VIDEO: राजस्थान को मेडिकल का बड़ा हब बनाने की कवायद शुरू, मेडिकल सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए तैयारी 

VIDEO: राजस्थान को मेडिकल का बड़ा हब बनाने की कवायद शुरू, मेडिकल सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए तैयारी 

VIDEO: राजस्थान को मेडिकल का बड़ा हब बनाने की कवायद शुरू, मेडिकल सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए तैयारी 

जयपुर: राजस्थान को देश में मेडिकल का एक बड़ा हब बनाने के लिए अशोक गहलोत सरकार ने बड़ी कवायद शुरू कर दी है. इसके तहत प्रदेश के मेडिकल सेक्टर में निजी निवेश को अप्रत्याशित तौर पर बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना लागू करने की तैयारी की जा रही है. कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर ने यह बता दिया है कि प्रदेश के लोगों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिहाज से निजी क्षेत्र की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है.

यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को स्वीकृति के लिए भेजा:
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जिस तरह से अस्पतालों में बिस्तर कम पड़ने लगे, उससे यह एहसास हो गया कि मेडिकल सेक्टर को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है. इसके लिए जरूरत है कि इस सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के हर सभव प्रयास किए जाएं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को इस बारे में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे. मंत्री शांति धारीवाल की हिदायत पर नगरीय विकास विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है. यह प्रस्ताव स्वीकृति के लिए मंत्री शांति धारीवाल को भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव में निजी क्षेत्र में मेडिकल सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रकार की छूटें प्रस्तावित की गई हैं आपको सबसे पहले बताते हैं कि यह तमाम प्रकार की छूटें किन शर्तों पर मिलेगी.

इन शर्तों पर मिलेगी छूटें:
- विशेष प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने के लिए यह जरूरी होगा कि चिकित्सा संस्थानों की स्थापना या उनके विस्तार के प्रस्ताव संबंधित निकाय में 31 मार्च 2022 तक प्रस्तुत कर दिए गए हो.
-प्रोजेक्ट दिसंबर 2025 तक पूरा करना जरूरी होगा, ऐसा नहीं किया तो दी गई छूट की राशि की ब्याज सहित वसूली होगी.
-अस्पतालों को राज्य सरकार के मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना का लाभ लोगों को देना होगा.
-क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप सुविधाओं का आकलन करते हुए प्राप्त प्रस्तावों का तकनीकी परीक्षण संबंधित नगर नियोजक के माध्यम से किया जाएगा.
- इस योजना को लागू करने से पहले ऐसे ही किसी मामले में कोई राशि निकायों में जमा करा दी गई है तो उसे वापस नहीं किया जाएगा.

यह विशेष प्रोत्साहन योजना मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, मेडिकल यूनिवर्सिटी आदि की स्थापना या विस्तार के लिए लागू की जाएगी. इस योजना के दायरे में एलोपैथी के साथ ही आयुर्वेद, प्राकृतिक, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के संस्थान भी शामिल होंगे. आपको बताते हैं इस योजना के तहत किस प्रकार नियमों में शिथिलता और विभिन्न छूट दिया जाना प्रस्तावित है.

ऐसे मिलेगी नियमों में शिथिलता:
- मेडिकल सेक्टर के तहत आने वाली गतिविधियों को व्यापक जनहित मानते हुए उन्हें शहरों के मास्टर प्लान में दर्शाए विभिन्न भू उपयोगों में अनुज्ञेय किया जा सकेगा.
-लेकिन इकोलॉजिकल, इको सेंसेटव पार्क,खुले मैदान आदि भू उपयोग में यह छूट नहीं दी जाएगी.
-मौजूदा आवासीय योजना में यह गतिविधियां उसी भूमि पर करने की इजाजत दी जाएगी जिस भूमि का भू उपयोग मास्टर प्लान में वाणिज्यक, मिश्रित या संस्थानिक है.
-ऐसी गतिविधियों के लिए भू उपयोग परिवर्तन शुल्क, भू रूपांतरण शुल्क और भवन मानचित्र अनुमोदन शुल्क में छूट दिया जाना प्रस्तावित है.
-इन मामलों में लीज राशि में छूट वित्त विभाग की स्वीकृति के अनुसार दी जा सकेगी.

उम्मीद है कि यह योजना होगी जल्द लागू :
राजस्थान में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए जिस विशेष प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इस प्रस्ताव में शामिल ऐसी ही छूटें सरकार की ओर से पूर्व में कई क्षेत्रों में भी दी गई है. खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि प्रदेश के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए.  ऐसे में उम्मीद है कि यह योजना जल्द लागू की जाएगी.

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