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Rajasthan Corona Updates: आज 58 नए संक्रमित मिले, मरीजों का ग्राफ पहुंचा 2642, जिलेवार जानें आंकड़े

Rajasthan Corona Updates: आज 58 नए संक्रमित मिले, मरीजों का ग्राफ पहुंचा 2642, जिलेवार जानें आंकड़े

जयपुर: राजस्थान में कोरोना संक्रमितों मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. आज भी प्रदेश में संक्रमण के अब तक 58 नए मामले सामने आ चुके है. इसमें सर्वाधिक 18 मामले जोधपुर में सामने आए है. इसके अलावा जयपुर में 14, अजमेर में 11, कोटा औऱ चित्तौड़गढ़ में 7-7, राजसमंद में 1 नया पॉजिटिव मिला है. ऐसे में अब प्रदेश में पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ 2642 पहुंच गया है. इसके साथ ही तीन मौते भी हुई है जिसमें से जयपुर में 2 और नागौर में एक व्यक्ति ने दम तोड़ा है. ऐसे में प्रदेश में मृतकों की संख्या भी 61 पहुंच गई है. 

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33 में से 29 जिलों में पहुंचा संक्रमण:
प्रदेश में जयपुर में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले सामने आए है. यहां 925 (2 इटली के नागरिक) संक्रमित हैं. इसके अलावा जोधपुर में 575 (इसमें 47 ईरान से आए), कोटा में 204, अजमेर में 161, टोंक में 134, भरतपुर में 111, नागौर में 118, बांसवाड़ा में 66, जैसलमेर में 49 (इसमें 14 ईरान से आए), झुंझुनूं में 42, झालावाड़ में 40, बीकानेर और भीलवाड़ा में 37-37, मरीज मिले हैं वहीं दौसा में 21, चित्तौड़गढ़ में 26, चूरू में 14, धौलपुर और पाली में 12-12, हनुमानगढ़ में 11, अलवर में 9, सवाईमाधोपुर और उदयपुर में 8-8, डूंगरपुर और सीकर में 6-6, करौली में 3, राजसमंद,  बाड़मेर और प्रतापगढ़ में 2-2 कोरोना मरीज मिल चुके हैं. इनके अलावा बारां में भी 1 संक्रमित मिला है. 

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गुरुवार को आये थे 146 नए केस:
गुरुवार को राजस्थान में रिकॉर्ड 146 पॉजिटिव नए केस सामने आए थे. इनमें सबसे ज्यादा 97 मरीज जोधपुर में मिले ​थे. इसके अलावा जयपुर में 29, कोटा में 5, अजमेर में 4, चित्तौड़गढ़ में 3, अलवर, बांसवाड़ा और टोंक में 2-2,  बारां और धौलपुर में 1-1 संक्रमित मिला. ऐसे में प्रदेश में अब पॉजिटिव मरीजों की संख्या 2584 पहुंच गया था. वहीं 3 लोगों की मौत होने से मौतों का आंकड़ा 58 पहुंच गया था.

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सीएम गहलोत ने किया हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह के नाम से बनाए गए रावणा राजपूत छात्रावास का लोकार्पण

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह के नाम से बनाए गए रावणा राजपूत छात्रावास का लोकार्पण किया. जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में दो करोड़ रुपए की लागत से यह छात्रावास बना है. 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में गहलोत ने ही छात्रावास के लिए जमीन दी थी. मेजर दलपत सिंह का आज 102 वां बलिदान दिवस है. दलपत सिंह को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा को मुक्त करवाने के लिए याद किया जाता है.  

हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गयी थी: 
हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गयी थी, जिसमें राजपूताने की सेना का नेतृत्व दलपत सिंह ने किया था. दलपत सिंह का जन्म वर्तमान पाली जिले के देवली गांव में हुआ था. प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजो की ओर से जोधपुर रियासत की सेना ने भी हिस्सा लिया था. कहा जाता है कि तब तोपों के सामने तलवारों से भिड़े थे दलपत सिंह. 

