VIDEO: राजस्व वसूली में फिसड्डी साबित हुआ प्रदेश का जलदाय विभाग

Naresh Sharma Published Date 2019/05/13 08:56

जयपुर: इंजीनियर्स व कर्मचारियों की लंबी चौड़ी फौज के साथ प्रदेश में पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाला जलदाय विभाग वसूली के मामले में फिसड्डी साबित हुआ है. खास बात यह है कि आम जनता के घर ढोल बजाकर वसूली करने वाले अधिकारी सरकारी महकमों से पानी का पैसा वसूलने में नाकाम रहे हैं. अकेले जयपुर रीजन प्रथम की बात करें, तो करीब दो हजार करोड़ रुपए बकाया है, जिनमें से विभाग में महज 269 करोड़ रुपए ही वसूल पाया है. दूसरी तरफ पूरे प्रदेश में अवैध कनेक्शन की बाढ़ सी आई गई है।  खास रिपोर्ट:

दो महीने पहले चला था वसूली का दिखावा अभियान:
जलदाय विभाग के अफसर लगते हैं, काम कम और दिखावा ज्यादा करते हैं. दो महीने पहले मीडिया को साथ ले जाकर राजस्व वसूली अभियान चलाया था. करीब दो दर्जन जगह कार्रवाई हुई, मीडिया में अपने नाम छपवाए, बड़े अफसरों से वाहवाही लूटी और फिर अभियान का बंद कर दिया गया. अब बकाया का असली आईना आइये आपको हम दिखाते हैं. वैसे तो पूरे प्रदेश में ही एक जैसे हालात हैं, लेकिन जयपुर रीजन एक की बात करें, तो इसमें दौसा, सीकर व झुंझुनू जिले आते हैं. यहां पर दो हजार एक सौ इक्यासी करोड़ रुपए उपभोक्ताओं पर बाकी है, लेकिन इनमें से वसूली महज दो सौ उनहतर करोड़ रुपए की ही हो पाई है. यानी महज 10 फीसदी. घरलेू उपभोक्ताओं पर 1920 करोड़ रुपए बाकी थे, इनमें से 249 करोड़ रुपए विभाग चुकता कर पाया. आश्चर्य की बात यह है कि जलदाय विभाग को पानी के नाम पर सरकारी विभाग ही चूना लगा रहे हैं. मानो उन्होंने पानी को फ्री समझ लिया. जयपुर रीजन एक में सरकारी दफ्तरों पर करीब 43 करोड़ रुपए बाकी है. वसूली सिर्फ सात करोड़ रुपए हो सकी. स्वायतशासी संस्थाओं पर करीब 20 करोड़ रुपए बाकी है, लेकिन जलदाय विभाग इनसें सिर्फ 15 लाख रुपए ही ले पाया. इसी तरह औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर 62 करोड़ बाकी है. इन प्रतिष्ठानों ने सिर्फ 12 करोड़ रुपए विभाग को दिए. 

सरकारी विभाग भी नहीं चुका रहे जलदाय विभाग का पैसा:
यह बकाया तो उन उपभोक्ताओं पर हैं, जिनको विभाग ने कनेक्शन दे रखे हैं, लेकिन एक हकीकत और भी है, जो जलदाय विभाग की पोल खोलती है. यह हकीकत है अवैध कनेक्शन की. कागजों में आंकड़े कुछ अलग हैं, जबकि हकीकत के कुछ और. जयपुर रीजन प्रथम में केवल दौसा के महुवा में ही 300 से अधिक अवैध कनेक्शन है. वहीं राजधानी जयपुर की बात करें, तो इनकी संख्या हजारों में हैं. ये अवैध कनेक्शन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकते. पाइप लाइन बदलने के वक्त रसूखदारों के घर ठेकेदार ही कनेक्शन जोड़ देते हैं. कुछ जगह पैसे लेकर अवैध कनेक़्शन की भी शिकायतें लगातार विभाग को मिलती रही है. अवैध कनेक्शन के कारण न तो इनका बिल लिया जा सकता है और न ही पानी का हिसाब बन पाता है. जयपुर पूरी तरह बीसलपुर बांध पर निर्भर है, लेकिन यहां पर अवैध कनेक्शनों की भरमार के चलते वैध कनेक्शन वालों को भी पूरा पानी नहीं मिल पाता. खानापूर्ति के नाम पर थानों, होटलों में भी जगह जगह अवैध कनेक्शन के लिए कार्रवाई हुई है, लेकिन यह महज औपचारिकता रही. अब देखना यह होगा कि विभिन्न योजनाओं के नाम पर सरकार का करोड़ों रुपए बहाने वाले जलदाय विभाग के अफसर क्या अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई करते हुए राजस्व वसूली कर पाएंगे या फिर ऐसे ही फ्री में पानी मिलता रहेगा. 

... नरेश शर्मा फर्स्ट इंडिया न्यूज जयपुर

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in