VIDEO: पंचायत चुनावों की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस में रार, निर्दलीय विधायक और पराजित उम्मीदवार आमने-सामने

VIDEO: पंचायत चुनावों की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस में रार, निर्दलीय विधायक और पराजित उम्मीदवार आमने-सामने

जयपुर: पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस (Congress) में निर्दलीय विधायक (Independent MLA) और पराजित नेताओं के बीच विवाद खड़ा हो गया है. टिकट बंटवारे को लेकर सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक और विधानसभा चुनाव में हारे कांग्रेस प्रत्याशी आमने-सामने हो गए हैं, जिससे सत्ता और संगठन में टकराव के हालात बनने लगे हैं. विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व के सामने ही निर्दलीय विधायकों की राय से टिकट वितरण पर सवाल खड़े किए तो निर्दलीय विधायक ने विरोध करने वाले नेताओं को अपरिवक्व बताते हुए कहा कि 15 दिन से कांग्रेस का झंडा उठाने वाले हम पर सवाल खड़े नहीं करें.

विधानसभा चुनाव हारे नेता और निर्दलीय विधायक आमने-सामने होने के कारण कांग्रेस की पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर झटका लगा है. दूसरी ओर प्रदेश नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी परेशानी ये है कि वे किसके कहने से टिकटों का वितरण करें, चूंकि सत्ता और संगठन के लिए दोनों का ही साथ जरूरी है. दरअसल सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों और बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को सत्ता और संगठन में अहमियत मिलने से विधानसभा चुनाव हारे नेताओं में असंतोष है. शुक्रवार को पीसीसी में जयपुर देहात की बैठक के बाद यह विवाद बयानों के जरिए गहरा गया. दूदू से निर्दलीय विधायक और पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर ने कहा कि पंचायती राज चुनाव में टिकट वितरण का कोई झगड़ा नहीं है, अगर कांग्रेस को मिटाने की सोच किसी की है तो टिकट का कोई झगड़ा होगा ही नहीं,  जो लोग निर्दलीय विधायकों की राय से टिकट देने का विरोध कर रहे हैं वह अपरिपक्व नेता हैं और समझते नहीं है. नागर ने कहा कि हम 30 साल से कांग्रेस का झंडा उठाकर चल रहे हैं. ऐसे में अगर कोई 15 दिन में यह सोच ले कि वही कांग्रेसी है तो फिर कोई क्या कर सकता है? हम निर्दलीय विधायकों का आलाकमान से कमिटमेंट है कि हम 5 साल तक कांग्रेस की सरकार का साथ देंगे. 

चुनाव हारने के बाद हमारी ही विधानसभा क्षेत्र में हमारे साथ दुर्व्यवहार हो रहा:
शाहपुरा से विधानसभा चुनाव हारे मनीष यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पंचायत राज चुनावों में निर्दलीय विधायकों का कहने पर टिकट नहीं बांटे बल्कि विधानसभा चुनाव में जो कांग्रेस के प्रत्याशी थे उनके कहने पर ही टिकट दिया जाएं. यादव ने कहा कि हमने अपना पक्ष प्रदेश नेतृत्व के सामने रख दिया है. प्रदेश नेतृत्व को तय करना कि उनकी जिम्मेदारी केवल सरकार को बचाना है या फिर संगठन को बचाना है. यादव ने कहा कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद हमारी ही विधानसभा क्षेत्र में हमारे साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, कांग्रेस के नेताओं को किसी काम में नहीं पूछा जा रहा है, जबकि निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को सत्ता और संगठन में तवज्जो दी जा रही है.

निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों की राय से टिकट नहीं देने का भी उठा था मामला:
इससे पहले गुरूवार को भी भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर और सिरोही जिले में टिकट वितरण को लेकर बुलाई गई अलग-अलग बैठकों में निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों की राय से टिकट नहीं देने का मामला उठा था. दौसा के महुवा, भरतपुर, सिरोही जिले की बैठक में तो कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते विधायकों ने बैठक से ही दूरी बना ली थी. बहरहाल पराजित उम्मीदवारों में अधिकांश सचिन पायलट कैंप के माने जाते है, निर्दलीय विधायकों में अधिकतर सीएम अशोक गहलोत के कट्टर समर्थक है, पायलट कैंप के बगावत के समय राज्य के सभी निर्दलीय विधायक सीएम गहलोत के साथ खड़े नजर आए थे.  

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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