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छात्रावास समाज के लिए बड़ी उपलब्धि:
मुख्यमंत्री आवास पर वीसी के माध्यम से हुए कार्यक्रम में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, विधायक मनीषा पंवार, विधायक जब्बर सिंह सांखला, रणजीत सिंह सोडाला, रणजीत सिंह पंवार, मोहन सिंह हाथोज शामिल थे. वहीं विद्याधर नगर छात्रावास से मुख्य सचेतक महेश जोशी वीसी के माध्यम से जुड़े. उधर, दिल्ली से पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह भी कार्यक्रम से जुड़े थे. इस मौके पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि छात्रावास समाज के लिए बड़ी उपलब्धि होती है और मुझे उम्मीद है कि युवा पीढ़ी मेजर दलपत सिंह से प्रेरणा लेगी. कार्यक्रम को लालंचद कटारिया, भंवर जितेंद्र सिंह व महेश जोशी ने भी संबोधित किया. 
 

राजस्थान में प्राणवायु 'ऑक्सीजन' का एडवांस प्लान ! कोरोना में बढ़ी डिमाण्ड पर राज्य सरकार अलर्ट

जयपुर: प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही एकाएक बढ़ी प्राणवायु ऑक्सीजन की जरूरत के प्रति राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है. भविष्य की जरूरत और कोरोना महामारी को देखते हुए प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पताल और सोसायटी से जुडे़ कॉलेजों के अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन के लिए अलग-अलग तरह के ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद शुरू हो गई है. आइए आपको बताते है राजस्थान में कोरोना महामारी के बीच ऑक्सीजन का क्या है गणित और सरकार की कैसी है तैयारी....

गंभीर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही: 
प्रदेश में हर दिन बढ़ते कोरोना मरीजों के बीच अब चिंता की बात ये है कि इसमें गंभीर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों को देखते हो अगस्त की तुलना में सितम्बर में ऐसे मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी. नतीजन, ऑक्सीजन की डिमांड भी एकाएक बढ़ गई है. अब हालात ये हो गए है कि न केवल निजी अस्पतालों को बल्कि सरकार और चिकित्सा विभाग को भी ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. हालांकि सरकार का दावा है कि अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडर्स की व्यवस्था है, लेकिन आगामी दिनों में बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए गहलोत सरकार ने एडवांस प्लान पर काम शुरू कर दिया है. इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 65 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की है. जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट और सोसायटी से जुडे़ कॉलेजों के अस्पतालों में जनरेशन प्लांट लगाए जाने है.  

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(आखिर सरकार के एडवांस प्लान के पीछे की वजह क्या ?)

- राजस्थान में हर रोज 12000 ऑक्सीजन सिलेंडर्स की आपूर्ति किया जाना संभव है.

- जून माह तक इन 12000 ऑक्सीजन सिलेंडर्स में से 4200 सिलेंडर्स अस्पतालों में और शेष इंडस्ट्री में जा रहे थे.

- लेकिन अगस्त माह में A सिम्टोमेटी मरीजों में भी सांस की दिक्कतों के सामने आने लगे मामले.

- जैसे ही इस तरह के मरीजों की तादात अस्पताल में बढ़ी तो एकाएक ऑक्सीजन की डिमाण्ड में भी हुआ इजाफा.

- जुलाई माह में अस्पतालों की डिमांड बढ़कर 5500 और अगस्त-सितम्बर में यह बढ़कर 8000 तक पहुंच गई है.

- विभागीय अधिकारियों की माने तो मरीजों की हर दिन की बढ़ती संख्या को देखते हुए अक्टूबर के अंत तक यह डिमांड बढ़कर लगभग 12000 तक पहुंच जाएगी.

- ऐसे में अलर्ट मोड पर आई सरकार ने निजी ऑक्सीजन प्लांट के अधिग्रहण के साथ ही नए प्लांट लगाने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया है.

(सरकार की ये है जिलों से लेकर मेडिकल कॉलेजों के लिए तैयारी):-

- वैसे तो सेन्ट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सिस्टम विकसित करने के लिए सरकार पहले ही विचार बना रही थी. 

- लेकिन कोरोना महामारी के दौरान अगस्त सितम्बर में एकाएक ऑक्सीजन बैड की जरूरत बढ़ी तो इस दिशा में तेजी से काम शुरू किया गया है. 

