जयपुर Rajasthan: तीसरी बार बढ़ा सरकारी कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए बनाई खेमराज कमेटी का कार्यकाल, जानिए क्या समस्याएं सुलझीं, क्या बाकी रह गए मसले

Rajasthan: तीसरी बार बढ़ा सरकारी कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए बनाई खेमराज कमेटी का कार्यकाल, जानिए क्या समस्याएं सुलझीं, क्या बाकी रह गए मसले

जयपुर: सरकारी कर्मचारियों (Government Employee) की वेतन विसंगति दूर करने के लिए बनाई खेमराज कमेटी (Khemraj Committee) का कार्यकाल तीसरी बार सरकार ने बढ़ाया है. बार-बार कमेटियों के बनाने से लेकर उनका कार्यकाल बढ़ाने और फिर रिपोर्ट सामने नहीं लाने से कर्मचारियों में गलत 'परसेप्शन' उभरने के आसार बन रहे हैं.  

पूर्व की वसुंधरा राजे सरकार हो से लेकर मौजूदा सरकार तक में सरकारी कर्मचारियों के लिए कमेटियों के बनने और कार्यकाल बढ़ाने का सिलसिला जारी है. इसे लेकर सरकारी कर्मचारियों में अलग तरह की मायूसी है क्योंकि हालांकि ओपीएस लागू करने से राहत तो मिली है लेकिन बुनियादी मसले हल न होने के चलते सरकारी कर्मचारी खुद को कमेटियों के मकड़जाल में जकड़ा महसूस कर रहा है. 

कमेटी-दर-कमेटी यूं बढ़ता गया मर्ज:-

- वसुंधरा राजे सरकार में पूर्व सीएस डीसी सामंत की अध्यक्षता में वेतन विसंगति निवारण समिति का गठन 3 नवंबर 2017 को हुआ. 

- सामंत कमेटी का कार्यकाल 8 मई 2018,8 अगस्त 2018,31 दिसंबर 2018 और 4 जुलाई 2019 को चार बार बढ़ाया गया. 

-7 वें वेतनमान संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए गठित सामंत कमेटी को वेतन विसंगति निवारण का भी जिम्मा सौंपा गया. इसे लेकर 5 अगस्त 2019 को कमेटी ने रिपोर्ट दे दी.

- इस समय यह रिपोर्ट सरकार परीक्षण करा रही है और इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है. 

खेमराज कमेटी:-

- सामंत कमेटी के बाद छूटे बिंदुओं और विसंगति के मसलों को हल करने के लिए रिटायर्ड आईएएस खेमराज की अध्यक्षता में 5 अगस्त 2021 को वेतन विसंगति परीक्षण समिति का गठन किया गया. 

- इसका कार्यकाल 1 नवंबर 2021 को 3 माह के लिए बढ़ाया गया था.

- फिर 3 फरवरी 2022 को इसे 6 माह के लिए बढ़ाया गया और अब 5 अगस्त को कमेटी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2022 तक बढ़ा दिया गया. 
चुनावी वर्ष से पूर्व बार-बार कार्यकाल बढ़ाने को सरकारी कर्मचारियों के वर्ग में बुनियादी मसलों को टालने के रूप में देखा जा रहा है और कर्मचारी नेता सामंत और खेमराज दोनों कमेटियों की रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक करके उसे लागू करने की मांग कर रहे हैं. 

क्या समस्याएं सुलझीं, क्या बाकी रह गए मसले:- 

- गहलोत सरकार सरकारी कर्मचारियों के लिए ओपीएस लागू करके फीलगुड महसूस कर रही है. 

- वहीं जिन कर्मचारियों की ग्रेड पे 2800 थी वह 3600 कर दी गई थी लेकिन 2017 में वसुंधरा राजे सरकार ने इसे वापस 2800 करके कटौती शुरू करने के आदेश कर दिए थे. 

- अब गहलोत सरकार ने 2013 के बाद जिन कर्मचारियों की एसीपी बकाया थी उन्हें लाभ दिया जिसमें काफी बड़े वर्ग को राहत पहुंची है और कुछ हद तक भरपाई हुई है.

- इसके बावजूद सरकारी नौकरी में जिनकी एंट्री पे 9840 थी, वह 7040 हो जाने से जो 2800 रुपये का नुकसान हो गया,उसकी भरपाई नहीं हो पाई है और यह सरकारी कर्मचारियों के लिए दुखती रग बन गई है. 

अब खेमराज कमेटी को सौंपा यह अतिरिक्त जिम्मा:- 

- अलग-अलग सेवाओं के लिए विशेष चयन और विशेष सेवा शर्तों के जो नियम हैं उनके तहत विशेष भत्तों की दर के बारे में परीक्षण करके अनुशंसा करेगी कमेटी.

- विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को देय हैं जो विशेष वेतन उसकी निरंतरता और देय दरों के बारे में अध्ययन/परीक्षण और अनुशंसा करेगी कमेटी.

- साथ ही डीपीसी की बैठकें,न्यायिक विवादों जैसे जो राज्य सरकार की ओर से संदर्भित  प्रकरण होंगे उनका परीक्षण/अध्ययन करके अनुशंसा करेगी कमेटी.

दरअसल पूर्व में कोरोना के प्रकोप के चलते खेमराज कमेटी के काम में देरी लाजिमी मानी जा रही थी,लेकिन अब बार-बार इसका कार्यकाल बढ़ने से सरकारी कर्मचारी ठगा-सा महसूस कर रहा है.  

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