राजस्थान का चुनाव बना ट्रेनिंग स्कूल, पिता के चुनावी मैनेजमेंट को संभाल रहे 'राजपुत्र'

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/03 11:16

जयपुर (योगेश शर्मा)। राजस्थान के चुनाव इस बार ट्रेनिंग स्कूल का भी काम कर रहे हैं। राज पुत्रों के लिये चुनाव एक ऐसे इम्तिहान की तरह भी है। जिस राह चलकर उन्हें भी अपने दादा और पिता की तरह सियासत में झंडे गाडने हैं। दिग्गज राजनेताओं के चुनाव में इस बार असली चुनावी मैनेजमेंट उनके खुद के हाथों में नहीं बल्कि पुत्रों के हाथ में है। पिता चुनाव हारें या जीतें उनके पुत्र जरूर चुनावी गुर सीख जाएंगे। खास रिपोर्ट-

अब विकास, जाति के साथ ही चुनाव में मैनेजमेंट अहम है। चाहे वो प्रचार का मैनेजमेंट हो या सोशल मीडिया का मैनेजमेंट या फिर बूथ का मैनेजमेंट। पिता भले ही जमीनी-जातीय राजनीति के धुरंधर हों, उनके राजपुत्र माहिर हैं आधुनिक मैनेजमेंट के। यही कारण है कि कई राज पुत्र अपने पिता का चुनावी मैनेजमेंट संभाल रहे हैं।

'राजपुत्र' अब तैयार !

वैभव गहलोत- पुत्र अशोक गहलोत
—पिता अशोक गहलोत के निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा में सक्रिय 
—पिता चुनावी दौरों पर, लिहाजा संभाल रहे मैनेजमेंट 
—प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी हैं वैभव 

पराक्रम राठौड़- पुत्र राजेन्द्र राठौड़ 
—चूरू में बना रहे बीजेपी की जीत की रणनीति
—पराक्रम माहिर माने जाते हैं मैनेजमेंट में
—राजेन्द्र राठौड़ चूरू के बीजेपी उम्मीदवार 

अभिमन्यु सिंह राजवी- पुत्र नरपत सिंह राजवी
—नरपत सिंह राजवी विद्याधरनगर से बीजेपी प्रत्याशी 
—अभिमन्यु लंबे समय से यहां सक्रिय, राजनीति है पारिवारिक विरासत
—चुनावी मैनेजमेंट के गुर अपने नाना से भी सीखा
—नाना दिवंगत भैरोंसिंह शेखावत रहे हैं देश के उपराष्ट्रपति और राज्य के सीएम

देवायुष सिंह- पुत्र राव राजेन्द्र सिंह
—शाहपुरा में चुनावी कमान देवायुष के पास
—पिता राव राजेन्द्र हैं बीजेपी के उम्मीदवार 
—देवायुष के लिये यह चुनाव बेहद अहम

के.के. विश्नोई- पुत्र लादूराम विश्नोई 
—लादूराम विश्नोई गुडामालानी से बीजेपी प्रत्याशी 
—केके ने संभाल रखी पिता की चुनावी कमान
—विदेश में व्यापार कर रहे के. के. अब गुडामालानी में सक्रिय
—बीजेपी प्रदेश संगठन में भी पदाधिकारी 

अखिलेश तिवाड़ी- पुत्र घनश्याम तिवाड़ी 
—घनश्याम तिवाड़ी का मैनेजमेंट अखिलेश के हाथों में
—भारत वाहिनी को अखिलेश ही कर रहे संचालित 
—अब अखिलेश ने कर रखा सांगानेर पर फोकस

धनंजय सिंह- पुत्र गजेन्द्र सिंह खींवसर 
—पिता गजेन्द्र सिंह खींवसर लोहावट से BJP प्रत्याशी 
—धनंजय सिंह संभाल रहे पिता का चुनावी मैनेजमेंट 

बालेन्दु सिंह शेखावत- पुत्र दीपेन्द्र सिंह शेखावत 
—पिता दीपेन्द्र सिंह शेखावत श्रीमाधोपुर से कांग्रेस प्रत्याशी 
—बालेन्दु सिंह यूथ कांग्रेस के बाद पीसीसी में पदाधिकारी 
—बालेन्दु माहिर हैं चुनावी कौशल और सियासी चपलता में

राकेश मोरदिया- पुत्र परसराम मोरदिया
—पिता परसराम मोरदिया धोद से कांग्रेस प्रत्याशी 
—राकेश मोरदिया ने यहां संभाल रखी चुनावी कमान
—राकेश के भाई महेश मोरदिया भी चुनावों में सक्रिय
—कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रह चुके राकेश 

विकास रिणवां- पुत्र राजकुमार रिणवां 
—पिता राजकुमार रिणवां रतनगढ़ से निर्दलीय प्रत्याशी 
—राजकुमार रिणवां को इस बार नहीं मिला बीजेपी का टिकट
—कमल की जगह ट्रैक्टर के लिये मांग रहे हैं अब वोट
—सहज और सरल विकास को माना जाता है पिता का सियासी वारिस 

सागर शर्मा- पुत्र डॉ. रघु शर्मा 
—रघु शर्मा केकड़ी से कांग्रेस प्रत्याशी 
—सागर ने कम समय में चुनावी पहचान बना ली
—भाषण देने की कला भी सीख चुके 
—सागर की खास बात है चुनावी आंकड़ों की गणित में माहिर

अश्विनी कल्ला- पुत्र बी.डी. कल्ला 
—बी. डी. कल्ला कांग्रेस पार्टी से बीकानेर पश्चिम से प्रत्याशी 
—उनके पुत्र अश्विनी कल्ला ने संभाल रखी चुनावी कमान
—जयपुर के केवी नम्बर 1 से पढ़े अश्विनी बीकानेर में खासे सक्रिय 

विजय जोशी- पौत्र गोपाल जोशी 
—गोपाल जोशी बीकानेर पश्चिम से भाजपा प्रत्याशी 
—पोते ने संभाल रखा दादा का चुनावी मैनेजमेंट 
—विजय जोशी ने खड़ी की युवाओं की टीम

कमल मीना- पुत्र परसादी लाल मीना
—पिता परसादी लाल मीना लालसोट से कांग्रेस प्रत्याशी 
—कमल पिछले कई सालों से देख रहे चुनावी मैनेजमेंट 
—पीसीसी में पदाधिकारी भी हैं कमल मीना 

मौजूदा चुनावी घमासान में कई पुत्र ऐसे भी जिन्हें पर्दे के पीछे कहकर अपने पिता और माता की मदद करनी पड़ रही है। ऐसा इसलिये क्यों कि वो पार्टी की मर्यादा से बंधे है और उनके अग्रजों ने पाला बदल लिया है। चुनावी घमासान में पुत्र ही नहीं बल्कि पिता भी अपने पुत्रों के वोट मांगते नजर आ  रहे है। बहरोड़ में चुनावी कमान है डॉ जसवंत के हाथों में। वे इस बार पुत्र मोहित यादव को विधानसभा में भेजना चाहते है। शेखावाटी के कद्दावर दलित नेता काका सुंदर लाल भी बेटे कैलाश मेघवाल के लिये पिलानी में वोट मांग रहे है। मौजूदा चुनाव ना केवल विरासत को संजोने के लिहाज से बल्कि उसे आगे बढ़ाने के लिये भी खास है। 

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