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राहुल-पायलट मुलाकात प्रकरण पर बड़ा अपडेट! जानकार सूत्रों ने दिए संकेत

राहुल-पायलट मुलाकात प्रकरण पर बड़ा अपडेट! जानकार सूत्रों ने दिए संकेत

जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई है. इस दौरान चारों के बीच करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. उसके बाद अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात जारी है. 

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तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की कही गई बात: 
मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही गई है. ऐसे में तीनों सदस्य पूरे मामले पर विचार विमर्श करने के बाद ही विधायकों की वापसी पर फैसला लेंगे. फिलहाल सचिन पायलट की बातों को नहीं माना गया है. शायद यह मीटिंग बहुत कामयाब नहीं रही. आलाकमान पायलट की मूल मांग मानने के मूड में नहीं है. आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार किया है. ऐसे में अब आखिर कैसे होगी पायलट और बागियों की सम्मानजनक घर वापसी? फिलहाल किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. शायद आज रात तक कुछ स्थिति स्पष्ट हो जाए. 

एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही:  
बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है, इस पर सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. ऐसे में अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. पहले भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से कई बार फोन पर बात की थी और उन्होंने मसला सुलझाने का प्रयास किया था. 

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गहलोत गुट के विधायकों ने की थी एक्शन की मांग:
इससे पहले सोमवार को ही ये बात सामने आई थी कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों ने मांग की है कि बागी विधायकों पर एक्शन होना चाहिए, जिसपर सीएम गहलोत ने फैसला आलाकमान पर छोड़ने की बात कही थी. साथ ही कहा था कि इस बारे में सबको आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. 

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चंडीगढ़: कृषि विधेयकों को लेकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए में मतभेद साफ तौर पर उभरकर सामने आ गया है. कृषि विधेयक के खिलाफ हरियाणा और पंजाब के किसान आंदोलित हैं. इसी के चलते NDA में बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के कोटे से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद हरियाणा में बीजेपी की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) पर साथ छोड़ने का दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में जेजेपी प्रमुख डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कशमकश में फंसे हुए हैं. 

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दुष्यंत जी आपको भी डिप्टी सीएम से इस्तीफा दे देना चाहिए: 
वहीं इसी बीच कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी एक ट्वीट करते हुए कहा कि दुष्यंत जी हरसिमरत कौर बादल की तरह आपको भी कम से कम डिप्टी सीएम की पोस्ट से इस्तीफा दे देना चाहिए. आपको किसानों से ज्यादा अपनी कुर्सी प्यारी है. 

BJP, JJP नेता किसान से विश्वासघात करने में लगे हुए: 
कांग्रेस नेता व राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि पंजाब के अकाली दल, AAP ने संसद में कांग्रेस के साथ किसान विरोधी 3 अध्यादेशों का विरोध करने का साहस दिखाया, पर दुर्भाग्य कि हरियाणा के BJP, JJP नेता सत्ता-सुख के लिए किसान से विश्वासघात करने में लगे हुए हैं. जब पंजाब के सब दल किसान के पक्ष में एक हो सकते हैं तो हरियाणा BJP-JJP क्यूँ नहीं? अकाली हरसिमरत जी के इस्तीफे के बाद इस प्रश्न को और बल मिलता है- जब पंजाब के सारे दल किसान के पक्ष में एक होकर केंद्र के इन किसान-घातक अध्यादेशों के विरोध में आ सकते हैं तो हरियाणा के सत्तासीन BJP-JJP नेता क्यूँ किसान से विश्वासघात कर रहे हैं? किसान-हित से ऊपर सत्ता-लोभ.

खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार जेजेपी के सहयोग से चल रही: 
बता दें कि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार जेजेपी के सहयोग से चल रही है. जेजेपी का राजनीतिक आधार ग्रामीण इलाके और किसानों पर टिका हुआ है, क्योंकि चौधरी  देवीलाल किसान नेता के तौर पर देश भर जाने जाते थे. किसानों की नाराजगी और राजनैतिक नुकसान को देखते हुए जेजेपी ने लाठीचार्ज को लेकर किसानों से माफी मांगी है. दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने कहा, 'किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जेजेपी माफी मांगती है. जेजेपी हमेशा किसानों के साथ है और किसानों के हित की बात पार्टी के लिए सबसे ऊपर है. 

