VIDEO: बिजली चोरी के मामलों में अब नहीं चलेगी साहब की मनमानी, ऊर्जा विभाग ने कसी अभियंताओं पर नकेल

VIDEO: बिजली चोरी के मामलों में अब नहीं चलेगी साहब की मनमानी, ऊर्जा विभाग ने कसी अभियंताओं पर नकेल

जयपुर: प्रदेश में बिजली चोरी के मामलों में सुनवाई के दौरान "साहब" की मनमानी नहीं चलेगी.ऊर्जा विभाग ने VCR के मामलों के निस्तारण को लेकर अभियंताओं की नकेल कसी है.नई कवायद के तहत अब मौखिक आदेशों पर वीसीआर के मामलों का निस्तारण नहीं होगा.बाकायदा सक्षम अभियंता को स्पीकिंग ऑर्डर के जरिए स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने आखिर किस कैलकुलेशन के आधार पर VCR राशि को कम किया या फिर नहीं किया.आखिर क्या है नया फरमान और उपभोक्ताओं को कैसे राहत मिलेगी. 

अभियंताओं की मनमानी किसी से छिपी नहीं: 
दरअसल, बिजली कम्पनियों में बिजली चोरी के प्रकरणों की सुनवाई के दौरान अभियंताओं की मनमानी किसी से छिपी नहीं है.इस मनमानी पर लगाम कसने,सर्तकता जांच में पारदर्शिता एवं सर्तकता जांच प्रतिवेदन के दुरूपयोग को रोकने के लिए राजस्थान राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रारूम में तय किया है.ऐसे में डिस्कॉम प्रशासन ने पूर्व में जारी सभी आदेशों को समाप्त करते हुए नए आदेश जारी किए है.इस आदेश के तहत प्रत्येक वीसीआर के प्रकरण में समक्ष अधिकारी को सुनवाई के बाद "स्पीकिंग ऑर्डर" के जरिए ही फाइनल डिसीजन देना होगा.यानी अभी तक जारी मौखिक आदेशों की परम्परा अब आगे जारी नहीं रहेंगी.

बिजली चोरी के प्रकरणों की सुनवाई में अभियंताओं की जिम्मेदारी होगी तय:
-VCR विवाद के मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता की कवायद
-राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग के निर्देश पर डिस्कॉम के आदेश
-VCR मॉनिटरिंग कमेटी में सक्षम अधिकारी को किया गया पाबंध
-अब मौखिक आदेश के बजाय समक्ष अधिकारियों को देना होगा  "स्पीकिंग ऑर्डर"
-आखिर किस कैलकुलेशन के आधार पर VCR राशि को किया गया कम
-अथवा किस मापदंड के आधार पर यथावत रखी गई VCR की राशि
-ये सबकुछ आदेश में करना होगा समक्ष अधिकारी को स्पष्ट
-बगैर किसी पुख्ता कारण के यदि राशि की गई कम तो अधिकारी की जिम्मेदारी होगी तय
-अभी तक फील्ड में अभियंता चेहरा देखकर जारी कर देते थे मौखिक आदेश

राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समितियों का गठन:
नए आदेशों के तहत विद्युत चोरी करने वाले उपभोक्ता यदि नोटिस में उल्लेखित विद्युत चोरी या सिविल लाइबिलिटी की राशि से सहमत नही होता है एवं उसके विरूद्ध अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहता है तो इसके लिए राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समितियों का गठन किया गया है.ऐसे उपभोक्ता अथवा गैर उपभोक्ता नोटिस जारी होने की तारीख से 30 दिवस के अन्दर राजस्व निर्धारण. पुनरीक्षण समिति के अध्यक्ष के समक्ष अपील दायर कर सकते है. इसके लिए उनको संबंधित सहायक अभियन्ता कार्यालय में सिविल लाइबिलिटी राशि का 10 प्रतिशत अथवा 5 लाख रूपये, जो भी कम हो व सम्पूर्ण प्रशमन राशि निर्धारित आवेदन शुल्क के साथ जमा करवानी होगी.

- ये रहेगी राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समितियां  
- वृत स्तरीय राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समिति में 5 लाख रूपये तक
सिविल लाइबिलिटी के प्रकरणों की सुनवाई होगी
- संभाग स्तरीय राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समिति में सिविल लाइबिलिटी
के 5 लाख रूपये से अधिक एवं 20 लाख रूपये तक के प्रकरणों की सुनवाई होगी
- निगम स्तरीय राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समिति में सिविल लाइबिलिटी के 20 लाख रूपये से अधिक राशि के प्रकरणों की सुनवाई होगी.

निस्तारण की समय सीमा भी अब कर दी गई है तय:
वीसीआर के मामलों के निस्तारण की समय सीमा भी अब तय कर दी गई है.उपभोक्ता एवं गैर उपभोक्ता द्वारा राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समिति में आवेदन करने के सात दिवस में सहायक अभियन्ता पूर्ण प्रकरण मय विवरण को संबंधित समिति में भेजना सुनिश्चित करेंगे एवं समिति द्वारा आवेदन प्राप्त होने के 30 दिवस के अन्दर उस प्रकरण का निस्तारण करना आवश्यक होगा.डिस्कॉम की इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को निश्चिततौर पर राहत मिलेगी.

और पढ़ें