जयपुर VIDEO: सहकारिता विभाग में अजब-गजब अंधेरगर्दी, पद जूनियर का, कुंडली मारे बैठे सीनियर अफसर !

VIDEO: सहकारिता विभाग में अजब-गजब अंधेरगर्दी, पद जूनियर का, कुंडली मारे बैठे सीनियर अफसर !

जयपुर: सहकारिता विभाग प्रदेश का एकमात्र ऐसा विभाग है जिसमें गंगा उल्टी-सीधी दोनों तरह से बह रही है. विभाग में जूनियर्स को सीनियर्स के पद पर बैठाने के मामले में हाई कोर्ट की फटकार लग चुकी है लेकिन एक दूसरा पहलू भी है जो विभाग में परस्पर गंगा के उल्टी-सीधी बहनें की ओर इशारा कर रहा है. जी हां विभाग में ऐसे अधिकारी भी है जिन्होंने मलाई दार पोस्ट पाने के लिए अपनी सीनियोरिटी का भी ख्याल नहीं रखा और जूनियर्स के पद पर कब्जा जमा बैठे हैं. 

पद जूनियर का लेकिन मलाई देख कुंडली मारे बैठे सीनियर अफसर !:
-सहकारिता विभाग में अजब गजब अंधेरगर्दी
-संयुक्त रजिस्ट्रार की पोस्ट लेकिन अतिरिक्त रजिस्ट्रार ने जमा रखा कब्जा
-ये हैं वो अति. रजिस्ट्रार जो संयुक्त रजिस्ट्रार का हक़ दबा रहे
-जयपुर सीसीबी एमडी इन्द्रराज मीणा, नागौर सीसीबी एमडी पीपी सिंह
-श्रीगंगानगर सीसीबी रंडी भूपेंद्र सिंह, बारां सीसीबी एमडी इंद्र सिंह 
-जोधपुर सीसीबी एमडी सुरेंद्र सिंह, झालावाड़ सीसीबी एमडी श्याम लाल मीणा  
चित्तौड़ सीसीबी एमडी रेनू अग्रवाल 
-वहीं पूनम भार्गव वरिष्ठ अति. रजिस्ट्रार हैं लेकिन डिप्टी रजिस्ट्रार की पोस्ट पर अजमेर में काबिज
-नवल मीणा सहायक रजिस्ट्रार है जबकि जेडीए में डिप्टी रजिस्ट्रार के तौर पर काबिज 
-जयपुर शहर डिप्टी रजिस्ट्रार का चार्ज देशराज यादव के पास
-जबकि देशराज यादव हैं सहायक रजिस्ट्रार लेकिन हाउसिंग सोसायटी कर रहे डील

सहकारिता विभाग में यूं तो विभाजन की एक पुख्ता व्यवस्था बनी हुई है लेकिन कुछ रसूकदार अधिकारी इस व्यवस्था को अपने हिसाब से चला रहे हैं. ये वो अधिकारी हैं जो देश, काल और परिस्थिति के अनुसार अपने हक में पद स्थापन ले ही लेते हैं. यदि खुलकर कहें तो ये वो अधिकारी हैं जो जूनियर पद पर मलाई दिखे तो जूनियर बन जाते हैं और सीनियर पद पर मलाई दिखे तो सीनियर बन जाते हैं. दरअसल सहकारिता विभाग में दर्जन से अधिक ऐसे अधिकारी है सो अपने हिसाब से पूरी व्यवस्था को चला रहे हैं. सहकारिता विभाग में केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक का पद काफी हम माना जाता है. विभाग के नियम कायदों के अनुसार इस पद पर संयुक्त रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी को नियुक्ति दी जाती है, लेकिन सहकारिता विभाग में 7 केंद्रीय सहकारी बैंक ऐसी भी हैं जहां अतिरिक्त रजिस्ट्रार स्तर के वरिष्ठ अधिकारी प्रबन्ध निदेशक के पद पर चिपके हुए हैं और इनका जोड़ इतना मजबूत है कि फेविकोल भी शरमा जाए.

केंद्रीय सहकारी बैंक जयपुर में अतिरिक्त रजिस्ट्रार होते हुए भी इंद्रराज मीणा अपेक्षाकृत जूनियर यानी संयुक्त रजिस्ट्रार उस पर के प्रबंध निदेशक पद पर काबिज हैं. इसी तरह नागौर केंद्र सरकार बैंक में पीपी सिंह, श्री गंगानगर में भूपेंद्र सिंह, बारां में इंद्र सिंह, जोधपुर में सुरेंद्र सिंह, झालावाड में श्यामलाल और चित्तौड़गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक में रेणु अग्रवाल अतिरिक्त रजिस्ट्रार होते हुए भी जूनियर पद पर कब्जा जमाए बैठे हैं. ऐसा ही एक मामला अजमेर का भी है जहां अतिरिक्त रजिस्टार पूनम भार्गव अतिरिक्त रजिस्ट्रार होते हुए अपेक्षाकृत काफी जूनियर डिप्टी रजिस्ट्रार की पोस्ट पर काबिज हैं सिर्फ इसलिए कि वे अजमेर छोड़ना नहीं चाहती. इसी तरह जेडीए में नवल मीणा डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर कार्य कर रहे हैं जबकि वे सहायक रजिस्ट्रार हैं.

एक अन्य मामला यहां मिसाल बन रहा है वह है जयपुर शहर के डिप्टी रजिस्ट्रार देशराज यादव का. यादव सहायक रजिस्ट्रार हैं लेकिन उनके पास डिप्टी रजिस्ट्रार का चार्ज है क्योंकि डिप्टी रजिस्ट्रार शहर की तमाम गृह निर्माण सोसाइटी डील करता है और गृह निर्माण सहकारी समिति डील करने का मतलब सब अच्छी तरह जानते हैं. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी सहकारिता विभाग में कुछ अधिकारियों की बपौती खत्म होने का नाम नहीं ले रही. अधिकारी अपने हिसाब से मलाईदार पोस्ट तय करते हैं फिर उसके लिए चाहै पूरा केडर ही क्यों ना सफर कर रहा हो. अब देखना होगा कि सहकारिता विभाग के मंत्री उदय लाल आंजना कब और कैसे विभाग में अधिकारियों की इस मनमानी को खत्म करते हैं.

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