में किसान आंदोलन का व्यापक असर देखा गया. भारतीय जनता पार्टी को घोर असफलता इन चुनावों में मिली, वहीं अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस को भारी सफलता पंजाब में मिली, कारण रहा तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में उत्पन्न किसान आंदोलन. पंजाब और हरियाणा में व्यापक स्तर पर किसान आंदोलन चला. राजस्थान में भी दिल्ली एनसीआर से सटे हरियाणा और पंजाब से सटे इलाकों में आंदोलन का असर है लेकिन संपूर्ण राजस्थान में असर नहीं देखा जा रहा है. जयपुर में हुई किसान सभा भी अधिक सफलता प्राप्त नहीं कर सकी थी. इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी अपने चुनाव प्रचार अभियान में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ माहौल बनाने में जुटी है जिससे ग्रामीण तबका और किसान वोट को साधा जा सके.

---किसान आंदोलन और तीन उप चुनाव क्षेत्र---
सुजानगढ़--
- सुजानगढ़ में किसान आबादी बहुसंख्यक है
- किसान आंदोलन का भी सुजानगढ़ में असर है
- सुजानगढ़ चुरू जिले में आता है
- चूरू जिला सटा है हरियाणा राज्य से
- जिले में लाल सलाम का भी असर है
- कांग्रेस को उम्मीद है किसान आंदोलन से यहां बीजेपी को नुकसान होगा

राजसमन्द--
- मेवाड़ के राजसमंद में बड़ा तबका ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता हैं
- हालांकि ग्रामीण इलाके के लोग बड़ी संख्या में खनिज व्यवसाय में रोजगार प्राप्त करते हैं
- राजसमंद में कांग्रेस को उम्मीद है कि किसान वोट बैंक कांग्रेस का साथ देगा

सहाड़ा--
- सहाडा में किसान आंदोलन को लेकर चर्चा है
- कांग्रेस के नेता बढ़-चढ़कर तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं
- सहाड़ा में बीजेपी ने जाट वर्ग के नेता को चुनावी समर में उतार दांव चला है
- वहीं कांग्रेस को उम्मीद है सहाड़ा की 80 फ़ीसदी ग्रामीण आबादी में रहने वाला किसान तबका उन्हे वोट करेगा

राजस्थान में किसानों के वर्ग के बीच कांग्रेस का पुराना वर्चस्व रहा है. सामंतवाद और जागीरदार प्रथा के खिलाफ कांग्रेस ने आजादी के बाद किसान नेताओं के साथ मिलकर बड़ा मूवमेंट चलाया. किसान नेता बलदेव राम मिर्धा ने अगुवाई की, आगे चलकर किसान नेता जुड़ गए कांग्रेस से. समय-समय पर भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे ने कांग्रेस के परंपरागत किसान वोट बैंक में सेंध लगाने का काम किया. इसके बावजूद कांग्रेस कहती है कि किसान और कांग्रेस की राशि एक है. कांग्रेस का यह भी दावा है कि राहुल गांधी एकमात्र शीर्ष नेता है देश के, जिन्होंने किसान आंदोलन के खिलाफ देशव्यापी अलख जगाई है. यह भी दावा है कि कॉन्ग्रेस ने भूमि अधिग्रहण बिल लागू नहीं होने दिया. तर्क अपनी जगह है लेकिन जनता का जनादेश अपनी जगह है, परिणाम ही तय करेंगे कि किसानों ने तीनों उप चुनावों में कितना साथ कांग्रेस का दिया. आखिर पगड़ी पहन कर किसानों के बीच वोट मांग रहे कांग्रेस नेताओं को कितना साथ किसान कौम का मिलता है?

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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