सीएम दुष्यंत चौटाला कृषि संबंधी विधेयक के समर्थन में:
जेजेपी प्रमुख और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कृषि संबंधी विधेयक के समर्थन में हैं और कांग्रेस पर किसानों को बहकाने का आरोप लगा रहे हैं. दुष्यंत चौटाला ने अभी तक इस किसान विधेयक का विरोध नहीं किया है, लेकिन यह जरूर कहा है कि इसमें एमएसपी का जिक्र होना चाहिए.
 

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर का इस्तीफा मंजूर, तोमर को मिला अतिरिक्त प्रभार

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नई दिल्ली: पीएम मोदी से सलाह के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. लोकसभा में तीन कृषि बिलों को पारित कराए जाने से नाराज हरसिमरत ने गुरुवार को मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया था. राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री परिषद से हरसिमरत का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत स्वीकार किया है. प्रधानमंत्री द्वारा सलाह-मशविरा के बाद राष्ट्रपति ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. 

विधेयकों पर सत्तारूढ़ राजग में फूट पड़ गई: 
कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने संबंधी विधेयकों पर सत्तारूढ़ राजग में फूट पड़ गई है. विधेयक से जुड़े प्रावधानों पर नाराजगी जताते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कल मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. इससे पहले लोकसभा में विधेयकों पर चर्चा के दौरान पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उनके इस्तीफे की घोषणा की थी. हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी एनडीए सरकार को समर्थन जारी रखेगी. 

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इस्तीफे की जानकारी हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर दी: 
बता दें कि मोदी कैबिनेट से अपने इस्तीफे की जानकारी हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर दी थी. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है. हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं. यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि बीजेपी की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल अध्यादेश का विरोध कर रही है.


 

एक यूजर ने सोनू सूद से की मांग, कहा-बिहार चुनाव के लिए BJP से टिकट दिलवा दो, अभिनेता ने दिया ये जवाब

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नई दिल्ली: बॉलीवुड के अभिनेता सोनू सूद ने कोरोना संकट के दौरान लगातार जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं. अब देशभर में अनलॉक शुरू हो गया, जब भी सोनू सूद आमजन की मदद कर रहे है. सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाने वाले लोगों की सोनू सूद लगातार मदद कर रहे है. अभिनेता सोनू सूद की खास बात यह है कि अकसर फैंस ट्वीट करके उनसे मदद की गुहार लगाते है, तो वे लोगों का रिप्लाई भी बखूबी करते हैं. आपको बता दें कि जब सोनू सूद से एक व्यक्ति ने बिहार चुनाव के लिए टिकट की मांग कर दी, जिसका उन्होंने ने बखूबी जवाब दिया.

सोनू सर आप सिर्फ मुझे भाजपा से टिकट दिला दो:
सोनू सूद से मदद मांगते हुए व्यक्ति ने ट्वीट करते हुए कहा कि सर इस बार हमें बिहार के ( भागलपुर ) से विधानसभा चुनाव लड़ना हैं. और जीत कर सेवा करना है, बस सोनू सर आप सिर्फ मुझे भाजपा से टिकट दिला दो. वहीं सोनू सूद ने इसका रिप्लाई जवाब देते हुए लिखा, बस, ट्रेन और प्लेन की टिकट के अलावा  मुझे कोई टिकट दिलवाना नहीं आता मेरे भाई. सोनू सूद ने इस तरह शख्स को जवाब दिया कि वो इस तरह का टिकट नहीं दिलवाते हैं. उनके इस ट्वीट पर लोगों के खूब रिएक्शन आ रहे हैं.

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लॉकडाउन के दौरान सोनू सूद ने की मदद:
गौरतलब है कि देश में कोरोना की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के दौरान सोनू सूद ने आमजन की खूब मदद की. इस दौरान उन्होंने शहरों में फंसे मजदूरों को सही सलामत उनके घर पहुंचाने के लिए बस और ट्रेन की व्यवस्था की. इसके साथ ही उन्होंने विदेशों में फंसे छात्रों को भी भारत वापस लौटने के लिए प्लेन बुक किया. वहीं सोनू सूद ने कोरोना वॉरियर्स के लिए जूहू में स्थित अपना होटल भी दान कर दिया था. कोरोना संकट के दौरान सोनू सूद ने लोगों को खाना भी बांटा. सोनू सूद महामारी के दौरान मजदूरों के लिए मसीहा बनकर सामने आये है. 

