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राज्यसभा सांसद अमर सिंह का निधन, सिंगापुर में चल रहा था उपचार

राज्यसभा सांसद अमर सिंह का निधन, सिंगापुर में चल रहा था उपचार

नई दिल्ली: राज्यसभा सदस्य और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह का आज निधन हो गया है. 64 वर्ष की उम्र में अमर सिंह ने अंतिम सांस ली. अमर सिंह का पिछले 6 माह से सिंगापुर में इलाज चल रहा था.अमर सिंह का हाल ही में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. 

काफी लंबे वक्त से चल रहे थे बीमार:
अमर सिंह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और करीब छह महीने से उनका सिंगापुर में इलाज किया जा रहा था.इससे पहले शनिवार को उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी और सभी फॉलोअर्स को ईद के मौके पर उन्हें बधाई दी. 

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यूपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे अमर सिंह :
आपको बता दें कि 5 जुलाई 2016 को उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता ली थी. वे कभी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. अमर समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी थे. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 27 जनवरी 1956 में हुआ. उनकी दो बेटियां हैं. अमर 2002 और 2008 में भी राज्यसभा के लिए चुने गए.  

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जयपुर: सचिन पायलट की करीब एक महीने की बगावत के बाद कांग्रेस में घर वापसी तय हो गई है. ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि गहलोत-पायलट समझौते का बसपा-कांग्रेस विलय प्रकरण पर क्या असर होगा. आज सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़े सभी मुद्दों पर जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बैंच सुनवाई करेगी. 

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मौजूदा हालात में TRUST VOTE जीतने पर इसका कोई असर नहीं होगा:
ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट बसपा विधायकों की "वोटिंग राइट्स" पर रोक लगा देता है तो फिर इसका असर गहलोत के TRUST VOTE के परिणाम पर क्या होगा? इस बारे में गहलोत कैम्प से जुड़े सूत्रों ने संकेत देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में TRUST VOTE जीतने पर इसका कोई असर नहीं होगा, और फिर रही-सही कसर बागी विधायकों की कांग्रेस वापसी से पूरी हो जाएगी. तेजी से बदलते इस घटनाक्रम से गहलोत कैम्प में जबरदस्त खुशी का माहौल है. 

गहलोत-पायलट संघर्ष प्रकरण समाप्त! दो माह पुराने आंतरिक संघर्ष का हुआ पटाक्षेप

विधानसभा सत्र से पहले ही कांग्रेस ने अपने घर को समेट लिया:  
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को सचिन पायलट और उनके साथी विधायकों से मुलाकात की, सभी की बातें सुनी गईं. जिसके बाद मंगलवार को सभी विधायक जयपुर जा सकते हैं. यानी 14 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले ही कांग्रेस ने अपने घर को समेट लिया है. वहीं राहुल-प्रियंका से मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने मीडिया से बात की, उन्होंने कहा कि पार्टी पद देती है तो ले भी सकती है. हम आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ रहे थे.


 

गहलोत-पायलट संघर्ष प्रकरण समाप्त! दो माह पुराने आंतरिक संघर्ष का हुआ पटाक्षेप

जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गहलोत-पायलट दो माह पुराने आंतरिक संघर्ष का पटाक्षेप हुआ हैं. अब गहलोत-पायलट टकराव एक बीते युग की बात होगी. आज देर रात तक पायलट की बाकायदा घर वापसी हो जाएगी. पायलट के साथ ही बर्खास्त मंत्री एवं 16 समर्थक विधायक लौटेंगे और अब फिर से राज्य में कांग्रेस की एकता कायम हो जाएगी, लेकिन राजनैतिक प्रेक्षकों के सामने अब एक ही सवाल ? क्या दोनों पक्षों के बीच ये समझौता होगा स्थाई युद्ध विराम ? या फिर कभी पायलट कैम्प "लाइन ऑफ कंट्रोल" पार कर जाएगा ? आखिर कैसे इतनी कटुता भुलाकर दोनों नेताओं का पुनर्मिलन होगा ? और इस पुनर्मिलन की रुपरेखा और व्यवहारिकता पर अभी कुछ प्रश्नचिन्ह लगे हैं. अलबत्ता मध्यस्थ भंवर जितेन्द्र अपनी पूरी कोशिशें कर रहे हैं. आज रात अहमद पटेल-पायलट की मुलाकात के बाद थोड़ा और खुलासा होगा. 

