जयपुर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे CAA को दी चुनौति, वाद दायर करने वाला तीसरा राज्य बना

राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे CAA को दी चुनौति, वाद दायर करने वाला तीसरा राज्य बना

राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे CAA को दी चुनौति, वाद दायर करने वाला तीसरा राज्य बना

जयपुर: विवादित नागरिकता संशोधन कानून की वैधता को चुनौती देते हुए राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर किया है. राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत ये वाद दायर किया है. राजस्थान सरकार ने खासतौर से अपने वाद में धर्म के आधार भेदभाव और वर्गीकरण करने को चुनौति दी है.

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कानून को चुनौति देने वाला राजस्थान तीसरा राज्य बना: 
केरल और पंजाब की तर्ज पर राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने भी नागरिकता संशोधन कानून को खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दी है. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर किया गया है. गृह मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर विवादित नागरिकता संशोधन कानून को 10 जनवरी से लागू किया है. इस कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 2015 के पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है. नए नारिकता कानून के खिलाफ पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हैं. केरल और पंजाब सरकार के बाद इस कानून को चुनौति देने वाला राजस्थान तीसरा राज्य बन गया है. 

कानून को लेकर गहलोत लगातार भाजपा और केन्द्र सरकार पर हमलावर रहे: 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नागरिकता संशोधन कानून का शुरू से ही मुखर होकर आलोचना कर रहे हैं. इस कानून को लेकर गहलोत लगातार भाजपा और केन्द्र सरकार पर हमलावर रहे हैं. पिछले माह ही राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री की अगुवाई में नागरिकता संशोधन कानून के साथ एनपीआर, एनआरसी के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित किया था. देश में एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाला राजस्थान पहला राज्य है. राज्य सरकार की याचिका में केरल और पंजाब सरकार द्वारा दि गयी दलीलो को शामिल किया गया है याचिका में कहा गया है कि यह काननू नागरिकता को धर्म से जोड़कर भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष छवि का उल्लंघन करता है.  

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सरकार ने अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला बताया:
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी ने अनुच्छेद 131 के तहत ये वाद दायर किया है--- अनुच्छेद 131 एक या एक से अधिक राज्यों और केंद्र सरकार के बीच विवादों में सर्वोच्च न्यायालय को फैसला करने का अधिकार देता है. सरकार ने विवादास्पद कानून को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला बताया है. नागरिकता संशोधन कानून और अन्य नियमों को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि ‘यह कानून अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और यह कानून अनुचित और तर्कहीन है क्योकि यह कानून धर्म के आधार पर नागरिकों में भेदभाव करता है..’  

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अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर:
बहरहाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन कानून को चुनौति दी जा चुकी है. देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर रहेगी. 
 

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