संजय राउत का तंज- क्या भाभीजी का पापड़ खाकर इतने लोग कोरोना से हुए ठीक?, बीजेपी ने दिया यह जवाब

संजय राउत का तंज- क्या भाभीजी का पापड़ खाकर इतने लोग कोरोना से हुए ठीक?, बीजेपी ने दिया यह जवाब

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन आज राज्यसभा में कोरोना वायरस को लेकर चर्चा हुई. इस दौरान शिव सेना ने इसे लेकर सरकार पर तंज कसा है. वायरस संक्रमण पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन के बयान पर सदन में चर्चा के दौरान के संजय राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं सदस्यों से पूछना चाहता हूं कि इतने लोग कैसे ठीक हुए? क्या सभी लोग भाभीजी का पापड़ खाकर ठीक हो गए? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक लड़ाई न होकर लोगों का जीवन बचाने की लड़ाई है. 

मेरी मां और छोटा भाई जो विधायक है, वो कोरोना से लड़ रहे:  
संजय राउत ने कहा कि मेरी मां और छोटा भाई जो विधायक है, वो कोरोना से लड़ रहे हैं. महाराष्ट्र में अब तक कई लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं. धारावी में आज स्थिति नियंत्रण में है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बीएमसी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि सदन में कल से कोरोना पर चर्चा हो रही है, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं. सत्ता पक्ष के लोग कह रहे हैं कि विपक्ष ने ताली-थाली बजाने में सरकार का सहयोग नहीं किया. मैं कहना चाहता हूं कि एक भी ऐसी रिसर्च बता दीजिए जिसमें ताली-थाली बजाने से कोरोना ठीक हुआ हो, तो मैं प्रधानमंत्री के साथ ताली-थाली बजाने के लिए तैयार हूं. संजय सिंह ने कोरोना पर चर्चा के दौरान यूपी सरकार को निशाने पर लिया और कहा कि यूपी में कोरोना किट के नाम पर घोटाला किया गया. 

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बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने ने दिया जवाब:
वहीं संजय राउत के तंज का जवाब देते हुए बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कोरोना अबतक की सबसे बड़ी आपदा है. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि क्या ताली-थाली बजाने से कोरोना खत्म हो जाएगा. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या चरखा चलाने से आजादी मिली थी. चरखा चलाना एक प्रतीक था. ठीक उसी तरह ताली-थाली बजाना एक प्रतीक था जिसके जरिए कोरोना से जंग में जुटे लोगों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की गई.

केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने जुलाई में एक वीडियो जारी किया था:
दरअसल, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने जुलाई में एक वीडियो जारी किया था. इसमें उन्होंने बीकानेर में बने भाभीजी नाम के पापड़ का प्रचार करते हुए दावा किया था कि यह पापड़ कोरोना वायरस के संकमण से बचाव में कारगर साबित होगा. इसी के चलते संजय राउत ने ने कोरोना को लेकर बीजेपी पर यह तंज कसा है. 

नरेंद्र मोदी ने जिंदगी के 70 साल का सफर किया पूरा, प्रधानमंत्री के रूप में रही हैं ये सात उपलब्धियां

नरेंद्र मोदी ने जिंदगी के 70 साल का सफर किया पूरा, प्रधानमंत्री के रूप में रही हैं ये सात उपलब्धियां

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जिंदगी के 70 साल का सफर पूरा कर लिया है. इस मौके पर उन्हें देश-विदेश से बधाईयां देने वालों का तांता लगा हुआ है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर लोग उनकी लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं. वहीं, देश भर में भाजपा कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारीन ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को अभी और आगे ले जाने की बहुत संभावनाएं मौजूद हैं. वहीं नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने बधाई देते हुए कहा कि  मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य व खुशियों की कामना करता हूं. दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे. 

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गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम मोदी को जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में एक मजबूत भारत की नींव रखी गई. सीआरपीएफ ने भी पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी है. वहीं, इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी पूरे देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित कर रही है. उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में पार्टी कार्यकर्ता सेवा सप्ताह मनाया जा रहा है. पीएम मोदी के जन्मदिन पर आज हम आपको उनकी सात बड़ी उपलब्धियों के बारे में बता रहे हैं.