राहुल-पायलट मीटिंग से भाजपा खेमे में निराशा ! ऐनवक्त पर पायलट के यू टर्न लेने से निराशा

तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की कही गई बात: 
इससे पहले सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई थी.इस दौरान चारों के बीच करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. उसके बाद अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात हुई. मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही गई है. ऐसे में तीनों सदस्य पूरे मामले पर विचार विमर्श करने के बाद ही विधायकों की वापसी पर फैसला लेंगे. फिलहाल सचिन पायलट की बातों को नहीं माना गया है. शायद यह मीटिंग बहुत कामयाब नहीं रही. आलाकमान पायलट की मूल मांग मानने के मूड में नहीं है. आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार किया है. ऐसे में अब आखिर कैसे होगी पायलट और बागियों की सम्मानजनक घर वापसी? फिलहाल किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. शायद आज रात तक कुछ स्थिति स्पष्ट हो जाए. 

एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही:  
बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है, इस पर सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. ऐसे में अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. पहले भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से कई बार फोन पर बात की थी और उन्होंने मसला सुलझाने का प्रयास किया था. 

गहलोत गुट के विधायकों ने की थी एक्शन की मांग:
इससे पहले सोमवार को ही ये बात सामने आई थी कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों ने मांग की है कि बागी विधायकों पर एक्शन होना चाहिए, जिसपर सीएम गहलोत ने फैसला आलाकमान पर छोड़ने की बात कही थी. साथ ही कहा था कि इस बारे में सबको आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. 

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राहुल-पायलट मीटिंग से भाजपा खेमे में निराशा ! ऐनवक्त पर पायलट के यू टर्न लेने से निराशा

जयपुर: राजस्थान सियासी संकट के बीच राहुल गांधी और सचिन पायलट की मुलाकात के बाद बीजेपी खेमे में निराशा हैं. ये निराशा ऐनवक्त पर पायलट के यूटर्न लेने से हुई है. अपनी NATURAL ALLY भाजपा से बिना किसी विचार-विमर्श या पूर्व सूचना के गांधी परिवार के साथ मीटिंग करने से निराशा है. हालांकि FACE VALUE पर भाजपा ने इसे हमेशा कांग्रेस में दो गुटों का आपसी झगड़ा माना.

तीन माह पुरानी दोस्ती एक तरह से टूटने के कगार पर:
लेकिन फिर भी कहीं न कहीं पिछले कुछ महीनों से भाजपा व पायलट एक दूसरे के काफी करीब आ गए थे. अब ये तीन माह पुरानी दोस्ती एक तरह से टूटने के कगार पर है, हालांकि इस बारे में इस स्टेज पर कुछ कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी. फिर भी भाजपा और पायलट के रिश्तों में एक दरार आ चुकी है. अब भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कैसे लेगा इस सारे घटनाक्रम को? इस बारे में अलग-अलग लोगों के अलग-अलग अनुमान है.

सचिन पायलट की राहुल-प्रियंका और वेणुगोपाल से मुलाकात:
इससे पहले राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई है. इस दौरान चारों के बीच करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. उसके बाद अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात जारी है. 

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तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की कही गई बात: 
मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही गई है. ऐसे में तीनों सदस्य पूरे मामले पर विचार विमर्श करने के बाद ही विधायकों की वापसी पर फैसला लेंगे. फिलहाल सचिन पायलट की बातों को नहीं माना गया है. शायद यह मीटिंग बहुत कामयाब नहीं रही. आलाकमान पायलट की मूल मांग मानने के मूड में नहीं है. आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार किया है. ऐसे में अब आखिर कैसे होगी पायलट और बागियों की सम्मानजनक घर वापसी? फिलहाल किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. शायद आज रात तक कुछ स्थिति स्पष्ट हो जाए. 

एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही:  
बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है, इस पर सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. ऐसे में अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. पहले भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से कई बार फोन पर बात की थी और उन्होंने मसला सुलझाने का प्रयास किया था. 

गहलोत गुट के विधायकों ने की थी एक्शन की मांग:
इससे पहले सोमवार को ही ये बात सामने आई थी कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों ने मांग की है कि बागी विधायकों पर एक्शन होना चाहिए, जिसपर सीएम गहलोत ने फैसला आलाकमान पर छोड़ने की बात कही थी. साथ ही कहा था कि इस बारे में सबको आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. 

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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई है. इस दौरान चारों के बीच करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. उसके बाद अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात जारी है. 

