VIDEO: छात्र नेताओं की सियासी चमक हुई धुंधली, नये नहीं चल पा रहे पुरानों की तरह

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/08 08:53

जयपुर: क्या अभी भी राजस्थान विश्वविद्यालय का छात्रसंघ युवा राजनीति की पाठशाला है ? जबाव मिलेगा नहीं. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों ने छात्र राजनीति को नवाचारों से तोल तो दिया, चुनाव सुधार भी बहुत हुये, मगर छात्रनेताओं की सियासी चमक धुंधली हो गई. कारण साफ है छात्र राजनीति अब बदल चुकी है. पहले चार या पांच साल की सियासत थी, आज बदलकर रह गई सालाना. पुराने नेताओं की जड़ें आज भी गहरी है, तो नये चेहरों का नूर कुछ समय बाद ही लुप्त होता नजर आता है. 

पुराने दिग्गजों का बोलबाला:
सियासी दलों में आज भी छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके पुराने दिग्गजों का बोलबाला है. वे केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में मंत्री जैसे अहम ओहदों पर है, लेकिन नये युवा चेहरों को सियासी मुकाम बनाने में भारी संघर्ष करना पड़ रहा है. राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत छात्रसंघ की राजनीति से निकलकर ही यहां तक पहुंचे. डॉ सीपी जोशी, गजेन्द्र सिंह शेखावत से लेकर रघु शर्मा तक ऐसे दिग्गज चेहरे है, जिन्होंने छात्र राजनीति की खान से निकलकर खुद को तराशा. छात्रसंघ चुनावों को लेकर खास रिपोर्ट: 

छात्र राजनीति का सुनहरा अध्याय:
राजस्थान की छात्र राजनीति ने सुनहरा अध्याय लिखा है. छात्र राजनीति के पुराने दौर के नेता आज भी यहां की सियासत में धूमकेतु की तरह चमक रहे है. देश की सर्वोच्च पंचायत संसद से लेकर प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत तक इन्होंने अपना मुकाम बनाया है. ना केवल सरकारों बल्कि नामचीन सियासी दलों के संगठनों में अपना नाम चमकाया है. राजस्थान विश्विविद्यालय की छात्र राजनीति का अखाड़ा युवा नेताओं को तराशने वाली पाठशाला की तरह रहा. यहां से निकले चेहरों ने देश और प्रदेश की सियासत में खुद को चमकाया, लेकिन राजस्थान के अन्य विश्विविद्यालयों के छात्रसंघ भी चमकते चेहरे पैदा कर चुके है.  

छात्रसंघ की सियासत से निकले अशोक गहलोत:
लिहाजा पहले बात कर लेते है जोधपुर के विश्वविद्यालय की. राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर विश्वविद्यालय के प्रांगण में कांग्रेस विचारधारा को आगे बढाने का कार्य किया था. उन्होंने यहां एनएसयूआई को प्रभावशाली तरीके से स्थापित किया. छात्रसंघ की सियासत से निकलकर वो तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके है. कई मर्तबा केन्द्र में मंत्री रह चुके और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. 

सीपी जोशी और गजेन्द्र सिंह शेखावत भी रहे छात्रसंघ नेता:
प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत राजस्थान विधानसभा के मुखिया डॉ सीपी जोशी ने उदयपुर के सुखाडिया विश्वविद्यालय को अपनी छात्र राजनीति का केन्द्र रखा. ग्वेरा से प्रेरित डॉ सीपी जोशी ने आगे चलकर विधायक, सांसद और केन्द्र में मंत्री, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जैसे अहम ओहदे संभाले. मोदी सरकार में काबिना मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की कहानी ऐसी ही है. गजेन्द्र सिंह शेखावत रह चुके है जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्विविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष. गजेन्द्र सिंह शेखावत दो बार से जोधपुर के सांसद और आज राजस्थान में बीजेपी के सबसे प्रभावी नेताओं में से एक है. वे मोदी और अमित शाह दोनों की पसंद कहे जाते है. 