1. 370 का खात्मा:
मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटा दिया और इसके साथ ही राज्य को दो हिस्सों में बांट भी दिया. अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश हैं. मोदी सरकार का यह सबसे ऐतिहासिक फैसला रहा है.

2. मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात:
मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाया.  मोदी सरकार ने तीन तलाक पर पाबंदी के लिए 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019' को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया. एक अगस्त 2019 से तीन तलाक देना कानूनी तौर पर जुर्म बन गया. 

3. नागरिकता संशोधन कानून:
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में नागरिकता संशोधन कानून को बड़े फैसले के तौर पर देखा जा सकता है. 10 जनवरी 2020 को इसे पूरे देश मे लागू कर दिया गया. इस कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य देशों से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और यहूदी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल सकती है. इस कानून में किए गए बदलाव को लेकर देश भर में कई महीने विरोध प्रदर्शन हुए. 

4. सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक:
पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने का काम किया है. मोदी सरकार के आने के बाद 18 सितंबर 2016 को हुए उरी अटैक के 11 दिन बाद 29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने एलओसी के उस पार घुसकर तमाम आतंकी लॉन्च पैड तबाह किए और कई आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो सीआरपीएफ के हमारे 40 जवान शहीद हो गए थे. इस आतंकी हमले के 12 दिन बात 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने  बॉर्डर पार कर पाकिस्तानी सीमा में बने आतंकियों के ठिकानों को को तबाह कर दिया. इसे एयर स्ट्राइक का नाम दिया गया था.

5. राम मंदिर का शुभारंभ:
पांच अगस्त, 2020 दिन इतिहास में दर्ज हो गया. पीएम मोदी ने भूमि पूजन कर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ किया था. भव्य राम मंदिर के निर्माण का सपना बीजेपी तीन दशकों से दिखा तो रही थी लेकिन लोगों को इसे लेकर सबसे ज्यादा भरोसा उस समय जगा जब मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने. 

6. लोककल्याण की योजनाएं:
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गरीब जनता की जरूरतों के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए लगभग सवा सौ गरीब कल्याण योजनाओं को शुरू किया. जिसका सीधा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में रहने वाली गरीब जनता को मिला. 

7. जीएसटी लागू करने का मकसद:
देश में लंबे समय से जीएसटी का मामला अटका हुआ था. मोदी सरकार ने सत्ता में आने के तीन साल बाद संसद से जीएसटी को पास कराया और यह देश में एक जुलाई 2017 से लागू हो गया. देश में कर सुधार की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम था. 

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

जयपुर: प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कई मुद्दों पत्रकारों से बात की.  केन्द्र सरकार द्वारा कृषि और कृषि व्यापार से संबंधित लाये गये तीन कानूनों पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें कृषि एवं किसान विरोधी बताया, पायलट ने कहा कि कोरोना काल में अध्यादेशों के माध्यम से उक्त कानून लागू किये है, जबकि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी. उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है जबकि केन्द्र सरकार ने इस संबंध में राज्यों से किसी प्रकार की सलाह नहीं ली. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों एवं राजनैतिक दलों से भी इस सम्बन्ध में कोई राय-मशविरा नहीं किया गया.

मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही:  
पायलट ने कहा कि मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों के लिए भूमि मुआवजा कानून रद्द करने के लिए एक अध्यादेश प्रस्तुत किया. परन्तु राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस एवं किसानों के विरोध के कारण मोदी सरकार को पीछे हटना पड़ा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन तीन नए कानूनों से किसान, खेत-मजदूर, कमीशन एजेंट, मण्डी व्यापारी सभी पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि एपीएमसी प्रणाली के समाप्त होने से कृषि उपज खरीद प्रणाली समाप्त हो जायेंगी. किसानों को बाजार मूल्य के अनुसार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा और न ही उनकी फसल का मूल्य.  

