VIDEO: राजस्थान की धरती से निकले सियासी शूरवीर, इन्होंने पैदा की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धमक

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/21 09:05

जयपुर(योगेश शर्मा)। राजस्थान के राजनीतिज्ञ अपने सियासी कौशल के लिये देशभर में जाने जाते है। चाहे कांग्रेस, बीजेपी हो या समाजवादी पॉलिटिक्स, यहां के दिग्गजों ने अपने गृह राज्य से बाहर अपने कूटनीतिक कौशल की छाप छोड़ी है। मौजूदा सियासी दौर में भी ऐसे राजनेता है जिनकी 'चाणक्य' नीति को राजस्थान से बाहर के राजनीतिक अखाड़े में मान्यता हासिल है। अशोक गहलोत ने कांग्रेस संगठन में रहते हुये राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को नई धार दी । कांग्रेस में ही जुबेर खान और धीरज गुर्जर को बडा़ जिम्मा सौंपा गया है। वहीं बीजेपी में ओम प्रकाश माथुर और भूपेन्द्र यादव पिछले लंबे समय से चमकते सितारे है,किरण माहेश्वरी को भी जिम्मेदारी मिली है अपना हुनर दिखाने की।  अब इन सभी के सामने चुनौती है भावी लोकसभा के चुनाव। राजस्थान के यह दिग्गज राजनेता केवल भरोसेमंद ही नहीं बल्कि उस चातुर्य में भी माहिर है जिसके जरिए चुनाव जीताने की रणनीति बनाई जा सके। आइये आपको बताते है राजस्थान के उन चाणक्यों के बारे में... पहले बात कांग्रेस की 

---अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री
-कांग्रेस के रह चुके है राष्ट्रीय संगठन महासचिव
-मुख्यमंत्री है फिर भी पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति बनाने में रहेगी भूमिका
-कांग्रेस के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे के तौर पर भी चर्चित
-उत्तरप्रदेश सरीखे बड़े राज्यों के रह चुके है प्रभारी
-कांग्रेस के अग्रिम संगठनों के रह चुके है इंचार्ज
-कांग्रेस की वॉर रुम बैठकों में इनकी भूमिका अहम रहती है
-कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनाने में रही भूमिका
-गुजरात चुनावों में इन्होंने अपनी सियासी क्षमताओं का लोहा मनवाया
-गांधी परिवार के विश्वस्तों में होती है गिनती
-गुजरात चुनावों ने देशव्यापी लोकप्रियता दिलाई
-गाँधीवादी राजनीति करने वाले देश के चुनिंदा नेताओं में शुमार
-राजस्थान के चुनाव पूर्व सर्वे में अव्वल चेहरे के तौर पर चर्चित 
Plus point - कुशल संगठनकर्ता, चुनावी रणनीतिकार,सोशल इंजीनियर,जोड़ तोड़ की राजनीति में माहिर, सियासी वातावरण को भांपने में सिद्धहस्त, संदेशात्मक राजनीति के कारण पहचान ,गठबंधन सियासत में माहिर

----जुबेर खान
-अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव
-हाल ही में इन्हें दी गई यूपी के पूर्वांचल की जिम्मेदारी
-पूर्वांचल में ही आते है सोनिया गांधी व राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र
-कांग्रेस को पूर्वांचल से खासी उम्मीदें
-प्रियंका गांधी की टीम में शुमार है जुबेर
-यूपी की सियासत का इन्हें व्यापक अनुभव
-वेस्टर्न यूपी में मुस्लिम वोटों को भी साधने का करेंगे काम
-कम लोगों को पता इन्होंने ही दी थी राजीव गांधी को पार्टी  संगठन की ट्रैनिंग
-तब जुबेर हुआ करते थे एन एस यू आई के इंचार्ज
- संगठन में लंबे समय से काम करने का व्यापक अनुभव
-अभी इनकी पत्नी साफिया बनी है रामगढ़ से कांग्रेस विधायक
Plus point- संगठनकर्ता,राजनीति करने की जमीनी शैली,शांत लेकिन अडिग पॉलिटिशियन, सहज सरल व्यक्तित्व के धनी,लो प्रोफाइल सियासत में विश्वासत

----धीरज गुर्जर
-कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव
-इन्हें दी गई है वेस्टर्न यूपी की जिम्मेदारी
-धीरज करेंगे प्रियंका गांधी को रिपोर्ट
-वेस्टर्न यूपी में गुर्जर समाज प्रभावित करता है सियासत को
-धीरज का काम यह भी होगा कि अपने समाज को साधे
- संगठन में काम करने का उन्हें पुराना अनुभव
-एन एस यू आई के रह चुके है प्रदेश अध्यक्ष,राष्ट्रीय टीम में भी काम किया

-----भंवर जितेन्द्र सिंह - - - AICCसदस्य
-पूर्व केंद्रीय मंत्री 
-राहुल गांधी की कोर टीम के सदस्य
-जो जिम्मेदारी दी उसे निभाने में कुशल 
-फ्रंटल संगठनों को खड़ा करने में रहे दक्ष 
-फ्रंटल संगठनों में चुनावी सिस्टम इन्होंने खड़ा किया
-अलवर उपचुनाव जीत का मिला क्रेडिट
Plus point-- राजमहल से निकल कर कहलाये कांग्रेसी चेहरे, मिलनसार, दूसरे दलों में इनके दुश्मन नहीं कट्टर दोस्त भी है,संगठनात्मक कौशल के धनी