- जिला अस्पतालों में जहां सेन्ट्रलाइज्ड पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर 14 कॉलेजों के लिए भी 65 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है. 

- इस राशि से सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में 20 केएल क्षमता के लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट और सोसायटी से जुडे़ कॉलेजों के अस्पतालों में जनरेशन प्लांट लगाए जाने है. 

- जयपुर में चार, जोधपुर बीकानेर में 2-2 लगेंगे लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट, जबकि शेष मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में एक-एक लगेगा प्लांट. 

सरकार की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑक्सीजन प्लांट को लगाने के लिए फर्मों को फीक्स टाइम दिया गया है. चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया का कहना है कि पांच जगहों पर प्लांट इसी माह लगा दिए जाएंगे,जबकि शेष बची जगहों पर अक्टूबर माह तक ऑक्सीजन प्लांट लगेंगे. इसके बाद काफी हद तक ऑक्सीजन की दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा.  

एसएमएस अस्पताल होगा ऑक्सीजन सिलेण्डर फ्री !

- प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल को लेकर सरकार का एक्शन प्लान

- एसएमएस अस्पताल में लगाए जाएंगे 20-20 KL क्षमता के दो लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट

- 20KL क्षमता के एक प्लांट से सामान्य परिस्थिति में एक हजार बैड को सप्लाई हो सकती है

- आमदिनों में एसएमएस में दो हजार से आसपास बैड पर मरीज होते है भर्ती

- ऐसे में दोनों प्लांट से काफी हद तक ऑक्सीजन की सप्लाई की डिमाण्ड होगी पूरी

- इसके साथ ही दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट हाल ही में हो चुके है अस्पताल में शुरू

- खुद चिकित्सा शिक्षा सचिव का दावा, जब अस्पताल में दोनों लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट हो जाएंगे शुरू

- तो काफी हद तक छोटे सिलेण्डर से ऑक्सीजन की निर्भरता होगी खत्म

- सिर्फ विशेष परिस्थिति के लिए ही मंगवाए जाएंगे ऑक्सीजन के छोटे सिलेण्डर

सरकार का दावा है कि अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडर्स की व्यवस्था है और आने वाले दिनों में बढ़ती डिमांड को देखते हुए हर तरह के विकल्प तैयार किए जा रहे हैं. हालांकि ऑक्सीजन प्लांट के लिए अक्टूबर अंत तक की डेडलाइन भी निर्धारित की गई है. लेकिन यदि इस टाइम लाइन के प्रति गंभीरता नहीं रखी गई तो हालात बिगडने में देरी नहीं लगेगी. क्योंकि जिस गति से गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से अक्टूबर अंत या नवम्बर माह में सरकार के लिए बड़ी चुनौती देखी जा रही है. ऐसे में उम्मीद ये है कि सरकार की मंशा के अनुरूप फील्ड में काम होगा ताकि जरूरतमंद मरीजों का प्राणवायु ऑक्सीजन के लिए दर दर भटकना नहीं पड़े.  

VIDEO: कोरोना के गंभीर मरीज को जाते ही मिलेगी 'ऑक्सीजन', फर्स्ट इंडिया की खबर के बाद ओपीडी में नई व्यवस्था

VIDEO: कोरोना के गंभीर मरीज को जाते ही मिलेगी 'ऑक्सीजन', फर्स्ट इंडिया की खबर के बाद ओपीडी में नई व्यवस्था

जयपुर: प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल आरयूएचएस में गंभीर कोरोना मरीजों को तत्काल "ऑक्सीजन" बैड उपलब्ध होगा. अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर फर्स्ट इंडिया की खबर के बाद RUHS अस्पताल प्रशासन ने आज से व्यवस्थाओं को दुरूस्त करना शुरू कर दिया है. इसके तहत पहले ही दिन ओपीडी में 15 ऑक्सीजन बैड का होल्डिंग एरिया बनाया गया है, जहां मरीज को भर्ती करते ही जरूरत के हिसाब से ट्रिटमेंट मिलेगा. इसके बाद उसे बैड की स्थिति के हिसाब से वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा.

