VIDEO: शहरों की पुरानी आबादी में बसे लोगों को मिलेंगे 2-2 पट्टे, किसे और किस शुल्क पर मिलेगा पट्टा, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: शहरों की पुरानी आबादी में बसे लोगों को मिलेंगे 2-2 पट्टे, किसे और किस शुल्क पर मिलेगा पट्टा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: आगामी प्रशासन शहरों के संग अभियान में शहरों की पुरानी आबादी में बसे लोगों को उनके मकान व जमीन के पट्टे दिए जाएंगे. ऐसा संभवतया पहली बार होगा जब व्यापक तौर पर बड़ी तादाद में पुरानी बसावट में पट्टे जारी किए जाएंगे. किन्हें, कैसे और किस दर पर पट्टा मिलेगा. जानिए पूरी खबर...

प्रदेश के शहरों में पुरानी बसावट क्षेत्र में कई परिवार बरसों से बसे हुए हैं. अधिकतर लोगों के पास अपने मकान या जमीन के दस्तावेज के तौर पर पारिवारिक बंटवारानामा, वसीयत, रजिस्ट्री,हक त्याग प्रमाण पत्र, बिजली व पानी के बिल, गृहकर की पुरानी रसीदें व पूर्व राजपरिवारों के दस्तावेज हैं. लेकिन जिस जमीन पर ये लोग बरसों से रह रहे हैं उस जमीन का इन लोगों के पास सरकारी पट्टा नहीं हैं. इसके चलते इन लोगों को अपनी संपत्ति के आधार पर बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पाता है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से शुरू किए जाने वाले प्रशासन शहरों के संग अभियान में इन परिवारों को ना केवल अपने जमीन का पट्टा मिलेगा बल्कि उनके निर्मित क्षेत्र का भी पट्टा दिया जाएगा. नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के नेतृत्व में अधिकारियों के चले मंथन के बाद पट्टा देने की प्रक्रिया प्रस्तावित की गई है. आपको बताते हैं कि शहरों की पुरानी आबादी क्षेत्र में किस प्रकार पट्टे दिया जाना प्रस्तावित है.

जानिए, किस प्रकार पट्टे दिया जाना प्रस्तावित:
-पुरानी आबादी क्षेत्र की परिभाषा में शहरों का परकोटा या चारदीवारी क्षेत्र और पूर्व राजपरिवार की निजी स्वामित्व की भूमि पर बसावट शामिल है.

-इसके अलावा ग्राम पंचायत का आबादी क्षेत्र जो नगरीय सीमा में आ गया है और वर्ष 1981 के नियमों के तहत भूमि रूपांतरित कर बसाई कॉलोनियां शामिल हैं.

-ऐसे क्षेत्र में बसे लोगों को दो तरह के पट्टे जारी किए जाएंगे.

-इमारत जिस भूमि पर बनी है उस पूरी भूमि का कॉमन पट्टा संबंधित निकाय की ओर से जारी किया जाएगा .

-यह कॉमन पट्टा उस इमारत के विभिन्न हिस्सों में  रहने वाले या कब्जाधारी सभी हितधारकों को दिया जाएगा.

-इस कॉमन पट्टे में सभी हितधारकों के नाम शामिल होंगे,यह एक-एक पट्टा सभी को दिया जाएगा.

-इसके अलावा जिस किसी भी व्यक्ति का उस इमारत में मकान,कमरे,दुकान आदि है तो उसे इस बिल्ट अप एरिया का पूरक पट्टा भी जारी किया जाएगा.

-अभियान में पट्टा लेने के लिए यह जरूरी होगा कि संपत्ति के सभी हितधारक संबंधित निकाय में आवेदन करें.

-इसके लिए एक-एक हितधारक को पट्टा लेने के लिए संबंधित निकाय में लिखित सहमति देनी होगी .

-पट्टे के लिए प्राप्त आवेदन पर निकाय आपत्ति व सुझाव मांगने के लिए सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी करेगा.

-इस विज्ञप्ति के माध्यम से प्रकरण में आपत्ति व सुझाव लेने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा.

शहरों की पुरानी आबादी क्षेत्र में लोगों को सरकारी पट्टा देने के लिए नगरपालिका अधिनियम की धारा 69 A में पहले से ही प्रावधान था. हाल ही ऐसा ही प्रावधान नगर सुधार न्यास अधिनियम और विकास प्राधिकरणों के अधिनियमों में भी किया गया है. इसके लिए हाल ही विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित किया जा चुका है. इस क्षेत्र में बसे किन लोगों को पट्टा लेने के लिए क्या शुल्क देना होगा इसको लेकर नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग की ओर से कैबिनेट मीमो कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है. आपको बताते हैं कि पट्टा देने के लिए क्या दरें प्रस्तावित की गई हैं.

पट्टा देने के लिए क्या दरें की गई प्रस्तावित:

-पट्टा जारी करने के शुल्क निर्धारण के लिए दो तरह की कट ऑफ डेट प्रस्तावित की गई हैं.

-जिन लोगों के पास कब्जे के तौर पर 1 जनवरी 1992 से पहले के पारिवारिक बंटवारानामा, वसीयत, रजिस्ट्री,हक त्याग प्रमाण पत्र, बिजली व पानी के बिल, गृहकर की पुरानी रसीदें व पूर्व राजपरिवारों के दस्तावेज आदि हैं.

-ऐसे लोगों को आवासीय पट्टा 10 रुपए प्रति वर्गमीटर, मिश्रित भू उपयोग का पट्टा 25 रुपए और कमर्शियल भू उपयोग का पट्टा 50 रुपए प्रति वर्गमीटर के अनुसार देना प्रस्तावित है.

-पट्टा देने के शुल्क की गणना केवल जिस भूमि पर भवन बना हुआ है,उस भूमि की नाप के अनुसार ही की जाएगी.

-ऐसे लोग जिनके पास कब्जे के तौर पर 1 जनवरी 1959 से पहले के दस्तावेज हैं और जिनके नाम ये दस्तावेज हैं वही या उनके वारिस वर्तमान में काबिज हैं.

-तो ऐसे लोगों को महज 501 रुपए में ही पट्टा जारी किया जाना प्रस्तावित है.

-सार्वजनिक भूमि के कब्जे को अभियान में नियमित नहीं किया जाएगा और अवैध व्यावसायिक इमारतों का नियमन भी नहीं किया जाएगा.

-किसी परिसर में सार्वजनिक उपयोग की भूमि जैसे पोल, चौक व अन्य स्थानों को पट्टे के साथ जारी नक्शे में ओपन स्पेस अंकित किया जाएगा.

-भूमि पर मालिकाना हक तय करने के लिए सिटी सर्वे रिकॉर्ड और राज्य अभिलेखागार के दस्तावेजों का भी निकाय परीक्षण करेंगे.

-अभियान के दौरान स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे जारी करने के लिए 1 जनवरी 1990 की कट ऑफ डेट प्रस्तावित की गई है.

-अनुसूचित जाति व जनजाति के परिवारों के लिए यह कट ऑफ डेट 1 जनवरी 1996 प्रस्तावित की गई है.

पुरानी आबादी क्षेत्र में पट्टों से वंचित प्रदेश भर के लाखों परिवारों को राहत देने के लिए समस्त प्रक्रिया,नियम,शर्तें व शुल्क प्रस्तावित किए गए हैं. नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग की ओर से इस बारे में कैबिनेट मीमो भेज दिया गया है. स्टेट कैबिनेट की मुहर लगने के बाद इसे औपचारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा.

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