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मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही गई है. ऐसे में तीनों सदस्य पूरे मामले पर विचार विमर्श करने के बाद ही विधायकों की वापसी पर फैसला लेंगे. फिलहाल सचिन पायलट की बातों को नहीं माना गया है. शायद यह मीटिंग बहुत कामयाब नहीं रही. आलाकमान पायलट की मूल मांग मानने के मूड में नहीं है. आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार किया है. ऐसे में अब आखिर कैसे होगी पायलट और बागियों की सम्मानजनक घर वापसी? फिलहाल किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. शायद आज रात तक कुछ स्थिति स्पष्ट हो जाए. 

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बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है, इस पर सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. ऐसे में अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. पहले भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से कई बार फोन पर बात की थी और उन्होंने मसला सुलझाने का प्रयास किया था. 

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गहलोत गुट के विधायकों ने की थी एक्शन की मांग:
इससे पहले सोमवार को ही ये बात सामने आई थी कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों ने मांग की है कि बागी विधायकों पर एक्शन होना चाहिए, जिसपर सीएम गहलोत ने फैसला आलाकमान पर छोड़ने की बात कही थी. साथ ही कहा था कि इस बारे में सबको आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. 

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नई दिल्ली: राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले राजस्थान सियासी घटनाक्रम पर बड़ा अपडेट सामने आया है. पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. तीनों के बीच दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया से मिलने पहुंचे. अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात जारी हैं.

मांगों पर नहीं बनी सहमति:
पायलट की तीनों के साथ दो घंटे तक हुई विभिन्न मसलों पर चर्चा हुईं. जानकार सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई हैं कि बैठक में सचिन पायलट ने कुछ मांगें रखी, लेकिन फिलहाल पायलट की रखी गई मांगों पर सहमति नहीं बनी हैं. अब तीन सदस्यीय कमेटी इस पर फैसला लेगी. 

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14 अगस्त से राजस्थान विधानसभा सत्र:
आपको बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र चलेगा. उससे पहले सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. इससे पहले भी जब सचिन पायलट ने बगावत की थी, तब प्रियंका गांधी वाड्रा से उनकी कई बार फोन पर बात हुई थी और उन्होंने मसला सुलझाने की कोशिश की थी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट के साथ करीब 22 विधायक थे. राज्य सरकार ने उनपर सरकार गिराने का आरोप लगाया था और राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. जिससे सचिन पायलट खासा नाराज हुए थे, उनकी बगावत के बाद ही कांग्रेस ने सचिन से उपमुख्यमंत्री-प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया था.

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VIDEO: विधायक संयम लोढ़ा का बड़ा बयान, BSP के विधायको का वोट फ्रीज नहीं कर सकता कोर्ट

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जैसलमेर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच विधायक संयम लोढ़ा का बड़ा बयान सामने आया है. फर्स्ट इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट बसपा के विधायकों का वोट फ्रीज नहीं कर सकता. कोर्ट अधिकाधिक बसपा के विलय को रोक सकता है, तब नया दल बसपा लोकतांत्रिक या कोई और दल बनाने से नहीं रोका जा सकता है. 

राहुल गांधी-सचिन पायलट मुलाकात आज! पायलट कैंप से जुड़े सूत्रों ने दिए संकेत  

मदन दिलावर जाने क्यों परेशान? 
इसके साथ ही संयम लोढ़ा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा तो फड़फड़ा रही है, मानसकिता संकीर्ण रही है. इसके साथ ही आदिवासी लीडरशिप का अपमान किया है. लोढ़ा ने कहा कि मदन दिलावर जाने क्यों परेशान है उन्होंने लिखा है कि उन्हें अपूरणीय क्षति हुई है. लेकिन ये समझ नहीं आता कि बसपा के विलय से उन्हें कैसे क्षति हुई है. ऐसे में सत्य की जीत होगी और सत्य अशोक गहलोत के साथ है. राजस्थान के चप्पे चप्पे से जनता का आशीष है. संवाददाता लक्ष्मण राघव ने विधायक संयम लोढा से खास बातचीत की...

 

राहुल गांधी-सचिन पायलट मुलाकात आज! पायलट कैंप से जुड़े सूत्रों ने दिए संकेत

जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच आज एक बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है. पायलट कैंप से जुड़े सूत्रों ने आज राहुल गांधी और सचिन पायलट की मुलाकात के संकेत दिए हैं. सूत्रों की माने तो यह मुलाकात आलाकमान के बुलावे पर हो रही है. लेकिन मुलाकात से पहले राहुल गांधी ने पायलट के सामने सभी विधायकों को साथ लेकर आने की शर्त रखी है और पायलट ने राहुल गांधी की बात मान ली. 

