Rajasthan Political Crisis: बीजेपी को सचिन पायलट के खुले तौर पर फैसला लेने का इंतजार, बनाई रणनीति

जयपुर: वर्तमान के तमाम राजनीतिक घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी को इंतजार है कि सचिन पायलट खुले तौर पर क्या फैसला लेते हैं. उसके बाद भारतीय जनता पार्टी अपना मंतव्य साफ करेंगी. पायलट कैंप के 19 विधायकों को नोटिस दिए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई रणनीति बनाई है. 

ट्विटर्स पर हैकर्स का सबसे बड़ा हमला, ओबामा, बिल गेट्स, जेफ बेजोस समेत कई बड़ी हस्तियों अकाउंट हुआ हैक 

हाउस के बाहर व्हीप लागू नहीं होती:
सचिन पायलट ने खुले तौर पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर इंकार कर दिया है. लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने सचिन पायलट कैंप के 19 विधायकों को नोटिस दिए जाने के मामले पर कांग्रेस को फिर से आड़े हाथ लिया है. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर का कहना है कि विधानसभा के अंदर ही व्हीप लागू होती है. हाउस के बाहर व्हीप लागू नहीं होती. सीपी जोशी समझदार है, उन्हें पता होना चाहिए कि संसदीय परंपराओं का उन लोगों ने अपमान किया है. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ से खास बातचीत के दौरान ओम प्रकाश माथुर ने कहा कि कोई भी विधायक दल की बैठक करें. उसमें कोई आए या ना आए. उस आधार पर नोटिस देना नियम प्रक्रियाओं में नहीं आता है. व्हीप का फैसला तब होता जब हाउस चल रहा हो. माथुर ने दलील दी कि बहुत से लोग उस बैठक में नहीं गए, उन्हें नोटिस नहीं दिया लेकिन 19 विधायकों को ही नोटिस दिया गया.

कांग्रेस को डर है कि कहीं फ्लोर टेस्ट में फेल ना हो जाए:
सचिन को मनाने की कोशिश की जा रही थी. जब सचिन इतना खुलकर बाहर आ चुके तो इतना मनाने की जरूरत क्या है? कांग्रेस को डर है कि कहीं फ्लोर टेस्ट में फेल ना हो जाए. सचिन ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी मिलने की कोशिश की थी. नहीं मिल पाए तब जाकर यह नौबत आई. जिन विधायकों को नोटिस दिया गया है, उन्हें कानूनी सलाह लेनी चाहिए. माथुर ने सचिन के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर घुमा फिरा कर जवाब देते हुए कहा कि परेशानी है तो वह यहां आ सकते हैं. उनके घर का कलह है एक बड़ा वर्ग आना चाहता है. निर्णय सचिन को करना है. पहले वह निर्णय करें. कांग्रेस अपने घर को नहीं संभाल पाई. अब उन्हें मनाने का प्रयत्न कर रही है. 

यह सरकार ज्यादा नहीं चलने वाली:
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने नोटिस के मामले पर कहा कि प्रतिपक्ष के नाते हमारी भूमिका क्या हो, इस विषय पर हम लोग चर्चा कर रहे हैं. आज नहीं तो कल रूबरू होना है. लेकिन यह सरकार ज्यादा नहीं चलने वाली. कांग्रेस की पहली नैतिक हार है और तोहमत हम पर लगाई जा रही है. वर्तमान मौजूदा सरकार अल्पमत में है. बहुमत खो चुकी है. 107 में से 20 या 22 लोग सचिन के पास है. निर्दलीय बीटीपी और अन्य 13 में से तीन वापस चले गए. सौ का आंकड़ा भी इन लोगों के पास नहीं है. बीटीपी के विधायको के पीछे पुलिस पड़ी हुई है. नोटिस बेहद हास्यास्पद है. हमारा नोटिस से संबंध नहीं लेकिन लड़ाई लंबी चलेगी. एसओजी का भी काफी दिखाकर विधानसभा नोटिस देकर डरा रहे हैं. इन्हें डिश क्वालीफाई करने की प्लानिंग है. आगे कानूनी व संविधानिक रास्ते खुले हुए हैं. नियमानुसार नोटिस नहीं दिए गए. इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय ली गई है. नियमों का अध्ययन करवाया गया है. फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर पूनिया ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई मांग नहीं है. 

विधान सभा सचिवालय का नोटिस भेजने का कोई क्षेत्राधिकार बनता ही नहीं: 
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की दलील है कि विधान सभा सचिवालय का नोटिस भेजने का कोई क्षेत्राधिकार बनता ही नहीं है. पार्टी में बैठक में कौन आया कौन नहीं आया विधान सभा सचिवालय का यह क्षेत्र अधिकार नहीं है. व्हीप की श्रेणी में यह पूरा मामला आएगा ही नहीं. उन्होंने कहा कि जिस किसी राज्य में ऐसे नोटिस का प्रयोग किया गया वह कोर्ट में जाकर स्ट्रक डाउन हुआ. विधानसभा का तब अधिकार बनेगा जब विधानसभा चल रही हो. 

