VIDEO: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव के परिणाम कल, किसके सिर सजेगा जीत का ताज, देखिए ये रिपोर्ट ?

VIDEO: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव के परिणाम कल, किसके सिर सजेगा जीत का ताज, देखिए ये रिपोर्ट ?

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के लिए तीन उप चुनाव के परिणामों की तस्वीर कल साफ हो जाएगी. राजसमंद ,सहाड़ा और सुजानगढ़ में कौन जीतेगा कल यह सामने आ जाएगा. परिवारवाद, अनुभव , दिग्गज नेताओं के साथ सभी कुछ इन तीनों उपचुनाव में दांव पर लगा. जुबानी आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला प्रचंड रूप में देखने को मिला.राजस्थान में अभी भी 1 विधानसभा का उपचुनाव होना शेष है वल्लभनगर की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है. यह जरूर है कि मौजूदा तीनों उपचुनाव के परिणाम राजस्थान की दशा और दिशा तय कर देंगे. पूरे चुनाव की खास बात यह रही कांग्रेस एकजुट दिखी वहीं बीजेपी अंतर्विरोध से जूझती नजर आई. दिवंगत मास्टर भंवर लाल मेघवाल के पुत्र मनोज मेघवाल, दिवंगत कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी और दिवंगत किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति को उम्मीद है सहानभूति की. रतनलाल जाट और खेमाराम मेघवाल को उम्मीद है अनुभव के दम पर जीत की. तनसुख बोहरा को समाज सेवा के भरोसे से जीत की चाह नजर आ रही. सुजानगढ़ में RLP ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया. कांग्रेस ने दो जगह पर दिवंगत विधायक के परिजनों को टिकट दिया है.  जाती य दांव पेंच का पूरा ध्यान रखा गया. 

सहाड़ा विधानसभा उपचुनाव:

आइए पहले बात करते हैं सहाड़ा विधानसभा उपचुनाव की. यह सीट कांग्रेस के पास थी. सहाड़ा से कांग्रेस ने दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी को मैदान में उतारा , त्रिवेदी के भाई राजेंद्र की दावेदारी सबसे प्रबल थी लेकिन परिवार में अंतर काले होने के कारण स्वर्गीय कैलाश त्रिवेदी की पत्नी को टिकट मिला. कांग्रेस की बुजुर्ग गायत्री का मुकाबला है बीजेपी के अनुभवी और वरिष्ठ नेता रतन लाल जाट से , रतन लाल जाट चुनाव के दौरान कोरोना पॉजिटिव हो गए थे. परंपरागत तौर पर यहां कांग्रेस ने ब्राह्मण और बीजेपी ने जाट चेहरे पर दां व खेला. गायत्री देवी पहली बार चुनाव लड़ रही, वहीं रतन लाल जाट पहले भी विधायक और मंत्री रह चुके है. उम्र, परिवारवाद इमोशनल कार्ड, जाति का गणित सभी फैक्टर यहा काम करेंगे. सहाड़ा के चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मेंद्र सिंह राठौड़ की साख भी दांव पर है. बीजेपी के सांसद चंद्र प्रकाश जोशी और प्रभारी जोगेश्वर गर्ग, श्रवण सिंह बागड़ी की साख यहां दांव पर है. बीजेपी के चुनावी स्टार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी सहाड़ा के गंगापुर में चुनावी सभाएं की है. इस पूरे चुनाव को प्रभावित करेगा एक फैक्टर और वो है.

राजसमंद विधानसभा उपचुनाव:

अब बात करते हैं राजसमंद विधानसभा क्षेत्र की,  राजसमंद में कांग्रेस ने नए चेहरे समाजसेवी और मार्बल व्यवसाई तनसुख बोहरा को उम्मीदवार बनाया ,उनका मुकाबला दिवंगत किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी से है. दीप्ति की माता किरण माहेश्वरी कद्दावर नेता ,पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद रही। किरण माहेश्वरी ने राजसमंद में विकास के कई काम कर आए हो और वो जब तक जिंदा रही यहां से चुनाव नहीं हारी. किरण ने राजसमंद को बीजेपी का अभेद्य दुर्ग बना दिया था. कांग्रेस ने यहां पूरी ताकत लगाई है.राजसमंद में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने नए उम्मीदवार उतारे है. दोनों उम्मीदवार जीवन में पहली बार चुनाव लड़ रहे है , यहां कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही वैश्य कार्ड चला है. राजसमंद के पूरे चुनाव प्रचार में सर्वाधिक चर्चित रहा नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया का दिया हुआ वक्तव्य, इस वक्तव्य ने बीजेपी के चुनाव प्रचार की पूरी दिशा ही बदल दी थी. नेता प्रतिपक्ष की ओर से महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए बयानों से राजपूत वर्ग गुस्से से भर गया और जगह-जगह गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, कटारिया ने कई बार माफी भी मांगी लेकिन बात नहीं बनी,यह बात भी दिगर है कि राजपूत वर्ग यहां परंपरागत रूप से भाजपा का मतदाता रहा है. राजसमंद से सटे सहाड़ा में भी राजपूत समाज अच्छी संख्या में मौजूद है. गुलाब चंद कटारिया फैक्टर राजसमन्द सीट को प्रभावित करेगा. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी है. कांग्रेस सरकार के मंत्री उदयलाल आंजना और प्रमोद जैन भाया ने यहां लंबा कैंप किया, भाया की भूमिका बेहद अहम रही, कांग्रेस के चुनाव प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज की साख भी यहां दांव पर है. बीजेपी के कई कद्दावर नेताओं ने यहां कैंप किया बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ,केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दौरे किए और सांसद दिया तुम्हारी बीजेपी के प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर और  पूर्व मंत्री अनिता भदेल की प्रतिष्ठा इस चुनाव से जुड़ी.