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जैसलमेर में विधायक दल की बैठक में ही संकेत दे दिए थे:  
ऐसे में अब पायलट कैंप के विधायक गुजरात या दूसरे स्थानों से दिल्ली पहुंच रहे हैं. वहीं राहुल-पायलट की संभावित मुलाकात की खबर से गहलोत खेमे में भी उत्सुकता है. हालांकि शायद गहलोत को इस मुलाकात की पहले ही जानकारी थी. इसलिए कल उन्होंने जैसलमेर में विधायक दल की बैठक में ही संकेत दे दिए थे और पायलट गुट के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे विधायकों को दो टूक संदेश दिया था कि जो भी दिल्ली का फैसला होगा हम उसे मानेंगे. हम सभी लोग पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं.  

भाजपा कैंप में हैरानी और आश्चर्य: 
दूसरी ओर राहुल-पायलट की संभावित मुलाकात से भाजपा कैंप में हैरानी और आश्चर्य होने की जानकारी सामने आ रही है. क्योंकि पायलट के NATURAL ALLY के रूप में भाजपा का भी इस सारे मामले में STAKE है. हालांकि भाजपा ने हमेशा गहलोत और पायलट की अंदरूनी लड़ाई बताया है. लेकिन अब राजनीतिक क्षेत्रों में एक सवाल पूछा जा रहा है कि क्या इतना आगे बढ़ने के बाद सचमुच पायलट लौट पाएंगे पीछे? आखिर अब क्या होगी राहुल और पायलट के बीच कोई डील? पायलट कैंप की खुद पायलट को सीएम बनाने की एक ही शर्त है और इसके लिए गहलोत के 96 या 100 विधायक कतई तैयार नहीं है, तो फिर ऐसे में क्या होगा नया 'शांति फॉर्मूला'? इस बारे में सभी लोगों के अपने-अपने अनुमान है. 

Rajasthan Political Crisis:  बसपा विधायकों के विलय मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई 

वेस्टर्न कंट्री क्लब होटल से देर रात निकले सभी विधायक:
इसी बीच पायलट गुट से जुड़ी बड़ी खबर है. वेस्टर्न कंट्री क्लब होटल से देर रात निकले सभी विधायक. इसके साथ ही मौके से एंबुलेंस और कोविड केयर सेंटर को हटाया गया है. पहले विधायकों के हयात होटल जाने की खबर थी लेकिन विधायक वहां भी नहीं पहुंचे. 

 

Rajasthan Political Crisis: बसपा विधायकों के विलय मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

Rajasthan Political Crisis:  बसपा विधायकों के विलय मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

जयपुर: राजस्थान में चल रहा सियासी संकट अभी थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. बसपा विधायकों के विलय मामले पर भाजपा विधायक मदन दिलावर की SLP पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुबह 11 बजे अहम सुनवाई होगी. जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में 3 सदस्य बैंच इस मामले की सुनवाई करेगी. 

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हाईकोर्ट के 6 अगस्त के फैसले को चुनौती दी गई: 
याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के 6 अगस्त के फैसले को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने स्पीकर सीपी जोशी के विलय के फैसले पर रोक लगाने से इंकार किया था. याचिका में कहा गया है कि, 14 अगस्त से शुरू होने वाले राजस्थान विधानसभा सत्र में इन 6 बसपा विधायकों के वोटिंग राइट्स पर रोक लगाई जाए. साथ ही, यह सभी विधायक कांग्रेस विधायक के रूप में काम न कर सकें.

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अगर वोटिंग अधिकार पर नहीं लगती रोक, तो होगी अपूरणीय क्षति:
याचिका में कहा गया एकलपीठ के बाद खण्डपीठ ने बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय होने को लेकर कोई आदेश नहीं दिया और ना ही स्टे एप्लीकेशन पर स्टे ही दिया है. 14 अगस्त से राजस्थान में विधानसभा का सत्र आहूत हो रहा है. ऐसे में अगर वोटिंग अधिकार पर रोग नहीं लगती तो यह अपूरणीय क्षति होगी. याचिका में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के साथ 6 विधायकों को पक्षकार बनाया गया है. 
 

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