VIDEO: अन्य प्रदेशों के विधायकों के लिए राजस्थान सुरक्षित ! 2005 से अब तक 6 बार हो चुकी है बाड़ाबंदी

जयपुर: राजे-रजवाड़ों का राजस्थान मौजूदा दौर में सियासत के नये फॉर्मेट के लिये माकूल जगह बना हुआ है. बाड़ा बंदी के नये फॉर्मेट का जनक राजस्थान ही है क्यों यहां से एक नहीं तीन दलों की महायुति की सरकार महाराष्ट्र में बनी थी. चाहे सरकार बनाने या गिराने की बात हो या फिर राज्ससभा चुनाव की रणनीति, जयपुर और राजस्थान सेफ गार्ड माना गया. अभी गुजरात के कांग्रेस विधायकों की पनाहगाह बना हुआ है राजस्थान.  

प्रॉपर्टी डीलर पर हमला कर लूट का प्रकरण, इलाज के दौरान नरेश ने तोड़ा दम, पुलिस कर रही बदमाशों की तलाश

राजस्थान पॉलिटिकल टूरिज्म का सबसे बड़ा केंद्र: 
लॉकडाउन लगने के वक्त तक गुजरात के कांग्रेस विधायक जयपुर में थे अब फिर लौट आये है रणनीति वहीं है राज्यसभा चुनाव फर्क एक ही है पड़ाव का केन्द्र जयपुर ना होकर आबू रोड़ के समीप जाम्बोड़ी है. इससे पहले मार्च में गुजरात और मध्य प्रदेश के विधायकों की बाड़ाबंदी भी हो चुकी है. ये ऐसा कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान में दूसरे राज्यों की बाड़ांबदी हुई हो, कभी सरकार बचाने तो कभी सरकार गिराने और कभी राज्यसभा चुनाव के लिए यहां बाड़ाबंदी होती आई है. ऐसे में राजस्थान को पॉलिटिकल टूरिज्म का सबसे बड़ा केंद्र भी कहा जाने लगा है. 2005 से अब तक यहां झारखंड, उत्तराखंड, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात व मध्यप्रदेश और गुजरात के विधायकों की बाड़ाबंदी हो चुकी है. 

बाड़ाबंदी की शुरुआत 1996 में भैरोसिंह शेखावत के दौर में हुई: 
राजस्थान में बाड़ाबंदी की शुरुआत 1996 में भैरोसिंह शेखावत के दौर में हुई थी, जब जनता दल से बगावत करके आए विधायकों को भाजपा में शामिल कराकर भाजपा की सरकार बनवाई गई थी. हालांकि उसके बाद ये चलन राजस्थान में बढ़ता चला गया. सबसे पहले इसकी शुरुआत 2005 में हुई जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समय में झारखंड की अर्जुन मुंडा सरकार को बचाने के लिए झारखंड के विधायकों की जयपुर में बाड़ाबंदी की थी, उन्हें अजमेर रोड स्थित एक बड़े रिसोर्ट में शिफ्ट किया गया था, इन्हें अजमेर और पुष्कर भी ले जाया गया, बाकायदा राजे मंत्रीपरिषद के प्रमुख सदस्यों ने रणनीति को सफल बनाने में सहयोग किया. बाड़ाबंदी के चलते झारखंड में अर्जुन मुंडा सरकार बच गई थी.

2016 में उत्तराखंड के बीजेपी विधायकों की जयपुर में बाडेबंदी हुई:
वसुंधरा राजे सरकार के ही दूसरे कालखंड में उतराखंड के बीजेपी विधायकों की जयपुर में बाडेबंदी हुई. हरीश रावत सरकार पर संकट के समय ये बाड़ाबंदी हुई थी. 2016 में उत्तराखंड में तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर जब सियासी संकट आया था, उस वक्त हरीश रावत मुख्यमंत्री थे, भाजपा विधायकों के टूटने और खरीद फरोख्त के डर से भाजपा ने अपने दो दर्जन से ज्यादा विधायकों को जयपुर भेजा था, इन्हें अजमेर रोड स्थित एक रिसोर्ट में ठहराया गया था. धूलंडी का पर्व होने के चलते भाजपा विधायकों ने होली-धूलंडी भी रिसोर्ट में मनाई थी. हालांकि फ्लोर टेस्ट में हरीश रावत सरकार ने बहुमत साबित कर दिया था. 

नवंबर 2019 में महाराष्ट्र के लिए हुई थी बाड़ाबंदी: 
वहीं 2019 में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने और जोड़तोड़ की सरकार बनाने के लिए कांग्रेस अपने विधायकों को जयपुर शिफ्ट किया था. नवंबर में कांग्रेस ने अपने विधायकों को दिल्ली रोड स्थित ब्यूना विस्टा रिसोर्ट में करीब दो सप्ताह तक ठहराया था. बाद में भाजपा की फडनवीस सरकार फ्लोर टेस्ट पास नहीं कर सकी और  शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन वाली उद्धव ठाकरे सरकार सत्ता में आई. 

पर्यटन विभाग ने तैयार किया राहत पैकेज, 3 महिने के लिए भत्ता देने का प्रस्ताव

मार्च 2020 में मध्यप्रदेश और गुजरात राज्यसभा चुनाव के लिए हुई बाड़ाबंदी: 
वहीं साल 2020 में मार्च माह की शुरुआत में मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार पर आए सियासी संकट के बीच कांग्रेस विधायकों को भी जयपुर शिफ्ट किया था. इन्हें भी ब्यूना विस्टा रिसोर्ट में करीब दो सप्ताह तक ठहराया था. बाड़ाबंदी की कमान खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हाथों में थीं. हालांकि विधायकों के टूटने से कमलनाथ सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई थी. वहीं गुजरात में चार सीटों पर हो रहे राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर भी कांग्रेस विधायकों को जयपुर शिफ्ट किया गया था. इन्हें भी दिल्ली रोड स्थित एक रिसोर्ट में ठहराया गया था. अब फिर गुजरात के सियासी तूफान को राजस्थान झेल रहा है और शायद इस तरह की सियासत का अभयस्त हो गया है.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

और पढ़ें