बीजेपी देख रही है सारे दृश्य को:
सचिन पायलट के बीजेपी ज्वाइन करने के सवाल पर कटारिया ने कहा कि हमने नहीं कहा था कि आप बीजेपी ज्वाइन करो. इनका आपस में जो चल रहा है उसमें वर्टिकल डिवीजन हो चुका है. हम बात कर रहे हैं कि आज की सरकार को बहुमत है या नहीं बीजेपी का काम इतना ही है कि बीजेपी देख रही है सारे दृश्य को. इस दौरान कटारिया ने कहा कि जैसे ही सचिन पायलट की कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी कोई रिएक्शन आएगा तब हम मिलकर बैठकर बात करेंगे और वसुंधरा राजे भी बैठक में शामिल होंगी. फिलहाल नेता प्रतिपक्ष की तरफ से विधायक दल के सभी विधायकों को अलर्ट रहने के लिए सूचना भी भेज दी गई है जरूरत पड़ेगी तो उन्हें बुलाया जाएगा. 

राजस्थान विधानसभा की गरिमा को ठेस लगी:  
वहीं दूसरी तरफ उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि विधान सभा के सचिवालय ने जो भी नोटिस जारी किए हैं. वह संवैधानिक रूप से ना केवल अवैधानिक है बल्कि कानूनी प्रक्रिया को भी धता बताया गया है और यह नोटिस जारी कर दिए हैं. संसदीय प्रक्रियाओं में इस प्रकार के नोटिस उस कृत्य के लिए जारी करना जो सदन के अंदर हुआ ही नहीं यह इतिहास में पहली बार हुआ है. राजस्थान विधानसभा की गरिमा को ठेस लगी है ऐसे लगता है कि विधानसभा का सचिवालय सरकार की कठपुतली बन गया है. जबकि विधानसभा का सचिवालय हमेशा निर्विवाद और निष्पक्ष रहता आया है. यह घटना संसदीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाती है. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि अशोक गहलोत के तमाम बयान गुंडों से भरे हैं और अपनी पार्टी का गठन देखकर बहादुरी दिखाई जा रही है. 

जनता सरकार की विदाई के दिन गिन रही: 
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सचिन पायलट को अभी उप मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ के पद से हटाया गया है. लेकिन अभी तो उन्हें कांग्रेस से बाहर करने तक लड़ाई लड़ी जा रही है, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ताजा बयान उसका स्पष्ट संकेत है. केंद्रीय मंत्री ने गहलोत सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जनता सरकार की विदाई के दिन गिन रही है वो दिन कितने होंगे, ये तो आना वाला समय ही बताएगा. सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि समय आने दीजिए, वो भी हो जाएगा. इसमें किसी को कोई अंदेशा नहीं होना चाहिए. लेकिन, प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या के प्रयास हो रहे हैं. एक-एक आवाज को न मानने और विरोध की कीमत चुकानी पड़ रही है. वो हम सब देख रहे हैं. सचिन ने भी कहा है कि मेरा विरोध किसी व्यक्ति से नहीं है, मेरा आग्रह सिर्फ इतना है कि जनता से जो हमने वादे किए थे, वो पूरे होने चाहिए. अब उन वादों को याद दिलाने की सजा अगर ऐसी होती है तो विश्वास जनता का भी टूटा है, उनके अंदर के साथियों का भी टूटेगा. कुछ लोग शायद अंदर उस बाड़े में डरे हुए हो सकते हैं, क्योंकि ये विकास की नहीं, बाड़ेबंदी की सरकार है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डंडे के जोर से विधायकों को बांधकर रखा गया है. मुझे आश्चर्य हो रहा है कि इस 21वीं शताब्दी में विधायकों को जबर्दस्ती अगवा करके पुलिस के माध्यम से कैंप में डाला जा रहा है. इससे शर्मनाक शायद कुछ हो नहीं सकता है.

सबूतों को क्यों छिपाकर रखा गया:
मुख्यमंत्री के ताजा बयान पर कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि क्या ये जानकारी का सूर्य आज ही उदय हुआ या ये सबूत जिनकी चर्चा की जा रही है, ये आज ही बाहर आए हैं. इतने दिन तक उन सबूतों को क्यों छिपाकर रखा गया. कौन-कौन और लोग इसमें लिप्त हैं. किन-किन लोगों के माध्यम से ये किया गया. इस सब की जानकारी आपको पहले से थी तो आपने पहले खुलासा क्यों नहीं किया. ये किसके साथ शेयर किया था, आपको अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए. 

अशोक गहलोत-अविनाश पांडे का बड़ा फैसला ! 19 बागी कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में उपचुनाव कराने की तैयारियां शुरू 

19 विधायक उच्चतम न्यायालय की शरण में जा सकते हैं:
कुल मिलाकर एक बात लगभग तय मानी जा रही है कि आगामी दिनों में यह 19 विधायक उच्चतम न्यायालय की शरण में जा सकते हैं ऐसे में भारतीय जनता पार्टी भले ही खुलेआम स्वीकार नहीं करें लेकिन विधायकों को मोरल सपोर्ट अवश्य देगी. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए ऐश्वर्य प्रधान की रिपोर्ट

और पढ़ें