जयपुर VIDEO: कोरोना और बढ़ते बजट आकार से पार पाना होगा, 3 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट होने का अनुमान, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: कोरोना और बढ़ते बजट आकार से पार पाना होगा, 3 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट होने का अनुमान, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: विधानसभा सत्र में पेश होने वाले बजट में इस बार कोरोना और बढ़ते बजट आकार के साथ राजस्व घाटे से पार पाना होगा. कृषि बजट के साथ इस बार कुल बजट का आकार 3 लाख करोड से ज्यादा का होने का अनुमान है. इनमें कृषि व उससे जुड़े कुल 9 विभागों का बजट करीब 40 हजार करोड का होगा. राजकोषीय घाटे को FRBM एक्ट की तय GSDP की 4 प्रतिशत सीमा के अंदर रखना तो चुनौती है ही, अभी के 41 हजार 728 करोड का राजस्व घाटा नहीं बढ़े.इसके भी कदम बढ़ाने होंगे. इस सबके बीच नए व पुराने मंत्रियों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों की मांग पूरी करने और आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए लोक लुभावन घोषणा को अमल में लाने के लिए प्रावधान और राजस्व बढाने के उपाय भी बजट में करने होंगे. 

कोरोना के बाद दूसरा बजट इस मायने में अहम होगा कि इस बार कृषि के लिए अलग बजट होगा. कर्जे के चलते किसानों की जमीन कुर्क करने के मसले को लेकर गरमाई सियासत के बीच ठगा सा महसूस कर रहा किसान वर्ग बजट में इससे जुड़ी राहत की उम्मीद कर रहा है. कृषि सेक्टर में इसके साथ ही कृषि उपकरणों की खरीद में कर व अन्य छूट की मांगें भी काफी समय से जारी हैं. किसान व्यापारियों को भी अलग-अलग रियायतों के लिए यह वर्ग बाट जोह रहा है.कृषि कमोडिटी को एक्सपोर्ट करने पर रियायतों की भी मांग है. केन्द्र के कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विरोध के बीच राज्य के बजट में मंडी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है. मंडियों की ओर जानेवाली सड़कों के विकास में भी सरकार बजट में गौर कर सकती है.

कृषि बजट में कृषि व उससे जुड़े  क्षेत्रों की गतिविधियों और किसान कल्याण से जुड़े खर्च को संकलित करके प्रदर्शित किया जाएगा. संबंधित विभागों में कृषि, कृषि विपणन, उद्यानिकी, पशुपालन, जल संसाधन, गोपालन, डेयरी, मत्स्य व सहकारिता विभाग शामिल हैं. इन सभी विभागों के सारे खर्चे को कृषि बजट में शामिल किया जाएगा. इसमें योजनागत और प्रतिबद्ध व्यय शामिल हैं. इसके साथ अन्य विभागों की ओर से भी किसानों के कल्याण तथा कृषि व उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए खर्च किया जाता है. ऊर्जा विभाग की तरफ से विद्युत दरें नहीं बढ़ाने के लिए अनुदान भी पूरी तरह किसानों के कल्याण से संबंधित है. 

-जिन डिफॉल्टर किसानों को कर्ज नहीं मिल रहा उन्हें एक सीमा तक कर्ज देने को लेकर छूट दी जा सकती है. 
-सोलर पैनल,स्प्रिंकलर जैसी सुविधाओं में कृषि अनुदान बढ़ सकता है जिसे इन्हें प्रोत्साहित किया जा सके. 
-कृषि बजट के लिए नोडल विभाग कृषि होगा.
-रिटेल व MSME सेक्टर को नई नीति बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है.
-रिटेल क्षेत्र में खास तौर पर स्वरोजगार के लिए स्कीम लाने को लेकर आशाएं हैं.
-हाल ही में हुए कई करारों के तहत इन्वेस्टर्स को राजस्थान में उद्योग लगाने का माहौल बनाने के लिए इज ऑफ डूइंग  पर फोकस करना होगा.

गृह व पुलिस विभाग:
-थाने,चौकी खोलने के साथ महिला सुरक्षा पर फोकस करना होगा.
-जेलों में जैमर,वीसी के जरिये पेशी और अत्याधुनिक सुरक्षा इंतजाम करना
- पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश और अन्य लाभ के लिए योजना पर अमल करना

राजस्व:
-तहसील व उप तहसील खोलने को लेकर खाका बजट में सामने आ सकता है या घोषणाएं  हो सकती हैं. 
-भू अभिलेख डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देना.