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अस्पताल में गणेश प्रतिमा की स्थापना के लिए पहुंचे एसएमएस मेडिकल कॉलेज के अति.प्राचार्य डॉ एसएम शर्मा समेत पूरी टीम ने नई व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान फर्स्ट इंडिया संवाददाता विकास शर्मा ने RUHS में प्रशासनिक जिम्मा संभाल रही पूरी टीम से की खास बातचीत...
 

कानून में संशोधन कर आत्महत्याओं पर अंकुश लगाएं राजस्थान सरकार- रामलाल शर्मा

कानून में संशोधन कर आत्महत्याओं पर अंकुश लगाएं राजस्थान सरकार- रामलाल शर्मा

जयपुर: भाजपा के प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता व विधायक रामलाल शर्मा ने राजस्थान में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर कहा है कि राजस्थान सरकार कानूनों में संशोधन करे और आत्महत्याओं पर अंकुश लगाने का काम करें. रामलाल शर्मा का तर्क है कि पिछले 2 महीनों में राजस्थान में आत्महत्याओं की संख्या में बहुत तीव्र गति से बढ़ोतरी हो रही है. आत्महत्याओं के मुख्य रूप से दो कारण माने जाते हैं. बढ़ी हुई ब्याज दर पर लिए हुए पैसों के लिए सूदखोर द्वारा टॉर्चर किया जाना और नए युवाओं का जुए के अंदर फंसना और इन्हीं दो कारणों की वजह से आत्महत्या बढ़ी हैं.

वर्तमान में बने हुए कानून इतने प्रभावी नहीं:  
शर्मा ने कहा कि वर्तमान में बने हुए कानून इतने प्रभावी नहीं है कि इन पर अंकुश लगाया जा सके. जुए के अंदर पुलिस पकड़ कर लाती है और कार्रवाई करती है. लेकिन जमानती अपराध होने के नाते उनको तत्काल रिहा कर दिया जाता है और इसकी वजह से जुआ खेलने वाले अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है. अब तो जुए का प्रकार भी बदल गया है अब इसके लिए लोगों को इकट्ठा होने की आवश्यकता नहीं है. 

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राजस्थान सरकार कानूनों में संशोधन करें:
उन्होंने कहा कि कई मोबाइल ऐप ऐसी आ चुकी है कि लोग घर बैठे जुआ खेल सकते हैं. लेकिन तीव्र गति से बढ़ रही आत्महत्याओं का कारण जुआ और बढ़ी हुई ब्याज दर पर पैसा वसूल करना है. विधायक शर्मा ने मांग की है कि राजस्थान सरकार कानूनों में संशोधन करें या अध्यादेश जारी करें और जो आत्महत्यायें हो रही है, उन पर अंकुश लगाने का काम करें. 

राज्यसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

राज्यसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नई दिल्ली: राज्यसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. छोटी सी अवधि होने के बावजूद सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया जबकि हंगामे के चलते आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया गया. 

यह सत्र कुछ मामलों में ऐतिहासिक रहा:  
सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह सत्र कुछ मामलों में ऐतिहासिक रहा है. इस बार सत्र के दौरान उच्च सदन के सदस्यों को बैठने की नई व्यवस्था के तहत पांच अन्य स्थानों पर बैठाया गया. उच्च सदन के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. इसके साथ ही लगातार दस दिनों तक सदन ने काम किया. शनिवार और रविवार को भी सदन का अवकाश नहीं रहा. 

सत्र के दौरान छह विधेयकों को पेश किय गया:
उन्होंने कहा कि इस बार सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया गया या लौटा दिया गया. इसके साथ ही छह विधेयकों को पेश किय गया. सत्र के दौरान पारित किए गए विधेयकों में कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक, महामारी संशोधन विधेयक, विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक, जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक शामिल हैं. 

