जयपुर कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने स्पीकर को भेजा इस्तीफा, बोले-27 साल से MLA हूं, ढाई साल नहीं रहूंगा तो क्या हो जाएगा

कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने स्पीकर को भेजा इस्तीफा, बोले-27 साल से MLA हूं, ढाई साल नहीं रहूंगा तो क्या हो जाएगा

कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने स्पीकर को भेजा इस्तीफा, बोले-27 साल से MLA हूं, ढाई साल नहीं रहूंगा तो क्या हो जाएगा

जयपुर: एक बार कांग्रेस में सियासत उफान पर कोरोना काल में शुरुआत हो गई है. सचिन पायलट गुट के असंतुष्ट विधायक हेमाराम चौधरी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है. हेमाराम ने ई मेल के और डाक से अलग-अलग इस्तीफे की कॉपी विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को भेजी है. हेमाराम चौधरी का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को मिलने की पुष्टि हो गई है. हेमाराम के इस्तीफे के बाद विधानसभा ने लिखित बयान जारी किया है. बयान में लिखा है-मंगलवार को विधायक हेमाराम चौधरी का इस्तीफा ई मेल से मिला है जिस पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी. हेमाराम चौधरी ने कहा कि मैंने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया है. इस्तीफा ई मेल कर दिया है और डाक से भी भेज दिया है. मैंने पहले भी इस्तीफा दिया था लेकिन उस वक्त स्वीकार नहीं किया था, पार्टी ने मुझे मनाया तो मान गया था. अब ढाई साल से विधायक हूं बहुत हो गया, आगे ढाई साल नहीं रहूंगा तो क्या हो जाएगा. इस्तीफे की वजह इसके स्वीकार होने के बाद बताउंगा. उधर पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि हेमाराम जी हमारी पार्टी के वरिष्ठ और सम्मानीय नेता हैं. उनके विधायक पद से इस्तीफ़े की जानकारी के बाद मेरी उनसे बात हुई है. यह पारिवारिक मामला है, जल्द ही मिल बैठकर सुलझा लिया जाएगा.

हेमाराम चाैधरी लंबे समय से नाराज:
हेमाराम चौधरी सचिन पायलट खेमे के विधायक हैं. पिछले साल पायलट खेमे की बगावत के समय हुई बाड़ेबंदी में भी वे 19 विधायकों के साथ बाड़ेबंदी में थे. विधानसभा के बजट सत्र के दाैरान भी हेमाराम ने तल्ख तेवर दिखाते हुए सरकार पर उनकी आवाज दबाने और उनके विधानसभा क्षेत्र में विकास के कामों में भेदभाव का आरोप लगाया था. हेमाराम चौधरी सरकार बनने के बाद से ही असंतुष्ट चल रहे हैं, उनकी जगह हरीश चौधरी को मंत्री बनाया गया था तब से वे नाराज हैं. 14 फरवरी 2019 को भी इस्तीफा दिया था, लेकिन तब मान गए थे  हेमाराम चौधरी ने 14 फरवरी 2019 को भी इस्तीफा दिया था. उस वक्त विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था और सामने लोकसभा चुनाव होने वाले थे, पार्टी ने उन्हें मना लिया था. 2019 में इस्तीफा सार्वजनिक भी नहीं किया था. इस बार हेमाराम ने इस्तीफे की घोषणा की है. सीएचओ भर्ती में नहीं पूछे जाने को लेकर भी थे नाराज हाल ही मेडिकल में हुई कम्युनिटी हेल्थ आफिसर सीएचओ भर्ती को लेकर भी हेमाराम नाराज थे. हेमाराम ने गुढामालानी क्षेत्र में सीएचओ लगाने में राय नहीं लेने के साथ गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे. नाराजगी के कारण और बहुत से थे लेकिन यह भी उसकी लिस्ट में जुड़ गया.

गुढामालानी की जनता का क्या दोष है?: 
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हेमाराम चौधरी ने तल्ख तेवर अपनाए थे. पीडब्ल्यूडी की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान हेमाराम चौधरी ने कहा था- मुझे पता है मुझे नहीं बोलने देंगे. बोलना बहुत कुछ है। मेरी आवाज को आप यहां दबा सकते हो. यहां नहीं बोलने दोगे. दूसरी जगह बोल देंगे. बोलने का क्या खामियाजा मुझे भुगतना है यह मैं भुगतने को तैयार हूं. मेरे से कोई दुश्मनी है तो जो सजा दें. भुगतने को तैयार हूं. गुढामालानी की जनता का क्या दोष है, जो नाम के लिए एक सड़क दी है. होशियारी से सायला गुढामालानी सड़क मंजूर की. इस सड़क से गुढामालानी का क्या लेना देना? 

विधानसभा में अभी कांग्रेस के 106 विधायक:
विधानसभा में अभी कांग्रेस के 106 विधायक हैं, हेमाराम का इस्तीफा मंजूर होने पर यह संख्या 105 हो जाएगी. विधानसभा में बहुमत के लिए 101 विधायक चाहिए. कांग्रेस सरकार के पास अभी 13 ​निर्दलीय, एक आरएलडी, दो सीपीएम विधायकों का समर्थन है. इस तरह गहलोत सरकार के पास बहुमत का पर्याप्त आंकड़ा है. हेमाराम के इस्तीफे के बाद डैमेज कंट्रोल शुरू हो गया है कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह सिंह डोटासरा ने कहा कि परिवार का मसला है सुलझा लेंगे. बहरहाल सीपी जोशी इस्तीफा मंजूर करते हैं या नहीं इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा. इस्तीफे पर अभी तीनों की ही प्रतिक्रिया आना बाकी है.

इस्तीफे के बाद सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर शुरु: 
हेमाराम चौधरी के इस्तीफे के बाद सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर शुरु हो गया है. राजनीतिक जानकार इसे सचिन पायलट खेमे की रणनीति का हिस्सा मानकर चल रहे हैं. पिछले साल मई में राज्यसभा चुनावों के वक्त विधायकों की बाड़ेबंदी हुई थी, अब एक साल बाद हेमाराम के इस्तीफे के बाद फिर से सियासी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. जानकार हेमाराम के इस्तीफे को आगे आने वाले सियासी संकट के संकेत के तौर पर देख रहे हैं.हेमाराम के इस्तीफे को सचिन पायलट खेमे की सुलह कमेटी के सामने रखी गई मांगों को 10 माह बाद भी पूरा नहीं करने से भी जोड़कर देखा जा रहा है. पायलट खेमे के विधायक अपने इलाकों में काम नहीं होने, सरकार मेें तवज्जे नहीं मिलने की शिकायत करते आए हैं. 14 अप्रैल को सचिन पयलट ने भी कहा था कि सुलह कमेटी के सामने तय हुई बातों को अब पूरा करना चाहिए और अब देरी का कोई कारण नहीं बचता. पीसीसी चीफ डोटासरा कहते है मसले सुलझा लिया जायेंगे.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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