यूडीएच,एलएसजी:
-प्रशासन शहरों के संग व गांव के संग अभियान के लिहाज से कुछ और रियायतें संभव.
- स्थानीय निकायों को वित्तीय सहायता देने और उन्हें उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए फंड में राज्य सरकार पैसे दे सकती है. 
-नई आवासीय योजनाओं के बारे में बजट में प्रावधान संभव है.   

आईटी:
-कोरोना के मद्देनजर सरकारी ऑफिसेस में वर्क फ्रॉम होम का मॉड्यूल तैयार करके लागू करना.
-विभागों को सेवाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दिया जाएगा. इसके तहत विभागों को बजट आवंटित किया जा सकता है. 

स्कूल व कॉलेज शिक्षा,उच्च शिक्षा:
-ऐसी घोषणाएं ज्यादा होने की संभावना है जिसमें सरकार को ज्यादा वित्तीय प्रावधान नहीं करना पड़े.. इसके तहत नए सरकारी कॉलेज खोलने, सरकारी स्कूल्स में नए संकाय या विषय खोलने की घोषणाएं संभावित है. साथ ही जनप्रतिनिधियों की डिमांड अनुसार स्कूल-कॉलेज क्रमोन्नत किए जा सकेंगे. 

परिवहन:
-ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण परिवहन सेवाओं पर जोर दिया जा सकता है.  
-मेट्रो के लिए भी राशि का प्रावधान संभव

चिकित्सा:
-कोरोना से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बजट में और व्यवस्थित रूप दिया जा सकता है. 
-चिकित्सा का बजट और  बढ़ाया जा सकता है. 
-मोहल्ला क्लिनिक और ज्यादा शुरू करने के लिए भी ज्यादा बजट का प्रावधान संभव है. 
-जनप्रतिनिधियों की मांग अनुसार नए पीएचसी और सीएचसी खोलने की घोषणा होने की पूरी उम्मीद है. 

महिला-बाल विकास विभाग:
-उड़ान योजना के लिए और बजट संभव 

पीडब्ल्यूडी,सड़क,पुल निर्माण:
-ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण पर बजट में ध्यान दिया जा सकता है. 
-नए आरयूबी और आरओबी के लिए बजट में प्रावधान किया जा सकता है. 

पंचायतीराज,ग्रामीण विकास ‌विभाग:
-जनता जल योजना के तहत पंचायतों को राशि देने की मांग है जिसे सरकार बजट में पूरा कर सकती है. 

युवा व रोजगार:
-और भर्तियों की घोषणा हो सकती है. एपीआरओ,पीआरओ व अन्य भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी

कर ढांचा:
-इस बार भी नया कर नहीं लगाने पर जोर रह सकता है लेकिन पुराने करों ने संशोधन हो सकता है. 
-रियल एस्टेट को बढ़ावा देने के लिए कुछ घोषणाएं संभव हैं.

पिछले बजट का लेखा-जोखा:
सरकार का 2020-21 के लिए राजकोषीय घाटा 33922 करोड अनुमानित था जो कि 2021-22 के लिए बढ़कर 47652 करोड के करीब अनुमानित बताया. यह बढ़ेगा तो यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 3.98 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो यह ध्यान रखना होगा, वरना FRBM एक्ट द्वारा निर्धारित GSDP की 4 प्रतिशत की सीमा से यह बाहर हो जाएगा.

-2020-21 के लिए प्रदेश को जो मिलनी थी राशि,उसमें 14 हजार करोड 94 लाख की कमी की गई
-2021-22 के लिए भी 40 हजार 106 करोड 81 लाख का प्रावधान किया जो 2020-21 के शुरुआती अनुमान से 6 हजार 779 करोड 36 लाख कम बताई गई है

बजट का आकार:
-2021-22 के लिए राजस्व खर्च 2 लाख 8 हजार 80 करोड रुपये
-पूंजीगत खर्च का प्रावधान किया 42667 करोड का
-इस हिसाब से 2 लाख 50 हजार करोड से ज्यादा के आकार का था पिछला बजट जो कि कृषि बजट को मिलाकर 3 लाख करोड से ज्यादा के होने का अनुमान है.

संशोधित अनुमान के अनुसार 2020-21 का राजस्व घाटा हो सकता 41 हजार 721 करोड जो वास्तविक बजट अनुमानों 12345 करोड से 29000 करोड ज्यादा होगा और यह घाटा भी बढ़कर 45000 करोड से ज्यादा हो सकता है. ऐसे में गहलोत सरकार को पॉपुलिस्ट होने के साथ इकोनॉमी को बेहतर करने का संतुलित दृष्टिकोण बजट में पेश करना होगा.

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