लगभग ढाई घंटे तक गहलोत, वेणुगोपाल और माकन के बीच मंत्रणा, बैठक में मुख्यतः 3 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा 

लगभग ढाई घंटे तक गहलोत, वेणुगोपाल और माकन के बीच मंत्रणा, बैठक में मुख्यतः 3 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा 

लगभग ढाई घंटे तक गहलोत, वेणुगोपाल और माकन के बीच मंत्रणा, बैठक में मुख्यतः 3 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा 

जयपुर: राज्य में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार व बदलाव तथा राजनीतिक नियुक्तियों की अटकलों के बीच पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल व राजस्थान प्रभारी अजय माकन शनिवार रात जयपुर पहुंचे.वेणुगोपाल व माकन शनिवार रात सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचे और सीधे मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचे.जहां पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वेणुगोपाल और माकन के बीच लगभग ढाई घंटे तक तीनों के बीच मंत्रणा हुई. 

जानकार सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुख्यतः 3 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा हुई. मंत्रिमंडल फेरबदल विस्तार पर विचार विमर्श हुआ. मुख्यमंत्री गहलोत ने मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला पहले की तरह आलाकमान पर छोड़ा हैं.बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों के जल्द निस्तारण पर भी चर्चा हुई. सूत्रों की मानें तो CM ने जल्द से जल्द और सभी की सहमति से नियुक्तियां होने की बात कही. सभी की सहमति से बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां हो. जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की सहमति ली जाए और इसके साथ ही मेनिफेस्टो कमेटी चेयरमैन के दौरे को लेकर भी सहमति जताई. कमेटी चेयरमैन ताम्रध्वज साहू जल्द जयपुर का दौरा करेंगे. मेनिफेस्टो की क्रियान्विति पर समीक्षा होगी.

इससे पहले पार्टी से जुड़े सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि मंत्रिमंडल में फेरबदल व विस्तार की अटकलों के बीच कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेता राजस्थान पहुंचे हैं.माना जा रहा है कि अजय माकन व वेणुगोपाल की गहलोत से मुलाकात के बाद राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की राह साफ हो सकती है. पहले यह कहा जा रहा था कि सारी कवायद को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत दिल्ली आएंगे.लेकिन जयपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय सूत्रों ने शनिवार को कहा, फिलहाल गहलोत का दिल्ली जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है.कम से एक दो दिन वह कहीं नहीं जा रहे. 

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पंजाब के मसले के समाधान के बाद अब सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी का पूरा फोकस राजस्थान को लेकर है और पार्टी आलाकमान की ओर से माकन से कहा गया है कि राजस्थान के सियासी मसले का समाधान जुलाई में ही हो जाना चाहिए. मौजूदा हिसाब से राजस्थान की गहलोत सरकार में नौ और मंत्री बनाए जा सकते हैं.पिछले साल तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट व 18 अन्य विधायकों ने गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बागी रुख अपनाया था.तब पायलट, विश्वेंद्र सिंह व रमेश मीणा को मंत्री पद से हटा दिया गया था.जयपुर में राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि अब मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी को पायलट ग्रुप के साथ साथ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से कांग्रेस में आए छह विधायकों व पार्टी का समर्थन कर रहे निर्दलियों को भी ध्यान रखना होगा.ऐसा माना जा रहा है मंत्री पद से वंचित रहने वालों को संसदीय सचिव, विभिन्न निगम बोर्डों का अध्यक्ष बनाया जा सकता है.

वहीं राज्य में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के पद भी लंबे समय से रिक्त हैं.राजस्थान में जिला स्तर पर विभिन्न निगमों व बोर्ड में लगभग 30 हजार राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं जो किसी न किसी कारण से लगातार टल रही हैं.जिला स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियों के लिए इस साल 9-10 फरवरी तक नाम मांगे गए थे.तब कांग्रेस महासचिव व प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने कहा था, हम लोगों की कोशिश रहेगी कि जिला स्तर पर जो बोर्ड व निगम हैं जहां लगभग 25 से 30 हजार राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं, इसकी कार्रवाई हम फरवरी के पहले पखवाड़े में पूरा कर लें. लेकिन उसके बाद विधानसभा का बजट सत्र व विधानसभा की तीन सीटों पर उपचुनाव के चलते मामला टल गया.

फिर लॉकडाउन के कारण राजनीतिक गतिविधियां ठप रहीं. वहीं, इन्हीं दिनों में राज्य के स्वायत्त शासन विभाग ने राजनीतिक नियुक्तियों के तहत 155 नगर निकायों में 850 से अधिक पार्षद मनोनीत किए हैं.हालांकि यह महज शुरूआत मानी जा रही है और बहुत से महत्वपूर्ण बोर्ड/ निगमों पर नियुक्तियां होनी हैं. राजस्थान की मौजूदा अशोक गहलोत सरकार दिसंबर 2018 में सत्ता में आई थी और अपना लगभग आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है.

और पढ़ें