सबसे खास है जयपुर का राजस्थान विश्वविद्यालय:
जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर के विश्वविद्यालयों ने नामचीन नेता पैदा किये, लेकिन इन सबके बीच सबसे खास है जयपुर का राजस्थान विश्वविद्यालय.  राजस्थान की राजधानी जयपुर होने के कारण यहां स्थापित राजस्थान विश्वविद्यालय अहम स्थान रखता है. छात्र मतदाताओं की संख्या के लिहाज से भी ये उत्तर भारत के बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है. आज गहलोत सरकार में मंत्री पद पर स्थापित कद्दावर नेता राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पदाधिकारी रह चुके हैं. पहले बात कर लेते हैं उन चेहरों की, जो राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ के पदाधिकारी रहने के बाद आज कांग्रेस में स्थापित नेता है.

डॉ रघु शर्मा, चिकित्सा व स्वास्थय-डीपीआर मंत्री, गहलोत सरकार:
-शर्मा रह चुके है राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष
-लंबे समय तक अध्यक्ष रहने का इनके नाम रिकार्ड ,क्योंकि चुनाव नहीं हुये थे
-केकड़ी से दूसरी बार विधायक और एक बार रह अजमेर से चुके सांसद
-पिछली गहलोत सरकार में विधानसभा के मुख्य सचेतक का पद संभाला था 
-कांग्रेस के संगठनों में कई अहम पदों को संभाल चुके 

महेश जोशी, मुख्य सचेतक, राज. विधानसभा:
-राविवि छात्रसंघ के रह चुके अध्यक्ष 
-कांग्रेस के कद्दावर नेताओ में होती है गिनती
-जोशी अभी है हवामहल से कांग्रेस के विधायक
-जयपुर से सांसद भी रह चुके है जोशी 

प्रताप सिंह खाचरियावास, परिवहन मंत्री, गहलोत सरकार:
-खाचरियावास रह चुके राविवि छात्रसंघ के अध्यक्ष
-पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भैरों सिंह शेखावत के है भतीजे
-खाचरियावास बने है दूसरी बार सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र से विधायक

महेन्द्र चौधरी, उप मुख्य सचेतक, राजस्थान विधानसभा:
-चौधरी रह चुके राविवि छात्रसंघ अध्यक्ष 
-नावां से कांग्रेस के दूसरी बार विधायक
-चौधरी के लिये कहा जाता है राविवि के छात्रसंघ चुनाव उनके समय में ग्लैमरस हुये

दीपेन्द्र सिंह शेखावत, विधायक कांग्रेस:
-सीकर के कल्याण कॉलेज के रह चुके छात्रसंघ अध्यक्ष 
-राविवि में सक्रिय सियासत की
-राजस्थान की विधानसभा के रह चुके स्पीकर 

राजकुमार शर्मा, विधायक कांग्रेस: 
-राविवि छात्रसंघ के रह चुके महासचिव 
-कांग्रेस के नवलगढ़ से विधायक 
-पिछली गहलोत सरकार में रह चुके मंत्री 

मुकेश भाकर, विधायक कांग्रेस:
-राविवि छात्रसंघ के रह चुके अध्यक्ष 
-लाडनू़ं से कांग्रेस विधायक है भाकर
-एन एस यू आई के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके भाकर

रामनिवास गावडिया, विधायक कांग्रेस:
-राविवि छात्रसंघ से जुड़े लॉ कालेज के रह चुके अध्यक्ष 
-गावडिया है परबतसर से विधायक 

बात कर लेते है भारतीय जनता पार्टी की. राजस्थान विश्वविद्यालय कैम्पस से निकलकर दिग्गजों ने लंबी सियासी पारी खेली. एबीवीपी से निकलकर छात्रसंघ के बैनर तले चुनाव लड़े और सियासी मुकाम हासिल किया. 

राजेन्द्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष: 
-राविवि छात्रसंघ के रह चुके अध्यक्ष 
-राठौड़ है चूरु से बीजेपी के विधायक 
-शेखावत और राजे सरकारों में रह चुके मंत्री 
-राजस्थान की सियासत के कद्दावर चेहरे

कालीचरण सराफ, विधायक भाजपा:
-राविवि छात्रसंघ के रह चुके अध्यक्ष 
-जयपुर के मालवीयनगर से विधायक
-शेखावत और राजे सरकारों में रह चुके मंत्री 

रामलाल शर्मा, विधायक भाजपा:
-राविवि छात्रसंघ के महासचिव रह चुके शर्मा
-चौमूं से लगातार बीजेपी के विधायक 