 सुजानगढ़ विधानसभा उपचुनाव:

 सुजानगढ़ रिजर्व सीट पर कांग्रेस की और से नए चेहरे मनोज मेघवाल को उतारा है ,उनके सामने बीजेपी ने खेमाराम मेघवाल को टिकट दिया है खेमाराम पहले विधायक और मंत्री रह चुके है. शेखावाटी का सुजानगढ़ दिवंगत मास्टर भंवर लाल मेघवाल के कारण राजनीतिक नक्शे पर हमेशा चर्चा में रहता था. लेकिन उनके पुत्र मनोज जी मेघवाल कभी भी राजनीति में चमकते सितारे नहीं बन पाए, कारण साफ था मास्टर भंवरलाल मेघवाल की राजनीतिक बारिश के तौर पर उनकी बेटी बनारसी मेघवाल को माना जाता था ,बीते दिनों मेघवाल परिवार पर वज्रपात हुआ माट साहेब भी इस दुनिया से चले गए और उनकी बेटी बनारसी की चली गई. और कांग्रेस पार्टी को राजनीति में अपरिपक्व मनोज मेघवाल को टिकट देना पड़ा. मनोज मेघवाल को चुनौती मिली अनुभवी नेता खेमा राम मेघवाल से जिन्होंने उनके पिता को भी चुनाव हराया था. सहानुभूति फैक्टर पर सवार होकर चुनाव लड़ रहे मनोज मेघवालऔर खेमाराम मेघवाल अपने अनुभव पर।लेकिन सुजानगढ़ का चुनाव RLP ने त्रिकोणीय बना दिया है.हनुमान बेनीवाल के दलित उम्मीदवार ने गणित बिगाड़ने का काम अभी तक दोनों दलों का किया है ,बेनीवाल ने यहां दो मेघवाल के मुकाबले नायक को उम्मीदवार बनाया है. आरएलपी यहां चुनाव परिणामों पर असर डालती हुई नजर आएगी. कांग्रेस पार्टी को सर्वाधिक उम्मीद सुजानगढ़ सीट से है. मंत्री भंवर सिंह भाटी, साले मोहम्मद , पूसाराम गोदारा की साख यहां पर दांव पर. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की प्रतिष्ठा भी सुजानगढ़ से जुड़ी है.

मेवाड़ में आते हैं सहाडा और राजसमंद:

बीजेपी में राजेंद्र राठौड , सांसद राहुल कसवां की प्रतिष्ठा का सवाल है. सहाडा और राजसमंद मेवाड़ में आते हैं तो वहीं सुजानगढ़ शेखावाटी में आता है. 3 विधानसभा उपचुनाव के परिणाम राजस्थान की राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे. उपचुनाव से कुछ दिन पहले ही सत्ताधारी दल कांग्रेस में आंतरिक बगावत का सामना किया था बगावत से पार पाकर सीएम गहलोत ने मजबूत स्थिति पैदा की और तीन चुनाव परिणाम उनके मुफीद आए तो वे राजस्थान के ताकतवर क्षत्रप कहलाएंगे. तीनों जगह पर अगर कांग्रेस जीतती है तो अशोक गहलोत इस जीत का संदेश देशव्यापी देंगे,सचिन पायलट ने भी कांग्रेस के पक्ष में प्रचार किया. कांग्रेस ने खुद को एकजुट दिखाने की भरसक कोशिश की. कांग्रेसी अगर तीनों सीटें जीत जाती है तो विधानसभा में उसे 1 सीट की बढ़ोतरी मिलेगी यह संख्या बल के लिए आपसे सत्ताधारी दल के लिए काफी अच्छा रहेगा. वहीं बीजेपी नेभारतीय जनता पार्टी ने बिना वसुंधरा राजे के तीनों उपचुनाव लड़े,संगठन महामंत्री चंद्र शेखर भी ज्यादातर समय पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे पर रहे, अगर परिणाम पक्ष में गए तो सतीश पूनिया कद्दावर कहलाएंगे.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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