जयपुर VIDEO: राजस्थान के अवैध स्नेक रेस्क्यू माफ़िया में हड़कंप, सोशल मीडिया से हटा रहे सांप के साथ स्टंट के फोटो-वीडियो

VIDEO: राजस्थान के अवैध स्नेक रेस्क्यू माफ़िया में हड़कंप, सोशल मीडिया से हटा रहे सांप के साथ स्टंट के फोटो-वीडियो

जयपुर: राजस्थान में अवैध रूप से बिना प्रोटोकॉल के सांप पकड़ने और उसके साथ स्टंट करने का कारोबार ज़ोरो पर था. फर्स्ट इंडिया की ख़बर के बाद अवैध रूप से सांप पकड़ने वालों और सांप के साथ स्टंट कर सोशल मीडिया पर डालने वालों में अब हड़कंप मच चुका है, सोशल मीडिया से स्टंट के फ़ोटो वीडियो हटाते नज़र आ रहे हैं. यह बात अलग है कि वन विभाग अभी भी इस ओर से आंखें मूंदे बैठा है. 

ऐसे बच सकते हैं सांप और अन्य वन्यजीव:
1. सांपों के साथ स्टंट करने व सोशल मीडिया पर डालने पर 6 माह से 1 वर्ष तक की जेल का प्रावधान वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत. स्टंट नॉन बेलेबल केटेगिरी में रखा जाए (यानी स्टंट किया तो जेल पक्की)

2. कोई भी एनजीओ अथवा निजी व्यक्ति बिना प्रशिक्षण के सांप नहीं पकड़ सकता है.

3. वेटनरी डॉक्टर के अलावा कोई भी सांप का इलाज नहीं करेगा. यदि मौके पर फर्स्ट एड देता है तो उसकी जानकारी वन विभाग को देनी होगी.

4. सांप का विष निकालना गैर जमानती अपराध माना जाए। ये काम केवल गवर्नमेंट एजेंसी या वो एनजीओ कर सकता है जिसको भारत सरकार से इसका लाइसेंस प्राप्त है.

5. स्नेक रेस्क्यूर को डीएफओ लेवल का अधिकारी आई कार्ड जारी करे. आई कार्ड जारी करने से पहले पुलिस  वेरिफिकेशन अनिवार्य हो, आपराधिक मामलों में लिप्त किसी भी व्यक्ति को आईकार्ड न ज़ारी किया जाए. आई कार्ड के दुरुपयोग को गंभीर अपराध माना जाए. आई कार्ड जारी करने के साथ उसपर ज़ारी करने की तिथि एवं वैधता तिथि अंकित हो. आई कार्ड के साथ गाइडलाइंस का चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन द्वारा ज़ारी एक पत्र संलग्न हो.

6. सांप पकड़ने वाले की स्पेशियल वर्दी हो जिससे वो आसानी से पहचान में आये.

7. बिना वर्दी बिना आई कार्ड के निजी व्यक्ति को रेस्क्यू करने का अधिकार न हो.

8. स्नेक रेस्क्यू के लिए फ़ीस किलोमीटर एवं दूरी के हिसाब से तय की जाए तय मापदंड से ज्यादा पैसे लेना अपराध माना जाए.

9. रेस्क्युकर्ता को एक रजिस्टर मेंटेन करना अनिवार्य हो व रिलीज़ की डिटेल मय जीपीएस एक दूसरा रजिस्टर जो फारेस्ट बीट गार्ड के पास हो. नियमित रेस्क्यू के बाद भरना आवश्यक हो दोनों रजिस्टर की डीएफओ समय समय पर जांच करे.

10. रेस्क्यू करने के बाद यदि रेस्क्युकर्ता सांप व अन्य किसी भी वन्यजीव को अपने साथ घर ले जाता है तो उसपर आपराधिक मुकदमा वन्यजीव एक्ट के अनुसार दर्ज किया जाए.

11. निजी व्यक्तियों को रेस्क्यू के बाद सांप व अन्य वन्यजीव का कम से कम 10 मिनिट का वीडियो बनाना आवश्यक हो. जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सांप व रेस्क्यू किया वन्यजीव सुरक्षित दूरी पर निकल गया है.

12. रेस्क्युकर्ता की हर तीन से 6 माह में ट्रेंनिंग हो.

13. सांप को पकड़ने के दौरान फ्री हैंडलिंग या नंगे हाथों से सांप को पकड़ना चाहे सांप वेनमस हो या न हो, फ्री हैंडलिंग नहीं की जाए.

14. सांप पकड़ने वाले के पास प्रॉपर किट हो.बिना किट के रेस्क्यू करना नहीं चाहिए.

15. जिले में कितने आधिकारिक रूप से सांप पकड़ने वाले हैं उनके नाम नंबर आई कार्ड जारी होने के बाद डीएफओ प्रेस नोट से आम जनता को अवगत कराएं. सांपों के साथ अवैध काम करने वालों को पकड़वाने पर आम जनता के लिए ईनाम का प्रावधान हो.

सांप को पकड़ने और रिलीज़ करने का विशेष प्रोटोकॉल:

वन विभाग के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन साहब शायद अभी तक नींद से जागे नहीं है. सांप को पकड़ने और रिलीज़ करने का विशेष प्रोटोकॉल होता है जिसे प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को लिखित में आदेशित करना है. सभी डिवीज़न में ये लिखित आदेश पहुंचते ही स्वयं विभागीय अमला हरक़त में आएगा और अवैध रूप से रेस्क्यू करने वालों और सांप के साथ सोशियल मीडिया पर स्टंट करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकेगा. अभी हो ये रहा है कि जो पकड़ में आ रहे हैं उनसे माफीनामे लिखवाए जा रहे हैं जबकि होना ये चाहिये कि लिखित आदेश और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के आधार पर सीधी गिरफ्तारी होनी चाहिए.

रेस्क्यू और रिलीज की कोई निगरानी नहीं:

रेस्क्यू के नाम पर कई लोगों नें अपनी प्राइवेट दूकानदारीयां खोल रखी हैं. प्राइवेट विज़िटिंग कार्ड छपवा रखे हैं, वेटनरी नॉलेज न होते हुए भी सांप का इलाज तक कर रहे हैं. रेस्क्यू और रिलीज की कोई निगरानी नहीं है. कई सालों से ये गोरखधंधा लगातार चल रहा है. इसमें अवैध रूप से वेनम एक्सट्रैक्शन एवं सांपों की तस्करी भी शामिल है. पिछले कुछ समय से सोशियल मीडिया पर सांप पकड़ने वालों की बाढ़ सी आ गई है, जिसको देखो वो सांप पकड़ रहा है पकड़ने के बाद सांप के साथ क्या हो रहा है कुछ पता नहीं. वन विभाग के अधिकारियों की ढिलाई वन्यजीवों की जान पर भारी पड़ रही है.

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