जयपुर VIDEO: 'चिरंजीवी' को बूस्टर डोज का इंतजार ! आखिर कब तक चलेगी निजी अस्पतालों की मनमानी ?

VIDEO: 'चिरंजीवी' को बूस्टर डोज का इंतजार ! आखिर कब तक चलेगी निजी अस्पतालों की मनमानी ?

जयपुर: प्रदेश की जनता को "यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज" देने की सोच के साथ शुरू की गई चिंरजीवी योजना को अभी "बुस्टर डोज" का इंतजार है. योजना को शुरू हुए करीब साढ़े तीन माह का समय बीत चुका है. इस दरमियान 1.34 करोड़ परिवारों को योजना से जोड़ तो दिया गया, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी और निजी अस्पतालों की मनमानी के चलते कई जगह मरीज इलाज को लेकर गुमराह हो रहे है. अकेले राजधानी की बात की जाए तो कुछ अस्पताल जहां सरकार को पत्र लिखकर योजना से पल्ला झाड़ रहे है तो कुछ सिर्फ खुद के फायदे के पैकेज में ही मरीजों का इलाज कर रहे है. 

नि: शुल्क दवा-जांच योजना के जरिए राजस्थान को देश दुनिया में एक अलग पहचान दिलाने वाले सीएम अशोक गहलोत ने एक मई यानी मजदूर दिवस के दिए 1600 करोड़ की "यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज" स्कीम की शुरूआत की. मंशा सिर्फ एक है कि लोगों को चिकित्सा पर लगने वाले बड़े खर्चो से पूरी तरह फ्री करके सामाजिक सुरक्षा दी जाए. सीएम की मंशा के अनुरूप लोगों ने भी योजना पर बड़ा विश्वास जताया है. करीब सवा करोड़ परिवारों को निशुल्क कैटेगिरी में योजना से जोड़ा गया, जबकि करीब नौ लाख परिवार 850 रुपए की प्रीमियम राशि देकर योजना से जुड़ चुके है. लेकिन जब बार अस्पतालों में सेवाएं देने की आई तो राजधानी जयपुर में ही निजी अस्पताल मनमानी पर उतर रहे है. जब योजना की रियलिटी जांचने के लिए फर्स्ट इंडिया ने योजना से जुड़े कुछ अस्पतालों से सम्पर्क किया तो उन्होंने क्या कुछ कहा वो आपको सुनाते है.

केस एक:-
रिपोर्टर : हैलो, ओम प्रकाश जी बोल रहे है महावीर राजस्थान हॉस्पिटल से....?
जवाब : जी बोल रहा हूं
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रिपोर्टर : सर आपके यहां चिरंजीवी योजना में एडमिशन ले लेंगे क्या ?
जवाब : नहीं, हमने चिंरजीवी में एडमिशन स्टॉप कर रखा है....
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रिपोर्टर : लेकिन आपका नाम तो योजना की वेवसाइट पर सूचीबद्ध है ?
जवाब : देखिए, हमने सरकार को पत्र भेज रखा है....हम किसी भी पेशेंट को चिंरजीवी योजना में नहीं ले रहे है
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रिपोर्टर : सर, हमने को चिंरजीवी में इंश्योरेस ले रखा है, इसलिए मरीजों का लाना चाह रहे थे ?
जवाब : देखिए हमने सरकार को सूचना भेज रखी है कि योजना में काम नहीं कर सकते है
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केस - 2
रिपोर्टर : हैलो, विवेक जैन बोल रहे है, अपेक्स हॉस्पिटल से....?
जवाब : जी बोल रहा हूं
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रिपोर्टर : सर आपके यहां चिरंजीवी योजना में एडमिशन ले लेंगे क्या ?
जवाब : मरीज को क्या दिक्कत हो रही है
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रिपोर्टर : जनरल मेडिसिन में मरीज को भर्ती कराना है
जवाब : देखिए, हम जनरल मेडिसीन में चिरंजीवी योजना में मरीज नहीं ले रहे है, सिर्फ सर्जरी में ले रहे है
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रिपोर्टर : योजना की वेबसाइट पर आपके यहां मेडिसिन का पैकेज शो कर रहा है ?
जवाब : हो सकता है वेबसाइट पर शो कर रखा हो, लेकिन हमने अभी तक मेडिसिन में मरीज लेना शुरू नहीं किया है
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रिपोर्टर : क्या इसके बारे में आपने चिकित्सा विभाग को सूचना दे रखी है ?
जवाब : जी, मैं सूचना नहीं देता हूं, हमारे प्रबन्धन ने दे रखी होगी
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ये दो केस तो सिर्फ एक बानगी है, इसके अलावा फर्स्ट इंडिया टीम ने कुछ अन्य अस्पतालों से भी सम्पर्क किया तो किसी ने पहले जांच कराके आने को कह दिया, तो किसी ने कहा कि सिर्फ कार्डिक के मरीज को ही योजना में भर्ती कर रहे हैं. इसके अलावा दूसरे पैकेज हमारे यहां शुरू नहीं किए गए है. इसके अलावा कुछ अस्पतालों ने तो किसी भी एक्शन से बचने के लिए प्रत्येक मरीज से शपथ पत्र लेना शुरू कर दिया है कि वे चिरंजीवी योजना में ट्रीटमेंट लेना नहीं चाहते हैं. ऐसे में लाभार्थी असमंजस में है कि योजना की वेवसाइट पर तो अस्पतालों के नाम दिए हुए है, जब वहां सम्पर्क किया जाता है तो कुछ अलग ही जवाब मिलता है. इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के उच्चाधिकारियों से सम्पर्क भी साधा गया, तो वे किसी भी जवाब से बचते नजर आए,...आइए अब आपको बताते है सरकारी आंकड़ों में योजना का रिपोर्ट कार्ड