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इस सत्र के दौरान 104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ:
नायडू ने बताया कि इस सत्र के दौरान 104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ. उन्होंने कहा कि इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर व्यवधान के कारण जहां सदन के कामकाज में तीन घंटों का नुकसान हुआ वहीं सदन ने तीन घंटे 26 मिनट अतिरिक्त बैठकर कामकाज किया. उन्होंने कहा कि पिछले चार सत्रों के दौरान उच्च सदन में कामकाज का कुल प्रतिशत 96.13 फीसदी रहा है. 

पहली बार उपसभापति को हटाये जाने का नोटिस दिया गया:
नायडू ने कहा कि राज्यसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उपसभापति को हटाये जाने का नोटिस दिया गया. सभापति ने कहा कि उन्होंने इसे खारिज कर दिया क्योंकि वह नियमों के अनुरूप नहीं था. उन्होंने इसके बाद सदन में हुई घटनाओं को ‘‘पीड़ादायक’’ बताया. 

खाटूश्यामजी मंदिर अब 31 अक्टूबर तक रहेगा बंद, ऑनलाइन दर्शन की रहेगी व्यवस्था

खाटूश्यामजी मंदिर अब 31 अक्टूबर तक रहेगा बंद, ऑनलाइन दर्शन की रहेगी व्यवस्था

सीकर: विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम के मंदिर के पट अब 31 अक्टूबर तक बंद रहेंगे. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सीकर जिले में लागू हुई धारा 144 को देखते हुए श्याम मंदिर कमेटी ने यह फैसला लिया है. जिसे लेकर कमेटी ने आम सूचना भी जारी की है.

एक अक्टूबर से खुलना था मंदिर:
बता दें कि इससे पहले सरकार की ओर से मिली छूट के बाद खाटूश्यामजी का मंदिर एक अक्टूबर से खुलना था. जिसकी श्याम मंदिर कमेटी की ओर से पूरी तैयारियां भी कर ली गई थी. लेकिन, दो दिन पहले जिले में लागू हुई धारा 144 को ध्याम में रखते हुए मंदिर कमेटी की बैठक हुई. जिसमें श्याम मंदिर के पट अब 31 अक्टूबर तक बंद रहने का फैसला किया गया है.

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ऑनलाइन दर्शन की रहेगी व्यवस्था: 
खाटूश्यामजी मंदिर बंद होने की अवधि के दौरान श्याम भक्तो के लिए बाबा श्याम के ऑनलाइन दर्शनों की व्यवस्था जारी रहेगी. 

VIDEO: अब परकोटे में जमीन के अंदर दौड़ेगी मेट्रो, सीएम गहलोत ने दिखाई हरी झंडी

जयपुर: राजधानी के परकोटा क्षेत्र में अब बड़ी चौपड़ तक मेट्रो दौड़ेगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हरी झंडी दिखाने के साथ ही आज 7 साल का इंतजार खत्म हो गया है. सीएम गहलोत ने आज इसका वर्चुअल उद्घाटन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की. इसके साथ ही बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. अब लोग शाम 4 बजे से बड़ी चौपड़ से मेट्रो में सफर कर सकेंगे.  

इस मौके पर परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, मेट्रो सीएमडी भास्कर ए सावंत सहित कई अधिकारी सएमआर में मौजूद रहे तो बड़ी चौपड़ पर मुख्य सचेतक महेश जोशी और विधायक अमीन कागजी के साथ कई अधिकारी वहां मौजूद रहे. 

इस काम में केवल नौ पेड़ ही काटे गए:
सीएम गहलोत ने कहा कि जहां यह काम चल रहा था वहां हैरिटेज के साथ काफी व्यस्त इलाका था. ऐसे में कोई नुकसान नहीं पहुंचे इसका ध्यान रखना बड़ी चुनौती थी. बिना दुर्घटना के इतना बड़ा काम हो जाना आश्चर्य की बात है. उन्होंने कहा कि इस काम में केवल नौ पेड़ ही काटे गए. 

सेकंड फेज का काम भी शुरू करेंगे:
इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सीतापुरा से अंबाबाड़ी तक का 22 किमी का सेकंड फेज का काम भी शुरू करेंगे. इसमें एयरपोर्ट भी जुड़ जाएगा. इसके साथ ही जल्द ही मानसरोवर से दूसरे इलाकों को भी जोड़ा जाएगा. हमारी प्रायरिटी में होने के बाद भी कोरोना के चलते इसमें विलंब हो रहा है. इस पूरे काम के लिए सीएम गहलोत ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे जयपुर और कोटा का ध्यान रखते हैं. ऐसे में मेरी उनसे शिकायत रहती है कि वे जोधपुर का भी उतना ही ध्यान रखें. 

