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अब आखिर क्या होगा सचिन पायलट कैंप के मुद्दों के निपटारे का? अहमद पटेल के चले जाने के बाद अब पूरी पार्टी में अनिश्चितता

जयपुर: वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद अहमद पटेल के निधन के बाद अब पूरी कांग्रेस पार्टी में अनिश्चितता का माहौल है. अगर राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि अब आखिर क्या होगा पायलट कैंप के मुद्दों के निपटारे का? ऐसे में अब माना जा रहा है कि अहमद पटले के निधन के बाद 3 सदस्य कमेटी का भी अब पुनर्गठन होगा. अहमद भाई के स्थान पर किसी नए वरिष्ठ नेता का चयन होगा. फिलहाल गांधी परिवार में एक VACUUM बन गया है. 

मंत्रिमंडल फेरबदल के प्रस्ताव अहमद भाई के समय ही तैयार हो चुके थे: 
अलबत्ता मंत्रिमंडल फेरबदल के प्रस्ताव अहमद भाई के समय ही तैयार हो चुके थे और इन प्रस्तावों पर केवल सोनिया की मंजूरी का इंतजार था. इन प्रस्तावों के अनुसार 15 विधायकों को संसदीय सचिव और 10 विधायकों को निगमों और बोर्डों में चेयरमैन बनना था. इसके साथ ही नए मंत्रियों की लिस्ट में आधा दर्जन से ज्यादा नाम थे. इनमें महेश जोशी, हेमाराम चौधरी, बृजेंद्र ओला, रामलाल जाट, राजेंद्र गुढ़ा, महेंद्र चौधरी, संयम लोढ़ा और मुरारी मीणा के नाम शामिल थे. 

मंत्री अशोक चांदना का भी प्रमोशन होना था:
इसके साथ ही पायलट कैंप के दो पुराने बर्खास्त विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा की मंत्री पद पर वापसी होनी थी. साथ ही दीपेंद्र सिंह शेखावत, दानिश अबरार, रोहित बोहरा का भी मंत्री बनना लगभग तय था. वहीं मंत्री अशोक चांदना का भी प्रमोशन होना था. चांदना को अपनी परफॉर्मेंस के लिए पुरस्कार मिलना था. दूसरी ओर 2-3 नॉन परफॉर्मर मंत्रियों की भी छुट्टी होनी थी. लेकिन अब अहमद पटेल के चले जाने के बाद सबकुछ उल्टा-पुल्टा हो गया. अब मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों पर नए सिरे से पूरी कवायद होगी और नए समीकरण बनेंगे. इन नए 'समीकरणों' से पायलट कैंप उत्साहित है. उन्हें अब ज्यादा महत्व मिलने की उम्मीद है. लेकिन अंततः राजस्थान में सब कुछ सीएम गहलोत की इच्छा से ही होगा. क्योंकि एक तरह से कांग्रेस ने राजस्थान को गहलोत को ठेके पर दे रखा है और ऐसे में सरकार और संगठन में भी आज केवल गहलोत की ही आवाज सुनाई देती है.  

मंत्री बनने के इच्छुक और खासतौर पर पायलट कैंप के लोगों में बेचैनी: 
अलबत्ता थोड़ा बहुत SAY अजय माकन का जरूर है. फिलहाल अजय माकन भी एक तरह से दिल्ली में अपने घर में ही कैद हैं. खुद एक माह तक कोरोना से पीड़ित रहने के बाद उनकी पत्नी और पुत्र भी कोरोना संक्रमित हुए हैं और इसलिए माकन का पूरा फोकस परिवार की देखभाल पर है. अब इन सारे हालातों के चलते मंत्री बनने के इच्छुक और खासतौर पर पायलट कैंप के लोगों में बेचैनी है. दूसरी ओर राजस्थान के हालात पर भाजपा आलाकमान की पूरी नजर है. क्योंकि अब महाराष्ट्र और राजस्थान की गैर भाजपा सरकारें निशाने पर है.  

 


 

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