अशोक लाहोटी, विधायक भाजपा:
-राविवि छात्रसंघ के रह चुके अध्यक्ष 
-लाहोटी है सांगानेर से बीजेपी के विधायक 
-एबीवीपी के बैनर से निकलकर बीजेपी में आये 

सतीश पूनिया, विधायक भाजपा:
-पूनिया रह चुके राविवि के छात्रसंघ महासचिव 
-आमेर से भाजपा विधायक 
-भाजपा संगठन के कद्दावर चेहरे
-बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिये नाम दौड़ में शुमार

छात्र राजनीति का अपना अलग महत्व:
छात्रसंघ की सियासत की कोख से निकलने वाले छात्र नेताओं में ही शुमार है हनुमान बेनीवाल. बेनीवाल अपने दम पर नागौर से सांसद बन चुके है, पहले खींवसर से विधायक थे. राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे थे बेनीवाल. छात्र राजनीति का अपना अलग महत्व है. आर एस एस की छात्र विंग अखिल भारतीय विधार्थी परिषद और कांग्रेस की छात्र यूनिट एन एस यू आई पहले से ही प्रदेश के तमाम विश्वविद्यालयों की छात्र राजनीति पर काबिज है. विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बीजेपी की नुमांइदगी भी एक तरह से एबीवीपी ही करती है. कुछ विश्वविद्यालयों और कॉलेजो में साम्यवादी विचारधारा वाली एस एफ आई का भी दबदबा है. SFI का बीकानेर, शेखावाटी के कॉलेज कैम्पस में प्रभाव रहता है. वैसे तो प्रदेश में अन्य विश्वविद्यालय भी है, लेकिन मतदाताओं की संख्या और राजधानी जयपुर में होने के कारण राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अपना क्रेज है. आर यू छात्रसंघ का अपैक्स अध्यक्ष और महासचिव बनना गौरव का विषय होता है. उसे सियासत की मुख्यधारा में आने में समय भी नहीं लगता है. 

RU के अब तक रहे छात्रसंघ अध्यक्ष:
आदर्श किशोर सक्सेना 1967-68
ज्ञान सिंह चौधरी 1968-69
हुकुम सिंह 1969-70
भरत पंवार 1970-71
विजय प्रभाकर 1971-72
विमल चौधरी 1973-74
काली चरण सराफ 1974-75
राजेंद्र राठौड़ 1978-79
महेश जोशी 1979-80
राजपाल सिंह शेखावत 1980-81
रघु शर्मा 1981-86
चंद्रशेखर 1986-89
प्रणवेंद्र शर्मा 1989-91
अखिल शुक्ला 1991-92
प्रताप सिंह खाचरियावास 1992-93
जितेंद्र श्रीमाली 1993-94
सोमेंद्र शर्मा 1994-95
महेंद्र चौधरी 1995-96
श्याम शर्मा 1996-97
हनुमान बेनीवाल 1997-98
रणवीर सिंह गुढ़ा 1998-99
राजकुमार शर्मा 1999-2000
अशोक लाहोटी 2000-01
नगेंद्र सिंह शेखावत 2001-02
पुष्पेंद्र भारद्वाज 2002-03
जितेंद्र मीणा 2003-04
राजपाल शर्मा 2004-05
मनीष यादव 2010-11
प्रभा चौधरी 2011-12
राजेश मीणा 2012-13
काना राम जाट 2013-14
अनिल चौपड़ा 2014-15
सतवीर चौधरी 2015-16
अंकित धायल 2016-17
पवन यादव 2017-2018
विनोद जाखड़ 2018-2019

ABVP और NSUI विचारधारा की राजनीति के बीच खुद के दम पर छात्र राजनीति करने वाले चेहरों की कैम्पस में भरमार रहती है, लेकिन सफलता कम को ही मिलती है. बीते कुछ सालों से कैम्पस की पॉलिटिक्स से कई चेहरे निकले लेकिन मुख्य धारा की राजनीति में प्लेटफार्म हासिल नहीं हो पाया है. कोशिशें जारी रहनी चाहिये और छात्रसंघ चुनाव भी. लोकतंत्र की खूबसूरती के लिये चुनाव जरुरी है और छात्र संसद भी. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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