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मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा:
सचिन पायलट ने मीडिया से कहा कि यह दावा सरासर गलत है कि अब किसान देश में कहीं भी अपनी उपज बेच सकता हैं. पायलट ने कहा कि जनगणना के अनुसार देश में 86 प्रतिशत किसान 5 एकड से कम भूमि के मालिक है. ऐसी स्थिति में 86 प्रतिशत अपने खेत की उपज को अन्य स्थान पर परिवहन या फेरी नहीं कर सकते हैं. इसलिए उन्हें अपनी फसल निकट बाजार में ही बेचनी पड़ती है. मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा. उन्होंने कहा कि अनाज-सब्जी बाजार प्रणाली की छंटाई के साथ राज्यों की आय का स्त्रोत भी समाप्त हो जाएगा. पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार से मांग की है कि राजनैतिक दलों, किसान संगठनों, मण्डी व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा कर इन कानूनों में संशोधन पर विचार करें जिससे देश के किसान की वास्तविक दशा में बदलाव आ सकें. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट
 

लगभग डेढ़ घंटे चली अजय माकन-सचिन पायलट की मुलाकात, दोनों ने साध लिया मौन!

जयपुर: मंगलवार को सचिन पायलट ने नई दिल्ली पहुंचकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन से मुलाकात की. दोनों नेताओं की लगभग डेढ़ घंटे तक मुलाकात चली. लेकिन बैठक के बाद दोनों ने मौन साध लिया. दोनों में से कोई भी कुछ कहने को तैयार नहीं है. मुलाकात के बाद बाहर निकल रहे सचिन पायलट ने किसी भी टिप्पणी से इनकार किया है. अलबत्ता उन्होंने मुलाकात के महत्वपूर्ण होने के जरूर संकेत दिए. इस मुलाकात की खबर फर्स्ट इंडिया तक पहुंचने पर भी पायलट ने इशारों-इशारों में आश्यर्च व्यक्त किया. 

माकन के दफ्तर ने भी अब तक इस बारे में कोई खुलासा नहीं किया: 
दूसरी ओर माकन के दफ्तर ने भी अब तक इस बारे में कोई खुलासा नहीं किया. अब मीडिया के सामने एक यक्ष प्रश्न उठता है ? आखिर मीडिया से क्या छिपाना चाहते हैं माकन और पायलट ? कांग्रेस पार्टी लुका-छिपी में यकीन नहीं करती है. खुद सोनिया-राहुल-प्रियंका हर मुद्दे पर मीडिया के सामने आते हैं. लेकिन तो फिर माकन और पायलट आज प्रेस कॉन्फ्रेंस या कोई प्रेस नोट जारी क्यों नहीं कर रहे हैं. 

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माकन-पायलट मुलाकात में संभवतः कुछ भी नहीं हुआ होगा नया:
ऐसे में इस सारे घटनाक्रम पर एक राजनीतिक प्रेक्षक ने टिप्पणी करते हुए कहा कि माकन-पायलट मुलाकात में संभवतः कुछ भी नया नहीं हुआ होगा. माकन को पहले से ही पायलट का पक्ष मालूम है और इसी तरह पायलट को भी गहलोत और 102 विधायकों के बारे में माकन के विचार मालूम है. ऐसे में इस प्रकार अब मुलाकात का रहस्य जानने में कांग्रेसी क्षेत्रों में कोई ज्यादा उत्सुकता नहीं है. 

पंच-सरपंच चुनाव में नामांकन भरने के लिए दिशा-निर्देश जारी, खुले में शौच नहीं जाने संबंधी घोषणा पत्र देना जरूरी

पंच-सरपंच चुनाव में नामांकन भरने के लिए दिशा-निर्देश जारी, खुले में शौच नहीं जाने संबंधी घोषणा पत्र देना जरूरी

जयपुर: प्रदेश में पंच और सरपंच चुनाव के लिए नामांकन भरना 16 सितंबर से शुरू होगा. इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. इसमें शौचालय बने होने, संतान, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति, पूर्व में पंचायती राज संस्थाओं के बकाया के बारे में नो ड्यूज से जुड़े दिशा निर्देश प्रमुख हैं.  

प्रदेश की 3848 ग्राम पंचायतों के लिए 16 सितंबर से अधिसूचना जारी हो जाएगी और चरणों के अनुसार अलग-अलग दिन नामांकन दाखिल किए जाएंगे. नामांकन भरने और उसके साथ दस्तावेज के लिए ये हैं दिशा निर्देश-

- पंच और सरपंच पदों के लिए नामांकन में सभी प्रविष्टियां पूरी करनी अनिवार्य है.  

