चुनाव आयोग की अनोखी पहल, वन्यजीव कर रहे मतदान की अपील

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/20 03:43

जयपुर। वाइल्डलाइफ टूरिज्म को बढ़ावा देने और प्रदेश में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए इस बार बाघ, भालू, हिरण, तोता और गोडावण जैसे वन्यजीव प पक्षी वोट अपील कर रहे हैं। इस बार सवाई माधोपुर सहित 9 जिन्होंने स्वीप कार्यक्रम के तहत इन पशु पक्षियों को चुनावी मैस्कॉट बनाया है। 

चुनाव आयोग के निर्देश पर इस बार प्रदेश के विभिन्न जिलों में वन्य जीव एवं पक्षी वोट अपील करते नजर आ रहे हैं। स्वीप कार्यक्रम के तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों ने अपने जिला पशु पक्षियों को इलेक्शन मैस्कॉट बनाया है। दरअसल इस पहल के पीछे वाइल्डलाइफ टूरिज्म को बढ़ाने, वन और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ ही मतदान प्रतिशत को बढ़ाने का उद्देश्य रहा है। 

इस पहल का ताना-बाना प्रदेश के कुछ वन्य जीव विशेषज्ञ खासकर पक्षी विशेषज्ञ अनिल रोजर्स द्वारा तैयार किया गया है। इस मुहिम में पाली जिला निर्वाचन अधिकारी ने जहां  बघेरे को अपना मैस्कॉट बनाया है वहीं जालौर ने जबरा भालू, सिरोही ने ग्रीन मुनिया, अजमेर ने खरमोर पक्षी,  झालावाड़ ने गागरोन तोता, कोटा ने ऊदबिलाव, सवाई माधोपुर बाघ शेरु, जैसलमेर गोदावन, भरतपुर साइबेरियन क्रेन और बारां ने ब्लैक बक जैसे वन्यजीव और पक्षियों को अपना इलेक्शन मैस्कॉट बनाया है। 

ध्यान रहे पिछले एक दशक में विभिन्न जिलों में वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है ऐसे में प्रदेश में वाइल्डलाइफ टूरिज्म को भी मजबूती मिली है और हर वर्ष वाइल्डलाइफ टूरिज्म के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। 

हालांकि ताजा मुहिम से 9 जिले ही जुड़े हैं जबकि अलवर का सरिस्का टाइगर पार्क देश दुनिया में मशहूर है वहां से कोई मैस्कॉट जारी नहीं हुआ। इसी तरह जयपुर का प्रोजेक्ट लेपर्ड किसी से पीछे नहीं लेकिन जयपुर में भी किसी वन्यजीव को मैस्कॉट नहीं बनाया गया।

बहराल, जिन जिलों द्वारा पहल की गई है उसके काफी अच्छे परिणाम आ रहे हैं और न केवल स्थानीय लोगों को वरन वाइल्ड लाइफ से जुड़े लोगों को भी इस मुहिम के प्रति काफी लगाव नजर आ रहा है। अब जिलों में संबंधित लोकसभा क्षेत्र के जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा शुभंकर की एक सीरीज़ बनाई गई है जो अब सोशल मीडिया, स्टीकर व बैनर के रूप में शहर से लेकर गांवों तक नज़र आ रही है। 

दरअसल, जो मैस्कॉट जारी किए गए हैं उनसे संबंधित जिले की  विरासत के लिए भी संरक्षण के प्रति जागरूकता आएगी साथ ही साथ वोटर्स भी लोकतंत्र के इस तैयोहार में अपनी पूर्ण रूप से भूमिका निभा पाएंगें। अनिल रोजर्स ने बताया कि जिस तरह गागरोनी तोते को झालावाड़ जिले में पुर्नस्थापित करने के प्रयास किए जा रहें है उसी तरह अन्य जिलों में भी वहां के स्थानीय वन्यजीव व पक्षियों को लेकर इससे जागरुकता बढ़ेगी।

जयपुर से संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट

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