- हर परिवार को चिकित्सा का अधिकार देने के उद्देश्य से एक मई से शुरू की गई चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना

- करीब सवा करोड़ परिवारों को निशुल्क कैटेगिरी में योजना से जोड़ा गया, जबकि करीब नौ लाख परिवार 850 रुपए की प्रीमियम राशि देकर योजना से जुड़े

- चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अब तक कुल 1,34,60,132 परिवार को चुके है पंजीकृत

- करीब साढ़े तीन माह के दौरान 1,74,192 परिवार किए जा चुके योजना से लाभान्वित

- यदि राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी से उपलब्ध डेटा पर नजर दौडाए तो करीब 80 परिवारों को सरकारी अस्पतालों में मिला योजना के तहत ट्रीटमेंट, जबकि करीब 88 हजार के आसपास परिवार निजी अस्पतालों में हो चुके लाभान्वित

- लेकिन इस डेटा के मुताबिक आधा दर्जन के आसपास जिले ऐसे है, जहां निजी क्षेत्र के अस्पतालों में 100 परिवारों को भी योजना के तहत ट्रीटमेंट दिया गया हो....हालांकि,इन जिलों के सरकारी अस्पतालों में जरूरी योजना के तहत मरीज लाभांवित हुए है.

- जयपुर जिले की बात की जाए तो योजना से अभी तक 63 निजी अस्पतालों को जोड़ा गया है, लेकिन इसमें राजधानी के बड़े अस्पतालों ने अभी तक दूरी बनाई हुई है....जो बड़े अस्पताल जुड़े भी है तो वे सिर्फ चुनिन्दा पैकेज में ही ट्रीटमेंट दे रहे है

इस रिपोर्ट के पीछे हमारी मंशा ये कतई नहीं है कि योजना में लोगों को फायदा नहीं मिल रहा है, बल्कि ये है कि जिस मंशा के साथ योजना शुरू की गई थी, वो पूरी करने के लिए अभी फील्ड में काफी काम करना होगा. सरकारी सिस्टम एक तरफ जहां मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना होगा, साथ ही पब्लिक ग्रीवेंस के लिए अधिकारियों को अपने चैंबर के दरवाजे आमजन और निजी अस्पताल संचालकों के लिए खोलने होंगे, तभी उन्हें वास्तविकता में सही फीडबैक मिलेगा...यदि ऐसा किया गया तो निश्चिततौर पर निजी अस्पतालों में "नो पेशेंट रिटर्न" पॉलिसी सख्ती से लागू हो पाएगी. 

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