- आवेदक को कोई भी कॉलम रिक्त छोड़ना नहीं है.  

- आवेदन पत्र में बिन्दु संख्या 1 में विचाराधीन आपराधिक मामलों के संबंध, बिन्दु संख्या 2 में आपराधिक प्रकरणों में दोष सीधी से जुड़ी सूचना, बिन्दु संख्या 3 में संतान के संबंध में सूचना और बिन्दु संख्या 4 में सम्पत्ति के संबंध में सूचना देनी है.  

- बिन्दु संख्या 1 से 3 का विवरण अभ्यर्थी की योग्यता या अयोग्यता के निर्धारण के लिए है जबकि बिन्दु संख्या 4 में सूचना केवल मतदाताओं की जानकारी के लिए है. इसके आधार पर अभ्यर्थी की योग्यता या अयोग्यता तय नहीं होगी.  

- हाईकोर्ट के निर्णय की कड़ी में अदालतों के लंबित मामलों  और संपत्तियों व नो ड्यूज की सूचना लेने के लिए शपथ पत्र भरा जाना है.  

- इस प्रारूप को 50 रुपए के नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर नामांकन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा.  

- यह शपथ पत्र जज या किसी न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट, या माननीय उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा नियुक्त शपथ कमिश्नर या किसी नोटरी पब्लिक से अटेस्टेड होना चाहिए.  

- अभ्यर्थियों को घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय तथा खुले में शौच नहीं जाने संबंधी घोषणा पत्र या अंडरटेकिंग नामांकन के साथ भरकर जमा कराना जरूरी है. इसे प्रमाणित करवाने की आवश्यकता नहीं है.  

- सभी उम्मीदवारों को नो-ड्यूज प्रमाण प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है.   

- यदि अभ्यर्थी पर संबंधित पंचायती राज संस्था की कर या फीस की राशि बकाया हो और उसको राशि जमा कराने का नोटिस दिये जाने की तिथि से 2 माह तक जमा नहीं कराई गई हो तो उसे उक्त राशि नामांकन दाखिल करने से पूर्व जमा कराने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा.  

- यदि कोई अभ्यर्थी पूर्व में किसी पंचायतीराज संस्था का सभापति या उप सभापति रहते हुए पंचायती राज संस्थाओं के बकायों को जमा कराने के संबंध में नोटिस तामील होने के बाद भी दो माह में राशि जमा नहीं कराता है और निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने से कम से कम दो माह पूर्व राज्य सरकार की ओर से जारी डिफॉल्टर की सूची में नाम शामिल हो गया हो तो वह अयोग्य होगा.  

- नामांकन से पूर्व यह राशि जमा कराने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर अभ्यर्थी अयोग्य नहीं माना जाएगा.  

- किसी भी पद के लिए नामांकन पत्र के समय चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है.  

- आरक्षित वार्ड से निर्वाचन लड़े जाने पर राजस्थान राज्य के सक्षम अधिकारी की ओर से जारी जाति प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है. महिला उम्मीदवार की स्थिति में महिला के पिता के निवास स्थान के क्षेत्राधिकार रखने वाले राजस्थान राज्य के सक्षम अधिकारी की ओर से जारी जाति प्रमाण पत्र मान्य होगा, लेकिन जाति प्रमाण पत्र और मतदाता सूची में महिला का नाम समान होना चाहिए. 

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सरपंच पद का चुनाव लड़े जाने के लिए जमानत राशि सामान्य वर्ग के लिए 500 व महिला एवं अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 250 रुपए है. उम्मीदवारों को यह राशि जमा करवाकर रसीद भी लगानी आवश्यक है. यदि आरक्षित जाति का व्यक्ति सामान्य वार्ड से निर्वाचन के लिए नामांकन पेश करता है तो यह जमानत राशि में रियायत के लिए उसे अपना जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी होगा.  

नामांकन पत्र के साथ सांख्यिकी सूचना के फार्म को भी चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों से भरवाया जावेगा. इसको प्रस्तुत नहीं करने पर नाम निर्देशन पत्र खारिज नहीं किया जायेगा, लेकिन यथासंभव इसको भरवाया जाना चाहिए ताकि चुनाव में खड़े होने वाले अभ्यर्थी के संबंध में सामान्य सूचनाएं उपलब्ध हो सके.  

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