---अब करते है बात बीजेपी की ..
---भाजपा के 'चाणक्य'--
-----ओम प्रकाश माथुर---

-राजस्थान से राज्यसभा सांसद
-गुजरात के चुनाव प्रभारी
-यूपी में भाजपा को दिलाई ऐतिहासिक जीत
-यूपी जीत के मास्टर माइंड रहे
-यूपी में किया था पिछड़ो-अति पिछड़ो की गणित पर काम
-नये चेहरों को टिकट दिला परचम लहराया 
-यूपी से पहले महाराष्ट्र,गुजरात,एमपी में लोहा मनवा चुके
-लंबे समय तक मोदी के राज्य गुजरात के प्रभारी रहे
-मोदी के साथ लंबे समय तक संघ में प्रचारक रहे
-महाराष्ट्र में फडनवीस को सीएम बनाने के पीछे वहीं थे
-आज पीएम मोदी के विश्वस्तों में शुमार
Plus point--गठबंधन पॉलिटिक्स और रुठे नेताओं को मनाने में माहिर,खांटी राजनीतिज्ञ,हरफनमौला अंदाज,जो कहा वो करते है
-लीक से हटकर सियासत करना उनका 'शगल '

-----भूपेन्द्र यादव----
-राजस्थान से राज्यसभा सांसद
-भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव 
-बिहार-गुजरात के संगठन प्रभारी
-अमित शाह के सबसे भरोसे मंद
-गुजरात चुनावों की रणनीति यादव के जिम्मे रही थी
-गुजरात में बीजेपी सरकार बनाने का मिला लाभ
-मोदी व शाह ने अपने राज्य के लिये इन पर जताया भरोसा
-यादव पहले भी बिहार के प्रभारी रह चुके है
-राजस्थान की चुनावी जीत में इनका था योगदान
-झारखंड में बनवाई थी बीजेपी की सरकार
-पिछले राजस्थान चुनावों में यादव रहे थे मास्टर माइंड 
- पेशे से वकील, यादव है भाजपा के कूटनीतिक चेहरे
Plus point- एक हाथ से दूसरे हाथ को पता नहीं चलने देते,वॉर रुम के सिद्धहस्त,सोशल इंजीनियरिंग में माहिर, गठबंधन की सियासत में भी हो गये पारंगत

------सुनील बंसल----
-राजस्थान के कोटपूतली के मूल निवासी
-यूपी भाजपा के संगठन महामंत्री,युवा नेता
-आर एस एस से भाजपा में पहुंचे
-अमित शाह के विश्वस्तों में से एक
-यूपी जीत की में रणनीतिक योगदान था
-यूपी से पहले देश इन्हें सियासी तौर पर नहीं जानता था
-एबीवीपी को शीर्ष तक पहुंचाने में रहा योगदान
-कभी डीयू छात्रसंघ चुनावों में लहराई थी भगवा पताका
-पहली बार बंसल का प्रयोग किया गया महाराष्ट्र चुनावों में
-बंसल ने महाराष्ट्र में किया था कूटनीतिक वर्क
-महाराष्ट्र की सफलता के बाद यूपी भेजा गया
-अब यूपी में लोकसभा मॉडल पर कर रहे काम
PLUS POINT-शानदार संगठनकर्ता,कठिन चुनौतियों में धैर्य नहीं खोना,चुनावी मैनेजमेंट में माहिर, तीक्ष्ण बुद्धि के धनी, नये कार्यकर्ता तैयार करने में माहिर, संघ मॉडल पर काम

-----किरण माहेश्वरी
-माहेश्वरी को भाजपा के संगठन में अहम जिम्मेदारी
-उन्हें कर्नाटक कहा सह चुनाव प्रभारी बनाया गया
-माहेश्वरी को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में काम करने का अनुभव
-पहले रह चुकी भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष
PLUS POINT-पार्टी से मिले टास्क को पूरा करने में दक्ष,कूल पालिटिशियन, कुशल संगठनकर्ता

राजस्थान की धरा से निकले सियासी चेहरों ने अपना मुकाम देश की सियासत में स्थापित किया। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की नजरों में खुद को स्थापित करना या फिर गांधी परिवार का चहेता बनना आसां नहीं था योग्यता और मेहनत से राजस्थान के सियासी शूरवीरों ने राष्ट्रीय राजनीति में धमक पैदा की । इनकी सलाह से राष्ट्रीय पार्टियां चलने लगी । कहते है चाणक्य की कोई बराबर नहीं कर सकता है लेकिन उनकी बताये राजनीतिक मार्ग पर चलने वालों को चाणक्य शब्द की उपमा दी जा सकती है। राजस्थान की सियासत के यह कूटनीतिक चेहरे भी साम,दाम,दंड और भेद के सियासी सिद्धांतो की सियासत को समझते है। चाणक्य की सीख मौजूदा राजनीति में भी प्रासंगिक है और मरुभूमि के राजनेता इसी पर चलकर अपने राज्य से बाहर जाकर खुद का लोहा मनवा चुके है। अब चुनौती है लोकसभा में 'चाणक्य' नीति पर आधारित कौशल दिखाने की। 

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