बूंदी का रामगढ़ विषधारी होगा प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व, वन विभाग के प्रस्ताव को NTCA ने दी मंजूरी; नए टाइगर रिजर्व का कैसा होगा स्वरूप ?

बूंदी का रामगढ़ विषधारी होगा प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व, वन विभाग के प्रस्ताव को NTCA ने दी मंजूरी; नए टाइगर रिजर्व का कैसा होगा स्वरूप ?

बूंदी का रामगढ़ विषधारी होगा प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व, वन विभाग के प्रस्ताव को NTCA ने दी मंजूरी; नए टाइगर रिजर्व का कैसा होगा स्वरूप ?

जयपुर: लंबी जद्दोजहद के बाद आकर बूंदी के रामगढ़ विषधारी को प्रदेश के चौथे टाइगर रिजर्व के तौर पर मंजूरी मिल गई है. एमटीसीए ने रामगढ़ विषधारी को मंजूरी दे दी है, अब जल्द ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इसकी अधिसूचना जारी करेगा. यह हाड़ौती का दूसरा और प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व होगा. नए टाइगर रिजर्व का कैसा होगा स्वरूप ?

दरअसल रामगढ़ विषधारी को नए टाइगर रिजर्व के तौर पर घोषित करवाने में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का भी अहम योगदान रहा है. बिड़ला लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहे थे. बहरहाल पिछले दिनों वाइल्डलाइफ वार्डन मोहन लाल मीणा ने मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के मुताबिक रामगढ़ विषधारी को टाइगर रिजर्व के तौर पर घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया था. इसके बाद हुई एनटीसीए की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है.

इसके उत्तर पूर्व में रणथंभौर टाइगर रिजर्व व दक्षिण में मुकुंदरा टाइगर रिजर्व:
राज्य सरकार की ओर से वन सचिव बी प्रवीण में 27 मई को एनटीसीए को पत्र लिखा, जिसमें बूंदी रामगढ़ सेंचुरी इसके आसपास के क्षेत्र को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत घोषित करने की सिफारिश की गई थी. इस पत्र में लिखा था कि बूंदी का रामगढ़ विषधारी दो टाइगर रिजर्व के बीच में आता है. इसके उत्तर पूर्व में रणथंभौर टाइगर रिजर्व व दक्षिण में मुकुंदरा टाइगर रिजर्व है. दोनों टाइगर रिजर्व के बीच के क्षेत्र को टाइगर आने जाने के काम में लेते हैं. यह रणथंभौर का बफर जोन भी है. अब रामगढ़ विषधारी को टाइगर रिजर्व के तौर पर एनटीसीए की मंजूरी के बाद धौलपुर से कोटा तक एक वृहद टाइगर कॉरिडोर विकसित हो जाएगा. 

रामगढ़ विषधारी के लिए 1050 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र प्रस्तावित किया गया:
एनटीसीए की तकनीकी समिति की बैठक में मंजूरी के बाद अब अधिसूचना जारी होगी और इसके बाद टाइगर रिजर्व में बाघ शिफ्ट किए जाएंगे. रामगढ़ विषधारी में एक बाघ टी115 मौजूद है. रामगढ़ विषधारी के लिए 1050 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है. दरअसल रामगढ़ विषधारी सदियों से बाघों के लिए एक मेटरनिटी होम के तौर पर प्रसिद्ध रहा है. सघन जंगल बाघों को सदियों से बेहतर आश्रय स्थल देते रहे हैं. 

राज्य सरकार के सचिव की ओर से टाइगर रिजर्व का नोटिफिकेशन जारी होगा:
रामगढ़ का बेहतर प्राकृतिक वातावरण और इसके बीच बहने वाली मेज नदी खूबसूरत वादियों में बाघों की दहाड़ से इसे देश के सबसे खूबसूरत जंगल होने का गौरव प्रदान करते हैं. यहां रणथंभौर से भाग टी91 और टी 62  के आने के बाद यहां की पूरी फिजा ही बदल गई थी. टी 91 को यहां से मुकन्दरा में शिफ्ट किया गया और टी 62 वापस रणथंबोर लौट गया था. फिलहाल यहां टी115 स्वतंत्र रूप से घूम रहा है. रामगढ़ विषधारी के टाइगर रिजर्व के तौर पर अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य सरकार कंजर्वेशन प्लान बनाकर केंद्र सरकार को भेजेगी. इसके बाद राज्य सरकार के सचिव की ओर से टाइगर रिजर्व का नोटिफिकेशन जारी होगा. इसमें रिजर्व का बफर और कोर एरिया घोषित होगा. 

राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग कार्य के लिए बजट आवंटित होगा:
भारत सरकार की ओर से यह प्लान मंजूर होने के बाद इसी के अनुसार आगे के कार्य होंगे. इसके बाद यहां राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग कार्य के लिए बजट आवंटित होगा. यहां एंक्लोजर के अलावा सुरक्षा दीवार व फेंसिंग भी होगी. प्रे बेस और ट्रांसलोकेट की प्रोसेस शुरू हो जाएगी. घना पक्षी विहार से करीब 150 शीतल यहां लाए जाएंगे, स्टाफ की भर्ती होगी साथ ही बॉर्डर होमगार्ड भी सुरक्षा में तैनात होंगे. रिजर्व के कर्मचारियों को विभिन्न वेतन भत्ते स्वीकृत होंगे. यहां पर्यटकों के लिए अलग-अलग जोन से एंट्री होगी इस प्रोसेस में करीब 5 वर्ष तक का समय लग सकता है. 

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 1050.12 वर्ग किलोमीटर का होगा:
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 1050.12 वर्ग किलोमीटर का होगा. इसमें 309.21 वर्ग किलोमीटर और क्षेत्र और 740.91 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र होगा. 1050 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 8 गांव भैरूपुरा, केशवपुरा, भीमगंज, हरीपुरा, गुलखेड़ी, गुढ़ा, मकदूका और धुंधला हैं. इन गांव में करीब 1000 मकान है और 4500  लोग यहां रहते है यह गांव करीब 80 वर्ग किलोमीटर में बसे है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल रामगढ़ विषधारी में एक बाघ, 16 लेपर्ड, 11 स्लॉथ बियर, 45 सांभर, 1189 नीलगाय, 77 शीतल और 606 जंगली सूअर है. अब अधिसूचना जारी होते ही यहां पर बाघों के शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. रणथंभौर में फिलहाल बाघों की संख्या 69 पहुंच गई है. ऐसे में वहां बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट रोकने के लिए रामगढ़ विषधारी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. 
 

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