महिला के हाथों हो रहा है शुभारंभ:
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन से पहले मेट्रो को चलाने वाली पायलट शैफाली से अपने विचार रखने को कहा. इस पर शैफाली ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे भूमिगत मेट्रो चलाने का मौका मिला है. सीएम गहलोत ने शैफाली का उत्साहवर्धन किया और कहा कि यह अच्छी बात है कि इस काम का शुभारंभ एक महिला के हाथों हो रहा है.  

हमारी मेट्रो का किराया कम: 
इससे पहले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि और राज्यों की तुलना में हमारी मेट्रो का किराया कम है. मेट्रो के चलने से न केवल लोगों को आसानी होगी बल्कि इससे पॉल्यूशन भी कम होगा. लोग बिना किसी दुर्घटना के अपने घर सुरक्षित पहुंच सकेंगे. 

मेट्रो में टोकन ले कर यात्रा करने पर पूरी तरह रोक रहेगी:
कोरोना को देखते हुए मेट्रो प्रबधंन ने बचाव के लिए कई फ़ैसले लिए हैं. मेट्रो में टोकन ले कर यात्रा करने पर पूरी तरह रोक रहेगी. स्मार्ट कार्ड ले कर ही मेट्रो में यात्रा कर सकेंगे. साथ ही मास्क लगाना हर यात्री के लिए अनिवार्य होगा. जिन स्टेशनों पर सोशल डिस्टेसिंग नहीं होगी वहां मेट्रो नहीं रुकेगी. सभी मेट्रो स्टेशनों पर सेनेटाईजेशन की भी व्यवस्था की गई है.  

- 2014 में शुरू हुआ था मेट्रो फेज-1बी का निर्माण कार्य

- मार्च, 2018 तक इस प्रोजेक्ट को करना था पूरा

- 02 भूमिगत मेट्रो स्टेशन बने हैं परकोटे के करीब दो किमी के दायरे में

- 1126 करोड़ आया है फेज वन भी प्रोजेक्ट का खर्चा

- मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक आसानी से पहुंच सकेंगे लोग

- बड़ी चौपड़ से मानसरोवर के बीच की मेट्रो की दूरी 11.3 किमी हो जाएगी, जो 26 मिनट में तय होगी यानी एक ट्रेन को आने-जाने में 52 मिनट लगेंगे 

- मेट्रो परियोजना पर 3149 खर्च किए गए हैं और इसको पूरा करने में 10 साल से अधिक का वक्त लगा है

किफायती किराया:- 

- 2 स्टेशन तक 6 रुपए

- 3 से 5 स्टेशन 12 रु.

- 6 से 8 स्टेशन 18 रु.

- 9 से 10 स्टेशन 22 रु.

- यह किराया अन्य किसी भी साधन से किफायती है

 

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

अमृतसर: केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों के खिलाफ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में समर्थक भी दिखाई दिए. इस दौरान पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान बिल से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. क्या सरकार रोटी को आवश्यक वस्तु नहीं मानती है? 

सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे:  
इस दौरान सिद्धू ट्रैक्टर पर सवार दिखे. साथ ही किसानों के हाथ में तख्तियां थीं और कुछ ने काले झंडे भी लिए हुए थे. सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू पिछले काफी लंबे वक्त के बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. उनका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ रिश्ता सही नहीं रहा है, ऐसे में यही वजह है कि पंजाब की पॉलिटिक्स में कम एक्टिव हैं.  हालांकि, कोरोना संकट के दौरान भी वो लगातार सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाल मुद्दों पर बात रखते रहे. 

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पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ:
बता दें कि पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है. इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विश्वास में लेने में कामयाब नहीं हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस बिल को लेकर विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. और किसानों को विपक्ष की बातों में ना आने की सलाह दी जा रही है.